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                <title>hindu religion - दैनिक जागरण</title>
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                <description>hindu religion RSS Feed</description>
                
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                <title>बुधवार को भगवान गणेश की पूजा कैसे करें? जानें शुभ विधि, मंत्र, भोग और विशेष उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[बुधवार भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा, मंत्र जाप और विशेष उपाय करने से बुद्धि, सुख, समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/puja-recitation/6a43c349ca70e/article-57466"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/wednesday-ganesh-puja.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित माना गया है। बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और मंगलकर्ता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही की जाती है। यदि आप चाहते हैं कि आपके कार्य बिना बाधा के पूरे हों, करियर और व्यापार में सफलता मिले तथा घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे, तो बुधवार के दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा अवश्य करनी चाहिए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बुधवार को ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बुधवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान करके स्वच्छ और हल्के हरे या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर की साफ-सफाई करें और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ जल से पोंछकर लाल या पीले वस्त्र पर स्थापित करें।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजा के दौरान सबसे पहले दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद भगवान गणेश को गंगाजल अर्पित करें। फिर रोली, अक्षत, सिंदूर, दूर्वा घास, लाल फूल और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। गणेश जी को विशेष रूप से दूर्वा घास अत्यंत प्रिय मानी जाती है। मान्यता है कि 21 दूर्वा अर्पित करने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>गणेश मंत्रों का करें जाप</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">पूजा के समय भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार निम्न मंत्रों का जाप कर सकते हैं—</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ॐ गं गणपतये नमः।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">या</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।<br />निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥</strong></p>
<p style="text-align:justify;">यदि समय हो तो गणेश अथर्वशीर्ष, गणेश चालीसा या संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है। इनका नियमित पाठ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भगवान गणेश को क्या भोग लगाएं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भगवान गणेश को मोदक सबसे प्रिय माना गया है। यदि मोदक उपलब्ध न हों तो बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू, गुड़, नारियल, केले या अन्य मिठाइयों का भोग भी लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भोग लगाने के बाद परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद बांटना शुभ माना जाता है। इससे घर में सुख-शांति और सौहार्द बना रहता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बुधवार को करें ये विशेष उपाय</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यदि जीवन में लगातार बाधाएं आ रही हैं या आर्थिक परेशानियां बनी हुई हैं, तो बुधवार को कुछ सरल उपाय भी किए जा सकते हैं।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।</li>
<li>हरे मूंग का दान किसी जरूरतमंद को करें।</li>
<li>गाय को हरा चारा खिलाएं।</li>
<li>विद्यार्थी भगवान गणेश को कलम और पुस्तक अर्पित कर सफलता की प्रार्थना करें।</li>
<li>व्यापार में उन्नति के लिए दुकान या कार्यालय में गणेश जी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।</li>
<li>गरीब या जरूरतमंद बच्चों को फल, मिठाई या स्टेशनरी का दान करें।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">धार्मिक मान्यता है कि इन उपायों से शुभ फल प्राप्त होते हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या करें और क्या न करें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बुधवार के दिन पूजा करते समय मन को शांत रखें और किसी के प्रति क्रोध या कटु वचन बोलने से बचें। पूजा में बासी फूल या खराब भोग का उपयोग नहीं करना चाहिए। भगवान गणेश को तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता, इसलिए पूजा में इसका प्रयोग न करें।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दिन झूठ बोलने, किसी का अपमान करने और अनावश्यक विवाद से बचने की भी सलाह दी जाती है। धार्मिक दृष्टि से संयम, सदाचार और सेवा भाव भगवान गणेश को प्रिय माने गए हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए विशेष महत्व</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बुधवार का दिन विशेष रूप से विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों और नौकरीपेशा लोगों के लिए शुभ माना जाता है। भगवान गणेश बुद्धि और ज्ञान के देवता हैं। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से एकाग्रता बढ़ने और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होने की मान्यता है।</p>
