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                <title>education-news - दैनिक जागरण</title>
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                <title>बिलासपुर के स्कूलों में बिना किताबों के पढ़ाई, नए शिक्षा सत्र के 15 दिन बाद भी नहीं पहुंचीं पाठ्य पुस्तकें</title>
                                    <description><![CDATA[70 और 80 जीएसएम कागज विवाद, टेंडर प्रक्रिया और तकनीकी देरी बनी वजह। जिला शिक्षा अधिकारी ने जल्द वितरण का भरोसा दिया, लाखों छात्र अब भी नई किताबों का इंतजार कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/studying-without-books-in-bilaspur-schools-text-books-did-not/article-57950"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-schools.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में नया शिक्षा सत्र शुरू हुए दो सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सरकारी स्कूलों के हजारों विद्यार्थियों को अब तक नई पाठ्य पुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। स्कूलों में नियमित रूप से कक्षाएं लग रही हैं, शिक्षक पढ़ाई भी करवा रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में छात्र बिना किताबों के ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कई बच्चे पुराने नोट्स, पिछले सत्र की किताबों या शिक्षकों द्वारा ब्लैकबोर्ड पर लिखाए गए पाठ के सहारे अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। शिक्षा सत्र की शुरुआत में ही किताबों की अनुपलब्धता ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार इस बार किताबों के वितरण में देरी का मुख्य कारण कागज की गुणवत्ता को लेकर चला विवाद, टेंडर प्रक्रिया में विलंब और प्रशासनिक स्तर पर हुई तकनीकी दिक्कतें हैं। पाठ्य पुस्तक निगम से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष 70 जीएसएम और 80 जीएसएम कागज के उपयोग को लेकर लंबे समय तक निर्णय नहीं हो सका। इसी वजह से किताबों की छपाई निर्धारित समय पर पूरी नहीं हो पाई और वितरण प्रक्रिया भी प्रभावित हो गई। इसका सीधा असर स्कूलों में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों पर दिखाई दे रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिलासपुर जिले में करीब तीन लाख विद्यार्थियों के लिए नए शिक्षा सत्र में लगभग 15 लाख पाठ्य पुस्तकों की आवश्यकता है। कक्षा के अनुसार प्रत्येक छात्र को तीन से छह किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को तीन से चार पुस्तकें, मिडिल स्कूल के विद्यार्थियों को लगभग पांच और हाईस्कूल स्तर पर छह तक किताबें दी जाती हैं। राज्य सरकार की योजना के तहत कक्षा पहली से दसवीं तक पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। इन पुस्तकों की छपाई और स्कूलों तक वितरण की जिम्मेदारी पाठ्य पुस्तक निगम की होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार नया सत्र शुरू होने से पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि सभी स्कूलों में समय पर किताबें पहुंच जाएंगी। कुछ समय पहले बिलासपुर दौरे पर आए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि नए सत्र की शुरुआत से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं और विद्यार्थियों तक किताबें समय पर पहुंचाई जाएं। हालांकि जमीनी स्थिति इससे अलग दिखाई दे रही है। जिले के कई सरकारी और कुछ निजी विद्यालयों में अब तक विद्यार्थियों को पूरी पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बिना किताबों के पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें फिलहाल पुराने नोट्स या पिछले साल की पुस्तकों से पढ़ने को कहा गया है। कई बच्चों ने बताया कि शिक्षक बोर्ड पर पाठ लिखवाकर पढ़ाई करा रहे हैं, लेकिन किताबें नहीं होने से घर पर दोबारा पढ़ाई करने में परेशानी होती है। जिन विद्यार्थियों के पास पुराने संस्करण की किताबें भी नहीं हैं, उन्हें सहपाठियों की मदद लेनी पड़ रही है। इससे पढ़ाई की गति भी प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अभिभावकों ने भी इस स्थिति पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब शिक्षा विभाग को पहले से स्कूल खुलने की तारीख की जानकारी थी, तो किताबों की छपाई और वितरण की प्रक्रिया समय रहते पूरी कर लेनी चाहिए थी। उनका मानना है कि शिक्षा सत्र के शुरुआती दिनों में ही पढ़ाई की मजबूत नींव रखी जाती है। यदि इसी समय विद्यार्थियों को जरूरी अध्ययन सामग्री उपलब्ध नहीं होगी तो इसका असर पूरे सत्र की पढ़ाई पर पड़ सकता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार इस