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                <title>Farmers - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Farmers RSS Feed</description>
                
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                <title>खाद कालाबाजारी पर सरकार का बड़ा एक्शन, कृषि मंत्री ने दी सख्त चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[अंबिकापुर दौरे में कृषि मंत्री रामविचार नेताम की दोटूक चेतावनी, खाद वितरण व्यवस्था की होगी कड़ी निगरानी, किसानों को समय पर उपलब्ध होगी पर्याप्त खाद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/governments-big-action-on-black-marketing-of-fertilizers-agriculture-minister/article-58387"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-agriculture-minister.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने खाद की कालाबाजारी और किसानों के हितों से जुड़े मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने अंबिकापुर दौरे के दौरान स्पष्ट कहा कि खाद की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका ऐसे लोगों को संरक्षण देने में सामने आती है तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा। सरकार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और किसानों के हितों से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। कृषि मंत्री ने कहा कि खेती का मौसम शुरू होते ही किसानों के लिए समय पर खाद उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे समय में यदि कोई व्यक्ति या समूह खाद की कृत्रिम कमी पैदा कर मुनाफाखोरी करने की कोशिश करता है तो यह सीधे तौर पर किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत को गंभीरता से ले रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को भी स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यदि जांच में किसी की भूमिका खाद माफियाओं को संरक्षण देने या अनियमित वितरण में सहयोग करने की सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। अंबिकापुर और सरगुजा क्षेत्र में लंबे समय से खाद वितरण को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई किसान संगठनों ने खाद की कालाबाजारी, अनियमित वितरण और कृत्रिम संकट पैदा किए जाने के आरोप लगाए हैं। इसी पृष्ठभूमि में कृषि मंत्री का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को परेशानी में डालने वाले तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी ताकि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसी भी किसान को खाद के लिए भटकना न पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में खाद की उपलब्धता पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है। विशेष रूप से डीएपी खाद का पर्याप्त भंडारण किया गया है ताकि मांग के अनुसार किसानों को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक लगभग 50 प्रतिशत खाद का उठाव किसानों द्वारा किया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वितरण प्रक्रिया लगातार जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मानसून की शुरुआत में बारिश में कुछ देरी होने के कारण किसानों में चिंता का माहौल था, लेकिन अब अधिकांश क्षेत्रों में अच्छी वर्षा होने से खेती की गतिविधियां तेज हो गई हैं। ऐसे समय में सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि खाद और अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता में कोई बाधा न आए। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि विभाग की ओर से जिला स्तर पर खाद वितरण की नियमित समीक्षा भी की जा रही है। विभिन्न जिलों में उपलब्ध स्टॉक, मांग और वितरण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कहीं भी कृत्रिम संकट की स्थिति उत्पन्न न हो। सरकार का प्रयास है कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध हो और किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। खेती के मौसम में खाद की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है और सरकार इसे लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कृषि मंत्री ने किसानों से भी अपील की कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद खरीदें और यदि कहीं अधिक कीमत वसूली जा रही हो, कालाबाजारी की जा रही हो या कृत्रिम कमी पैदा की जा रही हो तो इसकी जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 13:13:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मानसून सत्र से पहले साय सरकार की बड़ी बैठक आज, कई अहम फैसलों के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[शाम 4 बजे मंत्रालय में होगी मंत्रिपरिषद की बैठक, खरीफ सीजन, मानसून की स्थिति और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी होगा मंथन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/big-government-meeting-today-before-monsoon-session-indications-of-many/article-58202"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-cabinet-meeting-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार आज एक अहम कैबिनेट बैठक करने जा रही है। मंत्रालय स्थित महानदी भवन में शाम 4 बजे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक को आगामी विधानसभा मानसून सत्र के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में सरकार सदन में पेश किए जाने वाले