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                <title>Petroleum Ministry - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Petroleum Ministry RSS Feed</description>
                
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                <title>LNG सप्लाई फिर हुई सामान्य, सरकार ने हटाए सभी आपातकालीन प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से शिपमेंट बहाल होने के बाद केंद्र का बड़ा फैसला, उद्योगों को मिलेगी राहत और गैस आपूर्ति होगी सुचारु]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/lng-supply-normal-again-government-removed-all-emergency-restrictions/article-57903"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lng-supply-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति एक बार फिर सामान्य हो गई है। केंद्र सरकार ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चले सैन्य संघर्ष के दौरान लागू किए गए ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद देश के औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि एलएनजी का सबसे अधिक उपयोग उद्योगों, बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण और कई अन्य औद्योगिक गतिविधियों में किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गैस एवं तेल के जहाजों की आवाजाही सामान्य होने के बाद आपातकालीन प्रतिबंधों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में गैस की आपूर्ति स्थिर है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से भारत के लिए एलएनजी कार्गो फिर से नियमित रूप से पहुंच रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के चलते फरवरी के अंत में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई थी। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई होती है। हालात बिगड़ने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत आने वाले एलएनजी कार्गो को रोक दिया था या उन्हें अन्य देशों की ओर मोड़ दिया था। इस संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ लागू किया था। इसका उद्देश्य सीमित उपलब्ध गैस का प्राथमिकता के आधार पर वितरण सुनिश्चित करना और आवश्यक क्षेत्रों में आपूर्ति बनाए रखना था।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी सप्लाई से जुड़े प्रतिबंध हटाना सरकार का तीसरा बड़ा निर्णय माना जा रहा है। इससे पहले सरकार ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने के बाद दो अन्य आपातकालीन फैसले भी वापस ले चुकी है। पहले फैसले के तहत तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया था कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन अधिक करें ताकि घरेलू जरूरतें पूरी की जा सकें। अब इस निर्देश को समाप्त कर दिया गया है। दूसरे फैसले में बल्क उपभोक्ताओं को डीजल की बिक्री पर लगाई गई सीमा भी समाप्त कर दी गई है। सरकार का कहना है कि अब ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है और किसी प्रकार की अतिरिक्त पाबंदी की आवश्यकता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने का सबसे बड़ा लाभ औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा। देश में कई उद्योग प्राकृतिक गैस पर आधारित उत्पादन प्रणाली का उपयोग करते हैं। गैस की कमी के दौरान कई कंपनियों को उत्पादन लागत बढ़ने, वैकल्पिक ईंधन अपनाने और उत्पादन घटाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। अब नियमित आपूर्ति बहाल होने से उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और कई उद्योगों का संचालन पहले की तरह सुचारु रूप से हो सकेगा। इससे बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, स्टील, सिरेमिक, कांच, टेक्सटाइल और अन्य गैस आधारित उद्योगों को राहत मिलने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी रास्ते से खाड़ी देशों का अधिकांश तेल और गैस दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। देश अपनी आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस विदेशों से खरीदता है। इनमें से बड़ी मात्रा पश्चिम एशिया के देशों से आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40 से 45 प्रतिशत और एलएनजी आयात का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। विशेष रूप से कतर से आने वाली एलएनजी का अधिकांश परिवहन स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते ही होता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक कदम उठाए थे। विभिन्न देशों से ईंधन आयात के विकल्प तलाशे गए, घरेलू भंडार का उपयोग किया गया और आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण किया गया। एलएनजी आपूर्ति सामान्य होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी स्थिरता आने की उम्मीद है। उद्योगों के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यवसायों को भी इसका लाभ मिलेगा। इससे गैस की उपलब्धता बेहतर होगी और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:53:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पेट्रोल-डीजल खरीद पर सभी पाबंदियां खत्म, 1 जुलाई से रीटेल पंपों से मिलेगी पूरी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[1 जुलाई से कॉमर्शियल खरीदार भी रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे, 200 लीटर प्रतिदिन की सीमा भी समाप्त होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/all-restrictions-on-purchase-of-petrol-and-diesel-ended-complete/article-57373"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/petrol-or-diesel.