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                <title>Patient Care - दैनिक जागरण</title>
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                <title>धूप में तड़पता रहा बीमार बेटा, स्ट्रेचर धकेलते रहे माता-पिता</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर के एमवाय और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के बीच करीब एक किलोमीटर तक बीमार बच्चे को खुद ले गए परिजन, वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/sick-son-kept-suffering-in-the-sun-parents-kept-pushing/article-55178"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-hospital-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">इंदौर के सरकारी अस्पताल परिसर से सामने आई एक तस्वीर ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार दोपहर भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच एक बीमार बच्चे को उसके माता-पिता खुद स्ट्रेचर पर धकेलते हुए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक ले जाते दिखाई दिए। करीब एक किलोमीटर लंबे रास्ते में मां अपने बेटे को धूप से बचाने के लिए बार-बार पानी से चुन्नी भिगोकर उसके ऊपर डालती रही, जबकि पिता स्ट्रेचर को आगे बढ़ाते रहे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन और मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को लेकर बहस शुरू हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामला 12 वर्षीय आदर्श नामक बच्चे का बताया जा रहा है, जो रीढ़ की हड्डी से जुड़ी एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है। परिजनों के अनुसार बच्चे का पिछले लगभग 15 दिनों से इलाज चल रहा है। पहले उसे न्यू चेस्ट वार्ड में भर्ती किया गया था, जिसके बाद उसे एमवाय अस्पताल में उपचार के लिए रखा गया। शनिवार को चिकित्सकों ने उसे आगे की जांच और सलाह के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल रेफर किया। परिवार को उम्मीद थी कि अस्पताल प्रशासन मरीज को वहां तक पहुंचाने की व्यवस्था करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मजबूरी में माता-पिता को खुद ही स्ट्रेचर संभालना पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd">दोपहर की तेज धूप में अस्पताल परिसर का रास्ता तय करना परिवार के लिए बेहद कठिन साबित हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बच्चा दर्द और गर्मी से परेशान दिखाई दे रहा था। मां लगातार पानी की मदद से अपनी चुन्नी भिगोती और उसे बेटे के शरीर पर डाल देती ताकि धूप का असर कम हो सके। वहीं पिता स्ट्रेचर को धक्का देते हुए अस्पताल से अस्पताल तक का सफर पूरा करने की कोशिश करते रहे। इस दौरान उन्होंने कई बार आसपास मौजूद लोगों और कर्मचारियों से मदद की उम्मीद भी की, लेकिन तत्काल कोई सहायता नहीं मिल सकी।</p>
<p class="isSelectedEnd">परिजनों का आरोप है कि जब वे सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पहुंचे तो वहां उन्हें बताया गया कि बच्चे को भर्ती करने की जरूरत नहीं है। केवल मेडिकल रिकॉर्ड और फाइल देखने के लिए बुलाया गया था। यह जानकारी मिलने के बाद परिवार को एक बार फिर उसी बच्चे को स्ट्रेचर पर लेकर वापस लौटना पड़ा। परिजनों का कहना है कि यदि केवल दस्तावेज देखने थे तो उन्हें पहले ही इसकी जानकारी दी जा सकती थी। इससे बच्चे और परिवार को अनावश्यक परेशानी नहीं उठानी पड़ती।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना के बाद अस्पताल परिसर में मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आरोप है कि अस्पतालों में मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड या एक भवन से दूसरे भवन तक पहुंचाने के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद जरूरत पड़ने पर स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और सहायक कर्मचारी उपलब्ध नहीं हो पाते। कई मरीजों और उनके परिजनों को मजबूरी में खुद ही व्यवस्था संभालनी पड़ती है। स्वास्थ्य सेवाओं पर हर महीने बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद ऐसी घटनाएं सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के मुताबिक जिस आउटसोर्स कंपनी को अस्पताल परिसर में कई सेवाओं की जिम्मेदारी दी गई है, वह पहले भी विवादों में रह चुकी है। हाल के महीनों में सुरक्षा व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक मामलों को लेकर भी कंपनी की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए थे। कुछ अन्य मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे में यह नया मामला एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वायरल वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जानकारी जुटाने की बात कही है। एमवाय अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जा रही है। उनके अनुसार यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चे को किस अस्पताल से रेफर किया गया था और किन परिस्थितियों में परिजनों को स्वयं स्ट्रेचर लेकर जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी एकत्र करने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के प्रभारी अधिकारियों ने भी मामले की जानकारी लेने की बात कही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बच्चे की स्थिति, उसकी बीमारी और रेफरल प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि व्यवस्था में किस स्तर पर चूक हुई। यह घटना केवल एक परिवार की परेशानी तक सीमित नहीं रह गई है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो ने लोगों को झकझोर दिया है। कई लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के साथ-साथ मरीजों को सम्मानजनक और मानवीय सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 13:37:13 +0530</pubDate>
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