विधेयकों, चालू वित्तीय वर्ष के अनुपूरक बजट और कई नीतिगत प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी दे सकती है। इसके साथ ही प्रदेश में नई ट्रांसफर नीति पर भी फैसला होने की संभावना जताई जा रही है, जिसका लंबे समय से सरकारी कर्मचारी इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">13 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र से पहले यह मंत्रिपरिषद की अंतिम महत्वपूर्ण बैठक होगी। ऐसे में सरकार सत्र के दौरान पेश होने वाले सभी प्रमुख प्रस्तावों और विधायी कार्यों पर अंतिम चर्चा करेगी। माना जा रहा है कि कई संशोधन विधेयकों को भी कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा। बैठक में चालू वित्तीय वर्ष के लिए अनुपूरक बजट प्रस्ताव पर भी विस्तार से चर्चा होगी। विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार अतिरिक्त बजट आवंटन को मंजूरी दे सकती है। अनुपूरक बजट के जरिए विकास कार्यों, अधूरी परियोजनाओं और नई योजनाओं के लिए राशि उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके बाद इसे मानसून सत्र में सदन के सामने रखा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कैबिनेट बैठक में प्रदेश में मानसून की मौजूदा स्थिति भी प्रमुख एजेंडा रहेगी। इस वर्ष अब तक राज्य में सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कई जिलों में अपेक्षित वर्षा नहीं होने से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई है। सरकार इस स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय कर सकती है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। कृषि विभाग बैठक में खाद, बीज और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर विस्तृत प्रस्तुति देगा। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसानों तक समय पर आवश्यक कृषि सामग्री पहुंचे और बुआई का काम प्रभावित न हो। यदि कम बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो वैकल्पिक फसल योजना, सिंचाई प्रबंधन और राहत उपायों पर भी निर्णय लिया जा सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान और विभिन्न जिलों की वर्षा रिपोर्ट के आधार पर सरकार प्रभावित क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति तैयार कर सकती है। सिंचाई संसाधनों के बेहतर उपयोग, जल संरक्षण और सूखे की आशंका वाले इलाकों के लिए भी आवश्यक कदमों पर विचार होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी कर्मचारियों की नजर इस बैठक पर इसलिए भी टिकी हुई है क्योंकि नई स्थानांतरण नीति को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। पिछली नीति की अवधि समाप्त होने के बाद कर्मचारी और विभाग दोनों नई व्यवस्था का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि कैबिनेट इस संबंध में अंतिम फैसला ले सकती है। यदि नीति को मंजूरी मिलती है तो जल्द ही प्रदेशभर में तबादला प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नई ट्रांसफर नीति लागू होने के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, पंचायत, लोक निर्माण और अन्य विभागों में लंबे समय से लंबित तबादलों का रास्ता साफ हो जाएगा। कई विभागों ने पहले ही स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार कर लिए हैं और सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में धान उपार्जन नीति से जुड़े कुछ प्रस्तावों पर भी चर्चा होने की संभावना है। राज्य सरकार किसानों को बेहतर समर्थन मूल्य, खरीद व्यवस्था और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर विभागीय रिपोर्ट की समीक्षा कर सकती है। इसके अलावा कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के उपायों पर भी विचार किया जा सकता है। मंत्रिपरिषद के सामने किसानों, श्रमिकों, उद्योगों और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कई अन्य प्रस्ताव भी रखे जा सकते हैं। इनमें विभिन्न विभागों की नई योजनाएं, प्रशासनिक सुधार और नीतिगत बदलाव शामिल हो सकते हैं। कुछ विभागों ने अपने प्रस्ताव पहले ही सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिए हैं, जिन पर अंतिम निर्णय आज की बैठक में लिया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। विधानसभा मानसून सत्र में विपक्ष सरकार को महंगाई, किसानों की समस्याओं, बारिश की कमी, कानून व्यवस्था और विभिन्न विकास कार्यों को लेकर घेरने की तैयारी में है। ऐसे में सरकार चाहती है कि सत्र शुरू होने से पहले सभी विभाग पूरी तैयारी के साथ सदन में जाएं और आवश्यक प्रस्तावों को समय रहते मंजूरी मिल जाए। कैबिनेट बैठक के बाद सरकार की प्राथमिकताओं की तस्वीर भी साफ हो जाएगी। विशेष रूप से किसानों, कर्मचारियों और विकास योजनाओं से जुड़े फैसलों पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है। यदि नई ट्रांसफर नीति, अनुपूरक बजट और प्रमुख विधेयकों को मंजूरी मिलती है तो इसका असर आने वाले दिनों में प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी कामकाज पर साफ दिखाई देगा। सरकार की कोशिश होगी कि मानसून सत्र के दौरान विकास, कृषि, वित्त और प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस निर्णय लेकर प्रदेश के सामने अपनी कार्ययोजना स्पष्ट रूप से रखी जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:53:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>13 जुलाई से शुरू होगा छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र, 1033 सवालों के साथ सरकार को घेरेगा विपक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[पांच दिवसीय सत्र में कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट और मानसून की तैयारियों जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/monsoon-session-of-chhattisgarh-assembly-will-start-from-july-13/article-58083"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र शुरू होने से पहले ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार अब तक विधायकों की ओर से 1033 प्रश्न लगाए जा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या में प्रश्न विपक्षी कांग्रेस की ओर से हैं। कांग्रेस ने इस बार कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट, सड़कों की स्थिति और मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है। वहीं सत्ता पक्ष भी विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने और अपनी योजनाओं तथा उपलब्धियों को सदन के सामने रखने की तैयारी में जुटा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान सदन में कई मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामे की स्थिति देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधानसभा का यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब प्रदेश में कई स्थानीय और राज्य स्तरीय मुद्दे चर्चा में हैं। प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के दौरान विपक्ष सरकार से जवाब मांगेगा। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में अपराध की घटनाओं को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। हत्या, चाकूबाजी, महिलाओं के खिलाफ अपराध, नशे के कारोबार और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी। विपक्ष का आरोप है कि कई मामलों में प्रशासन समय पर प्रभावी कार्रवाई करने में सफल नहीं रहा, इसलिए इन विषयों पर विस्तृत चर्चा की जरूरत है। माना जा रहा है कि इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मानसून सत्र में किसानों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठने वाले हैं। खरीफ सीजन के बीच खाद और बीज की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, धान खरीदी की तैयारियां और कृषि विभाग की योजनाओं को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस का कहना है कि कई क्षेत्रों से किसानों को समय पर उर्वरक और अन्य जरूरी संसाधन नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं सरकार का दावा है कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सदन में इन दावों और आरोपों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। कृषि से जुड़े सवालों की संख्या भी इस बार अधिक बताई जा रही है, जिससे यह मुद्दा सत्र के दौरान प्रमुख बना रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के नकटी गांव का भूमि विवाद भी इस बार विधानसभा में राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बनने की संभावना है। अतिक्रमण हटाने, विस्थापन और विधायक आवास के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद बना हुआ है। इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार हो रही है। विपक्ष इसे सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए कई सवाल उठाने की तैयारी में है। वहीं सरकार की ओर से पूरे मामले में अपना पक्ष रखने की तैयारी की गई है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर भी सदन में काफी देर तक बहस हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती, पेयजल संकट और खराब सड़कें भी विपक्ष के एजेंडे में शामिल हैं। कई जिलों से लगातार बिजली आपूर्ति बाधित होने और पेयजल की समस्या की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके अलावा बारिश के दौरान सड़कों की खराब स्थिति, जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए जाएंगे। विपक्ष का कहना है कि मानसून शुरू होने से पहले जिन तैयारियों का दावा किया गया था, उनकी वास्तविक स्थिति की समीक्षा जरूरी है। हालिया बारिश के दौरान राहत और बचाव कार्यों की स्थिति भी चर्चा का विषय बन सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास से जुड़े मामलों पर भी प्रश्न लगाए गए हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन, बजट खर्च और विकास कार्यों की प्रगति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विधानसभा सचिवालय के अनुसार प्रश्नों की संख्या को देखते हुए इस बार प्रश्नकाल काफी व्यस्त रहने की संभावना है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य कार्यवाही के दौरान भी कई महत्वपूर्ण विषय सदन में उठ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर सरकार ने भी मानसून सत्र को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित जानकारी एकत्र की जा रही है ताकि विपक्ष के सवालों का तथ्यात्मक जवाब दिया जा सके। मंत्रियों और अधिकारियों के स्तर पर भी विभागवार समीक्षा की जा रही है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में विकास कार्य लगातार जारी हैं और विपक्ष के सवालों का जवाब तथ्यों के साथ दिया जाएगा। सत्ता पक्ष अपनी योजनाओं, उपलब्धियों और विकास कार्यों को भी सदन में प्रमुखता से रखने की रणनीति बना रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:37 +0530</pubDate>