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद पर लागू सभी आपातकालीन पाबंदियों को 1 जुलाई 2026 से हटाने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद अब कॉमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ता भी सामान्य ग्राहकों की तरह रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे। इसके साथ ही एक वाहन में एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा भी समाप्त कर दी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 29 जून को नया आदेश जारी करते हुए पहले लगाए गए प्रतिबंध वापस ले लिए। मंत्रालय का कहना है कि देश में ईंधन की आपूर्ति अब सामान्य हो चुकी है, इसलिए इन प्रतिबंधों को जारी रखने की आवश्यकता नहीं रही। सरकार ने 11 जून को पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर पैदा हुई चिंता के बीच कई अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे। उस समय वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण ईंधन की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई थी। हालात को देखते हुए सरकार ने जमाखोरी, कालाबाजारी और ईंधन के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की थी। इन नियमों के तहत बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं, फैक्ट्रियों, टेलीकॉम कंपनियों और अन्य कमर्शियल खरीदारों को रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं थी। उन्हें केवल बल्क सेल प्वाइंट्स या अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों से ही ईंधन लेना पड़ता था। प्रतिबंधों के दौरान आम वाहनों और ट्रकों के लिए भी एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा तय की गई थी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी क्षेत्र में ईंधन की कृत्रिम कमी पैदा न हो और सभी उपभोक्ताओं तक समान रूप से आपूर्ति बनी रहे। हालांकि पिछले कुछ दिनों में सप्लाई की स्थिति में लगातार सुधार दर्ज किया गया है। मंत्रालय के अनुसार देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई भी पहले की तुलना में सामान्य हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ सप्ताह के दौरान रीटेल और थोक बाजार में डीजल की कीमतों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला था। उदाहरण के तौर पर, रीटेल पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत काफी कम थी, जबकि थोक खरीदारों के लिए इसकी कीमत कहीं अधिक पड़ रही थी। इसी कारण कई ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां, बस ऑपरेटर और टेलीकॉम कंपनियां सीधे रीटेल पंपों से ईंधन खरीदने लगी थीं। इससे कुछ क्षेत्रों में मांग अचानक बढ़ गई और सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव बनने लगा। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने अस्थायी प्रतिबंध लागू किए थे। सरकार का कहना है कि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति पहले की तुलना में स्थिर हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और समुद्री मार्गों से तेल की आपूर्ति सामान्य होने के कारण भारत को कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति मिलने लगी है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जरिए होने वाली ऑयल शिपमेंट्स फिर से सुचारु होने से घरेलू स्तर पर स्टॉक मजबूत हुआ है। इसी समीक्षा के बाद मंत्रालय ने प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस निर्णय का सबसे बड़ा फायदा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलने की उम्मीद है। पहले ट्रक ऑपरेटरों और बस कंपनियों को निर्धारित सीमा के कारण कई बार अलग-अलग पेट्रोल पंपों से डीजल लेना पड़ता था, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे। अब यह परेशानी खत्म हो जाएगी। इसी तरह निर्माण कार्यों, औद्योगिक इकाइयों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी कंपनियों को भी ईंधन की उपलब्धता पहले की तरह आसान हो जाएगी। प्रतिबंध हटने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी और ईंधन की खरीद की प्रक्रिया सामान्य होगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू सप्लाई की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखेगी। यदि भविष्य में किसी तरह की आपूर्ति संबंधी चुनौती सामने आती है तो आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की चिंता की बात नहीं बताई गई है। 1 जुलाई से लागू होने वाले इस फैसले के बाद आम उपभोक्ताओं और बड़े व्यावसायिक खरीदारों दोनों को राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रतिबंध जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बचा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:20:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>कॉमर्शियल LPG सप्लाई पर लगी पाबंदियां हटीं, अब 100% गैस उपलब्ध कराएगी सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[एलपीजी आपूर्ति में सुधार के बाद केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, उद्योगों के लिए बल्क सप्लाई भी आंशिक रूप से बहाल, घरेलू उपलब्धता बनाए रखने पर रहेगा जोर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/restrictions-on-commercial-lpg-supply-lifted-now-government-will-provide/article-56982"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/commercial-lpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने एलपीजी आपूर्ति को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए कॉमर्शियल LPG सिलेंडरों पर लगी सभी सेक्टर आधारित पाबंदियां हटा दी हैं। इसके साथ ही राज्यों को पहले की तरह 100 फीसदी कॉमर्शियल गैस सप्लाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। गैस संकट के दौरान होटलों, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सीमित मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही थी, लेकिन अब हालात में सुधार के बाद यह व्यवस्था सामान्य की जा रही है। सरकार के इस फैसले से व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि देश में एलपीजी की उपलब्धता पहले की तुलना में बेहतर हुई है। घरेलू उत्पादन बढ़ने और विदेशों से आयातित एलपीजी कार्गो के आने की संभावना को देखते हुए कॉमर्शियल सप्लाई पर लगी सभी सीमाएं समाप्त कर दी गई हैं। इसके अलावा, गैस संकट की शुरुआत में पूरी तरह रोक दी गई बल्क एलपीजी सप्लाई को भी आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है। अब बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को संकट से पहले की खपत के स्तर का 50 प्रतिशत तक बल्क एलपीजी उपलब्ध कराया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार का मानना है कि इस फैसले से होटल, रेस्तरां, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को राहत मिलेगी। पिछले कुछ महीनों से गैस की सीमित उपलब्धता के कारण कई उद्योगों को अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ रहा था। अब सप्लाई सामान्य होने से उत्पादन गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, सप्लाई चेन में सुधार के बाद सी-3 और सी-4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स के डायवर्जन को भी कम किया जाएगा। इससे पेट्रोकेमिकल और डाउनस्ट्रीम उद्योगों को उनका पुराना आवंटन फिर से मिलने लगेगा। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं की आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी वजह से रोजाना कम से कम 40 हजार टन घरेलू एलपीजी उत्पादन बनाए रखने का लक्ष्य तय किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दरअसल, पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दिया था। क्षेत्र में संघर्ष और समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता के कारण एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई बाधाओं का असर देश की आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ा। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने शुरुआत में घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता दी और व्यावसायिक क्षेत्र के लिए गैस आपूर्ति में कटौती की थी। गैस संकट के दौरान कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। कारोबारियों का कहना था कि बढ़ती कीमतों और सीमित उपलब्धता के कारण होटल और रेस्तरां उद्योग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। कई छोटे व्यवसायों को परिचालन लागत बढ़ने की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अब सरकार के ताजा फैसले से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि कीमतों में स्थायी कमी अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी आयातकों में शामिल है और देश की कुल जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। ऐसे में वैश्विक हालात सामान्य होने पर ही घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल विदेशी आपूर्ति बेहतर होने के संकेत मिले हैं, जिससे सरकार ने प्रतिबंधों में ढील देने का निर्णय लिया है। 'प्री-क्राइसिस लेवल' का मतलब उस समय की खपत से है जब गैस संकट शुरू नहीं हुआ था। संकट के दौरान राज्यों और उद्योगों को सीमित मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही थी, ताकि घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो। अब धीरे-धीरे उसी स्तर की ओर वापसी की जा रही है। सरकार का कहना है कि अगर आपूर्ति की स्थिति लगातार बेहतर बनी रहती है तो आने वाले समय में उद्योगों को और अधिक राहत दी जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:34:35 +0530</pubDate>
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                <title>पेट्रोल-डीजल की थोक खरीद पर केंद्र की सख्ती, डीजल बिक्री पर नई सीमा लागू</title>
                                    <description><![CDATA[भू-राजनीतिक तनाव और ईंधन आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने औद्योगिक व व्यावसायिक उपभोक्ताओं की खुदरा पेट्रोल पंपों से खरीद पर रोक लगाई, डीजल खरीद 200 लीटर प्रतिदिन तक सीमित की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/centers-strictness-on-bulk-purchase-of-petrol-and-diesel-new/article-55707"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/petrol-diesel-restrictions.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देशभर में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को बनाए रखने और संभावित जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए खुदरा पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही डीजल की बिक्री को प्रति ग्राहक या वाहन प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर तक सीमित कर दिया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों तक लागू रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे असर को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के महीनों में देश के कई हिस्सों में डीजल की मांग अचानक बढ़ी थी। इसके पीछे एक बड़ी वजह खुदरा और थोक ईंधन कीमतों के बीच बढ़ता अंतर बताया जा रहा है। कई उद्योग, संस्थान और बड़े व्यावसायिक उपभोक्ता अपेक्षाकृत सस्ता ईंधन खरीदने के लिए सीधे पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे थे। इससे उन खुदरा केंद्रों पर दबाव बढ़ने लगा जो आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं। सरकार का मानना है कि अगर यह स्थिति जारी रहती तो कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी और आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ सकता था। यही कारण है कि मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी आदेश जारी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए आदेश के तहत औद्योगिक, संस्थागत और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अब अपनी जरूरत का ईंधन निर्धारित थोक आपूर्ति केंद्रों या अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों से लेना होगा। खुदरा पेट्रोल पंपों से की जाने वाली बड़ी खरीदारी पर प्रभावी रूप से रोक लगा दी गई है। साथ ही डीजल केवल वाहनों के ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा स्वीकृत कंटेनरों में ही दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस तरह खरीदा गया डीजल दोबारा बेचा नहीं जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य आम लोगों के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है ताकि किसी भी तरह की कृत्रिम कमी पैदा न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में खुदरा पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत करीब 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि थोक ग्राहकों के लिए इसकी कीमत लगभग 134.50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। कीमतों में इस बड़े अंतर के कारण कई बड़े उपभोक्ता खुदरा बाजार से ईंधन खरीदने लगे थे। बताया जा रहा है कि टेलीकॉम टावर संचालक, निर्माण क्षेत्र से जुड़े संस्थान और कई औद्योगिक इकाइयां भी खुदरा पंपों से डीजल खरीद रही थीं। इससे सरकारी तेल कंपनियों के खुदरा बिक्री आंकड़ों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। मई महीने में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों की पेट्रोल बिक्री में 4.8 प्रतिशत और डीजल