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                <title>Putin - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Putin RSS Feed</description>
                
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                <title>यूक्रेन का रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, मॉस्को तक पहुंचे करीब 200 ड्रोन</title>
                                    <description><![CDATA[कीव पर हालिया रूसी हमलों के जवाब में यूक्रेन की बड़ी कार्रवाई, ऑयल डिपो और रिफाइनरी बने निशाना, G7 ने बढ़ाई सैन्य मदद।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ukraines-biggest-drone-attack-on-russia-so-far-around-200/article-56336"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/russia-ukraine-war.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रूस-यूक्रेन युद्ध एक बार फिर नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। यूक्रेन ने गुरुवार को रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया, जिसने न केवल रूस की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी बल्कि युद्ध के बढ़ते दायरे को भी उजागर कर दिया। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रातभर चले इस हमले में करीब 1000 ड्रोन और चार क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इनमें से लगभग 200 ड्रोन सीधे राजधानी मॉस्को की दिशा में बढ़ रहे थे, जिन्हें रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने रोकने का दावा किया। हालांकि रूस ने अधिकांश ड्रोन मार गिराने की बात कही है, लेकिन कई इलाकों में हमलों के प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिए। दक्षिणी रोस्तोव क्षेत्र में स्थित एक बड़े ऑयल डिपो पर हमला हुआ, जहां विस्फोट के बाद भीषण आग लग गई। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं मॉस्को की कपोतन्या ऑयल रिफाइनरी पर भी हमला किया गया, जिससे वहां कई बड़े धमाके हुए और ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रिफाइनरी परिसर में विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि तेल टैंक का भारी ढक्कन कई मीटर ऊपर हवा में उछल गया। इसके बाद पूरे इलाके में घना काला धुआं फैल गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में आग की लपटें और धुएं के विशाल गुबार साफ दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के कुछ इलाकों को खाली कराया और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। हमले के कारण मॉस्को और उसके आसपास के क्षेत्रों में हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ। कई एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए उड़ानों को रोकना पड़ा। ड्रोन के मलबे गिरने से कुछ रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि बड़े पैमाने पर नागरिक हताहतों की कोई पुष्टि नहीं हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस हमले को रूस की हालिया सैन्य कार्रवाई का जवाब बताया है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने केवल उन ठिकानों को निशाना बनाया है, जो रूस के युद्ध अभियान को समर्थन दे रहे हैं। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन लंबे समय से लगातार रूसी हमलों का सामना कर रहा है और अब जवाबी कार्रवाई की क्षमता भी बढ़ गई है। अपने बयान में जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन युद्ध नहीं चाहता था, लेकिन यदि रूस यूक्रेन को जलाने की कोशिश करेगा तो मॉस्को भी सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्होंने यूक्रेनी सेना, खुफिया एजेंसियों और ड्रोन ऑपरेटरों की सराहना करते हुए कहा कि यह अभियान कई महीनों की तैयारी का परिणाम था। रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत 2022 में हुई थी। शुरुआती दौर में यूक्रेन की सैन्य क्षमताएं सीमित थीं और उसके ड्रोन हमले मुख्य रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों तक ही सीमित रहते थे। लेकिन 2023 के बाद से यूक्रेन ने लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोन विकसित किए और रूस के भीतर गहराई तक हमले करने की क्षमता हासिल कर ली। अब मॉस्को जैसे रणनीतिक शहर भी यूक्रेनी हमलों के दायरे में आ चुके हैं। दोनों देशों के बीच संघर्ष अब केवल फ्रंटलाइन तक सीमित नहीं रह गया है। तेल डिपो, रिफाइनरी, ऊर्जा संयंत्र और सैन्य सप्लाई नेटवर्क जैसे महत्वपूर्ण ढांचे लगातार निशाने पर हैं। इसका असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी युद्ध को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। G7 देशों ने यूक्रेन को अतिरिक्त सैन्य सहायता देने का ऐलान किया है। संगठन ने कहा है कि यूक्रेन को अधिक एयर डिफेंस सिस्टम, इंटरसेप्टर मिसाइलें और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही रूस के तेल और गैस कारोबार पर नए प्रतिबंध लगाने की भी तैयारी की जा रही है। G7 देशों ने यह भी कहा है कि आगामी सर्दियों को देखते हुए यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने के लिए आर्थिक और तकनीकी सहायता बढ़ाई जाएगी। युद्ध के कारण यूक्रेन की बिजली व्यवस्था पहले से ही गंभीर दबाव में है और कई क्षेत्रों में ऊर्जा संकट की आशंका बनी हुई है। उधर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस युद्ध को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें शुरू में लगा था कि रूस और यूक्रेन के बीच समझौता कराना अपेक्षाकृत आसान होगा, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरी अविश्वास और दुश्मनी ने बातचीत को बेहद कठिन बना दिया है। ट्रम्प ने कहा कि उनकी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की दोनों से बातचीत हुई है और वे जल्द से जल्द युद्ध समाप्त होते देखना चाहते हैं। हालिया ड्रोन हमले ने स्पष्ट कर दिया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां तकनीक और लंबी दूरी के हथियार निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:26:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>चीन-उत्तर कोरिया रिश्तों में नया मोड़, पुतिन-किम नजदीकी से जिनपिंग चिंतित</title>
