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                <title>Rural News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Rural News RSS Feed</description>
                
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                <title>खाद कालाबाजारी पर सरकार का बड़ा एक्शन, कृषि मंत्री ने दी सख्त चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[अंबिकापुर दौरे में कृषि मंत्री रामविचार नेताम की दोटूक चेतावनी, खाद वितरण व्यवस्था की होगी कड़ी निगरानी, किसानों को समय पर उपलब्ध होगी पर्याप्त खाद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/governments-big-action-on-black-marketing-of-fertilizers-agriculture-minister/article-58387"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-agriculture-minister.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने खाद की कालाबाजारी और किसानों के हितों से जुड़े मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने अंबिकापुर दौरे के दौरान स्पष्ट कहा कि खाद की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका ऐसे लोगों को संरक्षण देने में सामने आती है तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा। सरकार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और किसानों के हितों से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। कृषि मंत्री ने कहा कि खेती का मौसम शुरू होते ही किसानों के लिए समय पर खाद उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे समय में यदि कोई व्यक्ति या समूह खाद की कृत्रिम कमी पैदा कर मुनाफाखोरी करने की कोशिश करता है तो यह सीधे तौर पर किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत को गंभीरता से ले रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को भी स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यदि जांच में किसी की भूमिका खाद माफियाओं को संरक्षण देने या अनियमित वितरण में सहयोग करने की सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। अंबिकापुर और सरगुजा क्षेत्र में लंबे समय से खाद वितरण को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई किसान संगठनों ने खाद की कालाबाजारी, अनियमित वितरण और कृत्रिम संकट पैदा किए जाने के आरोप लगाए हैं। इसी पृष्ठभूमि में कृषि मंत्री का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को परेशानी में डालने वाले तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी ताकि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसी भी किसान को खाद के लिए भटकना न पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में खाद की उपलब्धता पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है। विशेष रूप से डीएपी खाद का पर्याप्त भंडारण किया गया है ताकि मांग के अनुसार किसानों को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक लगभग 50 प्रतिशत खाद का उठाव किसानों द्वारा किया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वितरण प्रक्रिया लगातार जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मानसून की शुरुआत में बारिश में कुछ देरी होने के कारण किसानों में चिंता का माहौल था, लेकिन अब अधिकांश क्षेत्रों में अच्छी वर्षा होने से खेती की गतिविधियां तेज हो गई हैं। ऐसे समय में सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि खाद और अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता में कोई बाधा न आए। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि विभाग की ओर से जिला स्तर पर खाद वितरण की नियमित समीक्षा भी की जा रही है। विभिन्न जिलों में उपलब्ध स्टॉक, मांग और वितरण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कहीं भी कृत्रिम संकट की स्थिति उत्पन्न न हो। सरकार का प्रयास है कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध हो और किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। खेती के मौसम में खाद की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है और सरकार इसे लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कृषि मंत्री ने किसानों से भी अपील की कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद खरीदें और यदि कहीं अधिक कीमत वसूली जा रही हो, कालाबाजारी की जा रही हो या कृत्रिम कमी पैदा की जा रही हो तो इसकी जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 13:13:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मृत्युभोज में घी के मालपुए नहीं बने तो 43 परिवारों का सामाजिक बहिष्कार</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के सिरोही जिले के मंडवारिया गांव में आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के समर्थन में खड़े लोगों पर भी कार्रवाई, पीड़ितों ने जिला