<p style="text-align:justify;">व्यापारियों के लिए भी बुधवार का दिन लाभकारी माना जाता है। नए कार्य की शुरुआत, नए सौदे या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले गणेश जी का स्मरण करना शुभ माना जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बुधवार का आध्यात्मिक संदेश</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भगवान गणेश केवल धन और सफलता के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि विवेक, धैर्य और सकारात्मक सोच का भी संदेश देते हैं। उनकी बड़ी सूंड, विशाल कान और छोटा मुख हमें अधिक सुनने, कम बोलने और सोच-समझकर निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार को भगवान गणेश की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने, मानसिक शांति प्राप्त करने और सुख-समृद्धि बढ़ाने की मान्यता है। नियमित पूजा, मंत्र जाप, दान और अच्छे कर्मों के साथ यदि भगवान गणेश का स्मरण किया जाए, तो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास का संचार होता है। हालांकि, धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं और उनका पालन प्रत्येक व्यक्ति अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 00:00:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>13 जून 2026 का पंचांग: जानिए आज का शुभ मुहूर्त, तिथि और ग्रह-नक्षत्र</title>
                                    <description><![CDATA[शनिवार के दिन बन रहे विशेष ज्योतिषीय संयोग, धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और शुभ शुरुआत से पहले पढ़ें आज का संपूर्ण पंचांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/6a2c050082800/article-55778"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/13-june-2026-panchang.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">13 जून 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार आज ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की तिथि चल रही है और शनिवार होने के कारण शनि देव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व बताया गया है। देशभर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनिवार के दिन मंदिरों में दर्शन और पूजा-पाठ करते हैं। ऐसे में किसी भी शुभ कार्य, यात्रा, खरीदारी या धार्मिक आयोजन से पहले पंचांग की जानकारी लेना काफी उपयोगी माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पंचांग केवल तिथि और वार की जानकारी नहीं देता, बल्कि इसमें ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय भी शामिल होता है। यही कारण है कि कई लोग दिन की शुरुआत पंचांग देखकर करते हैं। आज का दिन आध्यात्मिक गतिविधियों, दान-पुण्य और भगवान की आराधना के लिए अनुकूल माना जा रहा है। शनिवार होने के कारण शनि मंदिरों और हनुमान मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पंचांग के अनुसार आज ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रभाव बना हुआ है। यह तिथि भगवान शिव की उपासना के लिए शुभ मानी जाती है। कई स्थानों पर श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस तिथि पर की गई पूजा से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। साथ ही पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना भी की जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आज के नक्षत्र की बात करें तो इसका प्रभाव दिनभर विभिन्न राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिल सकता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति कई लोगों के लिए नए अवसर लेकर आ सकती है। हालांकि किसी भी बड़े निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित माना जाता है। व्यापार, नौकरी और निवेश से जुड़े मामलों में भी लोग शुभ समय का ध्यान रखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शनिवार का दिन विशेष रूप से शनि देव और भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार आज तिल का दान, सरसों के तेल का दीपक जलाना और हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ फलदायी माना जाता है। कई श्रद्धालु पीपल के वृक्ष की पूजा भी करते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन की बाधाएं कम होती हैं और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आज सूर्योदय के साथ ही पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत की जा सकती है। हालांकि राहुकाल के दौरान शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। पंचांग में राहुकाल, अभिजीत मुहूर्त और अन्य शुभ-अशुभ समय की जानकारी दी जाती है ताकि लोग अपने कार्यों की योजना उसी अनुसार बना सकें। विशेषकर विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे कार्यों में शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक दृष्टि से आज का दिन भगवान शिव और शनि देव दोनों की आराधना के लिए अच्छा माना जा रहा है। कई मंदिरों में विशेष पूजा और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है। सप्ताहांत होने के कारण भी मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ देखी जा सकती है। श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पंचांग का उद्देश्य केवल शुभ-अशुभ समय बताना नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। बदलती जीवनशैली के बावजूद आज भी बड़ी संख्या में लोग पंचांग के आधार पर अपने महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर बड़े शहरों तक पंचांग की उपयोगिता बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">13 जून 2026 का यह शनिवार धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक साधना और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा दिन माना जा रहा है। यदि आप किसी नए कार्य की शुरुआत करने जा रहे हैं या किसी महत्वपूर्ण निर्णय पर विचार कर रहे हैं, तो पंचांग में बताए गए शुभ समय और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति पर ध्यान देना लाभकारी हो सकता है। श्रद्धालुओं के लिए आज का दिन पूजा-पाठ, दान और ईश्वर आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 05:00:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल मंदिर में भव्य भस्म आरती, राजा स्वरूप में हुए बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के 4 बजे खुलने के साथ शुरू हुई भस्म आरती, हजारों श्रद्धालुओं ने किए बाबा महाकाल के दर्शन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/grand-bhasma-aarti-in-mahakal-temple-divine-darshan-of-baba/article-55255"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(6).jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह करीब चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई और बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए देर रात से ही कतारें लगनी शुरू हो गई थीं और जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, श्रद्धालुओं में उत्साह साफ दिखाई दिया।</p>
<p>मंदिर परंपरा के अनुसार सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न हुआ। मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान से भगवान को जल अर्पित किया और फिर दूध, दही, घी, शक्कर तथा विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। पूरे गर्भगृह में वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई दे रही थी। धार्मिक वातावरण के बीच यह अनुष्ठान लंबे समय तक चलता रहा और श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा के साथ इस दृश्य को निहारते रहे।</p>
<p>अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। जटाधारी स्वरूप में विराजमान भगवान महाकाल को चंदन का तिलक लगाया गया और विविध आभूषण अर्पित किए गए। राजा स्वरूप में किए गए इस श्रृंगार को देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रही। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती में श्रृंगार का विशेष महत्व माना जाता है और इसी परंपरा का पालन सोमवार को भी किया गया। गर्भगृह में मौजूद पुजारी और सेवक पूरे विधि-विधान के साथ अनुष्ठानों को संपन्न करते रहे।</p>
<p>भस्म आरती की शुरुआत प्रथम घंटा बजाकर की गई। मंदिर परिसर में घंटों की ध्वनि और मंत्रोच्चार के बीच हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती संपन्न हुई, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह आरती भगवान महाकाल के विशेष पूजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। आरती के दौरान श्रद्धालु लगातार भगवान के जयकारे लगाते रहे और पूरा परिसर शिवमय वातावरण में डूबा दिखाई दिया।</p>
<p>विशेष श्रृंगार के अगले चरण में भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित किया गया। इसके बाद श्रृंगार पूर्ण होने पर ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर पवित्र भस्म अर्पित की गई। यह क्षण भस्म आरती का सबसे प्रमुख और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी विश्वास के कारण देशभर से श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p>भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल को रजत शेषनाग मुकुट पहनाया गया। साथ ही रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं और विभिन्न प्रकार के आभूषण अर्पित किए गए। इसके अलावा मोगरा और गुलाब के सुगंधित फूलों से बाबा महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। फूलों की खुशबू से पूरा गर्भगृह और मंदिर परिसर महक उठा। दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु इस दिव्य स्वरूप को देखकर भावविभोर नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।</p>
<p>पूजन और श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मंदिर परंपराओं के अनुसार प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार के भोग लगाए जाते हैं और सोमवार के दिन विशेष श्रद्धा के साथ यह प्रक्रिया पूरी की गई। पुजारियों ने पूरे विधि-विधान से भोग अर्पित किया और भगवान से विश्व कल्याण की प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भी पूजा-अर्चना में शामिल रहे।</p>
<p>महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और महाकाल मंदिर की भस्म आरती का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का पालन करते हुए अखाड़े के संतों ने भी इस अनुष्ठान में भाग लिया। मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।</p>
<p>सोमवार को आयोजित इस भव्य भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह के समय मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। उज्जैन में स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती देश और दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सोमवार की यह आरती भी उसी आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:59:18 +0530</pubDate>
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