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                <title>Children Health - दैनिक जागरण</title>
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                <title>महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, स्कूलों के 500 मीटर दायरे में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों की सेहत को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय, नियम तोड़ने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई; राज्यभर में खाद्य जांच व्यवस्था भी होगी मजबूत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-decision-of-maharashtra-government-ban-on-sale-of-sting/article-57786"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/maharashtra-government.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित खानपान को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए राज्य के सभी स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में स्थित दुकानों पर <strong>'स्टिंग' (Sting) एनर्जी ड्रिंक</strong> की बिक्री पर रोक लगाने की घोषणा की है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल ने शुक्रवार को विधानसभा में इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार बच्चों में कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के बढ़ते सेवन को लेकर गंभीर है और उनकी सेहत की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है। सरकार जल्द ही इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री नरहरि जिरवाल ने विधानसभा में बताया कि यदि किसी स्कूल परिसर या उसके आसपास के 500 मीटर के दायरे में छात्रों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों अथवा कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक की बिक्री होती पाई जाती है, तो संबंधित दुकानदारों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को ऐसे उत्पादों से दूर रखना है, जिनका अधिक सेवन उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला विधानसभा में उस समय उठा जब विधायक विक्रम पचपुते ने 'स्टिंग' एनर्जी ड्रिंक के सेवन से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर प्रश्न किया। इस दौरान विधायक राहुल कुल और वरुण सरदेसाई ने भी इस विषय पर पूरक प्रश्न पूछे। जवाब देते हुए मंत्री जिरवाल ने कहा कि सरकार ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को स्कूलों के आसपास ऐसे उत्पादों की बिक्री पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने केवल प्रशासनिक अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों, स्कूल प्राचार्यों और जिला परिषदों को भी इस अभियान में भागीदारी निभाने की अपील की है। यदि किसी स्कूल के आसपास प्रतिबंधित या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों की बिक्री होती दिखाई देती है, तो उसकी जानकारी तत्काल खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को देने को कहा गया है। ऐसी शिकायतों पर जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि बच्चों और किशोरों में एनर्जी ड्रिंक का बढ़ता उपयोग चिंता का विषय बनता जा रहा है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कैफीन और अधिक शर्करा वाले पेय पदार्थों का नियमित सेवन बच्चों में नींद की समस्या, बेचैनी, हृदय गति बढ़ने, एकाग्रता में कमी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसी कारण सरकार ने एहतियात के तौर पर स्कूलों के आसपास इनकी बिक्री सीमित करने का निर्णय लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा में मंत्री जिरवाल ने राज्य में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की योजना की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मुंबई, नागपुर और संभाजीनगर में खाद्य एवं दवा परीक्षण की तीन प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इसके अलावा रायगढ़, नासिक, यवतमाल और पुणे में नई प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत राज्य में 22 अतिरिक्त प्रयोगशालाएं विकसित करने की योजना है। इन प्रयोगशालाओं के शुरू होने से खाद्य और पेय पदार्थों के नमूनों की जांच अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से हो सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने विधानसभा में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की जांच से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। मंत्री ने बताया कि अप्रैल 2025 से मई 2026 के बीच स्टिंग एनर्जी ड्रिंक के कुल 27 खाद्य नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए। इनमें से 10 नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए। इसके अलावा अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच विभिन्न ब्रांडों के एनर्जी ड्रिंक्स के कुल 115 नमूनों की जांच की गई। इनमें 63 नमूने मानक गुणवत्ता के पाए गए, जबकि एक नमूना सब-स्टैंडर्ड और छह नमूने मिसब्रांडेड घोषित किए गए। शेष नमूनों की जांच अभी जारी है।  खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में नियमित जांच और सख्त निगरानी आवश्यक है। विशेष रूप से ऐसे उत्पाद, जिनका उपयोग बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर करते हैं, उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं का विस्तार कर रही है, ताकि संदिग्ध उत्पादों की जांच समय पर हो सके और आवश्यक कार्रवाई की जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के इस फैसले को बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शिक्षा संस्थानों के आसपास जंक फूड, तंबाकू उत्पादों और अब कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर नियंत्रण की पहल को स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी सकारात्मक मान रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों में स्वस्थ खानपान की आदत विकसित करने के लिए स्कूल परिसर और उसके आसपास का वातावरण सुरक्षित होना आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:25:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>शिशुकुंज स्कूल मामला: बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद घर-घर पहुंची डॉक्टरों की टीम</title>
                                    <description><![CDATA[लंच के बाद 150 से अधिक छात्रों में दिखे बीमारी के लक्षण, किचन सील; स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की निगरानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/shishu-kunj-school-case-team-of-doctors-reached-door-to/article-56784"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/shishukunj-school-indore.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर के प्रतिष्ठित शिशुकुंज स्कूल में छात्रों की तबीयत बिगड़ने की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। स्कूल में लंच करने के बाद 150 से अधिक बच्चों के बीमार पड़ने के मामले ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। घटना के बाद अब डॉक्टरों की टीमें प्रभावित बच्चों के घर-घर जाकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही हैं। शुरुआती जांच में कई बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण पाए गए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई जा रही है और सभी को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।मामला सामने आने के बाद मंगलवार को स्कूल का माहौल सामान्य दिनों से अलग नजर आया। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों को घर से टिफिन देकर स्कूल भेजा। कई छात्रों ने स्कूल का भोजन लेने के बजाय घर का बना खाना ही खाना उचित समझा। वहीं कुछ अभिभावकों ने एहतियात के तौर पर बच्चों को स्कूल नहीं भेजा, जिसके चलते उपस्थिति भी अपेक्षाकृत कम रही। स्कूल प्रबंधन ने भी अभिभावकों को ई-मेल भेजकर फिलहाल बच्चों के लिए घर से भोजन भेजने का अनुरोध किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पूरा मामला शनिवार को सामने आया था। स्कूल में दोपहर का भोजन करने के कुछ समय बाद कई बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी, कमजोरी, घबराहट और बेचैनी की शिकायत की। धीरे-धीरे प्रभावित बच्चों की संख्या बढ़ने लगी। अभिभावकों को सूचना मिलने के बाद वे बच्चों को अस्पताल और क्लीनिक लेकर पहुंचे। देखते ही देखते यह मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया। प्रभावित छात्रों में बड़ी संख्या चौथी कक्षा तक के बच्चों की बताई जा रही है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल सक्रियता दिखाई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी के निर्देश पर डॉक्टरों की टीम गठित की गई। मंगलवार को टीम ने करीब 30 बच्चों के घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण किया। डॉक्टरों ने बच्चों की स्थिति का आकलन किया और अभिभावकों से बीमारी के लक्षणों तथा वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में अन्य प्रभावित बच्चों के घर भी जाकर जांच की जाएगी ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अधिकांश बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दिए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित भोजन या पानी के सेवन से ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हालांकि बीमारी की वास्तविक वजह का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल डॉक्टर बच्चों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने और स्वास्थ्य पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं। इस घटना के बाद सोमवार को अभिभावकों का गुस्सा भी देखने को मिला। बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंचे और पूरे मामले को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि बच्चों की सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कई अभिभावकों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। सोमवार को दोनों विभागों की संयुक्त टीम ने स्कूल परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। करीब चार घंटे तक चली जांच के दौरान किचन और खाद्य भंडारण व्यवस्था की पड़ताल की गई। निरीक्षण के दौरान कुछ खाद्य सामग्री और मसालों की एक्सपायरी डेट समाप्त होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए स्कूल के किचन को सील कर दिया। जांच दल ने किचन से विभिन्न खाद्य पदार्थों और पेय सामग्री के नमूने भी एकत्र किए हैं। इनमें पनीर, दूध, आइसक्रीम, दाल, तैयार भोजन, मसाले और पानी के नमूने शामिल हैं। कुल 23 नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि विभाग को अब तक कई अभिभावकों की ओर से शिकायतें और जानकारी प्राप्त हुई हैं। स्कूल प्रशासन ने भी अस्वस्थ महसूस करने वाले करीब 85 विद्यार्थियों को एहतियातन घर भेजा था। फिलहाल किसी भी बच्चे को अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता नहीं पड़ी है और सभी की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। अभिभावक, प्रशासन और स्कूल प्रबंधन यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। तब तक स्वास्थ्य विभाग बच्चों की निगरानी जारी रखेगा और एहतियाती कदम उठाता रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 12:17:20 +0530</pubDate>
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                <title>गुना में दूषित पानी पीने से 18 बच्चे बीमार, अस्पताल में भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[टूटी पाइपलाइन से घरों में पहुंचा गंदा पानी, उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत; स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/18-children-admitted-to-hospital-after-drinking-contaminated-water-in/article-55283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/guna-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के गुना शहर में दूषित पेयजल की आपूर्ति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शहर के बूढ़े बालाजी, पुरानी छावनी और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्र में गंदा पानी सप्लाई होने के बाद करीब 18 बच्चे बीमार पड़ गए। सभी बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई स्थानों पर टूटी हुई पाइपलाइनों के कारण पेयजल में गंदगी और दूषित तत्व मिल गए, जिससे यह स्थिति बनी। जानकारी के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने पिछले कुछ दिनों से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत की थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी का रंग भी सामान्य नहीं था, लेकिन शुरुआत में लोगों ने इसे अस्थायी समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया। बाद में जब बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी तो मामला गंभीर हो गया। एक-एक कर कई बच्चों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं सामने आने लगीं। कुछ बच्चों में पीलिया के शुरुआती लक्षण भी दिखाई दिए, जिसके बाद परिजन घबरा गए और उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अस्पताल में भर्ती बच्चों की उम्र 5 से 11 वर्ष के बीच बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश बच्चों में डायरिया और डिहाइड्रेशन की शिकायत थी। लगातार उल्टी और दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो रही थी, जिसके चलते उन्हें तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। राहत की बात यह है कि समय पर उपचार मिलने से सभी बच्चों की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है और किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई गई है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि दूषित पानी पीने से इस तरह के संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं। गर्मी और बारिश के मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण वे जल्दी प्रभावित होते हैं। अस्पताल प्रशासन लगातार बच्चों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जल जीवन मिशन की टीम सक्रिय हो गई। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और लोगों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त पाई गई। माना जा रहा है कि टूटी पाइपलाइन के जरिए नालियों और आसपास जमा गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे पानी दूषित हो गया। प्रशासन ने मुख्य वाटर टैंक और संबंधित पाइपलाइन क्षेत्रों से पानी के नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद पानी की गुणवत्ता और संक्रमण के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। साथ ही जिन स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हैं, वहां मरम्मत कार्य भी शुरू कर दिया गया है ताकि आगे ऐसी स्थिति न बने।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है। निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत की जाती तो बच्चों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होता। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को एहतियात बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, वहां लोग पानी को कम से कम 20 मिनट तक उबालकर ही उपयोग करें। इसके अलावा क्लोरीन टैबलेट का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि उबालने से पानी में मौजूद अधिकांश हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉक्टरों ने अभिभावकों को भी सतर्क रहने को कहा है। यदि बच्चों में उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में देरी करना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों ने ओआरएस घोल और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने की भी सलाह दी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। गुना में सामने आया यह मामला एक बार फिर शहरी जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। पेयजल की गुणवत्ता सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है और छोटी सी लापरवाही भी बड़े संकट का कारण बन सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:04:59 +0530</pubDate>
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