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                <title>Climate Change - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Climate Change RSS Feed</description>
                
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                <title>स्पेन के जंगल में भीषण आग से 12 की मौत, 19 लापता; राहत अभियान जारी</title>
                                    <description><![CDATA[एंडालूसिया के लॉस गैलार्डोस क्षेत्र में लगी भीषण आग ने बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। शुरुआती आशंका बिजली की गिरी हुई तार से आग लगने की है, हालांकि जांच अभी जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/12-killed-19-missing-in-massive-fire-in-spains-forest/article-58451"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/spain-wildfire.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">स्पेन के दक्षिणी हिस्से में स्थित एंडालूसिया क्षेत्र के लॉस गैलार्डोस में शुक्रवार को लगी भीषण जंगल की आग ने भारी तबाही मचा दी। इस हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 19 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार आठ लोग घायल हुए हैं और इनमें से चार की हालत गंभीर बनी हुई है। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों को सुरक्षित निकलने का मौका तक नहीं मिला। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि लापता लोगों की तलाश के लिए फायरफाइटर, पुलिस और सेना की इमरजेंसी यूनिट मिलकर काम कर रही है। भीषण गर्मी और तेज हवाओं के कारण आग पर पूरी तरह काबू पाने में मुश्किलें आ रही हैं। कई इलाकों से लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया था, लेकिन कुछ लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके। स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/andalusia-fire-(2).jpg" alt="Andalusia Fire" width="1366" height="749"></img></p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस आग की शुरुआत बिजली की गिरी हुई तार से होने की आशंका जताई गई थी। एंडालूसिया की इमरजेंसी सर्विस ने शुरुआती कॉल के आधार पर यही संभावना व्यक्त की, लेकिन बिजली कंपनी एंडेसा ने इस दावे से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि जिस बिजली लाइन की बात सामने आ रही है, उसमें उस समय बिजली का प्रवाह नहीं था। ऐसे में आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है। हादसे के दौरान सामने आई कई घटनाओं ने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया। अधिकारियों के मुताबिक एक कार में सवार चार लोग आग की चपेट में आने से जिंदा जल गए। वाहन का स्टीयरिंग दाईं ओर होने के कारण आशंका जताई जा रही है कि वे ब्रिटिश नागरिक हो सकते हैं। इसके अलावा सात अन्य लोग भी मृत पाए गए, जिन्होंने अपनी गाड़ियां छोड़कर दूसरे रास्ते से निकलने की कोशिश की थी। प्रशासन का कहना है कि इन लोगों ने निर्धारित निकासी मार्ग का इस्तेमाल नहीं किया, जिससे वे तेजी से फैलती आग के बीच फंस गए।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/andalusia-fire-(1).jpg" alt="Andalusia Fire" width="1366" height="749"></img></p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने लोगों से आपातकालीन स्थिति में केवल प्रशासन द्वारा बताए गए सुरक्षित मार्गों का ही उपयोग करने की अपील की है। राहत दलों के सामने चुनौती यह भी है कि कई इलाकों में धुआं इतना घना है कि दृश्यता बेहद कम हो गई है, जिससे खोज अभियान प्रभावित हो रहा है। 12 लोगों की मौत के साथ यह आग वर्ष 2005 के बाद स्पेन की सबसे घातक जंगल की आग मानी जा रही है। वर्ष 2005 में ग्वाडालाहारा प्रांत में लगी आग में 11 फायरफाइटरों की मौत हुई थी, जिसके बाद स्पेन ने जंगल की आग से निपटने की रणनीति और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली में कई बड़े बदलाव किए थे। इसके बावजूद इस बार की आग ने एक बार फिर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। आग बुझाने के लिए करीब 150 फायरफाइटर लगातार मोर्चे पर डटे हुए हैं और सेना की इमरजेंसी यूनिट भी राहत कार्य में शामिल है। एंडालूसिया के आपातकाल प्रमुख एंटोनियो सान्ज के अनुसार मृतकों में एक स्पेनिश नागरिक है, जबकि बाकी अधिकांश विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोगों ने अधिकारियों की घरों के भीतर सुरक्षित रहने की सलाह का पालन नहीं किया और कारों से निकलने का प्रयास किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/andalusia-fire.jpg" alt="Andalusia Fire" width="1366" height="749"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान वे आग की लपटों में घिर गए। लॉस गैलार्डोस के मेयर फ्रांसिस्को मिगुएल रेयेस ने इस घटना को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इतना भयावह मंजर पहले कभी नहीं देखा। उनके अनुसार पूरा इलाका ऐसा दिखाई दे रहा है मानो किसी बड़े विस्फोट ने सब कुछ तबाह कर दिया हो। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह हादसा पूरे देश के लिए बेहद दुखद है। यूरोपियन फॉरेस्ट फायर इंफॉर्मेशन सिस्टम के अनुसार इस वर्ष अब तक स्पेन में लगभग 57 हजार हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फ्रांस में भीषण हीटवेव से 1000 लोगों की मौत, यूरोप झुलसा</title>