प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/social-boycott-of-43-families-if-ghee-malpuas-are-not/article-57013"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sirohi-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजस्थान के सिरोही जिले के मंडवारिया गांव से सामाजिक बहिष्कार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परंपराओं और सामाजिक दबाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि गांव के एक गरीब परिवार ने आर्थिक तंगी के चलते मृत्युभोज में घी के मालपुए बनाने से इनकार कर दिया। इसके बाद समाज के कुछ पंचों ने न केवल उस परिवार का बल्कि उनका समर्थन करने वाले 43 अन्य परिवारों का भी सामाजिक बहिष्कार कर दिया। पीड़ित परिवारों का कहना है कि अब गांव में उन्हें राशन तक नहीं दिया जा रहा है। स्थानीय दुकानदार सामान देने से मना कर रहे हैं, जबकि सार्वजनिक कुओं से पानी भरने पर भी रोक लगा दी गई है। इतना ही नहीं, गांव के लोगों से बातचीत तक बंद कर दी गई है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें खेतों में मजदूरी भी नहीं मिल रही, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है और पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक परिवार में मृत्यु के बाद आयोजित होने वाले मृत्युभोज में आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण घी के मालपुए नहीं बनाए गए। परिवार ने समाज के लोगों से सादा भोजन स्वीकार करने का आग्रह किया था, लेकिन कथित तौर पर कुछ पंच इस बात से नाराज हो गए। इसके बाद पंचायत बुलाकर सामाजिक बहिष्कार का फैसला सुनाया गया। पीड़ितों का कहना है कि जिन्होंने इस फैसले का विरोध किया या गरीब परिवार का समर्थन किया, उन्हें भी दंडित कर दिया गया। देखते ही देखते कुल 43 परिवार इस बहिष्कार की चपेट में आ गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रभावित परिवारों का कहना है कि सामाजिक बहिष्कार का असर केवल रिश्तों तक सीमित नहीं है बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। महिलाओं और बच्चों को भी गांव में उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवारों का कहना है कि जरूरत का सामान खरीदने के लिए उन्हें दूसरे गांवों का रुख करना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर मजदूरी बंद होने से आर्थिक स्थिति और खराब होती जा रही है। कुछ लोगों ने बताया कि छोटे बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। गांव में सामाजिक दूरी बनाए रखने का दबाव इतना अधिक है कि कई लोग चाहकर भी इन परिवारों की मदद नहीं कर पा रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने पहले स्थानीय स्तर पर अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन समाधान नहीं निकला। इसके बाद सभी प्रभावित परिवार सिरोही कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रशासन से सामाजिक बहिष्कार समाप्त कराने, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले की जांच का भरोसा दिया है। उधर, यह मामला सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर इस तरह का सामाजिक दबाव उचित नहीं है और किसी भी परंपरा के नाम पर लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि सामाजिक बहिष्कार जैसी घटनाएं न केवल प्रभावित परिवारों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं बल्कि समाज में भय और असमानता का माहौल भी पैदा करती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि राजस्थान में सामाजिक बहिष्कार को रोकने के लिए 'राजस्थान सामाजिक बहिष्कार निषेध अधिनियम, 2019' लागू है। इस कानून के तहत किसी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना दंडनीय अपराध माना गया है। कानून का उद्देश्य ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना और लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल जिला प्रशासन पूरे मामले की जानकारी जुटा रहा है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप करेगा और उन्हें सामान्य जीवन जीने का अधिकार वापस मिलेगा। गांव में भी इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कई लोग चाहते हैं कि बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकले, जबकि पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्हें केवल सामाजिक सम्मान ही नहीं बल्कि अपने बुनियादी अधिकार भी वापस चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 14:29:17 +0530</pubDate>
