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                <title>recruitment news - दैनिक जागरण</title>
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                <description>recruitment news RSS Feed</description>
                
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                <title>एमपी SI-सूबेदार भर्ती का अंतिम रिजल्ट जारी, 500 में 436 अभ्यर्थियों का चयन</title>
                                    <description><![CDATA[कर्मचारी चयन मंडल ने घोषित किया अंतिम परिणाम, ओबीसी वर्ग के संजय परमार प्रदेश में टॉपर बने; महिला और आरक्षित श्रेणियों में पर्याप्त पात्र उम्मीदवार नहीं मिलने से 64 पद खाली रह गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/final-result-of-mp-si-subedar-recruitment-released-436-candidates-selected/article-58134"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-si-result.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने लंबे इंतजार के बाद सब इंस्पेक्टर और सूबेदार भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम मंगलवार को घोषित कर दिया। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 500 पदों पर नियुक्तियां की जानी थीं, लेकिन सभी पद नहीं भर सके। अंतिम परिणाम के अनुसार केवल 436 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, जबकि 64 पद रिक्त रह गए। कर्मचारी चयन मंडल के मुताबिक महिला और अन्य आरक्षित श्रेणियों में निर्धारित मानकों के अनुसार पर्याप्त पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने के कारण सभी पदों पर चयन संभव नहीं हो पाया। रिजल्ट जारी होने के साथ ही पदवार, श्रेणीवार और संवर्गवार कटऑफ भी सार्वजनिक कर दिए गए हैं। अब चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन, मेडिकल परीक्षण और नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया पुलिस विभाग द्वारा पूरी की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस भर्ती परीक्षा में ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थी संजय परमार ने 595.98 अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। जारी मेरिट सूची के अनुसार टॉप-10 अभ्यर्थियों में पांच उम्मीदवार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से हैं। इसके अलावा तीन अभ्यर्थी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और दो उम्मीदवार अनारक्षित वर्ग से शामिल हैं। टॉप-10 में ओबीसी वर्ग की मजबूत मौजूदगी इस बार के परिणाम की प्रमुख विशेषताओं में गिनी जा रही है। परिणाम जारी होने के बाद सफल अभ्यर्थियों में खुशी का माहौल है, जबकि कई उम्मीदवार अब आगे की चयन प्रक्रिया की तैयारी में जुट गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कर्मचारी चयन मंडल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार लिखित परीक्षा के बाद कुल 5,113 अभ्यर्थियों को अगले चरण के लिए पात्र घोषित किया गया था। भर्ती नियमों के अनुसार रिक्त पदों के लगभग तीन गुना यानी 1,692 उम्मीदवारों को पुलिस विभाग ने शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) और साक्षात्कार के लिए बुलाया। अंतिम चयन लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के संयुक्त आधार पर किया गया। इसी प्रक्रिया के बाद अंतिम मेरिट सूची तैयार की गई और चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भर्ती प्रक्रिया के दौरान महिला और अन्य विशेष आरक्षित वर्गों में पर्याप्त पात्र उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण सभी पद भरना संभव नहीं हो सका। कर्मचारी चयन मंडल ने बताया कि नियमों के अनुसार कुछ रिक्त पदों का वर्गीकरण बदलने की प्रक्रिया भी अपनाई गई, ताकि अधिक से अधिक पद भरे जा सकें। इसके बावजूद निर्धारित पात्रता और चयन मानकों को पूरा करने वाले उम्मीदवार पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हुए। परिणामस्वरूप कुल 500 पदों में से केवल 436 पदों पर ही अंतिम चयन किया जा सका। शेष पद फिलहाल रिक्त रह गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों के अंक समान रहे, उनकी वरीयता भर्ती नियमों के अनुसार तय की गई। समान अंक की स्थिति में आयु और आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को आधार बनाया गया। इसके अलावा पूर्व सैनिक उम्मीदवारों को शासन के नियमों के अनुसार मुख्य चयन प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण में पांच प्रतिशत अतिरिक्त अंकों का लाभ दिया गया। इससे पहले भी भर्ती प्रक्रिया के दौरान इन नियमों की जानकारी अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराई गई थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतिम परिणाम के साथ विभिन्न पदों के कटऑफ अंक भी घोषित किए गए हैं। जारी सूची के अनुसार सूबेदार पद के लिए अंतिम कटऑफ 571.16 अंक रहा। विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) सब इंस्पेक्टर पद के लिए कटऑफ 497.27 अंक निर्धारित किया गया, जबकि जिला पुलिस बल के सब इंस्पेक्टर पद के लिए अंतिम कटऑफ 505.206 अंक रहा। अभ्यर्थी अपनी श्रेणी और संबंधित पद के अनुसार कटऑफ का मिलान कर सकते हैं। विस्तृत परिणाम और मेरिट सूची कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अब चयनित उम्मीदवारों के लिए अगला चरण दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल परीक्षण का होगा। पुलिस विभाग नियुक्ति से पहले सभी प्रमाण-पत्रों की जांच करेगा। इसके बाद सफल उम्मीदवारों को प्रशिक्षण और नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कर्मचारी चयन मंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि परिणाम में किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि सामने आती है तो आवश्यक संशोधन करने का अधिकार मंडल के पास सुरक्षित रहेगा। इसलिए अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें और आगे की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी समय-समय पर प्राप्त करते रहें।</p>
