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                <title>Market News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Market News RSS Feed</description>
                
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                <title>प्याज-टमाटर की महंगाई से बढ़ा रसोई का खर्च, जून में वेज और नॉनवेज थाली हुई महंगी</title>
                                    <description><![CDATA[टमाटर, प्याज, खाद्य तेल और एलपीजी के बढ़ते दामों ने बढ़ाई थाली की लागत, मौसम की मार से दालों के और महंगे होने की आशंका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a4f5123bca60/article-58278"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gold-price-today-(11).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देशभर में आम लोगों की रसोई पर महंगाई का असर लगातार गहराता जा रहा है। जून 2026 के दौरान घर में तैयार होने वाली वेज और नॉनवेज दोनों तरह की थाली पहले के मुकाबले महंगी हो गई हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह टमाटर, प्याज, खाद्य तेल और एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतें हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक जून महीने में एक औसत वेज थाली की लागत सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़कर 28.4 रुपये हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में इसकी कीमत 28.1 रुपये थी। वहीं नॉनवेज थाली की कीमत में भी 6 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते आने वाले महीनों में दालों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल सकती है, जिससे घरेलू बजट पर और दबाव बढ़ने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्रिसिल की 'राइस रोटी रेट (RRR)' रिपोर्ट में बताया गया है कि सब्जियों और रसोई से जुड़े जरूरी सामानों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने थाली की लागत बढ़ा दी है। खासतौर पर टमाटर और प्याज की कीमतों में आई तेजी का सीधा असर हर घर की रसोई पर पड़ा है। इसके अलावा खाद्य तेल और एलपीजी सिलेंडर महंगे होने से खाना बनाने की कुल लागत भी बढ़ गई है। दूसरी ओर, पहले आलू की कीमतों में आई गिरावट से जो राहत मिली थी, उसका असर अब लगभग खत्म हो चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर मई 2026 और जून 2026 की तुलना करें तो भी महंगाई का असर साफ दिखाई देता है। एक महीने के भीतर वेज थाली की कीमत में 4 प्रतिशत और नॉनवेज थाली की लागत में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान टमाटर के दाम 17 प्रतिशत, प्याज के दाम 8 प्रतिशत और आलू के दाम 5 प्रतिशत बढ़े हैं। सब्जियों की कीमतों में इस बढ़ोतरी ने घरेलू खर्च को प्रभावित किया है। वहीं पोल्ट्री सेक्टर में सप्लाई कम होने से ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में भी लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर भी भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर पुशन शर्मा के अनुसार मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका असर खाद्य तेल और एलपीजी की कीमतों पर पड़ा है। सालाना आधार पर दोनों की कीमतों में लगभग 10-10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यही वजह है कि घरेलू रसोई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सब्जियों की बात करें तो टमाटर सबसे अधिक महंगा हुआ है। जून 2025 में टमाटर जहां करीब 32 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वहीं जून 2026 में इसकी कीमत बढ़कर 42 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। यानी एक साल में टमाटर करीब 31 प्रतिशत महंगा हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि फरवरी और मार्च के दौरान अधिक तापमान रहने के कारण गर्मियों की फसल की बुआई और रोपाई प्रभावित हुई, जिससे उत्पादन कम हुआ और कीमतें बढ़ गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्याज की कीमतों में भी सालाना आधार पर लगभग 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि नई रबी फसल की आवक से बाजार में कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सीमित सप्लाई के कारण कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। दूसरी ओर आलू की नई फसल आने से इसकी कीमतों में लगभग 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे थाली की