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                <title>power distribution - दैनिक जागरण</title>
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                <title>बिलासपुर करंट हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, बिजली विभाग से मांगा विस्तृत जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[तीन लोगों की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान, हाईकोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था, इलेक्ट्रिक फेंसिंग और रोकथाम नीति पर मांगा शपथपत्र।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-court-strict-on-bilaspur-current-accident-demands-detailed-answer/article-58077"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-news-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों की मौत के मामले ने अब न्यायपालिका का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस गंभीर घटना पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मीडिया रिपोर्ट को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के मैनेजिंग डायरेक्टर और राज्य के ऊर्जा विभाग के सचिव को शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि राज्य में बिजली व्यवस्था की निगरानी, रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्थाएं लागू हैं तथा भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य के कई हिस्सों में खेतों, फार्महाउसों और निजी परिसरों के आसपास बिजली प्रवाहित फेंसिंग लगाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई लोग अपनी फसल, पशुओं या संपत्ति की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से बिजली युक्त तारों का उपयोग करते हैं, लेकिन इसकी चपेट में आने से अनजान लोगों की जान चली जाती है। अदालत ने माना कि यह केवल व्यक्तिगत लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था होना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी कहा कि वर्तमान में ऐसे मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर दिए जाते हैं, लेकिन केवल एफआईआर दर्ज कर देना पर्याप्त समाधान नहीं माना जा सकता। यदि लगातार एक जैसी घटनाएं दोहराई जा रही हैं, तो इसका अर्थ है कि रोकथाम के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। अदालत ने सरकार और बिजली विभाग से पूछा है कि क्या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई स्पष्ट नीति, दिशा-निर्देश या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू है। यदि नहीं, तो इसे तैयार करने और लागू करने की समय-सीमा भी बताई जाए। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस मामले में CSPDCL के मैनेजिंग डायरेक्टर को भी औपचारिक रूप से पक्षकार बनाया जाए। साथ ही ऊर्जा विभाग के सचिव और बिजली कंपनी से विस्तृत शपथपत्र मांगा गया है। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि बिजली ढांचे का निरीक्षण कितनी नियमितता से किया जाता है, जर्जर तारों और खुले विद्युत स्रोतों की पहचान और मरम्मत की क्या व्यवस्था है तथा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय की जाती है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिस घटना के आधार पर अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया, वह बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के भाड़म गांव की है। यहां करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल बन गया था। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर हाईकोर्ट ने मामले को जनहित से जुड़ा मानते हुए स्वतः सुनवाई शुरू की। अदालत का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। पिछले दो महीनों में बिलासपुर जिले में करंट लगने की अलग-अलग घटनाओं में आठ लोगों की जान जा चुकी है। इनमें कई मामले खेतों के आसपास लगे बिजली प्रवाहित तारों या जर्जर विद्युत लाइनों से जुड़े बताए गए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने बिजली सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पुराने और ढीले बिजली तार लंबे समय से मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने अपने अवलोकन में यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग का खतरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। कई बार घरेलू पशु और वन्यजीव भी इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते हैं। इसलिए यह विषय मानव सुरक्षा के साथ-साथ पशु संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सके। पूरे मामले पर राज्य सरकार और बिजली विभाग की ओर से विस्तृत जवाब का इंतजार है। अदालत के निर्देशों के बाद अब यह स्पष्ट होगा कि बिजली सुरक्षा को लेकर वर्तमान व्यवस्था कितनी प्रभावी है और भविष्य में किन सुधारात्मक कदमों की योजना बनाई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:11 +0530</pubDate>
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                <title>अडाणी एनर्जी बनी देश की सबसे बड़ी स्मार्ट मीटर कंपनी, ₹3,050 करोड़ में इंटेलिस्मार्ट का अधिग्रहण</title>