बार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के नए दिशा-निर्देशों के कारण भी प्रकाशन प्रक्रिया में बदलाव करना पड़ा। पहले विभाग 70 जीएसएम कागज पर किताबें छपवाता था, लेकिन इस बार 80 जीएसएम कागज पर छपाई का प्रस्ताव सामने आया। बाद में इस पर यह तर्क दिया गया कि मोटे कागज से किताबों का वजन बढ़ जाएगा और बच्चों के स्कूल बैग अधिक भारी हो जाएंगे। इस मुद्दे पर आपत्तियां आने के बाद प्रस्ताव में संशोधन करना पड़ा, जिससे टेंडर प्रक्रिया दोबारा प्रभावित हुई और किताबों की छपाई में अपेक्षा से अधिक समय लग गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जीएसएम यानी ग्राम प्रति वर्ग मीटर, कागज की मोटाई और वजन मापने का मानक होता है। 70 जीएसएम कागज सामान्य रूप से कॉपियों और पुस्तकों में इस्तेमाल किया जाता है, जबकि 80 जीएसएम कागज अधिक मजबूत और बेहतर गुणवत्ता वाला माना जाता है। हालांकि इसकी मोटाई अधिक होने से किताबों का कुल वजन भी बढ़ जाता है। यही वजह रही कि इस मुद्दे पर लंबे समय तक विचार-विमर्श चलता रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल ने कहा है कि पाठ्य पुस्तक निगम से नई किताबें जिले में पहुंच चुकी हैं और उनका वितरण जल्द शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों सहित अन्य विद्यालयों में भी अगले दो से तीन दिनों के भीतर किताबें पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। निजी स्कूलों के लिए भी जल्द वितरण शुरू होने की बात कही गई है। हर नए शिक्षा सत्र की शुरुआत में विद्यार्थियों को समय पर किताबें उपलब्ध कराना बेहद जरूरी होता है। शुरुआती दिनों में पढ़ाई का आधार मजबूत किया जाता है और यदि इसी दौरान अध्ययन सामग्री उपलब्ध न हो तो सीखने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। ऐसे में विभाग के लिए जरूरी है कि भविष्य में टेंडर, छपाई और वितरण की पूरी प्रक्रिया पहले से तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाए ताकि विद्यार्थियों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:24:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>शिक्षकों के तबादलों में बड़ी राहत, मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[भास्कर की खबर के बाद शिक्षा विभाग ने बदले आदेश, अब अन्य दस्तावेजों से भी हो सकेगा आवेदन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-relief-in-teachers-transfers-mandatory-requirement-of-marriage-certificate/article-56791"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/teacher-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग ने स्वैच्छिक तबादलों की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र यानी मैरिज सर्टिफिकेट जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। विभाग के इस फैसले से उन हजारों शिक्षक-शिक्षिकाओं को राहत मिली है जो केवल मैरिज सर्टिफिकेट नहीं होने के कारण अपने आवेदन पूरे नहीं कर पा रहे थे। अब पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण के लिए आवेदन करने वाले शिक्षक समग्र आईडी, सत्यापित सेवा पुस्तिका की प्रति या अन्य उपयुक्त दस्तावेजों के आधार पर भी आवेदन कर सकेंगे। विभाग के इस फैसले को शिक्षकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से इस मुद्दे को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विवाह संबंधी जानकारी के सत्यापन के लिए केवल विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र ही अनिवार्य दस्तावेज नहीं माना जाएगा। इसके स्थान पर ऐसे दस्तावेज भी स्वीकार किए जाएंगे जिनसे पति-पत्नी संबंध की पुष्टि हो सके। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक थे जिनका विवाह कई वर्ष पहले हुआ था, लेकिन उन्होंने विवाह पंजीयन नहीं कराया था। ऐसे में वे पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे थे। मामला सामने आने के बाद विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए नियमों में आवश्यक संशोधन किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">6 जून को जारी की गई तबादला नीति में विवाह प्रमाण पत्र को अनिवार्य दस्तावेज के रूप में उल्लेखित नहीं किया गया था। इसके बावजूद ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन के दौरान मैरिज सर्टिफिकेट अपलोड करना जरूरी दिखाया जा रहा था। इससे शिक्षक वर्ग में भ्रम की स्थिति बन गई थी। कई शिक्षक लगातार विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर रहे थे और इस विसंगति को दूर करने की मांग कर रहे थे। मामला सार्वजनिक होने के बाद विभाग ने त्वरित निर्णय लेते हुए आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी। शिक्षा विभाग का कहना है कि पात्र शिक्षकों को केवल तकनीकी कारणों से तबादला प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जाएगा।  