लागत को कुछ हद तक नियंत्रित रखने में मदद मिली, लेकिन अन्य खाद्य पदार्थों की महंगाई के कारण कुल खर्च फिर भी बढ़ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">नॉनवेज थाली की लागत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह चिकन की कीमतों में आया उछाल है। रिपोर्ट के अनुसार नॉनवेज थाली की कुल लागत में ब्रॉयलर चिकन का हिस्सा करीब 50 प्रतिशत होता है। जून महीने में भीषण गर्मी के कारण पोल्ट्री फार्मों में पक्षियों की मृत्यु दर बढ़ गई। कई पक्षियों का वजन भी कम हो गया और नए चूजों को पालने की रफ्तार धीमी पड़ गई। इसका सीधा असर सप्लाई पर पड़ा और बाजार में चिकन महंगा हो गया। सालाना आधार पर ब्रॉयलर की कीमतों में लगभग 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में दालों की कीमतें भी आम लोगों की चिंता बढ़ा सकती हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि उड़द और मूंग का शुरुआती स्टॉक पहले से ही कम है। इसके अलावा कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण दालों की फसल को नुकसान पहुंचा है। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है और कीमतों में आगे भी तेजी बनी रह सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:13:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>चांदी और सोने के दाम में तेज उछाल, बाजार में हलचल बढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[22 जून को सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी तेजी दर्ज की गई, चांदी ₹2.37 लाख प्रति किलो और सोना ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंचा, जिससे बाजार में फिर से अस्थिरता देखने को मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sharp-rise-in-the-prices-of-silver-and-gold-increased/article-56647"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gold-price-today-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">22 जून को सोने-चांदी के दामों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार चांदी की कीमत में एक ही दिन में ₹5,826 की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद एक किलो चांदी का भाव ₹2.37 लाख तक पहुंच गया है। वहीं सोने की कीमत में भी तेजी रही और 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1,694 बढ़कर ₹1.46 लाख पर पहुंच गया। बाजार में इस अचानक आई तेजी ने निवेशकों और ज्वेलरी कारोबारियों दोनों को सतर्क कर दिया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी का भाव करीब ₹2.32 लाख प्रति किलो था, लेकिन ताजा बढ़ोतरी के बाद इसमें एक बार फिर बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। इसी तरह सोने की कीमत भी एक दिन पहले के मुकाबले बढ़ी है, जहां 24 कैरेट सोना पहले लगभग ₹1.44 लाख के आसपास था, वहीं अब यह ₹1.46 लाख के करीब पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों और डॉलर में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय सर्राफा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि, अभी भी बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और आने वाले दिनों में कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस साल की शुरुआत से ही सोने और चांदी की कीमतों में लगातार अस्थिरता देखने को मिल रही है। 31 दिसंबर 2025 को सोने की कीमत लगभग ₹1.33 लाख थी, जो जनवरी के अंत में बढ़कर ₹1.76 लाख के स्तर तक पहुंच गई थी। इसके बाद से अब तक इसमें लगभग ₹30 हजार की गिरावट देखी गई है। इसी तरह चांदी की बात करें तो 31 दिसंबर 2025 को इसका भाव करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो था, जो जनवरी में बढ़कर ₹3.86 लाख के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। उसके बाद से इसमें लगभग ₹1.49 लाख की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन हाल के दिनों में फिर से इसमें तेजी देखी जा रही है। वैश्विक आर्थिक स्थिति, ब्याज दरों में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग और आपूर्ति का सीधा असर भारत के सर्राफा बाजार पर पड़ रहा है। खासकर चांदी की कीमतों में जो तेजी देखी जा रही है, वह औद्योगिक मांग और निवेश के बढ़ते रुझान का परिणाम मानी जा रही है। वहीं सोने को अब भी सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जिसके कारण इसकी मांग बनी रहती है। हालांकि कीमतों में अचानक बदलाव से आम खरीदार और