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                <title>मध्यप्रदेश में अल्पवर्षा की आशंका पर सरकार अलर्ट, हर जिले में बनेगी जल संकट आकस्मिक योजना</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संभावित कम बारिश से निपटने के लिए सभी विभागों के साथ समीक्षा बैठक की। जल डैशबोर्ड, कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान, जल संरक्षण अभियान और किसानों के लिए वैज्ञानिक खेती पर विशेष जोर दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/government-alert-on-possibility-of-short-rainfall-in-madhya-pradesh/article-57709"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में संभावित अल्पवर्षा की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जल संकट, कृषि, सिंचाई और पेयजल प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार ने तय किया है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट से निपटने के लिए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही राज्य स्तर पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग और पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए आधुनिक जल डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा, जिससे जलाशयों, भूजल और पेयजल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। सरकार का कहना है कि समय रहते वैज्ञानिक योजना और विभागों के बेहतर समन्वय से संभावित अल्पवर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि संभावित कम बारिश को केवल संकट के रूप में नहीं बल्कि बेहतर योजना और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि किसानों तक समय पर सही जानकारी और तकनीकी सलाह पहुंचाई जाए ताकि मौसम की चुनौती के बावजूद कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर न्यूनतम असर पड़े। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित कई विभागों की तैयारियों की समीक्षा की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर, कोदो और कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देती हैं और किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो सकती हैं। इसके साथ ही किसानों से जल्दबाजी में बुआई नहीं करने की अपील करने के निर्देश भी दिए गए। सरकार चाहती है कि खेतों में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुआई की जाए ताकि फसलों को शुरुआती नुकसान से बचाया जा सके। बैठक में आधुनिक कृषि तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर भी बल दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाह गांव-गांव तक पहुंचाई जाए ताकि किसान अपने क्षेत्र की जल उपलब्धता और मौसम के अनुसार उपयुक्त फसल का चयन कर सकें। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाने की योजना तैयार की गई है। साथ ही कम अवधि में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत बीज किस्मों के उपयोग को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जल प्रबंधन को लेकर सरकार ने कई दीर्घकालिक योजनाओं पर भी काम शुरू करने का फैसला किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक गांव की समीक्षा की जाएगी और बंद या अधूरी नल-जल योजनाओं की मरम्मत के लिए 90 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जाएगा। वहीं शहरी निकायों में वैकल्पिक जल स्रोतों की पहचान कर टैंकर व्यवस्था की आकस्मिक योजना तैयार की जाएगी। अमृत 2.0 योजना के तहत लंबित जल प्रदाय परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार ने "जलाभिषेक 2.0" अभियान के तहत प्रदेश के पुराने तालाबों, बावड़ियों, कुओं और अन्य पारंपरिक जल संरचनाओं का सर्वे और पुनर्जीवन करने की योजना बनाई है। मनरेगा के समन्वय से प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 100 जल संरचनाओं को अगले दो वर्षों में पुनर्जीवित किया जाएगा। इसके अलावा भूजल पुनर्भरण अभियान के अंतर्गत रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम और खेत-तालाब निर्माण को मिशन मोड में पूरा किया जाएगा। सरकार "खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में" की अवधारणा को भी व्यापक स्तर पर लागू करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रदेश के सभी प्रमुख जलाशयों जैसे इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर और गांधीसागर में जल उपयोग के लिए स्पष्ट प्राथमिकता तय की जाएगी। सरकार ने पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इसके बाद सिंचाई और फिर जलविद्युत उत्पादन के लिए जल उपयोग किया जाएगा। साथ ही नहरों की सफाई और मरम्मत रबी सीजन से पहले पूरी करने तथा अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों को सौंपी जाएगी। कृषि क्षेत्र के लिए प्रत्येक जिले में कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जाएगा। कम जल मांग वाली फसलों, दलहन, तिलहन और श्रीअन्न को बढ़ावा देने के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। धान उत्पादक क्षेत्रों में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) और वैकल्पिक गीला-सूखा (AWD) तकनीक को बढ़ावा देने की भी योजना बनाई गई है। साथ ही डिजिटल क्रॉप सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी आधारित फसल क्षति आकलन और फसल बीमा दावों के त्वरित निपटारे के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच सरकार की तैयारियों को लेकर विपक्ष ने भी सवाल उठाए हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यदि संभावित अल्पवर्षा के संकेत पहले से