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                <title>Life Imprisonment - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Life Imprisonment RSS Feed</description>
                
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                <title>भोपाल मनुआभान टेकरी केस में दो दोषियों को उम्रकैद सजा</title>
                                    <description><![CDATA[डीएनए रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर अदालत ने सुनाया फैसला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/bhopal-two-convicts-sentenced-to-life-imprisonment-in-manuabhan-tekri/article-56255"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-manubhan-tekri-case.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल के बहुचर्चित मनुआभान टेकरी दुष्कर्म एवं हत्या कांड में सात साल बाद आखिरकार अदालत का फैसला सामने आया है। विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने बुधवार को इस मामले में अविनाश साहू और जस्टिन राज को दोषी करार देते हुए शेष प्राकृतिक जीवन तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों आरोपियों पर 8-8 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह वही मामला है जिसने वर्ष 2019 में पूरे मध्यप्रदेश को झकझोर कर रख दिया था और लंबे समय तक लोगों के बीच गुस्सा और चिंता का माहौल बना रहा था। अदालत का यह फैसला उन परिवारजनों के लिए राहत लेकर आया है जो वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे, हालांकि घटना की भयावहता आज भी लोगों के जहन में ताजा है। यह पूरी घटना 30 अप्रैल 2019 की बताई जाती है, जब भोपाल में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा अपनी 16 वर्षीय बुआ और उसके मित्र अविनाश साहू के साथ मनुआभान टेकरी घूमने गई थी। बताया जाता है कि यह एक सामान्य घूमने-फिरने का दिन था, लेकिन कुछ ही घंटों में हालात पूरी तरह बदल गए। आरोप है कि टेकरी पर ही दोनों आरोपियों ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया और उसके बाद बेहद क्रूर तरीके से पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को करीब 100 फीट गहरी खाई में स्थित एक गुफा में छिपा दिया गया ताकि किसी को इसकी भनक न लग सके। शुरुआती घंटों में यह मामला गुमशुदगी जैसा लगा, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पूरा सच सामने आने लगा और मामला बेहद गंभीर हो गया।</p>
<p>घटना की जानकारी मिलते ही कोहेफिजा थाना पुलिस ने देर रात से ही सर्चिंग अभियान शुरू कर दिया था। अंधेरे, खड़ी चढ़ाई और गहरी खाई के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी मुश्किलें आईं, लेकिन पुलिस लगातार इलाके में तलाश करती रही। इसी दौरान पूछताछ में अविनाश साहू के बयान बार-बार बदलने लगे, जिससे पुलिस को उस पर शक गहरा गया। सख्ती से पूछताछ किए जाने पर उसने कथित तौर पर पूरी वारदात कबूल कर ली। इसके बाद पुलिस टीम ने बताए गए स्थान पर जाकर खाई से छात्रा का शव बरामद किया, जो बुरी तरह क्षत-विक्षत हालत में था। शव मिलने के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश दोनों फैल गए थे और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुटने लगे थे। इसके बाद पुलिस ने इस पूरे मामले में पॉक्सो एक्ट और हत्या सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और जांच को आगे बढ़ाया। मेडिकल रिपोर्ट, डीएनए जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों को केस की सबसे अहम कड़ी बनाया गया। शुरुआती जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने चालान पेश किया। बाद में राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सीबीआई जांच की सिफारिश भी की। लेकिन सीबीआई ने अपने स्तर पर जांच करने के बाद जो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, उसमें दोनों आरोपियों को क्लीन चिट दे दी गई थी। इस रिपोर्ट को लेकर भी काफी सवाल उठे और अदालत ने स्वयं इस पर आपत्ति जताते हुए सीबीआई से स्पष्टीकरण मांगा था, जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया।</p>
<p>लंबी कानूनी प्रक्रिया और कई चरणों की सुनवाई के बाद आखिरकार ट्रायल पूरा हुआ और अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, डीएनए रिपोर्ट और पुलिस जांच को विश्वसनीय मानते हुए दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उपलब्ध सबूतों की श्रृंखला अपराध की पुष्टि करती है और इस तरह की घटनाओं में कठोर सजा जरूरी है ताकि समाज में संदेश जाए। फैसले के दौरान अदालत कक्ष में भी माहौल गंभीर रहा। वहीं, बाहर मौजूद लोगों में भी इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली, लेकिन अधिकतर लोग इसे न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि गंभीर अपराधों की जांच और न्याय प्रक्रिया में इतना लंबा समय क्यों लगता है। पीड़ित परिवार के लिए यह सात साल का इंतजार आसान नहीं रहा, और हर सुनवाई के साथ उम्मीद और दर्द दोनों साथ चलते रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:36:50 +0530</pubDate>
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                <title>बच्चे को ले जाने के विवाद में साले की हत्या, जीजा को उम्रकैद</title>
