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                <title>civic administration - दैनिक जागरण</title>
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                <description>civic administration RSS Feed</description>
                
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                <title>कोचिंग संस्थानों को निगम का 48 घंटे का अल्टीमेटम, शपथ पत्र नहीं दिया तो 10 जुलाई से होगी सीलिंग</title>
                                    <description><![CDATA[फायर सेफ्टी नियमों के पालन को लेकर नगर निगम सख्त, 69 कोचिंग संस्थानों को 30 दिन में सभी सुरक्षा इंतजाम पूरे करने के निर्देश; लापरवाही पर कार्रवाई तय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a4dd98f78cd2/article-58148"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/coaching-institutes.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छात्रों की सुरक्षा को लेकर नगर निगम ने शहर के कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय अटल भवन में अपर आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में 70 से अधिक कोचिंग संचालकों और भवन स्वामियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि तय समय सीमा के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया तो 10 जुलाई से संस्थानों को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सीधे कार्रवाई होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम ने शहर के 69 कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अगले 48 घंटे के भीतर, यानी 9 जुलाई की शाम तक 200 रुपए के न्यायिक स्टाम्प पर शपथ पत्र प्रस्तुत करें। इस शपथ पत्र में यह लिखित आश्वासन देना होगा कि संबंधित संस्थान अगले 30 दिनों के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े सभी आवश्यक प्रबंध पूरे कर देंगे। इसके साथ ही कोचिंग संचालकों को 15 दिन के भीतर यह भी बताना होगा कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब तक क्या-क्या काम किए गए हैं और आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने साफ कहा कि यदि निर्धारित समय में शपथ पत्र जमा नहीं किया गया या सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमी पाई गई तो बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक के दौरान कई कोचिंग संचालकों ने यह तर्क दिया कि जिस भवन में वे संस्थान चला रहे हैं, वह उनकी निजी संपत्ति नहीं है और भवन मालिकों की जिम्मेदारी है कि वे फायर सेफ्टी के इंतजाम करें। इस पर नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया कि छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल भवन स्वामी पर नहीं छोड़ी जा सकती। निगम के अधिकारियों ने कहा कि चाहे भवन किराए का हो या स्वयं का, कोचिंग संस्थान संचालकों को ही फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने और उसका खर्च वहन करना होगा। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में कोचिंग संस्थानों के लिए लगभग 20 बिंदुओं वाली सुरक्षा गाइडलाइन का पालन अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए। इनमें सबसे प्रमुख निर्देश यह है कि किसी भी भवन में ऑटोमैटिक लॉक वाले दरवाजे नहीं लगाए जाएंगे। सभी भवनों में कम से कम दो आपातकालीन निकास द्वार होना अनिवार्य रहेगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में छात्र और कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकल सकें। इन निकास मार्गों के आसपास किसी भी प्रकार का ज्वलनशील पदार्थ, विद्युत उपकरण या अन्य अवरोधक सामग्री नहीं रखी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम ने बेसमेंट के उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। गाइडलाइन के अनुसार बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोर के रूप में ही किया जा सकेगा। यदि किसी भवन का बेसमेंट 200 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल का है तो वहां स्वचालित स्प्रिंकलर सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा भवनों में लगाए गए फायर पंपों को इस तरह जोड़ा जाएगा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी वे जनरेटर की बायपास लाइन के माध्यम से लगातार काम करते रहें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जनरेटर को किसी भी स्थिति में निकास मार्ग या रिफ्यूज एरिया में नहीं रखा जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने नियमित फायर ऑडिट और विद्युत ऑडिट को भी अनिवार्य किया है। प्रत्येक वर्ष भवन का फायर ऑडिट और इलेक्ट्रिकल ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट निगम को सौंपनी होगी। इसके साथ ही हर चार महीने में विद्यार्थियों और स्टाफ के लिए मॉक ड्रिल आयोजित करना भी जरूरी होगा। संस्थान के कर्मचारियों को अग्निशमन यंत्र चलाने का प्रशिक्षण देना होगा, जबकि सुरक्षा गार्ड को हाइड्रेंट सिस्टम के संचालन की जानकारी होना आवश्यक होगा। निगम का मानना है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सही उपयोग भी सभी संबंधित लोगों को आना चाहिए।</p>