मैरिज सर्टिफिकेट से जुड़ी समस्या का समाधान होने के बाद भी तबादला प्रक्रिया में कई अन्य परेशानियां बनी हुई हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतें लगातार सामने आ रही हैं। कई शिक्षकों को आवेदन सबमिट करने में परेशानी हो रही है तो कई मामलों में दस्तावेज अपलोड नहीं हो पा रहे हैं। अंतिम तिथि नजदीक होने के कारण शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। कई आवेदक ऐसे हैं जो निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण सफल नहीं हो पा रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षक संगठनों के मुताबिक तबादला प्रक्रिया में 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता भी बड़ी संख्या में शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। इसके अलावा जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों पर तबादला प्रतिबंध और न्यूनतम तीन वर्ष की सेवा अवधि जैसी शर्तों के कारण भी कई शिक्षक आवेदन करने से वंचित हो गए हैं। संगठन दावा कर रहे हैं कि इन नियमों के चलते बड़ी संख्या में पात्र शिक्षक प्रक्रिया से बाहर हो चुके हैं। उनका कहना है कि यदि इन शर्तों में कुछ व्यावहारिक संशोधन नहीं किए गए तो अनेक शिक्षक तबादले के अवसर का लाभ नहीं उठा पाएंगे। दिव्यांग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों को भी पोर्टल से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार कई दिव्यांग शिक्षकों के पास स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र मौजूद हैं, लेकिन पोर्टल केवल एक वर्ष के भीतर जारी प्रमाण पत्र ही स्वीकार कर रहा है। ऐसी स्थिति में उनके आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहे। इसे लेकर भी विभाग से शिकायतें की गई हैं। संबंधित शिक्षकों का कहना है कि स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए और पोर्टल में आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तबादला प्रक्रिया में आ रही इन समस्याओं को लेकर विभिन्न शिक्षक संगठनों ने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से मुलाकात की है। राज्य अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव सहित कई प्रतिनिधियों ने मंत्री के समक्ष शिक्षकों की समस्याएं रखीं। वहीं शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने मांग की है कि पोर्टल की तकनीकी खामियों को तत्काल दूर किया जाए और आवेदन की अंतिम तिथि भी बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि यदि समय सीमा में विस्तार नहीं किया गया तो अनेक पात्र शिक्षक केवल तकनीकी कारणों से आवेदन नहीं कर पाएंगे। विभाग द्वारा मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता हटाए जाने के फैसले का शिक्षक वर्ग ने स्वागत किया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:29:32 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल गांधी ने CBSE छात्र सार्थक से की मुलाकात, बोले- 18 साल का युवा सिस्टम से तेज निकला</title>
                                    <description><![CDATA[OSM पोर्टल और टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल, छात्र की पहल को बताया पारदर्शिता और जवाबदेही की मिसाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rahul-gandhi-met-cbse-student-sarthak-and-said-18/article-55207"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rahul-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार को झारखंड के रांची निवासी 18 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत से मुलाकात का वीडियो साझा करते हुए शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार तथा सीबीएसई पर सवाल उठाए। करीब आठ मिनट के इस वीडियो में राहुल गांधी और सार्थक के बीच हुई बातचीत दिखाई गई है, जिसमें सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और उससे जुड़े टेंडर को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई। राहुल गांधी ने छात्र की पहल की सराहना करते हुए कहा कि एक 18 वर्षीय युवा ने उन खामियों को सामने लाया, जिन्हें जांच एजेंसियां और बड़े संस्थागत तंत्र नहीं देख सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सार्थक सिद्धांत ने इसी वर्ष 12वीं कक्षा की परीक्षा दी थी। परिणाम घोषित होने के बाद उन्होंने अपने अंकों को लेकर पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई। इसी दौरान उन्होंने अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं का अध्ययन किया और कथित तौर पर कई तकनीकी तथा प्रक्रियागत गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। छात्र का दावा है कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, मूल्यांकन और उससे संबंधित डिजिटल व्यवस्था में कई ऐसे पहलू हैं जिनकी गंभीर जांच की आवश्यकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहुल गांधी द्वारा साझा किए गए वीडियो में सार्थक ने बताया कि उन्होंने एक नागरिक के रूप में केवल वही किया जो किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को करना चाहिए। उनके अनुसार यदि किसी व्यवस्था में खामियां दिखाई दें तो उन्हें समझना और सुधार के लिए आवाज उठाना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। सार्थक ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी सार्वजनिक संस्थान की विश्वसनीयता का आधार होती है और छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बातचीत के दौरान सार्थक ने बताया कि उन्हें OSM पोर्टल से जुड़ी कुछ जानकारियां एक एथिकल हैकर के माध्यम से मिली थीं। इसके बाद उन्होंने विभिन्न दस्तावेजों, टेंडर रिकॉर्ड और उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियों का अध्ययन किया। छात्र का कहना है कि उन्होंने सीबीएसई से जुड़े सैकड़ों टेंडर दस्तावेजों की समीक्षा की और यह समझने की कोशिश की कि मूल्यांकन प्रणाली को संचालित करने वाली कंपनी को किस प्रक्रिया के तहत चयनित किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान कुछ शर्तों में बदलाव किए गए, जिन्हें लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने बातचीत के दौरान यह सवाल भी उठाया कि यदि एक 18 वर्षीय छात्र किसी व्यवस्था में संभावित खामियां पहचान सकता है, तो बड़े संस्थागत तंत्र और निगरानी एजेंसियां ऐसा क्यों नहीं कर पातीं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक छात्र की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जिज्ञासा और जागरूकता का उदाहरण है जो देश के युवाओं में मौजूद है। राहुल ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और व्यवस्था से जवाब मांगना किसी भी नागरिक का अधिकार है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सार्थक ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी राय रखी। उनका कहना था कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली कई बार छात्रों की जिज्ञासा और खोजी सोच को प्रोत्साहित करने के बजाय सीमित कर देती है। उन्होंने बताया कि तकनीकी विषयों में रुचि और परिवार से मिले सहयोग के कारण उन्होंने इस विषय को गहराई से समझने का प्रयास किया। उनके अनुसार छात्रों को केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें व्यवस्थाओं को समझने और उनमें सुधार के लिए भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे विवाद के केंद्र में OSM प्रणाली और उससे जुड़ी कंपनी COEMPT एडूटेक है, जिसे सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन कार्य का ठेका मिला हुआ है। राहुल गांधी पहले भी इस कंपनी और टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि कंपनी को ठेका देने की प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण नियमों और मानकों को बदला गया। हालांकि सीबीएसई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की गई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सीबीएसई का कहना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का उद्देश्य मूल्यांकन को अधिक तेज, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। बोर्ड के अनुसार डिजिटल मूल्यांकन से अंकों के जोड़, डेटा एंट्री और अन्य मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होती है। हालांकि परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने सर्वर संबंधी समस्याओं, भुगतान में कठिनाई और उत्तर पुस्तिकाओं की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं। इससे पहले भी राहुल गांधी ने कुछ छात्रों के साथ बैठक कर उनकी शिकायतें सुनी थीं। उन छात्रों ने दावा किया था कि उत्तर पुस्तिकाओं और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में कई तरह की तकनीकी समस्याएं सामने आईं। इन घटनाओं के बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, डिजिटल मूल्यांकन की गुणवत्ता और छात्रों के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। सार्थक सिद्धांत की पहल चर्चा का विषय बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:16 +0530</pubDate>
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