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                <title>Lalghati - दैनिक जागरण</title>
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                <title>भोपाल में खुदी सड़कों ने बढ़ाई मुसीबत, तीन दिन में सुधार का अल्टीमेटम</title>
                                    <description><![CDATA[हल्की बारिश ने खोली सीवरेज प्रोजेक्ट की पोल, निगम के प्रभारी इंजीनियर बोले- सड़कें नहीं सुधरीं तो पद छोड़ दूंगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/excavated-roads-increase-problems-in-bhopal-ultimatum-for-improvement-in/article-55282"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-roads.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भोपाल में मानसून की पहली बारिश ने शहर की तैयारियों की हकीकत सामने ला दी है। पिछले 24 घंटों में करीब 12 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, लेकिन इतनी सी बारिश ने शहर के कई इलाकों की तस्वीर बदल दी। जगह-जगह सीवरेज लाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कें कीचड़ और पानी से भर गईं। हालत यह रही कि शनिवार देर रात से रविवार सुबह तक कई लोग फिसलकर घायल हो गए। पैदल चलना मुश्किल हो गया और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd">शिवाजी नगर, छह नंबर, गौतम नगर, रचना नगर, शांति निकेतन, एमपी नगर, लालघाटी, नीलबड़, बैरागढ़ और रातीबड़ जैसे कई इलाकों में सड़कें कीचड़ में तब्दील नजर आईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश से पहले ही सड़कें खराब थीं, लेकिन पानी गिरते ही स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई। कई जगहों पर खुदाई के बाद सड़कों का पुनर्निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम के प्रभारी कार्यपालन यंत्री आरके त्रिवेदी ने माना कि खुदाई के कारण नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगले तीन दिनों के भीतर सड़क सुधार और रेस्टोरेशन का काम पूरा कर दिया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि निर्धारित समय में काम पूरा नहीं हुआ तो वह अपने पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद शहर में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि पिछले कई महीनों से लोग इसी समस्या से जूझ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">दरअसल यह समस्या नई नहीं है। पिछले छह महीने से शहर के अलग-अलग हिस्सों में सीवरेज नेटवर्क बिछाने के लिए बड़े पैमाने पर खुदाई की गई है। नरेला, हुजूर और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों में करीब 100 किलोमीटर सड़कें खोदी गईं। इनमें से लगभग 60 किलोमीटर सड़कें तो बहाल कर दी गई हैं, लेकिन करीब 40 किलोमीटर सड़कों का रेस्टोरेशन अब भी अधूरा पड़ा हुआ है। नियमों के अनुसार खुदाई के 21 दिनों के भीतर सड़क को पहले जैसी स्थिति में बहाल किया जाना चाहिए, लेकिन कई जगहों पर छह महीने बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नर्मदापुरम रोड स्थित इंदुस कॉलोनी में बारिश के बाद सड़क तालाब जैसी दिखाई दी। सीवरेज लाइन के लिए की गई खुदाई के बाद सड़क का पुनर्निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया था। पहली ही बारिश में वहां पानी भर गया और कीचड़ फैल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वाहन निकालना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। कई लोगों को रास्ता बदलकर जाना पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd">नीलबड़ के बरखेड़ी खुर्द क्षेत्र में भी हालात खराब हैं। यहां जनवरी में सड़क खोदी गई थी, लेकिन अब तक उसे ठीक नहीं किया गया। रविवार सुबह एक पानी का टैंकर कीचड़ में फंस गया, जिसके बाद काफी देर तक रास्ता बाधित रहा। स्थानीय निवासी राजेंद्र आहूजा का कहना है कि पिछले छह महीनों से लोग परेशान हैं और अब बारिश ने मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। छोटे वाहन और स्कूल जाने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">लालघाटी के विजय नगर क्षेत्र में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। यहां जनवरी से खुदाई का काम चल रहा है और सड़क बहाली का इंतजार अब भी जारी है। स्थानीय निवासी लक्ष्मण लालवानी का कहना है कि खराब सड़क और कीचड़ के कारण बुजुर्गों ने घर से निकलना लगभग बंद कर दिया है। महिलाओं और बच्चों को भी काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि शिकायतों के बाद ठेकेदार बदला गया, लेकिन हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम का दावा है कि लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा रही है। निगम अब तक चार ठेकेदारों को 50 से ज्यादा नोटिस जारी कर चुका है। इसके अलावा करीब 25 लाख रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है। हालांकि इसके बावजूद जमीनी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा। लोगों का कहना है कि केवल नोटिस और जुर्माने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि काम समय पर पूरा होना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">रचना नगर के निवासी एमके शर्मा बताते हैं कि उनके इलाके में चार महीने से खुदाई का काम चल रहा है। बारिश शुरू होने से पहले ही लोगों को अंदेशा था कि सड़कें कीचड़ में बदल जाएंगी। रविवार को कई लोग फिसलकर गिर गए और कुछ को चोटें भी आईं। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़कों का रेस्टोरेशन कर दिया जाता तो यह स्थिति नहीं बनती। शहर की तीन प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में 40 किलोमीटर सड़क सुधार कार्य अब भी अधूरा है। इनमें नरेला और गोविंदपुरा क्षेत्र में करीब 20 किलोमीटर, दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में 15 किलोमीटर और हुजूर क्षेत्र में लगभग 5 किलोमीटर सड़कें शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोग अब जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। बारिश का मौसम अभी शुरू ही हुआ है और यदि समय रहते सड़कों का पुनर्निर्माण नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:05:05 +0530</pubDate>