मौजूद थे तो अप्रैल और मई में ही तैयारी क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समय रहते प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है और अब समीक्षा बैठकों के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने और किसानों के लिए जमीनी स्तर पर तत्काल राहत उपाय लागू करने की मांग की। वहीं राज्य सरकार का कहना है कि सभी विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं और संभावित जल संकट से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां तेजी से आगे बढ़ाई जा रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:07:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>उज्जैन में आज 207 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात देंगे सीएम मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[झारड़ा में 188.42 करोड़ के सामाकोटा बैराज का लोकार्पण, 18 गांवों के 11 हजार से ज्यादा किसान परिवारों को मिलेगा सिंचाई का लाभ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a32456f9e388/article-56171"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-mohan-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को उज्जैन जिले के झारड़ा क्षेत्र के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही सामाकोटा बैराज परियोजना का लोकार्पण करेंगे। करीब 188.42 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस बैराज को मालवा अंचल की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार छोटी कालीसिंध नदी पर निर्मित यह परियोजना लंबे समय से क्षेत्र के किसानों की जरूरत रही है। बैराज के शुरू होने के बाद आसपास के गांवों में खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और किसानों को फसल उत्पादन में भी लाभ मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>सामाकोटा बैराज की जल संग्रहण क्षमता 17.57 मिलियन घन मीटर है। इस परियोजना के जरिए पाइपलाइन आधारित सिंचाई प्रणाली विकसित की गई है, जिससे करीब 7236 हेक्टेयर कृषि भूमि को पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। बताया जा रहा है कि झारड़ा, नलखेड़ा, पनोडिया, नीमखेड़ा, घट्टियाजस्सा, मेलाखेड़ी, खोरियापदमा, खेरला, लसूड़ियानहाटा, नागपुरा, छज्जुखेड़ी, देलाखेड़ी, डूंगरखेड़ी, खेड़ामद्दा, कसोन, महिदपुरिया, सोमचिड़ी सहित कुल 18 गांवों के 11 हजार से अधिक किसान परिवारों को इस योजना का सीधा फायदा मिलेगा। क्षेत्र में लंबे समय से बारिश पर निर्भर खेती की समस्या रही है और कई बार कम वर्षा के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था। ऐसे में बैराज से मिलने वाली सिंचाई सुविधा को खेती की स्थिरता के लिए अहम माना जा रहा है।</p>
<p>मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में केवल बैराज का लोकार्पण ही नहीं होगा, बल्कि विभिन्न विभागों से जुड़े कई विकास कार्य भी जनता को समर्पित किए जाएंगे। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार करीब 19 करोड़ रुपए से अधिक लागत के अन्य निर्माण कार्यों का उद्घाटन भी इसी अवसर पर किया जाएगा। इनमें उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 4.35 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित महाविद्यालय भवन प्रमुख है। इसके अलावा लोक शिक्षण विभाग के तहत सेमलिया, महिदपुर रोड और कुंडीखेड़ा में बनाए गए कन्या विद्यालय भवनों का भी लोकार्पण किया जाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में इन भवनों को स्थानीय विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>विकास कार्यों की सूची में ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्र की परियोजनाएं भी शामिल हैं। मोचीखेड़ा में तैयार किए गए 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र को भी जनता को समर्पित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण इलाकों में वोल्टेज संबंधी समस्याओं में कमी आने की संभावना है। वहीं झारड़ा क्षेत्र में निर्मित 13 नए उप स्वास्थ्य केंद्र भवनों का लोकार्पण भी मुख्यमंत्री के हाथों होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से इन भवनों का निर्माण किया गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहले की तुलना में अधिक सुलभ हो सकेंगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सुबह से ही बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, किसानों और स्थानीय नागरिकों के कार्यक्रम में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। क्षेत्र के किसानों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि सामाकोटा बैराज परियोजना को उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों में शामिल माना जाता रहा है। कई किसान संगठनों ने भी इस परियोजना के शुरू होने को कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम बताया है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली से जुड़े नए बुनियादी ढांचे का लाभ भी ग्रामीण आबादी को सीधे तौर पर मिलेगा। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस दौरे के दौरान लगभग 207 करोड़ रुपए के विकास कार्य उज्जैन जिले की जनता को समर्पित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 13:32:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>साय कैबिनेट की अहम बैठक आज, ट्रांसफर नीति और CM हेल्पलाइन पर फैसला संभव</title>