निवेशक दोनों ही असमंजस में हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोना खरीदते समय हमेशा हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदना चाहिए, जिसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) प्रमाणित करता है। हॉलमार्क से यह पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है और उसकी शुद्धता कितनी है। इसके अलावा खरीदने से पहले अलग-अलग स्रोतों से कीमतों की तुलना करना भी जरूरी माना गया है, ताकि सही भाव पर खरीदारी हो सके। बाजार में 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के दाम अलग-अलग होते हैं, इसलिए ग्राहक को सतर्क रहना जरूरी है। चांदी की शुद्धता पहचानने के लिए भी कई पारंपरिक तरीके बताए जाते हैं। इनमें मैग्नेट टेस्ट सबसे आम है, जिसमें असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती। इसके अलावा आइस टेस्ट में असली चांदी पर बर्फ जल्दी पिघलती है। स्मेल टेस्ट में असली चांदी से कोई गंध नहीं आती, जबकि नकली चांदी में कॉपर जैसी गंध महसूस हो सकती है। वहीं क्लॉथ टेस्ट में सफेद कपड़े से रगड़ने पर अगर काला निशान आता है तो उसे असली माना जाता है। इन घरेलू तरीकों के साथ-साथ प्रमाणित जांच भी जरूरी है। सोने और चांदी के दामों में लगातार हो रहा बदलाव बाजार को अस्थिर बनाए हुए है। निवेशक जहां एक ओर मुनाफे की संभावना देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर तेजी से बदलते दाम चिंता का कारण भी बन रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:10:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 77,100 के करीब</title>
                                    <description><![CDATA[निफ्टी भी 100 अंक चढ़ा, IT और कंज्यूमर शेयरों में खरीदारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/stock-market-rises-sensex-nears-77100/article-56157"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">17 जून को शेयर बाजार में एक बार फिर तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार से ही शेयर बाजार में मजबूती का रुख बना रहा और निवेशकों की खरीदारी के चलते सेंसेक्स करीब 300 अंक की बढ़त के साथ 77,100 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी भी लगभग 100 अंक चढ़कर 24,050 के पास पहुंच गया। बाजार में खासतौर पर IT और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे पूरे इंडेक्स को सपोर्ट मिला। शुरुआती घंटे में ही कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में हल्की-हल्की तेजी दिखी और धीरे-धीरे यह रफ्तार पूरे बाजार में फैल गई। दिन के दौरान शेयर बाजार की चाल थोड़ी उतार-चढ़ाव भरी भी रही, लेकिन कुल मिलाकर रुझान सकारात्मक ही रहा। वैश्विक संकेतों में मिली-जुली स्थिति के बावजूद घरेलू स्तर पर निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। एशियाई बाजारों में भी आज मिश्रित कारोबार देखने को मिला, जहां साउथ कोरिया का कोस्पी हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, वहीं जापान का निक्केई इंडेक्स अच्छी तेजी में रहा। दूसरी ओर हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग दबाव में नजर आया और वहां गिरावट दर्ज की गई। इस तरह वैश्विक बाजारों से मिले संकेतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर सीमित ही रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान भी मिला-जुला रुख देखने को मिला था। डाउ जोन्स में बढ़त दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक और S&amp;P 500 दबाव में रहे। टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट का असर अमेरिकी इंडेक्स पर साफ दिखाई दिया। इसका असर एशियाई और उभरते बाजारों की धारणा पर भी पड़ा है। इसी बीच विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर डालें तो पिछले कुछ दिनों में लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, बीते सात दिनों में FIIs ने करीब 3,618 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। वहीं 30 दिन की अवधि में भी भारी निकासी देखने को मिली है। