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                <title>बिलासपुर में 6.25 लाख का गांजा जब्त, बच्चे की आड़ लेकर तस्करी का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[सिविल लाइन पुलिस ने दो महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया। आरोप है कि पुलिस से बचने के लिए आरोपियों ने अपने साथ पांच साल के बच्चे को रखा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/ganja-worth-rs-625-lakh-seized-in-bilaspur-accused-of/article-57214"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-news-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">बिलासपुर में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सिविल लाइन पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने गांजा तस्करी के आरोप में दो महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 12.405 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 6.25 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस का दावा है कि आरोपी शक से बचने और आसानी से सफर करने के लिए अपने साथ पांच साल के एक बच्चे को भी लेकर चल रहे थे। कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। वहीं बच्चे को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि उसलापुर रेलवे स्टेशन स्थित लोको पायलट प्रशिक्षण केंद्र के पास दो महिलाएं और एक पुरुष संदिग्ध हालत में एक आसमानी रंग का ट्रॉली बैग लेकर खड़े हैं। सूचना में यह भी बताया गया था कि उनके साथ एक छोटा बच्चा भी है। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस ने टीम गठित कर मौके पर घेराबंदी शुरू कर दी। कुछ ही देर बाद बताए गए हुलिए से मेल खाते तीनों संदिग्ध एक ट्रॉली बैग और बच्चे के साथ दिखाई दिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस ने संदेह के आधार पर उन्हें रोककर पूछताछ की। शुरुआती जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर ट्रॉली बैग की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान बैग के अंदर खाकी रंग की प्लास्टिक टेप से लिपटे 11 पैकेट मिले। जब पैकेट खोले गए तो उनमें गांजा भरा हुआ था। मौके पर ही जब्त सामग्री का वजन किया गया, जिसमें कुल 12.405 किलोग्राम गांजा निकला। बरामद मादक पदार्थ की कीमत करीब 6.25 लाख रुपए आंकी गई है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ओडिशा के झारसुगुड़ा निवासी प्रकाश नायक उर्फ पप्पू (41), नेहा सिंह (34) और जांजगीर-चांपा जिले की अर्चना सिंह (27) के रूप में हुई है। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गांजा कहां से लाया गया था और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। इसके अलावा इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने अपने साथ पांच साल के बच्चे को इसलिए रखा था ताकि किसी को उन पर आसानी से शक न हो। आमतौर पर परिवार के साथ यात्रा करने वालों पर कम संदेह किया जाता है और इसी बात का फायदा उठाने की कोशिश की गई। हालांकि पुलिस को पहले से ही सूचना में बच्चे के साथ होने की जानकारी मिल गई थी, जिसके चलते टीम पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंची और कार्रवाई सफल रही। जब्ती की कार्रवाई के बाद पुलिस ने गांजा, ट्रॉली बैग और अन्य सामान को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। तीनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत में पेशी के बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। वहीं उनके साथ मिले बच्चे की सुरक्षा और देखभाल को ध्यान में रखते हुए उसे बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों का संबंध किसी बड़े अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह से तो नहीं है। मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। बिलासपुर पुलिस का कहना है कि जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई है ताकि मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं भी नशीले पदार्थों की तस्करी या संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। हाल के दिनों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में नशीले पदार्थों की तस्करी के कई मामले सामने आए हैं। पुलिस का मानना है कि सीमावर्ती राज्यों से गांजे की अवैध सप्लाई रोकने के लिए लगातार निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। बिलासपुर की यह कार्रवाई भी उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:39:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिलासपुर नगर निगम में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, सभी 8 जोनों के कमिश्नर बदले गए</title>
                                    <description><![CDATA[कामकाज में सुधार और प्रशासनिक कसावट के लिए निगम कमिश्नर ने जारी किए नए आदेश, कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-administrative-reshuffle-in-bilaspur-municipal-corporation-commissioners-of-all/article-55815"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-nagar-nigam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर नगर निगम में लंबे समय से एक ही जोन में कार्यरत अधिकारियों के प्रभार में आखिरकार बड़ा बदलाव किया गया है। नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने जोन कमिश्नरों, डिप्टी कमिश्नरों और कार्यपालन अभियंताओं की नई पदस्थापना के आदेश जारी कर दिए हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत निगम के सभी आठ जोनों में अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। निगम प्रशासन का कहना है कि यह कदम कामकाज में तेजी लाने, जवाबदेही बढ़ाने और वार्ड स्तर पर नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। नए आदेश जारी होने के बाद अधिकारियों ने अपने नए दायित्व संभालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम के अधिकांश जोन कमिश्नर पिछले ढाई से चार वर्षों से एक ही जोन में पदस्थ थे। लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थापना को लेकर निर्वाचित परिषद के सदस्यों और पार्षदों की ओर से लगातार बदलाव की मांग उठाई जा रही थी। उनका कहना था कि नियमित अंतराल में प्रभार बदलने से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ती है और विकास कार्यों की निगरानी अधिक प्रभावी होती है। इसी पृष्ठभूमि में निगम प्रशासन ने व्यापक स्तर पर फेरबदल का निर्णय लिया। सबसे ज्यादा चर्चा जोन क्रमांक-1 में लंबे समय से पदस्थ रंजना अग्रवाल के स्थानांतरण को लेकर हो रही है। रंजना अग्रवाल चार वर्षों से अधिक समय से इसी जोन की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अब उन्हें जोन क्रमांक-8 की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह जोन क्रमांक-6 की जोन कमिश्नर मधुलिका सिंह को जोन क्रमांक-1 का नया प्रभार दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक रंजना अग्रवाल के खिलाफ कई पार्षदों की शिकायतें भी लंबित थीं। हालांकि आधिकारिक तौर पर फेरबदल को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल जोन क्रमांक-3 को वीआईपी जोन माना जाता है। इस क्षेत्र में कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय, सरकारी आवास, जनप्रतिनिधियों के निवास और महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान स्थित हैं। ऐसे में इस जोन की जिम्मेदारी हमेशा अनुभवी अधिकारियों को सौंपी जाती है। इस बार प्रवेश कश्यप को इस महत्वपूर्ण जोन का जोन कमिश्नर बनाया गया है। निगम प्रशासन को उम्मीद है कि उनके अनुभव का लाभ इस क्षेत्र में चल रहे विकास और जनसुविधा संबंधी कार्यों को मिलेगा। प्रवेश कश्यप को केवल जोन क्रमांक-3 की जिम्मेदारी ही नहीं मिली है, बल्कि उनके पास पहले से मौजूद कई महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार भी बरकरार रखा गया है। वे उपायुक्त, स्थापना शाखा, स्वास्थ्य अधिकारी, स्वच्छता सर्वेक्षण और सिटी 2.0 से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे। इससे स्पष्ट है कि निगम प्रशासन ने उन्हें कई अहम परियोजनाओं और व्यवस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी सौंपकर विशेष भरोसा जताया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी क्रम में प्रवीण शुक्ला को जोन कमिश्नर के पद से मुक्त कर उनके मूल पद कार्यपालन अभियंता के रूप में कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। अब वे जोन क्रमांक-3 और जोन क्रमांक-7 में कार्यपालन अभियंता की जिम्मेदारी संभालेंगे। निगम प्रशासन का मानना है कि तकनीकी कार्यों के बेहतर निष्पादन के लिए अनुभवी अभियंताओं को उनकी मूल जिम्मेदारियों में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। नए आदेशों के तहत जोन क्रमांक-7 के जोन कमिश्नर प्रवीण शर्मा को जोन क्रमांक-2 भेजा गया है। वहीं भूपेंद्र उपाध्याय को जोन क्रमांक-2 से स्थानांतरित कर जोन क्रमांक-7 का प्रभार दिया गया है। सागर राज को जोन क्रमांक-4 से जोन क्रमांक-6 भेजा गया है, जबकि विभा सिंह को जोन क्रमांक-8 से जोन क्रमांक-4 की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा सवीना अनंत को जोन क्रमांक-5 का जोन कमिश्नर नियुक्त किया गया है। उनके पास उद्यान और स्विमिंग पूल से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी रहेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डिप्टी कमिश्नर दीपिका भगत के प्रभार में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। उन्हें स्टोर शाखा, भविष्य निधि, पेंशन और खाद्य शाखा से संबंधित जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनके कई पूर्व दायित्व भी यथावत रखे गए हैं ताकि प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनी रहे। निगम प्रशासन का कहना है कि अधिकारियों के अनुभव और कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए नई जिम्मेदारियों का निर्धारण किया गया है। नगर निगम के भीतर इस फेरबदल को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहने से कार्यप्रणाली में एकरूपता आ जाती है और कई बार निगरानी व्यवस्था भी प्रभावित होती है। ऐसे में समय-समय पर दायित्व बदलने से नई कार्यशैली और बेहतर परिणाम सामने आने की संभावना रहती है। वहीं पार्षदों और जनप्रतिनिधियों का भी मानना है कि इससे नागरिक समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी और विकास कार्यों की समीक्षा अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:24:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मृत घोषित युवक में दिखी हरकत, अंतिम संस्कार से पहले उठे गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[प्राइवेट अस्पताल पर लापरवाही के आरोप, एम्बुलेंस में शरीर हिलने का वीडियो वायरल; दोबारा भर्ती के बाद हुई मौत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/movement-seen-in-young-man-declared-dead-serious-questions-raised/article-55186"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और दुर्ग जिले के भिलाई से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। एक प्राइवेट अस्पताल द्वारा मृत घोषित किए गए युवक के शरीर में अंतिम संस्कार के लिए ले जाते समय अचानक हरकत दिखाई देने का दावा किया गया है। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने भी इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि बाद में युवक को दोबारा अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार भिलाई के पुरानी भिलाई क्षेत्र स्थित देव बलोदा निवासी रामअवतार रात्रे कुछ दिन पहले अपने घर के बाथरूम में गिर गए थे। गिरने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। परिजन तत्काल उन्हें इलाज के लिए रायपुर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में चिकित्सकों ने उनकी जांच की और उपचार शुरू किया। परिवार का कहना है कि डॉक्टरों ने उन्हें बताया था कि मरीज की हालत गंभीर है और उसे लगातार निगरानी में रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">परिजनों के मुताबिक इलाज के दौरान कुछ समय बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें जानकारी दी कि मरीज की मौत हो चुकी है। इसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार के लोग गहरे सदमे में थे और वे शव को लेकर अपने घर के लिए रवाना हो गए। घर पहुंचने से पहले ही अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। रिश्तेदारों और परिचितों को सूचना दे दी गई थी। घर पर अर्थी सजाई जा चुकी थी और अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जा रही थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच एम्बुलेंस में ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने सभी को हैरान कर दिया। परिजनों का दावा है कि रास्ते में युवक के शरीर में हलचल दिखाई देने लगी। उन्होंने देखा कि उसके हाथ-पैर हिल रहे थे और शरीर में हरकत महसूस हो रही थी। पहले तो किसी को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब दोबारा ध्यान से देखा गया तो परिवार के लोग घबरा गए। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति को अस्पताल ने मृत घोषित किया था, उसमें इस तरह की गतिविधियां कैसे दिखाई दे सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">परिजनों ने तत्काल अंतिम संस्कार की प्रक्रिया रोक दी और युवक को दोबारा अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया। बताया जाता है कि उसे रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका परीक्षण कर उपचार शुरू किया। कुछ समय तक इलाज चलने के बाद आखिरकार युवक ने दम तोड़ दिया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने चिकित्सा प्रक्रियाओं और मरीज को मृत घोषित करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसे परिजनों ने रिकॉर्ड किया था। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में एम्बुलेंस के भीतर युवक के शरीर में हरकत दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई लोग अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">परिवार का कहना है कि यदि युवक के शरीर में हरकत मौजूद थी तो उसे मृत घोषित करने से पहले और अधिक सावधानी बरती जानी चाहिए थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने जल्दबाजी में निर्णय लिया। उनका कहना है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मरीज को मृत घोषित करने की प्रक्रिया में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसी भी मरीज को मृत घोषित करने से पहले निर्धारित चिकित्सा मानकों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। कई बार कुछ शारीरिक प्रतिक्रियाएं या मांसपेशियों की गतिविधियां मृत्यु के बाद भी सीमित समय तक दिखाई दे सकती हैं। हालांकि इस मामले में वास्तविक स्थिति क्या थी, इसका पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मीडिया द्वारा संपर्क किए जाने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से कोई बयान जारी नहीं किया है। यही कारण है कि मामले को लेकर लोगों की उत्सुकता और सवाल दोनों बढ़ते जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देखा जा रहा है। यदि परिजनों की शिकायत के आधार पर जांच शुरू होती है तो अस्पताल की प्रक्रियाओं, मेडिकल रिकॉर्ड और संबंधित डॉक्टरों की भूमिका की भी समीक्षा की जा सकती है। दूसरी ओर परिवार न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहा है। इस घटना ने एक बार फिर चिकित्सा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और परिजनों के आरोपों के बीच अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 16:26:51 +0530</pubDate>
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                <title>छत्तीसगढ़ में घरेलू गैस सिलेंडर फिर महंगा, अब 1013 रुपए चुकाने होंगे</title>