                                    <description><![CDATA[रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद ने लिया खूनी मोड़, अदालत ने हत्या के दोषी जीजा को सुनाई आजीवन कारावास की सजा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/life-imprisonment-to-brother-in-law-for-murder-of-brother-in-law-in-dispute/article-55304"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raigarh-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p>रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद से जुड़ा एक हत्या का मामला करीब तीन साल बाद अदालत के फैसले के साथ अपने अहम पड़ाव पर पहुंच गया। बच्चे को जबरन अपने साथ ले जाने के दौरान हुए विवाद में बड़े साले की चाकू मारकर हत्या करने वाले आरोपी को न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर अर्थदंड भी लगाया है और मृतक के परिवार को क्षतिपूर्ति राशि दिए जाने की अनुशंसा की है। यह मामला उस समय काफी चर्चा में रहा था क्योंकि घटना परिवार के सदस्यों के सामने हुई थी और विवाद की वजह एक साल का मासूम बच्चा था।</p>
<p>अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना की शुरुआत पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक मतभेदों से हुई थी। ग्राम मुनुंद निवासी दाताराम सारथी की शादी उर्मिला सारथी से हुई थी, लेकिन दोनों के रिश्तों में लगातार तनाव बना हुआ था। बताया गया कि आपसी विवाद के कारण उर्मिला अक्सर अपने मायके ग्राम पत्थलगांव खुर्द में रहती थी। इसी दौरान उसने एक बेटे को जन्म दिया और वह अपने बच्चे के साथ मायके में ही रह रही थी। परिवार के लोगों का कहना था कि पति-पत्नी के बीच संबंध सामान्य नहीं थे और कई बार समझौते की कोशिशें भी हुईं, लेकिन स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। घटना 1 मई 2022 की शाम की है। बताया जाता है कि दाताराम सारथी अपने ससुराल पहुंचा और वहां मौजूद अपने एक साल के बेटे को अपने साथ ले जाने की कोशिश करने लगा। आरोप है कि उसने बच्चे को जबरन अपनी पत्नी से छीन लिया और उसे लेकर जाने लगा। उस समय उर्मिला सारथी, उसकी भाभी और भतीजी ने उसे रोकने की कोशिश की। परिवार की महिलाओं ने काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। बच्चे को लेकर वह मुख्य सड़क की ओर बढ़ गया। इसी बीच परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस बात की जानकारी मिली और माहौल तनावपूर्ण हो गया।</p>
<p>प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जब दाताराम बच्चे को लेकर जा रहा था, तभी उसका बड़ा साला महेश सारथी वहां पहुंचा। महेश ने उसे रोकने का प्रयास किया और बच्चे को जबरन ले जाने का विरोध किया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। बताया जा रहा है कि कुछ ही मिनटों में बहस इतनी तीखी हो गई कि मामला हिंसक रूप ले बैठा। आरोप है कि गुस्से में आकर दाताराम ने अपने पास मौजूद चाकू निकाल लिया और महेश सारथी पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। चाकू के वार महेश के पेट, पीठ और गर्दन पर किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना इतनी अचानक हुई कि वहां मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही महेश जमीन पर गिर पड़ा। उसकी पत्नी, बहन और बेटी के सामने यह पूरा घटनाक्रम हुआ। परिवार के सदस्यों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा और घर में मातम का माहौल बन गया।</p>
<p>घटना के बाद मृतक की पत्नी कुसुम सारथी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए, गवाहों के बयान दर्ज किए गए और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जांच में महत्वपूर्ण साबित हुए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी दाताराम सारथी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखा। सुनवाई पूरी होने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने आरोपी को हत्या का दोषी पाया। न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोपी की संलिप्तता को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। इसके आधार पर अदालत ने दाताराम सारथी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया।</p>
<p>फैसले के साथ ही न्यायालय ने मृतक के परिवार की स्थिति को देखते हुए महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए। अदालत ने मृतक के आश्रितों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायगढ़ के माध्यम से एक लाख रुपए की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने की अनुशंसा की है।  यह राशि परिवार को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से दी जाती है, हालांकि किसी परिजन की मृत्यु से हुई क्षति की भरपाई संभव नहीं होती। इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया कि पारिवारिक विवाद और रिश्तों में बढ़ता तनाव कभी-कभी बेहद दुखद परिणाम लेकर आ सकता है। एक बच्चे को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हत्या जैसे गंभीर अपराध में बदल गया और अंततः एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया, जबकि दूसरे परिवार का व्यक्ति आजीवन कारावास की सजा तक पहुंच गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:44:03 +0530</pubDate>
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