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DIIs लगातार बाजार को सपोर्ट कर रहे हैं और उन्होंने इसी अवधि में खरीदारी बनाए रखी है। बाजार में मौजूदा तेजी के पीछे चुनिंदा सेक्टरों की मजबूत खरीदारी और घरेलू फंड्स का सपोर्ट अहम कारण है। खासकर IT सेक्टर में हाल के दिनों में विदेशी ऑर्डर्स और बेहतर आउटलुक की वजह से निवेशकों की रुचि बढ़ी है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी ग्रामीण और शहरी मांग में सुधार की उम्मीदों ने खरीदारी को बढ़ावा दिया है। हालांकि FII की बिकवाली एक चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन घरेलू निवेशक फिलहाल इस दबाव को संतुलित करने में सफल दिख रहे हैं। कल यानी 16 जून को भी शेयर बाजार में अच्छी तेजी दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 544 अंक की छलांग लगाकर 76,808 के स्तर पर बंद हुआ था और निफ्टी 135 अंक बढ़कर 23,989 पर बंद हुआ था। लगातार दो सत्रों से मिल रही इस तेजी ने निवेशकों की धारणा को मजबूत किया है, हालांकि विशेषज्ञ अभी भी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि वैश्विक संकेत और FII फ्लो में उतार-चढ़ाव आगे भी बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:34:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सेंसेक्स 350 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,900 के पार, FMCG और IT शेयरों में तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[बाजार में मजबूती का रुख, वोलैटिलिटी घटी, मेटल शेयरों की कमजोरी ने बढ़त को सीमित किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-350-points-nifty-crosses-23900-rise-in-fmcg/article-56048"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex-today-(3).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार सुबह कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ देखने को मिली और जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बाजार में सकारात्मक रुझान और साफ होता गया। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स करीब 354.54 अंक की बढ़त के साथ 76,618.87 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी 84.80 अंक चढ़कर 23,938.70 के आसपास पहुंच गया। बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से FMCG, आईटी और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में खरीदारी के चलते देखने को मिली। वहीं दूसरी तरफ बाजार में अस्थिरता को मापने वाला India VIX भी 5 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर लगभग 13.6 के स्तर पर आ गया, जिससे निवेशकों के बीच जोखिम लेने की भावना थोड़ी मजबूत होती दिखी। कुल मिलाकर बाजार की चौड़ाई भी सकारात्मक रही, जहां लगभग 2,030 शेयरों में बढ़त और 1,604 में गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती संकेतों से ही यह साफ था कि बाजार में खरीदारी का माहौल बना हुआ है, हालांकि मेटल सेक्टर की कमजोरी ने इस तेजी को पूरी तरह खुलकर आगे नहीं बढ़ने दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">दिन के कारोबार में कुछ खास शेयरों ने निवेशकों का ध्यान खींचा। खासतौर पर Sonata Software में जबरदस्त तेजी देखी गई, जहां शेयर करीब 14.80 प्रतिशत उछलकर 299.05 रुपये के आसपास पहुंच गया। इस शेयर में ट्रेडिंग वॉल्यूम भी सामान्य से कई गुना ज्यादा रहा, जिससे यह साफ संकेत मिला कि इसमें अचानक भारी खरीदारी आई है। वहीं दूसरी ओर मेटल सेक्टर में कमजोरी का दबाव साफ नजर आया। Hindalco Industries निफ्टी के लिए सबसे बड़ा दबाव बनाने वाले शेयरों में रहा, जबकि JSW Steel और Tata Steel जैसे दिग्गज स्टॉक्स भी गिरावट में रहे। इसी तरह NALCO में भी तेज गिरावट देखी गई और यह मिडकैप इंडेक्स का सबसे बड़ा लूज़र बनकर उभरा, जहां यह 5 प्रतिशत से अधिक टूट गया। इसके अलावा Ola Electric, Paytm और Kalyan Jewellers जैसे शेयरों में भी कमजोरी देखी गई, जिससे मिडकैप स्पेस में मिला-जुला रुख बना रहा। हालांकि दूसरी तरफ Suzlon Energy ने 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज कर निवेशकों को आकर्षित किया, वहीं Schaeffler India और Kaynes Technology जैसे शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली। बाजार के कुल रुझान की बात करें तो फिलहाल निवेशकों का मूड सतर्क लेकिन सकारात्मक बना हुआ है। FMCG और IT जैसे डिफेंसिव और ग्रोथ सेक्टर में लगातार खरीदारी से बाजार को सपोर्ट मिल रहा है, जबकि ग्लोबल संकेतों और सेक्टरल दबाव के चलते कुछ हिस्सों में मुनाफावसूली भी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वोलैटिलिटी में आई गिरावट से निकट भविष्य में बाजार में स्थिरता बढ़ सकती है, लेकिन मेटल और बैंकिंग सेक्टर की चाल आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। SBI