                                    <description><![CDATA[नवा रायपुर में हुई बैठक में तबादलों से रोक हटाने, किसानों से जुड़े प्रस्तावों और CM हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत पर चर्चा, कई बड़े फैसलों की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/important-meeting-of-sai-cabinet-today-decision-on-transfer-policy/article-55392"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sai-cabinet-meeting-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर में सोमवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक पर पूरे प्रदेश की नजर बनी रही। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में आयोजित इस बैठक को सरकार की प्रशासनिक और जनहित से जुड़ी योजनाओं के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा तबादलों पर लगी रोक और नई ट्रांसफर नीति को लेकर रही। लंबे समय से अधिकारी और कर्मचारी स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही तबादलों का रास्ता खोल सकती है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक नई स्थानांतरण नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिलने की संभावना है, जिसके बाद विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर तबादले शुरू हो सकते हैं।</p>
<p>प्रदेश में पिछले कुछ समय से तबादलों पर लगी रोक के कारण कई विभागों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे थे। कई कर्मचारी और अधिकारी लंबे समय से अपनी पसंद या जरूरत के अनुसार स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं। ऐसे में कैबिनेट का यह फैसला प्रशासनिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है। अधिकारियों के अनुसार नई नीति में पारदर्शिता और जरूरत आधारित स्थानांतरण को प्राथमिकता दी जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा। बैठक शुरू होने से पहले मंत्रालय परिसर में भी इस मुद्दे को लेकर काफी चर्चा रही और विभिन्न विभागों के कर्मचारी फैसले का इंतजार करते नजर आए।</p>
<p>बैठक के एजेंडे में खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों को भी अहम स्थान दिया गया। आगामी खरीफ विपणन वर्ष को देखते हुए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारियों की समीक्षा की गई। इसके अलावा कस्टम मिलिंग नीति और किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता को लेकर भी चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रदेश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है, इसलिए सरकार खेती से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दे रही है। सूत्रों के मुताबिक किसानों के हित में कुछ नए प्रस्तावों पर भी विचार किया गया, जिनकी घोषणा आने वाले दिनों में की जा सकती है।</p>
<p>इस बैठक का एक और महत्वपूर्ण पहलू मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत रही। सुशासन तिहार के समापन के बाद सरकार ने लोगों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए इस नई व्यवस्था को लागू करने का फैसला किया है। अब आम नागरिक टोल फ्री नंबर 1076 पर कॉल कर अपनी समस्याएं और शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। सरकार का दावा है कि इससे लोगों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक आसान और प्रभावी बनेगी। इसके साथ ही वेब पोर्टल, मोबाइल एप और व्हाट्सएप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद मजबूत होगा।</p>
<p>सुशासन तिहार के दौरान प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिकायतें और सुझाव प्राप्त हुए थे। माना जा रहा है कि कैबिनेट बैठक में इन फीडबैक पर भी चर्चा हुई है। सरकार विभिन्न जिलों से मिले सुझावों का अध्ययन कर प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाना चाहती है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक लोगों ने सड़क, बिजली, पानी, राजस्व और अन्य सेवाओं से जुड़े मुद्दे उठाए थे। ऐसे में सरकार इन समस्याओं के समाधान को लेकर भी रणनीति तैयार कर सकती है।</p>
<p>बैठक में कर्मचारियों, उद्योगों और विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। राज्य में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कुछ नई पहल पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि बैठक समाप्त होने तक सभी फैसलों की आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई थी, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे काफी अहम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि आज लिए जाने वाले फैसले आने वाले महीनों में प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और विकास योजनाओं की दिशा तय कर सकते हैं।</p>
<p>सरकार एक ओर जहां प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ किसानों और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को भी प्राथमिकता देने के संकेत दे रही है। यही वजह है कि साय कैबिनेट की इस बैठक को केवल नियमित सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों के मंच के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर बैठक के बाद जारी होने वाले आधिकारिक निर्णयों पर टिकी हुई है, जिनका असर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों, किसानों और आम नागरिकों पर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 12:56:32 +0530</pubDate>
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