बिक्री में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने अपने आदेश में मौजूदा वैश्विक हालात का भी उल्लेख किया है। मंत्रालय के अनुसार दुनिया के कुछ हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम आपूर्ति श्रृंखला और शिपिंग नेटवर्क को प्रभावित कर रही है। ऐसे हालात में ईंधन संसाधनों का सावधानीपूर्वक प्रबंधन आवश्यक हो गया है। सूत्रों का कहना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति पर और दबाव बढ़ता है तो कई देशों को ऊर्जा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आदेश में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करें। जमाखोरी, कालाबाजारी, अनधिकृत खरीद और ईंधन की अवैध बिक्री जैसी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों और अधिकृत ईंधन विक्रेताओं को भी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों में किसी उपभोक्ता, क्षेत्र या लेनदेन को इस आदेश से छूट दी जा सकती है। हालांकि इसके लिए अलग से विशेष आदेश जारी किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:20:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ 4 सिलेंडर पर मिलेगी ₹300 सब्सिडी</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बीच सरकार का फैसला, उज्ज्वला लाभार्थियों को साल में केवल चार रिफिल पर अतिरिक्त राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-change-in-ujjwala-scheme-now-only-4-cylinders-will/article-55370"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ujjwala-scheme.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश की करोड़ों महिलाओं से जुड़ी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) में बड़ा बदलाव किया गया है। अब योजना के लाभार्थियों को सालभर में केवल पहले चार एलपीजी सिलेंडरों पर ही 300 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी। इससे पहले यह लाभ नौ सिलेंडरों तक उपलब्ध था। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण यह फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को दुनिया का सबसे सस्ता रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सोमवार को हुई एक आधिकारिक ब्रीफिंग में पेट्रोलियम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खनूजा ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया में बने हालात का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। खास तौर पर एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में करीब 46 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका असर भारत पर भी पड़ा क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। वर्तमान में दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी के बाद यह सिलेंडर 642 रुपये में मिल रहा है। हालांकि अब यह अतिरिक्त राहत केवल चार सिलेंडरों तक सीमित रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडर की वास्तविक लागत अब 1600 रुपये से भी अधिक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं से कम कीमत वसूली जा रही है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार हर घरेलू सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है। पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा करीब 41 हजार करोड़ रुपये था। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये की सहायता देने की मंजूरी दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने यह भी बताया कि सिर्फ एलपीजी ही नहीं बल्कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भी कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। मौजूदा हालात में डीजल पर लगभग 30 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर करीब 6 रुपये प्रति लीटर तक का घाटा बताया जा रहा है। इससे तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन 600 से 700 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। हालांकि सरकार ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई। फरवरी में एलपीजी का सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस लगभग 543 डॉलर प्रति टन था, जो जून तक बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन पहुंच गया। इससे प्रोपेन और ब्यूटेन दोनों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई। यही वजह है कि भारत सहित कई देशों में गैस की लागत बढ़ी है। फिर भी सरकार दावा कर रही है कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कई पड़ोसी देशों की तुलना में भारतीय उपभोक्ताओं को काफी कम कीमत पर रसोई गैस उपलब्ध कराई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह है कि जहां घरेलू उपभोक्ता लगभग 66 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गैस प्राप्त कर रहे हैं, वहीं होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर दिल्ली में 3113.50 रुपये में मिल रहा है। यानी उनकी लागत करीब 164 रुपये प्रति किलोग्राम बैठ रही है। कमर्शियल गैस की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार हर महीने स्वतः तय होती हैं और हाल के महीनों में इनमें लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं। सरकार के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी रखी गई और देश में किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी नहीं होने दी गई। साथ ही घरेलू एलपीजी उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई। गैस की खरीद अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से भी शुरू की गई ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके। उपलब्ध गैस आपूर्ति में घरों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर गैस की चोरी और घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने के लिए भी निगरानी बढ़ाई गई है। सरकार ने ओटीपी आधारित डिलीवरी सत्यापन को 90 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके। अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने तक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों के सामने उपभोक्ताओं को राहत देने और बढ़ती लागत के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 11:29:26 +0530</pubDate>
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