और Axis Bank जैसे बड़े बैंकिंग स्टॉक्स में कमजोरी ने भी इंडेक्स की बढ़त को सीमित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:58:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम, आईटी और एफएमसीजी शेयरों में खरीदारी से बाजार मजबूत; रुपया कमजोर हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-400-points-in-indian-stock-market-amid-iran/article-55497"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indian-stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार ने 10 जून 2026 को वैश्विक तनावों के बीच भी मजबूती दिखाई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला, लेकिन भारतीय निवेशकों ने फिलहाल घबराहट नहीं दिखाई। बुधवार सुबह कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स करीब 400 अंकों की बढ़त के साथ 74,300 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 100 अंक चढ़कर 23,350 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला।</p>
<p>वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव पर बनी हुई है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी हेलीकॉप्टर गिराए जाने की घटना के जवाब में उठाया गया कदम बताया। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं, लेकिन भारतीय बाजार में इसका असर सीमित दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण ने बाजार को संभाले रखा।</p>
<p>तेल बाजार पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल बड़ा उछाल नहीं देखा गया। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 91.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा। तेल की कीमतों में स्थिरता भारतीय बाजार के लिए राहत की बात मानी जा रही है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। यदि तेल की कीमतों में तेज उछाल आता तो इसका असर महंगाई और कॉर्पोरेट मुनाफे दोनों पर पड़ सकता था। फिलहाल तेल बाजार की स्थिरता ने निवेशकों को कुछ राहत दी है।</p>
<p>हालांकि एशियाई बाजारों का रुख भारतीय बाजार से अलग दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लगभग 3.77 प्रतिशत टूट गया, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। एशियाई निवेशकों में भू-राजनीतिक तनाव को लेकर चिंता साफ दिखाई दी। इसके मुकाबले भारतीय बाजार में खरीदारी का माहौल यह संकेत देता है कि घरेलू निवेशक फिलहाल वैश्विक जोखिमों से ज्यादा स्थानीय आर्थिक संकेतकों पर ध्यान दे रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी शेयर बाजारों का प्रदर्शन भी मिश्रित रहा। डाउ जोंस में मामूली बढ़त दर्ज की गई, लेकिन नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक दबाव में रहे। तकनीकी शेयरों में बिकवाली और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी बाजारों में निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। इसके बावजूद भारतीय बाजार में सकारात्मक शुरुआत ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा अभी बरकरार है।</p>
<p>विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 9 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 4,566 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। पिछले सात और तीस दिनों के आंकड़े भी विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी है। घरेलू निवेशकों की मजबूत हिस्सेदारी ही बाजार को गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि घरेलू निवेशकों का समर्थन इसी तरह बना रहा तो विदेशी बिकवाली का असर सीमित रह सकता है।</p>
<p>मुद्रा बाजार में हालांकि दबाव देखने को मिला। बुधवार सुबह शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे कमजोर होकर 95.56 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की निकासी का असर भारतीय मुद्रा पर दिखाई दिया। कमजोर रुपया आयात लागत बढ़ा सकता है, लेकिन निर्यातकों के लिए यह कुछ राहत भी लेकर आता है।</p>
<p>बाजार को मजबूती मिलने की एक वजह मंगलवार का सकारात्मक कारोबार भी माना जा रहा है। 9 जून को सेंसेक्स लगभग 395 अंक चढ़कर 73,918.76 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 23,242.10 के स्तर पर पहुंच गया था। उस तेजी का असर बुधवार के कारोबार में भी दिखाई दिया। निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी। यदि वैश्विक तनाव और नहीं बढ़ता है तो भारतीय बाजार अपनी मजबूती बनाए रख सकता है, हालांकि आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 13:25:18 +0530</pubDate>