                                    <description><![CDATA[16 देशों में रिकॉर्डतोड़ तापमान, सड़कें पिघलीं, स्कूल बंद, जंगलों में आग, बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a41fb2e9628b/article-57262"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/europe-heatwave-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">यूरोप इस समय इतिहास की सबसे भीषण गर्मी की लहर से जूझ रहा है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। फ्रांस में हाल ही में आई हीटवेव के दौरान करीब 1,000 अतिरिक्त मौतों की पुष्टि हुई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ गई है। फ्रांस की हेल्थ एजेंसी के अनुसार ये मौतें 24 जून से 27 जून के बीच दर्ज की गई हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि यह “अतिरिक्त मौतें” हैं, यानी सामान्य औसत से करीब 1,000 अधिक लोगों की जान गई है। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग लोग रहे हैं और करीब 85 प्रतिशत मामलों में पीड़ितों की उम्र अधिक पाई गई है। अधिकतर मौतें घरों के भीतर ही हुई हैं, जहां गर्मी से राहत नहीं मिल पाई। पेरिस और आसपास के इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। यहां तापमान लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है और कई घरों में कूलिंग सिस्टम न होने के कारण लोग अधिक प्रभावित हुए हैं। लोग पंखे और एयर कंडीशनर खरीदने के लिए दुकानों पर उमड़ पड़े, जिससे कई जगह स्टॉक खत्म हो गया। प्रशासन ने लोगों को दिन के सबसे गर्म समय में बाहर न निकलने की सलाह दी है और अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img alt="2Q=="></img></p>
<p>फ्रांस के अलावा पूरे यूरोप में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन, इटली, डेनमार्क, स्विट्जरलैंड और चेक रिपब्लिक समेत कुल 16 देशों में तापमान ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कहीं सड़कें पिघलने लगी हैं तो कहीं रेल पटरियां गर्म होकर मुड़ने के कारण ट्रेनों की रफ्तार सीमित करनी पड़ी है। कई देशों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और बड़ी संख्या में लोग तटीय इलाकों और ठंडे क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं। ब्रिटेन में स्थिति बेहद असामान्य मानी जा रही है, जहां लगातार तीन दिनों तक रेड वार्निंग जारी करनी पड़ी है। दक्षिणी इंग्लैंड में तापमान 36 डिग्री से अधिक पहुंच गया है और अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस संबंधी समस्याओं के मरीज तेजी से बढ़े हैं। कई शहरों में 1000 से अधिक स्कूलों को बंद करना पड़ा है क्योंकि कक्षाओं का तापमान असहनीय हो गया है। वहीं जर्मनी में 41.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया है, जो देश के इतिहास का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। स्पेन में स्थिति और भी गंभीर है, जहां तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। यहां भीषण गर्मी के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं और कई कस्बों को खाली कराना पड़ा है। दमकल विभाग लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटा है। इटली में 18 शहरों में रेड अलर्ट जारी है और सरकार ने लोगों को दोपहर के समय घरों से बाहर न निकलने की चेतावनी दी है। पो नदी का जलस्तर भी तेजी से गिर रहा है, जिससे खेती और पेयजल पर संकट गहराने लगा है।</p>
<p><img alt="Z"></img></p>
<p>डेनमार्क जैसे ठंडे देश में भी तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो वहां के इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। चेक रिपब्लिक में भी तापमान 40 डिग्री के पार चला गया है और मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। स्विट्जरलैंड में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा बढ़ गया है। यूरोप की यह हीटवेव केवल असामान्य मौसम नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। वैज्ञानिकों के अनुसार यूरोप का तापमान वैश्विक औसत से तेज गति से बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं और अधिक बार देखने को मिल सकती हैं। गर्मी की यह लहर न केवल स्वास्थ्य बल्कि अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और कृषि पर भी गंभीर असर डाल रही है।पूरे यूरोप में आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है। सरकारें लगातार नागरिकों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रही हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 11:08:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंदौर में कल से शुरू होगा ब्रिक्स कृषि मंत्रियों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी जानकारी, छोटे किसानों, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल कृषि और नवाचार पर होगा मंथन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/brics-agriculture-ministers-conference-will-start-from-tomorrow-in-indore/article-55243"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-brics-summit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। 