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                <title>Elephant Death - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Elephant Death RSS Feed</description>
                
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                <title>रायगढ़ में मालगाड़ी की चपेट में आई मादा हाथी, उपचार के दौरान मौत</title>
                                    <description><![CDATA[चारमार गांव के पास रेल लाइन पार करते समय हुआ हादसा, वन विभाग ने किया रेस्क्यू लेकिन नहीं बच सकी हाथी की जान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/female-elephant-hit-by-goods-train-in-raigarh-dies-during/article-56105"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raigarh-elephant-accident.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां मालगाड़ी की चपेट में आने से एक मादा हाथी गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथी को बचाने के लिए रेस्क्यू व उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इलाज के लिए उसे बिलासपुर ले जाने की तैयारी की जा रही थी, तभी उसकी मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर रेलवे ट्रैक और हाथियों के आवागमन के बीच बढ़ते टकराव को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह घटना रायगढ़ वन मंडल के घरघोड़ा रेंज अंतर्गत चारमार गांव के पास सोमवार रात करीब नौ बजे हुई। बताया जा रहा है कि 10 से अधिक हाथियों का एक दल जंगल से निकलकर रेलवे लाइन पार कर रहा था। उसी दौरान खरसिया की ओर से धरमजयगढ़ की दिशा में कोयला लेने जा रही एक मालगाड़ी वहां से गुजर रही थी। हाथियों के झुंड के बीच मौजूद एक मादा हाथी ट्रेन की चपेट में आ गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के मुताबिक टक्कर इतनी जोरदार थी कि मादा हाथी के शरीर के पिछले हिस्से में गंभीर चोटें आईं। उसका पिछला पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण वह उठने और चलने की स्थिति में नहीं थी। हादसे के बाद हाथी रेलवे लाइन के पास ही घायल अवस्था में पड़ी रही। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचने लगे और इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हो गया कि हाथी की हालत बेहद गंभीर है और उसे तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता है। वन विभाग ने घायल हाथी के उपचार के लिए आवश्यक इंतजाम शुरू किए और विशेषज्ञ चिकित्सकों से भी संपर्क किया गया। हालांकि स्थिति को संभालना आसान नहीं था, क्योंकि जिस हाथी को चोट लगी थी उसके साथ मौजूद पूरा झुंड आसपास ही डटा हुआ था।</p>
<p class="isSelectedEnd">वन अधिकारियों के अनुसार हाथियों का दल लगातार घायल मादा हाथी के आसपास घूम रहा था। ऐसे में बचाव दल के लिए उसके करीब पहुंचना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। हाथियों का व्यवहार स्वाभाविक रूप से संवेदनशील और सुरक्षात्मक था, जिसके कारण वन अमले को बेहद सावधानी बरतनी पड़ी। कई बार ऐसा लगा कि झुंड आक्रामक हो सकता है, इसलिए रेस्क्यू टीम को दूरी बनाकर रणनीति तैयार करनी पड़ी। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंचने लगे। वन विभाग ने लोगों से घटनास्थल के आसपास भीड़ न लगाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि जंगली हाथियों का व्यवहार किसी भी समय बदल सकता है और वे खतरा महसूस होने पर आक्रामक हो सकते हैं। इसके बावजूद कई लोग हाथी को देखने के लिए मौके की ओर बढ़ते रहे, जिससे वन विभाग की चिंता और बढ़ गई। घायल हाथी की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। वन विभाग के अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। रायगढ़ वनमंडल के अधिकारियों ने बिलासपुर स्थित मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) मनोज पांडेय को घटना से अवगत कराया। इसके बाद उन्होंने तत्काल निगरानी बढ़ाने और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही वन्यजीव विशेषज्ञों को भी मौके पर भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया गया कि कानन पेंडारी जू के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन को भी रायगढ़ के लिए रवाना किया गया था ताकि घायल हाथी का बेहतर इलाज किया जा सके। वन विभाग की योजना थी कि प्राथमिक उपचार के बाद हाथी को विशेष चिकित्सा सुविधा के लिए बिलासपुर ले जाया जाए। लेकिन हाथी की हालत लगातार बिगड़ती रही और इलाज के प्रयासों के बीच ही उसने दम तोड़ दिया। मादा हाथी की मौत के बाद वन विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि हादसे के समय ट्रेन की गति क्या थी और क्या रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी की कोई सूचना पहले से उपलब्ध थी। इसके अलावा वन विभाग और रेलवे के बीच समन्वय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में रेलवे ट्रैक पार करते समय हाथियों के घायल होने और मौत की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्ग और रेलवे लाइनों के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। जंगलों के सिकुड़ते दायरे और मानव गतिविधियों के विस्तार के कारण हाथियों को अक्सर रेलवे ट्रैक पार करने पड़ते हैं। ऐसे में दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। विशेषज्ञ लंबे समय से हाथी कॉरिडोर की सुरक्षा, ट्रेनों की गति नियंत्रण और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की मांग करते रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:20:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रायगढ़ में हाथी शावकों की मौत का खुलासा, संक्रमण बना वजह</title>