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                <title>पोल्ट्री फार्म में घुसा तेंदुआ, 10 मुर्गियों का किया शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[धमतरी के मोहलाई गांव में CCTV में कैद हुई घटना, रिहायशी इलाके के करीब तेंदुए की मौजूदगी से ग्रामीणों में बढ़ी चिंता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a2541ae6b9a3/article-55190"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/leopard-attack-dhamtari.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक बार फिर तेंदुए की आमद ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के केरेगांव रेंज अंतर्गत ग्राम मोहलाई स्थित एक निजी पोल्ट्री फार्म में गुरुवार देर रात तेंदुआ घुस गया और उसने करीब 10 मुर्गियों का शिकार कर लिया। पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसका वीडियो अब सामने आया है। वीडियो में तेंदुआ फार्म के भीतर घूमता दिखाई देता है और कुछ मुर्गियों को अपने जबड़े में दबाकर ले जाते हुए नजर आता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, घटना गुरुवार रात की है। बताया जा रहा है कि तेंदुआ पोल्ट्री फार्म की सुरक्षा जाली को नुकसान पहुंचाकर अंदर दाखिल हुआ था। जैसे ही वह फार्म के भीतर पहुंचा, वहां मौजूद मुर्गियों में अफरा-तफरी मच गई। कई मुर्गियां इधर-उधर भागने लगीं जबकि कुछ डर के कारण एक कोने में सिमट गईं। इसी दौरान तेंदुए ने एक के बाद एक कई मुर्गियों को अपना शिकार बना लिया। सुबह जब फार्म संचालक वहां पहुंचे तो उन्हें कई मुर्गियां गायब मिलीं और कुछ मृत अवस्था में पड़ी थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है क्योंकि जिस पोल्ट्री फार्म में तेंदुआ घुसा, वह रिहायशी क्षेत्र से महज 500 से 700 मीटर की दूरी पर स्थित है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर तेंदुआ भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाके की ओर बढ़ा तो लोगों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता है। खासकर बच्चों और मवेशियों को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। गांव के लोगों ने वन विभाग से लगातार निगरानी और सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों के अनुसार मोहलाई गांव जंगल से सटा हुआ क्षेत्र है। यहां अक्सर हिरण, चीतल, सियार और लकड़बग्घा जैसे वन्य जीव दिखाई देते रहते हैं। हालांकि तेंदुए की मौजूदगी ने लोगों की चिंता कहीं ज्यादा बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय में यह तीसरी बार है जब आसपास के पोल्ट्री फार्मों के नजदीक तेंदुआ देखा गया है। इससे पहले भी उसकी गतिविधियां दर्ज की गई थीं, लेकिन मुर्गियों पर इस तरह हमला करने की घटना सामने नहीं आई थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पोल्ट्री फार्म संचालक साजिद अब्दुल हमीद ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में तेंदुआ दो से तीन मुर्गियों को उठाकर ले जाता दिखाई दे रहा है, लेकिन वास्तविक नुकसान इससे कहीं ज्यादा है। उनके अनुसार करीब 10 मुर्गियां गायब मिलीं और कुछ मुर्गियां मृत पड़ी थीं। उन्होंने बताया कि बीते 10 दिनों के दौरान फार्म में लगभग 500 मुर्गियों की मौत हुई है, जिससे उन्हें एक से डेढ़ लाख रुपये तक का नुकसान होने का अनुमान है। लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए उन्होंने पूरे फार्म को फिलहाल खाली करा दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने आसपास के क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। वन विभाग के कर्मचारियों ने ग्रामीणों से रात के समय अकेले जंगल की ओर नहीं जाने, छोटे बच्चों को घर के आसपास रखने और पालतू पशुओं को सुरक्षित स्थान पर बांधने की सलाह दी है। गांव में लोगों को सतर्क रहने के लिए भी कहा गया है। धमतरी वन मंडल के डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव ने बताया कि मोहलाई गांव स्थित पोल्ट्री फार्म में तेंदुए के घुसने की सूचना विभाग को मिली है। प्रारंभिक जांच में तेंदुए की गतिविधि की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि विभाग की टीम लगातार गश्त कर रही है और पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है। साथ ही पोल्ट्री फार्म में हुए नुकसान का आंकलन करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नियमानुसार क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया पूरी की जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वन विभाग का मानना है कि जंगलों में भोजन की उपलब्धता कम होने और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण कई बार जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर पहुंच जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में लोगों को घबराने की बजाय सतर्क रहने की जरूरत होती है। वहीं ग्रामीण चाहते हैं कि वन विभाग इलाके में कैमरा ट्रैप लगाए और तेंदुए की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे ताकि किसी बड़ी घटना को रोका जा सके। मोहलाई गांव और आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है। सीसीटीवी में कैद तस्वीरों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि वन विभाग जल्द ही प्रभावी कदम उठाएगा, जिससे लोगों और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 16:27:32 +0530</pubDate>
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