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                <title>YoungCricketer - दैनिक जागरण</title>
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                <title>वैभव सूर्यवंशी के छोटे भाई आशीर्वाद का धमाका, 119 गेंदों पर 168 रन ठोके</title>
                                    <description><![CDATA[लोकल टूर्नामेंट में 19 चौके और 6 छक्कों की मदद से मचाया तहलका, लगातार दूसरी बड़ी पारी से बढ़ी चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/vaibhav-suryavanshis-younger-brother-ashirwads-blast-scored-168-runs-in/article-56812"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/aashirwad-suryavanshi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिहार क्रिकेट के उभरते नाम वैभव सूर्यवंशी के छोटे भाई आशीर्वाद सूर्यवंशी ने एक बार फिर अपने शानदार प्रदर्शन से सबका ध्यान खींच लिया है। समस्तीपुर में खेले गए एक लोकल क्रिकेट टूर्नामेंट में 10 साल के आशीर्वाद ने 119 गेंदों पर 168 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उनकी इस पारी में 19 चौके और 6 छक्के शामिल रहे, जिसने पूरे मैच का रुख ही बदल दिया। यह मुकाबला ऋषभ-11 और वैशाली-11 के बीच खेला गया था, जिसमें आशीर्वाद की पारी की बदौलत उनकी टीम ने शानदार जीत दर्ज की। आशीर्वाद ने अपनी इस पारी की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए भी साझा की, जिससे उनकी चर्चा और तेज हो गई। लगातार दूसरे बड़े प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि वह भी अपने बड़े भाई वैभव सूर्यवंशी की तरह ही आक्रामक और प्रतिभाशाली बल्लेबाज के रूप में उभर रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने बिरौली के खिलाफ एक मैच में 87 गेंदों पर 103 रन बनाए थे, जिसमें 20 चौके और एक छक्का शामिल था। लगातार दो शानदार पारियों के बाद क्रिकेट प्रेमियों में उनके भविष्य को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> इतनी कम उम्र में इस तरह का प्रदर्शन दुर्लभ होता है। आशीर्वाद की बल्लेबाजी में आक्रामकता के साथ-साथ शॉट सिलेक्शन भी देखने लायक है। उनकी टाइमिंग और गेंद को समझकर खेलने की क्षमता उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। खास बात यह है कि वह दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं, जबकि उनके बड़े भाई वैभव बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं। हालांकि दोनों की बल्लेबाजी शैली में एक समानता जरूर है, वह है अटैकिंग अप्रोच। दोनों ही खिलाड़ी शुरुआत से ही गेंदबाजों पर दबाव बनाने में विश्वास रखते हैं। आशीर्वाद सूर्यवंशी अपने परिवार में सबसे छोटे हैं। उनके बड़े भाई वैभव सूर्यवंशी पहले ही भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुके हैं। वैभव इस समय भारतीय क्रिकेट का चर्चित नाम हैं और उन्हें हाल ही में अंतरराष्ट्रीय टी-20 सीरीज और अन्य महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों के लिए चुना गया है। 15 साल की उम्र में ही टीम इंडिया में जगह बनाकर उन्होंने कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। उन्होंने सबसे कम उम्र में भारतीय टीम में चयन का रिकॉर्ड बनाकर क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैभव ने कई दिग्गज खिलाड़ियों के रिकॉर्ड पीछे छोड़े हैं। वह भारतीय टीम में चुने जाने वाले सबसे युवा खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं। इसके अलावा उन्होंने घरेलू और आईपीएल स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन किया है। एक ही सीजन में 776 रन बनाकर उन्होंने ऑरेंज कैप अपने नाम की थी और साथ ही कई व्यक्तिगत पुरस्कार भी जीते थे। उनकी सबसे चर्चित उपलब्धि 36 गेंदों पर शतक रही, जिसने उन्हें देशभर में सुर्खियों में ला दिया था। आशीर्वाद और