9 जून से यहां ब्रिक्स कृषि मंत्रियों और कृषि कार्य समूह की महत्वपूर्ण बैठकों की शुरुआत होगी, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस सम्मेलन की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए इसे वैश्विक कृषि सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी और समय के साथ यह दुनिया के सबसे प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय समूहों में शामिल हो चुका है। वर्तमान में ब्रिक्स के 11 सदस्य देश और 10 साझेदार देश हैं। वैश्विक कृषि पर इसके प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और करीब 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों के पास है। ऐसे में इस मंच पर होने वाले निर्णय और सहयोग का असर विश्व खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत इससे पहले वर्ष 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। वर्ष 2016 में भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच की शुरुआत की गई थी, जिसने सदस्य देशों के बीच कृषि अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को नई दिशा दी। इस बार भी भारत कृषि क्षेत्र में साझा विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल लेकर आगे बढ़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि कार्य समूह के अधिकारियों की अब तक आठ बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में खाद्य सुरक्षा, मत्स्य पालन, पशुपालन, कृषि व्यापार और किसानों की आय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि नीतियों के केंद्र में हमेशा छोटे और सीमांत किसान रहे हैं। इन्हीं किसानों को नई तकनीकों, अनुसंधान, बाजार और कृषि ऋण तक बेहतर पहुंच दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने बताया कि इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य फोकस चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा। इनमें खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका; कृषि व्यापार और सहयोग; जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि और सतत विकास; तथा कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में नवाचार और साझेदारी को मजबूत बनाना शामिल है। उनका कहना था कि कृषि विकास तभी सार्थक होगा जब किसानों की आय बढ़ेगी और उनकी आजीविका अधिक सुरक्षित होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दुनिया भर के किसान बदलते मौसम के प्रभावों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में पुनर्योजी कृषि, टिकाऊ खेती की पद्धतियां और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी आधुनिक तकनीकों को छोटे किसानों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और भविष्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके नेतृत्व को भी मजबूत किया जा रहा है। इसी कड़ी में 12 जून को “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा” विषय पर विशेष मंत्री स्तरीय संवाद आयोजित किया जाएगा। इसमें कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा नई पीढ़ी को कृषि नवाचारों से जोड़ने पर चर्चा होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">तय कार्यक्रम के अनुसार 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें आयोजित होंगी। इसके बाद 12 और 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक होगी। सम्मेलन के दौरान खाद्य हानि को कम करने, पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि नवाचार, किसानों के अधिकार और सतत कृषि विकास जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार विभिन्न देशों के प्रतिनिधि अपने अनुभव और सफल मॉडल भी साझा करेंगे, जिससे सदस्य देशों के बीच सहयोग और मजबूत होगा। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को विशेष बनाने के लिए “ब्रिक्स वाटिका” का भी निर्माण किया जाएगा। इसमें सदस्य देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों की सहभागिता से सामूहिक वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित होगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के प्रति ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक मानी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">विदेशी मेहमानों को भारत की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए विशेष कार्यक्रम भी तैयार किए गए हैं। सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों को इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा, प्रसिद्ध छप्पन दुकान और ऐतिहासिक नगर मांडू का भ्रमण कराया जाएगा। इसके जरिए भारत की समृद्ध संस्कृति, खानपान और विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का प्रयास किया जाएगा। केंद्रीय कृषि मंत्री ने विश्वास जताया कि इंदौर में आयोजित यह सम्मेलन ब्रिक्स देशों के बीच कृषि सहयोग को नई दिशा देगा। साथ ही वैश्विक स्तर पर करोड़ों छोटे किसानों के हितों को मजबूत करने और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इंदौर में होने वाला यह आयोजन न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका को मजबूत करेगा बल्कि कृषि क्षेत्र में साझा विकास और सहयोग के नए अवसर भी पैदा करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:58:35 +0530</pubDate>
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