<p style="text-align:justify;">भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी होने के साथ हजारों अभ्यर्थियों का इंतजार खत्म हो गया है। पिछले कई महीनों से उम्मीदवार लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और साक्षात्कार के बाद अंतिम मेरिट सूची का इंतजार कर रहे थे। अब चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति प्रक्रिया की ओर बढ़ेंगे, जबकि जिन उम्मीदवारों का चयन नहीं हो सका, वे भविष्य की भर्तियों की तैयारी में जुटेंगे। इस भर्ती के जरिए प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर और सूबेदार जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिससे पुलिस बल को आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:15:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>MPPSC मेंस परीक्षा से रोक हटी, अभ्यर्थियों को बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[हाईकोर्ट ने दी परीक्षा कराने की अनुमति, लेकिन रिजर्वेशन और मेरिट विवाद पर अंतिम फैसला अभी बाकी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/ban-on-mppsc-mains-exam-lifted-big-relief-for-candidates/article-56376"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mppsc-mains-exam-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (Madhya Pradesh Public Service Commission) की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 को लेकर लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद आखिरकार फिलहाल एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार को इस परीक्षा पर लगी अंतरिम रोक को हटा दिया है, जिसके बाद अब परीक्षा आयोजित करने का रास्ता साफ हो गया है। करीब डेढ़ साल से अटकी इस प्रक्रिया से जुड़े हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से आगे की चयन प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे। यह फैसला हाईकोर्ट की युगलपीठ, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की बेंच ने सुनाया। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल मुख्य परीक्षा को लेकर अंतरिम राहत है और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मूल कानूनी एवं संवैधानिक मुद्दों पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को तय की गई है, जिसमें इन विवादों पर विस्तृत विचार किया जाएगा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से यह मांग की गई थी कि परीक्षा पर लगी रोक हटाई जाए ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितता में न रहे। दलील दी गई कि भर्ती प्रक्रिया पहले ही काफी लंबी हो चुकी है और इसे और रोके रखना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर अदालत ने परीक्षा आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी, लेकिन सभी कानूनी प्रश्नों को सुरक्षित रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे विवाद की जड़ में प्रारंभिक परीक्षा 2025 से जुड़े कई अहम मुद्दे हैं। सबसे बड़ा सवाल वर्गवार कटऑफ सार्वजनिक न किए जाने को लेकर उठाया गया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने विस्तृत कटऑफ जारी नहीं किया, जिससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत कटऑफ को खोलकर याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए थे। दूसरा बड़ा विवाद ओपन मेरिट सीटों को लेकर है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ओबीसी, एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के वे अभ्यर्थी, जिन्होंने सामान्य वर्ग के बराबर या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं, उन्हें अनारक्षित सीटों पर समायोजित किया जाना चाहिए। लेकिन आयोग की नीति को लेकर यह मुद्दा लगातार विवाद का कारण बना हुआ है। इसी तरह आयु सीमा में छूट पाने वाले अभ्यर्थियों के माइग्रेशन यानी सामान्य वर्ग में समायोजन के नियमों की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने इन्हीं सभी बिंदुओं को गंभीर मानते हुए पहले मुख्य परीक्षा पर रोक लगा दी थी। अब रोक हटने के बाद परीक्षा प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकेगी, लेकिन अंतिम निर्णय पर सबकी नजर बनी हुई है। इस मामले में यह भी कहा गया कि चयन प्रक्रिया लगातार लंबी होती जा रही है, जिससे अभ्यर्थियों की तैयारी और करियर दोनों प्रभावित हो रहे हैं। पहले जहां चयन एक साल में पूरा हो जाता था, वहीं अब यह प्रक्रिया डेढ़ से दो साल तक खिंच रही है। यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य सेवा परीक्षाओं के पिछले संस्करण भी कानूनी विवादों में फंसे रहे हैं। 