                                    <description><![CDATA[इंटेलिस्मार्ट की 100% हिस्सेदारी खरीदने के बाद अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के पास 4.7 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो होगा, बिजली वितरण क्षेत्र में बढ़ेगी कंपनी की पकड़।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/adani-energy-becomes-countrys-largest-smart-meter-company-acquires-intellismart/article-55498"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/adani-energy-solutions.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">देश के स्मार्ट मीटरिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) ने इंटेलिस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड का अधिग्रहण कर लिया है। करीब 3,050 करोड़ रुपए के इस सौदे के साथ ही कंपनी देश की सबसे बड़ी स्मार्ट मीटरिंग कंपनी बन गई है। इस अधिग्रहण के बाद अडाणी एनर्जी के पास कुल 4.7 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो हो जाएगा, जो भारतीय बिजली वितरण क्षेत्र में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंगलवार को सामने आई इस जानकारी के बाद ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में इसकी काफी चर्चा रही। इंटेलिस्मार्ट पहले से ही देश की प्रमुख स्मार्ट मीटरिंग कंपनियों में गिनी जाती है और इसके पास उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार तथा असम जैसे राज्यों में 2.2 करोड़ से ज्यादा स्मार्ट मीटरों का नेटवर्क मौजूद है। अब यह पूरा कारोबार अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के नियंत्रण में आ जाएगा। कंपनी को इंटेलिस्मार्ट की 100 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी मिलेगी, जिसके साथ उससे जुड़ी वित्तीय देनदारियां भी शामिल होंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह सौदा सिर्फ एक कारोबारी विस्तार नहीं बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते स्मार्ट ऊर्जा बाजार में लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है। केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से देशभर में पारंपरिक बिजली मीटरों की जगह स्मार्ट मीटर लगाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। इसका उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों की दक्षता बढ़ाना, लाइन लॉस कम करना और उपभोक्ताओं को पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था उपलब्ध कराना है। ऐसे समय में अडाणी एनर्जी का यह अधिग्रहण काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कंपनी के अनुसार अधिग्रहण से पहले AESL के पास 2.46 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटरों की ऑर्डर बुक थी। इंटेलिस्मार्ट के जुड़ने के बाद यह संख्या बढ़कर 4.7 करोड़ से ऊपर पहुंच जाएगी। इससे कंपनी न केवल स्मार्ट मीटरिंग के क्षेत्र में अग्रणी बनेगी बल्कि बड़े पैमाने पर संचालन की क्षमता भी हासिल करेगी। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पोर्टफोलियो के साथ कंपनी देश के विभिन्न राज्यों में बिजली वितरण सुधार कार्यक्रमों में और अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्मार्ट मीटरों को बिजली क्षेत्र में तकनीकी क्रांति का हिस्सा माना जा रहा है। इनकी मदद से उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत की रियल टाइम जानकारी मिलती है। साथ ही बिजली कंपनियों को भी खपत के आंकड़े तुरंत प्राप्त होते हैं, जिससे बिलिंग प्रक्रिया अधिक सटीक बनती है। बिजली चोरी रोकने, लाइन लॉस कम करने और उपभोक्ता शिकायतों को घटाने में भी इन मीटरों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही वजह है कि देशभर में इनके उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है स्मार्ट मीटरिंग बाजार आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने वाला है। सरकार की योजनाओं और डिजिटलीकरण की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इस क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ रहा है। अडाणी समूह का यह कदम भी उसी दिशा में एक बड़ा निवेश माना जा रहा है। इससे कंपनी को तकनीकी विशेषज्ञता, बड़े ग्राहक आधार और कई राज्यों में मौजूद परिचालन नेटवर्क का लाभ मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कंदर्प पटेल ने कहा कि इंटेलिस्मार्ट का अधिग्रहण कंपनी की निष्पादन क्षमता और तकनीकी ताकत को और मजबूत करेगा। उनके मुताबिक इस सौदे से बिजली वितरण क्षेत्र के आधुनिकीकरण में तेजी आएगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े स्तर पर संचालन से लागत कम होगी और दक्षता में सुधार देखने को मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">बिजली उपभोक्ताओं के लिए भी यह अधिग्रहण कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट मीटरों के विस्तार से गलत बिलिंग की शिकायतों में कमी आ सकती है। उपभोक्ता अपनी खपत पर बेहतर नियंत्रण रख सकेंगे और उन्हें समय पर सटीक बिल मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके अलावा बिजली वितरण कंपनियों के लिए भी राजस्व संग्रह में सुधार हो सकता है। 3,050 करोड़ रुपए का यह अधिग्रहण भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में इस वर्ष के प्रमुख सौदों में शामिल हो गया है। स्मार्ट मीटरिंग बाजार में अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस की स्थिति अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है और आने वाले समय में यह क्षेत्र कंपनी की विकास रणनीति का अहम आधार बन सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 13:25:10 +0530</pubDate>
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