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                <title>Temple Administration - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Temple Administration RSS Feed</description>
                
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                <title>महाकाल मंदिर में ‘पुष्पा’ गेटअप में VIP एंट्री, वीडियो वायरल</title>
                                    <description><![CDATA[साड़ी-ब्लाउज पहनकर पहुंचे युवक को मिली विशेष प्रवेश सुविधा, मंदिर परिसर में वीडियो और फोटो सामने आने के बाद कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vip-entry-video-in-pushpa-getup-in-mahakal-temple-goes/article-55431"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-temple-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में एक युवक की एंट्री और उससे जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में युवक फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार से प्रेरित वेशभूषा में नजर आ रहा है। उसने साड़ी-ब्लाउज पहन रखा था, पैरों में पायल, हाथों में चूड़ियां, कानों में टॉप्स और नाक में नथनी भी दिखाई दे रही थी। गले में नींबू की माला और अन्य आभूषण पहनकर वह मंदिर परिसर में घूमता नजर आया। मामला उस समय और चर्चा में आ गया जब वीडियो में उसे सामान्य श्रद्धालुओं की तरह नहीं बल्कि विशेष सुविधा के साथ मंदिर में प्रवेश करते देखा गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">महाकाल मंदिर में हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर कई नियम लागू हैं। मंदिर परिसर में मोबाइल से फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर भी प्रतिबंध है। इसके बावजूद वायरल वीडियो में युवक न केवल मंदिर परिसर के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देता है बल्कि उसके साथ मंदिर समिति के कुछ कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी भी नजर आते हैं। कई तस्वीरों और वीडियो क्लिप्स में कर्मचारी उसके साथ फोटो खिंचवाते दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली और नियमों के पालन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि युवक को विशेष प्रोटोकॉल के साथ मंदिर में प्रवेश दिया गया था। वायरल वीडियो में वह गणेश मंडपम तक पहुंचता दिखाई देता है। सामान्य दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर दर्शन करते हैं, ऐसे में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर युवक को यह सुविधा किस आधार पर दी गई। कुछ लोगों ने इसे नियमों के उल्लंघन का मामला बताया तो कुछ ने सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई। वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद यह मुद्दा शहर में चर्चा का विषय बन गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर अपलोड की गई थीं। दावा किया गया कि इन्हें एक ऐसे अकाउंट से साझा किया गया, जहां इसी वेशभूषा में बने अन्य वीडियो भी मौजूद हैं। वीडियो सामने आने के बाद कई श्रद्धालुओं ने नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि जब आम लोगों के लिए सख्त नियम लागू हैं तो फिर किसी व्यक्ति को विशेष छूट कैसे दी जा सकती है। सोशल मीडिया पर लोगों ने मंदिर प्रशासन से जवाब भी मांगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले ने तूल पकड़ा तो मंदिर प्रशासन को भी सफाई देनी पड़ी। महाकाल मंदिर प्रशासन के अनुसार वायरल वीडियो हाल का नहीं बल्कि फरवरी महीने का बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि वीडियो सामने आने के बाद तत्काल जांच कराई गई थी। जांच के दौरान यह पाया गया कि निर्धारित व्यवस्था का पालन नहीं किया गया था। इसके बाद संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे उसके पद से हटा दिया गया। प्रशासन का कहना है कि मंदिर की मर्यादा और नियमों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">अधिकारियों के अनुसार मंदिर परिसर में किसी को विशेष अनुमति देना या प्रतिबंधित क्षेत्रों में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी होने देना नियमों के खिलाफ है। यही कारण है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई की गई। हालांकि इस पूरे मामले में यह भी चर्चा रही कि वीडियो काफी समय बाद सार्वजनिक क्यों हुआ और अब जाकर इस पर बहस क्यों शुरू हुई। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है। महाकाल मंदिर देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की घटना तुरंत लोगों का ध्यान खींच लेती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 16:53:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>खजराना मंदिर के पुजारियों को हटाने की मांग, बहू ने दहेज प्रताड़ना मामले में प्रशासन से की कार्रवाई की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंची पीड़िता, जांच पूरी होने तक पुजारियों को पूजा कार्य और गर्भगृह से दूर रखने की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/demand-for-removal-of-khajrana-temple-priests-daughter-in-law-appeals-administration/article-55430"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/khajrana-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार के खिलाफ दर्ज दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले की शिकायतकर्ता डॉ. इंद्रा भट्ट मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचीं और प्रशासन से मांग की कि जांच पूरी होने तक संबंधित पुजारियों को मंदिर में पूजा-पाठ और गर्भगृह से दूर रखा जाए। इस मांग के साथ मामला धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉ. इंद्रा भट्ट ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनका विवाह मई 2025 में खजराना मंदिर से जुड़े पुजारी पुनित भट्ट के साथ हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष की ओर से दहेज की मांग शुरू हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मांग पूरी नहीं होने पर उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। शिकायत के अनुसार उन्हें अपमानित किया गया, मारपीट की गई और कई बार धमकियां भी दी गईं। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक रिश्ते को बचाने की कोशिश की, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की शिकायत महिला थाना इंदौर में दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद पुनित भट्ट सहित परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। एफआईआर में दहेज प्रताड़ना, मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने जैसी धाराएं शामिल हैं। पीड़िता का कहना है कि जब मामला न्यायालय और पुलिस जांच के स्तर पर पहुंच चुका है, तब तक संबंधित लोगों को मंदिर की धार्मिक गतिविधियों से अलग रखा जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जनसुनवाई में दिए गए आवेदन में डॉ. इंद्रा भट्ट ने विशेष रूप से मध्य प्रदेश श्री गणपति मंदिर खजराना (इंदौर) अधिनियम, 2003 का उल्लेख किया है। उनका तर्क है कि मंदिर एक विशेष अधिनियम के तहत संचालित होता है और यदि किसी पुजारी के खिलाफ गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो, तो जांच पूरी होने तक उसे धार्मिक जिम्मेदारियों से अलग करने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं का विश्वास भी बना रहेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिकायत में केवल दहेज प्रताड़ना का मामला ही नहीं उठाया गया है, बल्कि मंदिर परिसर में कथित अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। पीड़िता ने दावा किया है कि मंदिर परिसर में कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जो धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली दक्षिणा के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि इन आरोपों के समर्थन में उनके पास वीडियो और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले में पीड़िता के अधिवक्ता कृष्ण कुमार कुन्हारे ने कहा कि मंदिर अधिनियम के प्रावधानों के तहत यदि किसी व्यक्ति के आचरण से मंदिर की प्रतिष्ठा प्रभावित होने की आशंका हो, तो प्रशासक या जिला प्रशासन आवश्यक कदम उठा सकता है। उनका कहना है कि यह किसी को दोषी ठहराने की मांग नहीं है, बल्कि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होने तक प्रशासनिक स्तर पर एहतियाती कदम उठाने की मांग है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं अधिवक्ता डॉ. रुपाली राठौर ने भी कानूनी पक्ष रखते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं, जहां गंभीर आपराधिक मामलों में नाम आने के बाद संबंधित धार्मिक पदाधिकारियों को अस्थायी रूप से सेवा से अलग किया गया था। उनका कहना है कि इससे जांच प्रभावित नहीं होती और संस्थान की साख भी बनी रहती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर, इस पूरे मामले को लेकर मंदिर प्रशासन और संबंधित पक्षों की ओर से अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायत का परीक्षण किया जाएगा और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी निर्णय से पहले कानूनी पहलुओं और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">खजराना गणेश मंदिर मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख गणेश मंदिरों में गिना जाता है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर से जुड़े किसी भी विवाद का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। यही वजह है कि यह मामला अब केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मंदिर की व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ गया है। पीड़िता ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं करता है, तो वह सामाजिक संगठनों और समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगी। उनका कहना है कि वह इस मामले को राज्य स्तर तक ले जाएंगी ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 16:53:17 +0530</pubDate>
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