                                    <description><![CDATA[शी जिनपिंग 7 साल बाद प्योंगयांग दौरे पर, रूस-उत्तर कोरिया की बढ़ती साझेदारी से एशिया की भू-राजनीति में बदलाव के संकेत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-turn-in-china-north-korea-relations-jinping-worried-about-putin-kim/article-55142"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/xi-jinping-north-korea-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">एशिया की भू-राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले हफ्ते उत्तर कोरिया के दौरे पर जा रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात किम जोंग उन से होगी। यह यात्रा 8 से 9 जून के बीच प्रस्तावित है और करीब 7 साल बाद शी जिनपिंग प्योंगयांग पहुंचेंगे। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब रूस, चीन और उत्तर कोरिया के बीच बदलते रिश्तों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कुछ साल पहले तक उत्तर कोरिया पर चीन का लगभग पूर्ण प्रभाव माना जाता था, लेकिन हाल के वर्षों में स्थिति तेजी से बदली है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग काफी बढ़ गया है। हथियारों की आपूर्ति, ऊर्जा सहायता और रणनीतिक समर्थन ने किम जोंग उन की स्थिति को पहले से कहीं मजबूत कर दिया है। अब उत्तर कोरिया केवल चीन पर निर्भर नहीं रहा, बल्कि रूस एक नए और प्रभावशाली साझेदार के रूप में उभरा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा आर्थिक और राजनीतिक सहयोगी रहा है। दोनों देशों के बीच 1400 किलोमीटर लंबी सीमा और एक विशेष रक्षा संधि भी है, जिसे बीजिंग की एकमात्र सक्रिय सैन्य संधि माना जाता है। इस समझौते के अनुसार यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो दूसरा उसकी मदद करेगा। इस साल इस संधि के 65 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जिससे इस दौरे का महत्व और बढ़ जाता है। हालांकि हालिया घटनाक्रम चीन के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ती नजदीकी ने बीजिंग की रणनीतिक स्थिति को चुनौती दी है। किम जोंग उन अब खुद को सिर्फ चीन पर निर्भर नेता के रूप में नहीं देखना चाहते। उनका झुकाव रूस की ओर बढ़ा है, जिससे उन्हें आर्थिक और सैन्य दोनों स्तरों पर अतिरिक्त लाभ मिला है। वहीं चीन इस स्थिति को अपने प्रभाव में कमी के रूप में देख रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">शी जिनपिंग का यह दौरा इसी संतुलन को दोबारा स्थापित करने की कोशिश माना जा रहा है। चीन चाहता है कि उत्तर कोरिया पर उसका प्रभाव बना रहे और वह क्षेत्रीय राजनीति में प्रमुख भूमिका में बना रहे। दूसरी ओर किम जोंग उन इस स्थिति का लाभ उठाकर चीन और रूस दोनों से अधिक रियायतें हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। यूक्रेन युद्ध ने उत्तर कोरिया की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को भी बदल दिया है। रूस को हथियार और सैन्य सहयोग देने के बदले में उत्तर कोरिया को तेल, खाद्य सामग्री और तकनीकी सहायता मिल रही है। इस सहयोग ने किम जोंग उन को आर्थिक रूप से काफी राहत दी है। वहीं चीन इस बढ़ती साझेदारी को अपने प्रभाव के लिए चुनौती के रूप में देख रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पिछले कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया की परमाणु नीति पर भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रूस ने न केवल उत्तर कोरिया के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों पर नरम रुख अपनाया है, बल्कि कुछ मामलों में इन प्रतिबंधों को कमजोर भी किया है। चीन का रुख भी पहले की तुलना में अपेक्षाकृत नरम हुआ है और वह अब खुले तौर पर निंदा करने से बचता दिखाई देता है। इस पूरे घटनाक्रम में किम जोंग उन की स्थिति पहले से अधिक मजबूत नजर आती है। कोविड महामारी के बाद उत्तर कोरिया ने खुद को अलग-थलग रखा, लेकिन बाद में रूस के साथ साझेदारी ने उसकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया। पर्यटन और सीमित व्यापार के माध्यम से भी उत्तर कोरिया नए राजस्व स्रोत तलाशने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी तरफ अमेरिका भी इस पूरे क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार किम जोंग उन से बातचीत की इच्छा जता चुके हैं, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर गतिरोध अभी भी बना हुआ है। किम जोंग उन स्पष्ट कर चुके हैं कि वे अपने परमाणु हथियारों को सुरक्षा की गारंटी मानते हैं और किसी भी बातचीत में उन्हें छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इस पूरी स्थिति ने एशिया में शक्ति संतुलन को बदल दिया है। चीन, रूस और उत्तर कोरिया के बीच बनते-बिगड़ते समीकरण आने वाले समय में वैश्विक राजनीति पर गहरा असर डाल सकते हैं। शी जिनपिंग का यह दौरा न केवल एक कूटनीतिक मुलाकात है, बल्कि यह चीन की रणनीतिक स्थिति को फिर से मजबूत करने की कोशिश भी मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 17:14:15 +0530</pubDate>
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