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                <title>सेंसेक्स में 100 अंक की तेजी, निफ्टी भी मजबूत कारोबार</title>
                                    <description><![CDATA[9 जून को शेयर बाजार में हल्की तेजी, ऑटो-रियल्टी शेयरों में खरीदारी से सेंटीमेंट मजबूत, वैश्विक संकेत मिले-जुले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-up-100-points-nifty-also-strong-business/article-55369"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/untitled-design-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">शेयर बाजार तेजी के साथ 9 जून के कारोबार की शुरुआत हुई और शुरुआती मिनटों से ही बाजार में हल्का सकारात्मक माहौल देखने को मिला। सेंसेक्स करीब 100 अंक की तेजी के साथ 73,700 के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी भी लगभग 50 अंक की बढ़त के साथ 23,200 के स्तर तक पहुंच गया। सुबह के सत्र में ही निवेशकों का रुख थोड़ा बेहतर नजर आया और कई सेक्टरों में खरीदारी बढ़ी। खासकर ऑटो और रियल्टी सेक्टर में लगातार खरीदारी से बाजार को सपोर्ट मिला। शुरुआती ट्रेड में ऐसा लगा कि पिछले सत्र की गिरावट के बाद बाजार धीरे-धीरे रिकवरी की तरफ बढ़ रहा है, हालांकि उतार-चढ़ाव भी बना रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के सत्र में शेयर बाजार तेजी का माहौल देखने को मिला, लेकिन यह पूरी तरह एकतरफा नहीं था। ग्लोबल संकेतों का असर भी साफ नजर आया। एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला, जहां दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ, वहीं हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग दबाव में रहा। जापान का निक्केई इंडेक्स भी सकारात्मक दायरे में रहा और निवेशकों को कुछ राहत दी। वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले सत्र में मिश्रित रुख रहा था—नैस्डैक और S&amp;P 500 में बढ़त देखने को मिली, जबकि डाउ जोन्स थोड़ा कमजोर बंद हुआ। इन वैश्विक संकेतों का सीधा असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर भी दिखाई दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी आज बाजार की दिशा तय करने में अहम रहीं। 8 जून के आंकड़ों के मुताबिक एफआईआई ने करीब 5,556 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने इस दौरान 5,165 करोड़ रुपये की खरीदारी कर कुछ संतुलन बनाने की कोशिश की। पिछले कुछ दिनों के आंकड़े देखें तो एफआईआई लगातार नेट सेलर बने हुए हैं, जबकि डीआईआई बाजार को सहारा दे रहे हैं। इससे साफ है कि घरेलू निवेशकों की भागीदारी अभी भी बाजार को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौर करने वाली बात यह भी है कि इससे पहले 8 जून को बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। सेंसेक्स 719 अंक टूटकर 73,524 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी में भी करीब 244 अंकों की गिरावट देखने को मिली थी और यह 23,123 के स्तर पर बंद हुआ था। उस गिरावट के बाद आज की हल्की तेजी को बाजार में एक तकनीकी रिकवरी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, जब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर पूरी तरह रोक नहीं लगती, तब तक बाजार में स्थिरता पूरी तरह नहीं आ सकती।</p>
<p style="text-align:justify;">सेक्टरल फ्रंट पर आज ऑटो और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा हलचल देखने को मिली। ऑटो सेक्टर में मांग और भविष्य की बिक्री को लेकर उम्मीदें बनी हुई हैं, वहीं रियल्टी सेक्टर में भी खरीदारी का रुझान जारी है। बैंकिंग और आईटी सेक्टर में हल्की सुस्ती देखी गई, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का मूड सकारात्मक बना रहा। कारोबार के बीच कई स्टॉक्स में दिनभर उतार-चढ़ाव चलता रहा, जिससे ट्रेडर्स के लिए माहौल थोड़ा सतर्क बना रहा। मौजूदा समय में बाजार एक सीमित दायरे में घूम रहा है, जहां वैश्विक संकेत, एफआईआई की चाल और घरेलू निवेशकों की खरीदारी मिलकर दिशा तय कर रहे हैं। आने वाले सत्रों में अगर विदेशी बिकवाली कम होती है और घरेलू खरीदारी बनी रहती है तो बाजार में और मजबूती देखी जा सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 11:13:48 +0530</pubDate>
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