                                    <description><![CDATA[25 दिनों में चार शावकों की मौत से बढ़ी चिंता, देहरादून और बरेली लैब की रिपोर्ट में हेपेटाइटिस व सेप्टिसीमिया की पुष्टि]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/infection-became-the-reason-for-the-death-of-elephant-cubs/article-55393"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/elephant-calf-death.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडलों में पिछले कुछ सप्ताह से हाथी शावकों की लगातार हो रही मौतों के मामले में अब जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिन शावकों की मौत हुई, उनमें से एक की जान हेपेटाइटिस यानी लिवर संक्रमण और दूसरे की मौत सेप्टिसीमिया यानी गंभीर रक्त संक्रमण के कारण हुई। इससे पहले एक अन्य शावक की मौत निमोनिया से होने की पुष्टि हो चुकी थी। महज 25 दिनों के भीतर एक ही हाथी दल के चार शावकों की मौत ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। मामले को गंभीर मानते हुए विभाग ने विशेषज्ञों की मदद से जांच कराई थी और अब रिपोर्ट आने के बाद मौतों के पीछे की वजह काफी हद तक साफ हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">8 मई से 1 जून के बीच रायगढ़ और धरमजयगढ़ क्षेत्र के जंगलों में अलग-अलग स्थानों पर हाथी शावकों के शव मिले थे। शुरुआती स्तर पर यह स्पष्ट नहीं था कि मौतों की वजह क्या है। कई मामलों में शावकों के शव जल स्रोतों और तालाबों के आसपास पाए गए थे, जिससे वन अमले के सामने कई सवाल खड़े हो गए थे। चूंकि सभी शावक एक ही हाथी दल से जुड़े बताए जा रहे थे, इसलिए संक्रमण फैलने की आशंका भी जताई जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार पोस्टमॉर्टम के दौरान आवश्यक नमूने एकत्र किए गए और उन्हें जांच के लिए देहरादून तथा बरेली स्थित प्रयोगशालाओं में भेजा गया था। अब आई रिपोर्ट में दो अलग-अलग तरह के संक्रमण की पुष्टि हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि हेपेटाइटिस ऐसा संक्रमण है जो सीधे लिवर को प्रभावित करता है। इसके कारण शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं प्रभावित होने लगती हैं। दूसरी ओर सेप्टिसीमिया एक गंभीर स्थिति होती है जिसमें रक्त संक्रमित हो जाता है और संक्रमण पूरे शरीर में फैलने लगता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक छोटे शावकों में ऐसी बीमारियां तेजी से असर दिखाती हैं और समय पर इलाज या पहचान नहीं होने पर जान का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि हाथी शावकों की मौत के मामलों को लेकर विभाग अब पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद वन विभाग ने हाल ही में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन भी किया। दो दिन तक चले इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए वैज्ञानिकों, वन्यजीव विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यशाला के दौरान हाथियों में होने वाली बीमारियों, संक्रमण के कारणों, स्वास्थ्य निगरानी और बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों को भी यह बताया गया कि जंगलों में किसी हाथी या शावक के असामान्य व्यवहार को कैसे पहचानना है और बीमारी की आशंका होने पर तत्काल क्या कदम उठाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि रायगढ़ और धरमजयगढ़ के जंगलों में इस समय कुल 137 हाथी मौजूद हैं। इनमें 37 नर, 62 मादा और 35 शावक शामिल हैं। शावकों की लगातार मौत के बाद विभाग ने विशेष निगरानी अभियान शुरू कर दिया है। हाथी मित्र दल, ट्रैकर्स और वनकर्मियों की टीमें लगातार जंगलों में सक्रिय हैं। हाथियों के मूवमेंट पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरों और ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। रात के समय थर्मल ड्रोन की मदद से हाथियों की लोकेशन और गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">वन अधिकारियों का मानना है कि जंगलों में रहने वाले हाथियों के स्वास्थ्य की निगरानी आसान नहीं होती। कई बार बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते और जब तक स्थिति स्पष्ट होती है तब तक काफी देर हो चुकी होती है। ऐसे में तकनीक और विशेषज्ञों की मदद से निगरानी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। विभाग का उद्देश्य सिर्फ मौतों के कारणों की पहचान करना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की मौजूदगी में पोस्टमॉर्टम कराया गया था। जांच रिपोर्ट में एक शावक की मौत हेपेटाइटिस और दूसरे की मौत सेप्टिसीमिया के कारण होने की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि विभाग अब एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है ताकि हाथी शावकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और जंगलों में संक्रमण से जुड़े मामलों की समय रहते पहचान हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 12:57:14 +0530</pubDate>
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