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                <title>भोपाल के लालघाटी में तीन मंजिला कॉम्प्लेक्स में आग, छह रेस्टोरेंट प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[भोज इन रेस्टोरेंट के किचन से शुरू हुई आग ने पूरे भवन को चपेट में लिया, फायर ब्रिगेड की आठ गाड़ियों ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद पाया काबू।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/fire-in-three-storey-complex-in-lalghati-bhopal-six-restaurants-affected/article-55173"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-fire-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भोपाल के लालघाटी इलाके में रविवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत से घना धुआं उठता दिखाई दिया। एलर कॉम्प्लेक्स नाम की इस इमारत में स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी आग देखते ही देखते पूरे भवन में फैल गई। घटना की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय इमारत के भीतर कोई मौजूद नहीं था, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। हालांकि आग की वजह से रेस्टोरेंट और अन्य दुकानों को काफी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के अनुसार आग सबसे पहले भोज इन रेस्टोरेंट के किचन में लगी थी। शुरुआती समय में किसी को इसका अंदाजा नहीं हुआ। सुबह करीब सात बजे पड़ोस की एक इमारत में तैनात सुरक्षा गार्ड ने कॉम्प्लेक्स की खिड़कियों से धुआं निकलते देखा। पहले उसे लगा कि यह रोज की तरह किचन से निकलने वाला सामान्य धुआं है, लेकिन कुछ ही देर बाद जब धुएं के साथ लपटें दिखाई देने लगीं तो स्थिति की गंभीरता समझ में आई। इसके बाद तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">एलर कॉम्प्लेक्स इलाके की प्रमुख व्यावसायिक इमारतों में गिना जाता है। यहां कुल छह रेस्टोरेंट संचालित होते हैं। बेसमेंट में प्रसिद्ध भोजनालय बापू की कुटिया स्थित है, जबकि ग्राउंड फ्लोर पर डोमिनोज का आउटलेट और कई अन्य दुकानें मौजूद हैं। आग लगने के बाद पूरे भवन में धुआं भर गया और कुछ ही समय में आसपास के क्षेत्र में भी इसकी चर्चा फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इमारत से उठ रहा काला धुआं कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रहा था।</p>
<p class="isSelectedEnd">सूचना मिलने के बाद शहर के विभिन्न फायर स्टेशनों से दमकल वाहन मौके पर भेजे गए। तीन वाटर टैंकरों सहित कुल आठ दमकल गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं। आग की तीव्रता को देखते हुए दमकलकर्मियों को भवन के अंदर पहुंचने में कठिनाई हुई। कई हिस्सों में घना धुआं भर जाने के कारण सामान्य रास्तों से प्रवेश संभव नहीं था। ऐसे में फायर ब्रिगेड के जवानों ने एक दीवार तोड़कर अंदर प्रवेश किया और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। लगातार पानी की बौछार और विशेष उपकरणों की मदद से लपटों को नियंत्रित किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">हादसे के दौरान सबसे बड़ा खतरा रेस्टोरेंट के किचन में रखे कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों से था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वहां चार बड़े एलपीजी सिलेंडर मौजूद थे। यदि इनमें विस्फोट हो जाता तो नुकसान कई गुना बढ़ सकता था और आसपास की इमारतें भी इसकी चपेट में आ सकती थीं। दमकलकर्मियों ने तेजी दिखाते हुए सबसे पहले इन सिलेंडरों को सुरक्षित बाहर निकाला। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते यह कदम उठा लेने से एक बड़ा हादसा टल गया। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक आग की लपटें तेजी से ऊपर की मंजिलों तक पहुंच रही थीं। रेस्टोरेंट के अंदर मौजूद फर्नीचर, लकड़ी की सजावट और अन्य ज्वलनशील सामान के कारण आग फैलने की गति और बढ़ गई। हालांकि दमकल विभाग की टीमों ने लगातार प्रयास करते हुए आग को अन्य हिस्सों में फैलने से रोक लिया। करीब एक घंटे बाद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">फायर ऑफिसर सौरभ पटेल ने बताया कि प्राथमिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। उनके अनुसार जिस समय आग लगी, उस वक्त रेस्टोरेंट बंद था और अंदर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि परिसर में फायर एक्सटिंग्विशर उपलब्ध थे, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि दमकल विभाग को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी। विस्तृत जांच के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस घटना के बाद एक बार फिर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स में बड़ी मात्रा में गैस, बिजली के उपकरण और ज्वलनशील सामग्री का उपयोग होता है, इसलिए नियमित सुरक्षा जांच और फायर सेफ्टी ड्रिल बेहद जरूरी है। स्थानीय प्रशासन भी अब इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की तैयारी कर रहा है। आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। प्रारंभिक तौर पर किसी के घायल होने या हताहत होने की सूचना नहीं है। प्रशासन और फायर विभाग की टीमें मामले की जांच में जुटी हुई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 13:06:06 +0530</pubDate>
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