वैभव दोनों ही भाई क्रिकेट के प्रति जुनून और आक्रामक खेल शैली के लिए जाने जाते हैं। परिवार में पिता संजीव सूर्यवंशी और मां आरती सूर्यवंशी ने दोनों बच्चों के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। पिता खुद भी बच्चों की ट्रेनिंग और अभ्यास पर विशेष ध्यान देते हैं। परिवार का मानना है कि दोनों बच्चे आगे चलकर राज्य और देश के लिए बड़ा नाम कमा सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आशीर्वाद की बल्लेबाजी में खास बात यह है कि वह गेंद को खुलकर खेलते हैं और बड़े शॉट लगाने से नहीं हिचकते। उनकी पावर हिटिंग क्षमता और आत्मविश्वास उनकी उम्र के हिसाब से काफी आगे मानी जा रही है। स्थानीय कोच और क्रिकेट विशेषज्ञ भी उनके प्रदर्शन से प्रभावित हैं और मानते हैं कि यदि सही मार्गदर्शन मिलता रहा तो वह भविष्य में बड़ा नाम बन सकते हैं। लगातार दो बड़ी पारियों के बाद अब आशीर्वाद पर सभी की नजरें टिक गई हैं। सोशल मीडिया पर भी उनके शॉट्स और स्कोर तेजी से वायरल हो रहे हैं। क्रिकेट प्रेमी उन्हें भविष्य का उभरता सितारा मानने लगे हैं। हालांकि अभी वह शुरुआती स्तर पर खेल रहे हैं, लेकिन उनके प्रदर्शन ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि बिहार से एक और प्रतिभाशाली क्रिकेटर तैयार हो रहा है। वैभव और आशीर्वाद की जोड़ी ने बिहार क्रिकेट को एक नई पहचान दी है। जहां एक ओर वैभव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रख चुके हैं, वहीं दूसरी ओर आशीर्वाद धीरे-धीरे अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आशीर्वाद भी अपने बड़े भाई की तरह राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच पाते हैं या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 16:08:30 +0530</pubDate>
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                <title>मुंबई लीग से IPL तक का सपना, चिन्मय सुतार की नजर अब बड़े मंच पर</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई क्रिकेट लीग के ऑरेंज कैप विजेता चिन्मय सुतार ने बीमारी से वापसी की कहानी सुनाई, कहा- इस सीजन का लक्ष्य IPL फ्रेंचाइजी का ध्यान आकर्षित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/chinmay-sutars-dream-from-mumbai-league-to-ipl-now-eyes/article-55438"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chinmay-sutar.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुंबई क्रिकेट लीग में पिछले सीजन शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले युवा बल्लेबाज चिन्मय सुतार अब अपने क्रिकेट करियर के अगले बड़े लक्ष्य पर नजर लगाए हुए हैं। मराठा रॉयल्स के लिए खेलने वाले इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी का सपना अब इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL तक पहुंचने का है। आगामी मुंबई क्रिकेट लीग को वह अपने लिए एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं और उनका मानना है कि यदि इस बार भी उनका प्रदर्शन दमदार रहा तो IPL फ्रेंचाइजी टीमों का ध्यान उनकी ओर जरूर जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">चिन्मय सुतार ने हाल ही में अपने क्रिकेट सफर, शुरुआती संघर्ष, बीमारी के दौर और परिवार से मिले समर्थन को लेकर खुलकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि क्रिकेट उनके जीवन का हिस्सा बचपन से रहा है। महज पांच साल की उम्र में उन्होंने बल्ला थाम लिया था। उस समय उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि आगे चलकर क्रिकेट ही उनका पेशा बनेगा, लेकिन खेल के प्रति लगाव धीरे-धीरे जुनून में बदलता गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उनके क्रिकेट करियर की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके पिता राजेश सुतार रहे हैं। राजेश खुद भी क्रिकेट से जुड़े