<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/jaac/tag-17297" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>JAAC - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/17297/rss</link>
                <description>JAAC RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>PoK में भड़का विरोध, पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन तेज</title>
                                    <description><![CDATA[महंगाई और प्रशासनिक मुद्दों से शुरू हुआ प्रदर्शन अब राजनीतिक टकराव में बदला, हजारों लोग सड़कों पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pok-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7--%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%9C/article-57486"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pok-protest-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="flex max-w-full flex-col gap-4 grow">
<div class="min-h-8 text-message relative flex w-full flex-col items-end gap-2 text-start break-words whitespace-normal outline-none keyboard-focused:focus-ring [.text-message+&amp;]:mt-1">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden">
<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और कई इलाकों में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। मंगलवार को रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में हजारों की संख्या में लोग जमा हुए और उन्होंने पाकिस्तान प्रशासन के खिलाफ खुलकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका क्षेत्र पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है और लंबे समय से उन्हें बुनियादी सुविधाओं, आर्थिक राहत और राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। भीड़ में शामिल लोगों का कहना था कि महंगाई और प्रशासनिक लापरवाही ने जीवन को मुश्किल बना दिया है और अब स्थिति असहनीय होती जा रही है। कई जगहों पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, जबकि स्थानीय लोगों के बीच नाराजगी और गहरी होती जा रही है।</p>
<p>यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (<span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Jammu Kashmir Awami Action Committee</span></span>) के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संगठन के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर (<span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Shaukat Nawaz Mir</span></span>) को उनके दो साथियों के साथ धीरकोट क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है, जिसके बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान सरकार ने उनके बारे में जानकारी देने वाले के लिए 1 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की थी, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है। इसके साथ ही JAAC के 600 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग इलाकों से हिरासत में लिए जाने की खबरें हैं। कई जगहों पर छापेमारी और गिरफ्तारी के बाद स्थानीय स्तर पर गुस्सा फैल गया है और छोटे शहरों से लेकर कस्बों तक विरोध की लहर देखी जा रही है। सरकार पर आरोप है कि वह आंदोलन को दबाने के लिए सख्त कानूनों का इस्तेमाल कर रही है, जिसमें आतंकवाद विरोधी धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए ये कदम जरूरी थे, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव कम होने की बजाय और बढ़ता दिख रहा है।</p>
<p>प्रदर्शन की शुरुआत भले ही महंगाई, खाद्य संकट और स्थानीय प्रशासनिक समस्याओं से हुई थी, लेकिन अब यह पूरी तरह राजनीतिक रूप ले चुका है और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष का रूप बन गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जरूरी सामान की सप्लाई बाधित की जा रही है और लोगों पर दबाव बनाने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगाई गई है, जिससे बाहरी दुनिया तक जानकारी नहीं पहुंच पा रही है। कई इलाकों में संचार व्यवस्था बाधित होने से लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि हाल के दिनों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कुछ लोगों की मौतें हुई हैं, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसी बीच राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है क्योंकि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक बयान में रावलकोट और मीरपुर के लोगों को लेकर टिप्पणी की गई थी, जिसके बाद विरोध और तेज हो गया। आने वाले दिनों में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में राजनीतिक हलचल और बढ़ने की संभावना है। इस समय PoK में स्थिति बेहद अस्थिर बनी हुई है और हर तरफ अनिश्चितता का माहौल देखा जा रहा है।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pok-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7--%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%9C/article-57486</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pok-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7--%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%9C/article-57486</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 11:03:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/pok-protest-%281%29.jpg"                         length="159500"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PoK में आरक्षित सीटों को लेकर बवाल, 46 प्रदर्शनकारियों की मौत; 1100 से ज्यादा गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[शरणार्थी सीटें खत्म करने की मांग पर उग्र हुआ आंदोलन, पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई का विरोध तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/uproar-over-reserved-seats-in-pok-46-protesters-died-more/article-55832"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pok-protest.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले चार दिनों से जारी आंदोलन ने गंभीर रूप ले लिया है। आरक्षित विधानसभा सीटों को लेकर शुरू हुआ विरोध अब व्यापक जनआंदोलन में बदलता नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, आंदोलन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान अब तक 46 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि 1100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालात ऐसे हैं कि कई शहरों में बाजार, स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तर बंद पड़े हैं। इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। विवाद की जड़ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें हैं। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए निर्धारित हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। लंबे समय से स्थानीय संगठनों का एक वर्ग इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है। उनका तर्क है कि इन सीटों के कारण स्थानीय जनता के राजनीतिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले ने तब नया मोड़ लिया जब PoK सुप्रीम कोर्ट ने 7 जून को दायर याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए आरक्षण समाप्त करने की मांगों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है और इसे किसी सरकारी रियायत की तरह खत्म नहीं किया जा सकता। अदालत के इस फैसले के बाद जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने आंदोलन को और तेज कर दिया। संगठन ने फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, धरना और जनसभाओं का आह्वान किया, जिसके बाद हालात लगातार बिगड़ते चले गए। मुजफ्फराबाद, मीरपुर, पुंछ और रावलकोट जैसे कई प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंदोलन केवल आरक्षित सीटों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक नीतियों और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े व्यापक मुद्दों का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारी पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती की है। रिपोर्टों के मुताबिक, रेंजर्स और फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी के जवानों को संवेदनशील इलाकों में भेजा गया है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था, लेकिन आंदोलनकारी इसे दमनात्मक कार्रवाई बता रहे हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पों की भी खबरें सामने आई हैं। इस बीच प्रशासन ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के कई नेताओं के खिलाफ राजद्रोह के मामले दर्ज किए हैं। संगठन से जुड़े प्रमुख नेताओं शौकत नवाज मीर, ख्वाजा मेहरान और अन्य कार्यकर्ताओं पर सरकार विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। इससे आंदोलनकारियों में और नाराजगी बढ़ी है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता गया। प्रतिबंध के बावजूद संगठन के समर्थक विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे हैं और आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर चुके हैं। रावलकोट में JAAC के नेता उमर नजीर कश्मीरी का एक भाषण भी चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ दिनों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए थे, लेकिन हाल ही में उन्होंने एक कार्यक्रम में सरकार और सेना की आलोचना करते हुए घाटी से सुरक्षा बलों को हटाने की मांग की। खास बात यह रही कि इंटरनेट प्रतिबंधों के बावजूद उनका भाषण लाइव प्रसारित हुआ। स्थानीय स्तर पर इस बात की चर्चा है कि प्रसारण के लिए सैटेलाइट इंटरनेट तकनीक का उपयोग किया गया हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आंदोलन का असर आम लोगों के जीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बाजार बंद होने और परिवहन प्रभावित होने के कारण दवाइयों, खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारिक गतिविधियां लगभग ठप पड़ गई हैं और शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। PoK की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड सहित कई शहरों में प्रदर्शन आयोजित किए गए, जहां लोगों ने पाकिस्तानी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। न्यूयॉर्क में भी कुछ समूहों ने विरोध दर्ज कराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। भारत में भी इस घटनाक्रम को लेकर प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। श्रीनगर सहित कश्मीर के कई इलाकों में लोगों ने प्रदर्शन कर PoK में हुई मौतों पर चिंता जताई। विभिन्न सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्र जांच की मांग की है। कुछ नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्थाओं से मामले पर ध्यान देने की अपील भी की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/uproar-over-reserved-seats-in-pok-46-protesters-died-more/article-55832</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/uproar-over-reserved-seats-in-pok-46-protesters-died-more/article-55832</guid>
                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 15:39:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/pok-protest.jpg"                         length="154388"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीओके में हिंसा से 27 लोगों की मौत, चुनाव से पहले बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[आरक्षित सीटों को लेकर आंदोलन कर रहे संगठन पर प्रतिबंध के बाद भड़की हिंसा, पुलिसकर्मियों समेत कई लोगों की जान गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/27-people-died-due-to-violence-in-pok-tension-increased/article-55412"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pok-violence.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता और जन असंतोष खुलकर सामने आया है। क्षेत्र के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 27 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़े। शुरुआती जानकारी के मुताबिक मृतकों में चार पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जारी है, जबकि प्रदर्शनकारी सरकार पर दमनात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह विवाद विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर शुरू हुआ था, जो अब बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) लंबे समय से इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रही है। संगठन का आरोप है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय लोगों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है और सत्ता कुछ चुनिंदा समूहों तक सीमित रह जाती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो विभिन्न युद्धों और संघर्षों के दौरान जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच टकराव लगातार बढ़ता गया और आखिरकार हालात हिंसा तक पहुंच गए।</p>
<p style="text-align:justify;">तनाव उस समय और बढ़ गया जब पीओके सरकार ने 5 जून को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत JAAC पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को इसका कारण बताया। प्रतिबंध लगने के बाद पुलिस ने संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और कई समर्थकों को हिरासत में लिया गया। इसके विरोध में विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन शुरू हो गए। हालात तब ज्यादा बिगड़ गए जब संगठन के एक सदस्य की कथित पुलिस फायरिंग में मौत होने की खबर सामने आई। इस घटना के बाद समर्थक बड़ी संख्या में अस्पताल के शवगृह के बाहर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">रविवार को रावलकोट में स्थिति अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई। प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस और JAAC समर्थकों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला हिंसक हो गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। प्रशासन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर हथियारों से हमला किया, जबकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बल प्रयोग कर हालात को और बिगाड़ दिया। इस दौरान गोलीबारी और पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं, वहीं बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय प्रशासन के मुताबिक अब तक 30 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सुरक्षा एजेंसियां हिंसा फैलाने वालों की पहचान करने में जुटी हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं विपक्षी और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि सरकार राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए कठोर कदम उठा रही है। इस बीच सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव दिखाई दे रहा है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">आगामी विधानसभा चुनाव भी इस पूरे विवाद की एक बड़ी वजह हैं। पीओके में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनाव से पहले बढ़ता तनाव सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। यहां विधानसभा की कुल 53 सीटें हैं, जिनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है। बाकी सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। ऐसे समय में आरक्षित सीटों का मुद्दा चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में पीओके की राजनीति लगातार अस्थिर रही है। सरकारों में बदलाव, नेतृत्व संकट और राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष ने प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित किया है। 2021 के चुनावों के बाद बनी सरकार भी कई उतार-चढ़ाव से गुजरी। कई प्रधानमंत्रियों को बीच कार्यकाल में पद छोड़ना पड़ा और राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते रहे। ऐसे माहौल में जनता के बीच असंतोष बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/27-people-died-due-to-violence-in-pok-tension-increased/article-55412</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/27-people-died-due-to-violence-in-pok-tension-increased/article-55412</guid>
                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 15:33:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/pok-violence.jpg"                         length="194397"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        