2019 और 2023 की परीक्षाओं के मामले भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे थे, जहां लंबी सुनवाई के बाद चयन प्रक्रिया आगे बढ़ पाई थी। इस बार भी वही स्थिति बनती दिख रही है, जहां एक तरफ परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, वहीं दूसरी तरफ आरक्षण, मेरिट और माइग्रेशन जैसे मुद्दों पर अंतिम न्यायिक निर्णय का इंतजार जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:08:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की सीमा हटेगी, सीएम ने ड्राफ्ट निरस्त किया</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विवादित प्रस्तावित नियम वापस लेने के निर्देश दिए, अब दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों को अपात्र ठहराने वाला प्रावधान हटाकर नया मसौदा तैयार किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-limit-of-two-children-for-government-jobs-in-madhya/article-55515"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-government-jobs.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर बड़ा फैसला लेते हुए दो बच्चों की सीमा संबंधी विवादित प्रावधान को वापस लेने का निर्णय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026 के उस प्रस्तावित मसौदे को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को शासकीय सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रावधान शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद सामान्य प्रशासन विभाग को तत्काल प्रभाव से ड्राफ्ट हटाने और संशोधित प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार के इस कदम को लाखों युवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से इस प्रस्तावित नियम को लेकर प्रदेशभर में चर्चा चल रही थी। विभिन्न सामाजिक संगठनों, कर्मचारी संगठनों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच इस प्रावधान को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। कई लोगों का मानना था कि यह नियम बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के लिए अवसर सीमित कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग ने 6 जून 2026 को मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026 का प्रारूप जारी किया था। इस मसौदे में यह प्रावधान शामिल किया गया था कि जिन उम्मीदवारों की दो से अधिक जीवित संतान होंगी, उन्हें सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जा सकता है। जैसे ही यह प्रस्ताव सार्वजनिक हुआ, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसकी चर्चा शुरू हो गई। कई वर्गों ने इसे कठोर और विवादास्पद कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे जनसंख्या नियंत्रण से जोड़कर समर्थन भी किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरे मामले की समीक्षा की। बताया जा रहा है कि सरकार को विभिन्न पक्षों से सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुई थीं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मौजूदा ड्राफ्ट को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और इसे सरकारी पोर्टल से हटाया जाए। साथ ही नया संशोधित मसौदा तैयार किया जाए, जिसमें दो बच्चों की अधिकतम सीमा से जुड़ा प्रावधान शामिल न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">भोपाल में प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को लेकर काफी चर्चा रही। अधिकारियों के अनुसार सरकार का उद्देश्य ऐसा नियम बनाना है जो व्यावहारिक हो और व्यापक जनहित को ध्यान में रखे। इसी वजह से नए प्रारूप पर दोबारा काम किया जाएगा। माना जा रहा है कि विभाग जल्द ही संशोधित मसौदा सार्वजनिक कर सकता है, जिस पर फिर से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन युवाओं पर पड़ेगा जो आने वाले समय में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन मंडल और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित नियम लागू होने की स्थिति में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की पात्रता प्रभावित हो सकती थी। ऐसे में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अभ्यर्थियों के बीच राहत का माहौल देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वर्तमान में कार्यरत कई सरकारी कर्मचारी भी इस प्रस्ताव को लेकर चिंतित बताए जा रहे थे। कर्मचारियों के बीच यह आशंका थी कि भविष्य में सेवा संबंधी नियमों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया था, लेकिन प्रस्ताव सामने आने के बाद चर्चाओं का दौर लगातार जारी था। अब ड्राफ्ट वापस लिए जाने के बाद इन आशंकाओं पर भी विराम लग गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार ने जनभावनाओं और विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया है। हाल के वर्षों में कई राज्यों में दो बच्चों की नीति को लेकर अलग-अलग प्रकार की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में इसे लेकर कानूनी और सामाजिक बहस भी सामने आई है। मध्य प्रदेश में भी प्रस्तावित नियम के सार्वजनिक होते ही इसी तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">अनुसार नया मसौदा तैयार करते समय भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवहारिक बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी वर्ग के साथ अनावश्यक भेदभाव जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि संशोधित प्रारूप तैयार करने से पहले सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया जाए। मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस फैसले को राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता भी काफी हद तक समाप्त हो गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:06:00 +0530</pubDate>
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