रहे हैं और उन्होंने अपने दौर में कई अच्छे खिलाड़ियों के साथ खेला। चिन्मय बताते हैं कि बचपन में वह अक्सर अपने पिता को मैदान पर खेलते हुए देखा करते थे। वहीं से उनके मन में क्रिकेट के प्रति रुचि पैदा हुई। घर में खेल का माहौल होने के कारण उन्हें शुरू से ही क्रिकेट की बारीकियां समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि जब भी वह अपने पिता को खेलते देखते थे तो उन्हें भी मैदान पर उतरने की इच्छा होती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">चिन्मय के अनुसार शुरुआती वर्षों में क्रिकेट उनके लिए सिर्फ एक खेल था, जिसे वह पूरी तरह आनंद के साथ खेलते थे। लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया, उन्हें प्रोफेशनल क्रिकेट की वास्तविक तस्वीर समझ में आने लगी। स्कूल स्तर के मुकाबलों से लेकर अंडर-14 और फिर क्लब क्रिकेट तक का सफर उनके लिए सीखने का महत्वपूर्ण दौर रहा। इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ प्रतिभा ही नहीं बल्कि अनुशासन, मेहनत और निरंतरता भी बेहद जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि उनका सफर हमेशा आसान नहीं रहा। जब वह लगभग 15 साल के थे, तब उन्हें एक गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा। यह समय उनके क्रिकेट करियर का सबसे कठिन दौर साबित हुआ। बीमारी के कारण उन्हें करीब 10 से 11 महीने तक मैदान से दूर रहना पड़ा। किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि लंबे समय तक खेल से दूर रहने का असर शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उस दौर को याद करते हुए चिन्मय बताते हैं कि यह उनके जीवन का बेहद भावुक और कठिन समय था। जब साथी खिलाड़ी मैदान पर अभ्यास कर रहे थे, तब वह इलाज और रिकवरी में व्यस्त थे। कई बार निराशा भी होती थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा और वापसी की तैयारी जारी रखी। उनका मानना है कि मुश्किल समय इंसान को मजबूत बनाता है और वही अनुभव आगे की राह में सबसे बड़ी ताकत साबित होते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे सफर में उनके पिता ने सबसे अहम भूमिका निभाई। चिन्मय कहते हैं कि उनके पिता सिर्फ उनके कोच नहीं बल्कि जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं। जब भी वह क्रिकेट या निजी जीवन में किसी कठिनाई का सामना करते हैं, उनके पिता हमेशा साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने बताया कि खराब प्रदर्शन हो या आत्मविश्वास की कमी, हर मुश्किल वक्त में पिता ने उन्हें संभाला और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। यही वजह है कि वह अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपने परिवार, खासकर पिता को देते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">खेल की बात करें तो चिन्मय खुद को मुख्य रूप से एक टॉप ऑर्डर बल्लेबाज मानते हैं। उनका कहना है कि बल्लेबाजी ही उनकी असली पहचान है और वह टीम के लिए ऊपर के क्रम में खेलना पसंद करते हैं। हालांकि जरूरत पड़ने पर वह स्पिन गेंदबाजी भी कर सकते हैं, लेकिन उनकी प्राथमिक भूमिका बल्लेबाज की ही रहती है। पिछले सीजन में मुंबई क्रिकेट लीग में उनके बल्ले से निकले रनों ने उन्हें ऑरेंज कैप दिलाई थी और इसी प्रदर्शन ने उन्हें क्रिकेट जगत में नई पहचान भी दिलाई। अब आगामी सीजन को लेकर उनकी तैयारियां जोरों पर हैं। चिन्मय का लक्ष्य सिर्फ रन बनाना नहीं बल्कि अपने खेल में और अधिक निखार लाना है। उनका मानना है कि मुंबई क्रिकेट लीग जैसे मंच युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा अवसर देते हैं। इसी वजह से वह इस सीजन को अपने करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव मान रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 17:25:54 +0530</pubDate>
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