                                    <description><![CDATA[तीन महीने में दूसरी बार बढ़े दाम, घरेलू एलपीजी पर 89 रुपए की बढ़ोतरी से रसोई का बजट बिगड़ने की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/6a252cf75b635/article-55185"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-lpg-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रायपुर। छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर एक बार फिर महंगा हो गया है। रविवार से राज्य में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की नई कीमत लागू कर दी गई है। राजधानी रायपुर में अब उपभोक्ताओं को एक घरेलू सिलेंडर के लिए लगभग 1013 रुपए चुकाने होंगे। इससे पहले यही सिलेंडर 984 रुपए में मिल रहा था। नई दरों के अनुसार एक सिलेंडर पर 29 रुपए की बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">घरेलू एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब पहले से ही खाद्य पदार्थों, ईंधन और दैनिक जरूरत की वस्तुओं के दाम बढ़े हुए हैं। बढ़ी हुई कीमतों का सीधा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ने की उम्मीद है। खासकर उन परिवारों के लिए यह अतिरिक्त बोझ माना जा रहा है जो पूरी तरह रसोई गैस पर निर्भर हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">पिछले तीन महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह दूसरी बार है जब घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 7 मार्च को गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की वृद्धि की गई थी। मार्च और जून की बढ़ोतरी को मिलाकर देखा जाए तो तीन महीने के भीतर घरेलू गैस सिलेंडर कुल 89 रुपए महंगा हो चुका है। लगातार बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। कई लोगों का कहना है कि घरेलू खर्च पहले से ही बढ़े हुए हैं और अब गैस सिलेंडर महंगा होने से मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">घरेलू गैस सिलेंडर के साथ-साथ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी हाल ही में वृद्धि की गई थी। करीब एक सप्ताह पहले व्यावसायिक उपयोग में आने वाले सिलेंडर के दाम लगभग 53 रुपए बढ़ाए गए थे। होटल, रेस्तरां, ढाबा और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर इसका असर देखने को मिल सकता है। व्यापारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत का असर अंततः ग्राहकों तक पहुंच सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तेल कंपनियों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। वैश्विक स्तर पर एलपीजी की खरीद लागत बढ़ने और घरेलू बिक्री में होने वाले नुकसान के कारण कीमतों में संशोधन करना आवश्यक हो गया था। कंपनियों के अनुसार मौजूदा बढ़ोतरी के बाद भी उन्हें पूरी लागत की भरपाई नहीं हो पा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार सरकारी तेल विपणन कंपनियों को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर प्रति सिलेंडर काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था। कंपनियों का दावा है कि हालिया मूल्य वृद्धि से नुकसान में कुछ कमी आएगी, लेकिन पूरी भरपाई अभी भी संभव नहीं हो सकेगी। यही वजह है कि कंपनियां समय-समय पर लागत और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर कीमतों में बदलाव करती रहती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">एलपीजी के अलावा पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में भी हाल के हफ्तों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार वृद्धि से परिवहन लागत बढ़ी है, जिसका असर विभिन्न वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। वहीं सीएनजी महंगी होने से सार्वजनिक और निजी परिवहन सेवाओं की लागत में भी बढ़ोतरी हुई है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह बाजार की समग्र महंगाई को प्रभावित करता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">एलपीजी सिलेंडर की कीमत तय करने की प्रक्रिया कई कारकों पर निर्भर करती है। सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों को देखा जाता है। इसके बाद डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसके अलावा आयात शुल्क, परिवहन खर्च, बॉटलिंग प्लांट का खर्च और वितरण व्यवस्था से जुड़ी लागत भी अंतिम कीमत को प्रभावित करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार की सब्सिडी और कर संबंधी नीतियां भी गैस सिलेंडर के दाम तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। हालांकि वर्तमान में अधिकांश उपभोक्ताओं को सीमित या नाममात्र की सब्सिडी मिल रही है। ऐसे में बाजार में होने वाले मूल्य परिवर्तन का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है। नई दरें लागू होने के बाद राज्यभर में उपभोक्ताओं को महंगा सिलेंडर खरीदना पड़ेगा। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और ऊर्जा कीमतों में बदलाव के आधार पर एलपीजी दरों में फिर संशोधन हो सकता है। लेकिन बढ़ी हुई कीमतों ने आम लोगों की रसोई का खर्च बढ़ा दिया है </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 16:26:45 +0530</pubDate>
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