<p>नगर निगम का कहना है कि हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में कोचिंग संस्थानों और शैक्षणिक भवनों में आग लगने जैसी घटनाओं ने सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में शहर के सभी कोचिंग संस्थानों में समय रहते आवश्यक सुधार कराना जरूरी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी संस्था को परेशान करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है। आने वाले दिनों में निरीक्षण अभियान और तेज किया जाएगा तथा जिन संस्थानों में नियमों का पालन नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:16:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फायर सेफ्टी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- टेंडर नहीं, जमीन पर कब दिखेगा काम</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फायर सुरक्षा व्यवस्था पर जताई नाराजगी, सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी, जिला प्रशासन ने भी जांच अभियान तेज किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a3e422ac159a/article-57027"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-high-court-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लखनऊ में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड के बाद देशभर में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की अग्निशमन व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि केवल टेंडर जारी करने या योजनाओं की जानकारी देने से काम नहीं चलेगा। लोगों की सुरक्षा के लिए जमीन पर वास्तविक काम दिखाई देना चाहिए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से फायर ब्रिगेड के आधुनिक वाहनों और उपकरणों की खरीद से जुड़े सभी टेंडरों की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत की इस टिप्पणी के बाद प्रशासनिक व्यवस्था भी सक्रिय नजर आने लगी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वर्षों से फायर सेफ्टी को मजबूत बनाने की बातें हो रही हैं, लेकिन कई योजनाएं अब भी कागजों तक सीमित दिखाई देती हैं। यदि टेंडर जारी हो चुके हैं तो यह भी बताया जाना चाहिए कि वर्क ऑर्डर कब जारी हुए और काम किस स्तर तक पहुंचा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जा सकती। दरअसल यह मामला तब चर्चा में आया जब हाल ही में मोपका क्षेत्र में स्थित विद्युत वितरण कंपनी के सब स्टेशन और आसपास की दुकानों में आग लगने की घटना सामने आई। इस घटना के बाद मीडिया रिपोर्टों में राज्य की फायर सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को प्रमुखता से उठाया गया। इन्हीं खबरों का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की। अदालत ने राज्य शासन से शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब भी तलब किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य में करीब 72.70 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहनों और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा 16 नए फायर स्टेशन स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है। हालांकि कई जिलों में अब तक फायर स्टेशन के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है, जिसके कारण परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। अदालत ने इस जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि केवल योजनाओं और टेंडर की जानकारी पर्याप्त नहीं है। आम लोगों को सुरक्षा तभी मिलेगी जब ये परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देंगी। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2020 में कई नए फायर स्टेशन बनाने की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन वर्षों बाद भी कई स्थानों पर जमीन का चयन नहीं हो पाया। राज्य के कुछ जिलों में भूमि उपलब्ध करा दी गई है और वहां निर्माण के लिए धनराशि भी जारी की जा चुकी है, जबकि कई अन्य जिलों में अब तक जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। अदालत ने इस देरी पर भी चिंता जताई और शासन से स्पष्ट समयसीमा बताने को कहा है। हाईकोर्ट की सख्ती के बीच जिला प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने शहर के सभी कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल, व्यावसायिक परिसरों और बहुमंजिला इमारतों की व्यापक जांच कराने के आदेश दिए हैं। इसके लिए जिला स्तर और अनुविभाग स्तर पर अलग-अलग जांच समितियों का गठन किया गया है। प्रत्येक समिति की अध्यक्षता संबंधित एसडीएम करेंगे, जबकि पुलिस, नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और अन्य विभागों के अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रशासन ने इन समितियों को दस दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित संस्थानों में फायर एनओसी है या नहीं, आपातकालीन निकासी मार्ग मौजूद हैं या नहीं और आग लगने की स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं या नहीं। यदि किसी भवन में गंभीर लापरवाही पाई जाती है तो पहले सुधार के निर्देश दिए जाएंगे और निर्देशों का पालन नहीं होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में नगर निगम ने शहर के छह कोचिंग संस्थानों की जांच भी की थी। जांच में एक संस्थान में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता पाया गया, जिसके बाद उसे सील कर दिया गया। अन्य पांच संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा ताकि किसी भी संस्थान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी न हो। जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि संबंधित विभागों के पास शहर में संचालित कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला इमारतों की पूरी और अद्यतन सूची उपलब्ध नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने फायर विभाग के रिकॉर्ड और फायर ऑडिट को जांच का मुख्य आधार बनाने का फैसला किया है। जिन संस्थानों ने अब तक फायर एनओसी नहीं ली है या जिनका फायर ऑडिट लंबित है, वहां विशेष रूप से निरीक्षण किया जाएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अग्नि सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। आम लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और सरकार को इसके लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी, जब राज्य सरकार को फायर उपकरणों की खरीद, नए फायर स्टेशन निर्माण और अन्य लंबित कार्यों की अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 15:02:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रायपुर महापौर का सख्त संदेश, ठेकेदारों के साथ लापरवाह अफसरों पर भी होगी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[छह घंटे चली समीक्षा बैठक में विकास कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी, करबला तालाब परियोजना की खामियों को लेकर अधिकारियों को लगाई फटकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/raipur-mayors-strict-message-action-will-be-taken-against-negligent/article-56092"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-mayor-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे ने शहर में चल रहे विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और परियोजनाओं में सामने आ रही खामियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। निगम मुख्यालय में सोमवार को करीब छह घंटे तक चली समीक्षा बैठक में महापौर ने अधिकारियों और अभियंताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी निर्माण कार्य में गड़बड़ी पाए जाने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है तो उसकी निगरानी करने वाले अधिकारी और इंजीनियर भी जवाबदेही से बच नहीं सकते। बैठक के दौरान महापौर ने विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। इस दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जहां कार्यों में देरी, दस्तावेजी खामियां और निगरानी में लापरवाही की बात सामने आई। महापौर ने अधिकारियों से कहा कि विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका लाभ समय पर आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अपर आयुक्त को निर्देश दिए कि जिन अधिकारियों की निगरानी में लापरवाही सामने आई है, उनकी जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा करबला तालाब विकास योजना को लेकर हुई। समीक्षा के दौरान इस परियोजना से जुड़े कई दस्तावेजों और कार्यों में अनियमितताओं की जानकारी सामने आई। बताया गया कि मेजरमेंट बुक (एमबी) में कुछ त्रुटियां पाई गई हैं, जिसके बाद महापौर ने संबंधित अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास परियोजना में रिकॉर्ड और दस्तावेजों की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि कागजी कार्यवाही में ही गड़बड़ी होगी तो परियोजना की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों प्रभावित होंगी। महापौर ने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेजों में त्रुटियां और निर्माण कार्यों में लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता के पैसे से होने वाले कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में केवल ठेकेदारों पर कार्रवाई कर जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी जा सकती, बल्कि निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कई विकास कार्यों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन जमीन पर उनका काम शुरू नहीं हो पाया है। इस पर महापौर ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने के बाद उनका समय पर क्रियान्वयन होना चाहिए। यदि काम शुरू होने में अनावश्यक देरी हो रही है तो इसके कारणों की जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्ज की जानी चाहिए। महापौर ने कहा कि रायपुर तेजी से विकसित हो रहा शहर है और यहां की बढ़ती आबादी को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की जिम्मेदारी है। ऐसे में विकास कार्यों में देरी का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित परियोजनाओं की सूची तैयार की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक परियोजना की वर्तमान स्थिति का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं की अलग से समीक्षा की जाएगी। जिन मामलों में लापरवाही या अनावश्यक देरी पाई जाएगी, वहां जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। महापौर ने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा दोनों पर विशेष ध्यान देना होगा, क्योंकि जनता परिणाम देखना चाहती है। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, 15वें वित्त आयोग की योजनाएं, प्रधानमंत्री आवास योजना, सांसद निधि, विधायक निधि, महापौर निधि, पार्षद निधि और सामान्य निधि से संचालित विभिन्न विकास कार्यों की भी जोनवार समीक्षा की गई। अधिकारियों ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिस पर महापौर ने कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल बजट खर्च करना नहीं बल्कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक जोन में चल रहे कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का पालन हो। महापौर ने कहा कि कई बार परियोजनाएं समय पर पूरी तो हो जाती हैं, लेकिन गुणवत्ता में कमी के कारण कुछ ही समय बाद समस्याएं सामने आने लगती हैं। इसलिए गुणवत्ता और समयसीमा दोनों को समान महत्व दिया जाना चाहिए। करीब छह घंटे तक चली इस समीक्षा बैठक में अपर आयुक्त लोकेश्वर साहू, विनोद पाण्डेय, कृष्णा खटीक, मुख्य अभियंता संजय बागड़े, अधीक्षण अभियंता राजेश राठौर, इमरान खान, सभी जोन कमिश्नर, कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता, उप अभियंता और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदार मौजूद रहे। बैठक के अंत में महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाले समय में विकास कार्यों की नियमित समीक्षा जारी रहेगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:27:31 +0530</pubDate>
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                <title>रायपुर में स्ट्रीट डॉग्स के लिए फीडिंग जोन तय, अब निर्धारित जगहों पर ही मिलेगा भोजन</title>
                                    <description><![CDATA[हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने शहर के सभी 70 वार्डों में फीडिंग जोन बनाए, विवाद कम करने और आवारा कुत्तों के बेहतर प्रबंधन पर रहेगा जोर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/feeding-zone-fixed-for-street-dogs-in-raipur-now-food/article-55518"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-street-dogs.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने को लेकर लंबे समय से चल रहे विवादों के बीच नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। हाईकोर्ट के निर्देशों के पालन में शहर के सभी 70 वार्डों में स्ट्रीट डॉग्स के लिए विशेष फीडिंग जोन निर्धारित कर दिए गए हैं। अब पशु प्रेमी केवल इन तय स्थानों पर ही आवारा कुत्तों को भोजन करा सकेंगे। निगम की ओर से इन स्थानों पर सूचना बोर्ड भी लगाए जा रहे हैं ताकि लोगों को नियमों की स्पष्ट जानकारी मिल सके और भविष्य में अनावश्यक विवादों से बचा जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के कई इलाकों में पिछले कुछ वर्षों से आवारा कुत्तों को खाना खिलाने को लेकर रहवासियों और पशु प्रेमियों के बीच मतभेद देखने को मिलते रहे हैं। कई बार स्थानीय लोगों ने शिकायत की कि रिहायशी इलाकों में बड़ी संख्या में कुत्तों के इकट्ठा होने से बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को परेशानी होती है। दूसरी ओर पशु प्रेमियों का कहना था कि जानवरों को भोजन देना उनका नैतिक दायित्व है। इसी खींचतान के चलते कई मामले नगर निगम और प्रशासन तक पहुंचे थे। अब हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद इस समस्या का व्यवस्थित समाधान निकालने की कोशिश की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के सभी जोनों में ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं जहां स्ट्रीट डॉग्स को सुरक्षित तरीके से भोजन कराया जा सके। इनमें खाली मैदान, सार्वजनिक स्थल, तालाब के आसपास के क्षेत्र, सामुदायिक भवन परिसर, मुक्तिधाम के आसपास की जगहें और कुछ खाली प्लॉट शामिल किए गए हैं। इन स्थानों का चयन इस तरह किया गया है कि आम नागरिकों की आवाजाही प्रभावित न हो और कुत्तों को भी भोजन उपलब्ध कराया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम का कहना है कि फीडिंग जोन बनाए जाने का मुख्य उद्देश्य व्यवस्था को नियंत्रित करना और दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाना है। अधिकारियों का मानना है कि जब भोजन कराने के लिए तय स्थान उपलब्ध होंगे तो रिहायशी इलाकों में कुत्तों की भीड़ कम होगी और विवाद की स्थिति भी नहीं बनेगी। इसके अलावा इन स्थानों की निगरानी करना भी आसान होगा, जिससे स्ट्रीट डॉग्स से जुड़ी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस नई व्यवस्था के साथ नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवारा कुत्तों से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी। यदि किसी क्षेत्र से शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित कुत्तों को पकड़कर उनकी स्वास्थ्य जांच की जाएगी। इसके बाद एनिमल बर्थ कंट्रोल यानी एबीसी नियमों के तहत आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इनमें डी-वॉर्मिंग, एंटी रेबीज टीकाकरण और नसबंदी जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। निगम का दावा है कि इससे कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर समय-समय पर चिंता भी जताई जाती रही है। कई इलाकों में कुत्तों के झुंड के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। वहीं पशु कल्याण से जुड़े संगठन लगातार यह मांग करते रहे हैं कि जानवरों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए और उनके भोजन तथा स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाए। ऐसे में फीडिंग जोन की व्यवस्था को दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया कदम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि लोगों को अपने वार्ड में निर्धारित फीडिंग जोन की जानकारी स्थानीय सूचना बोर्डों और जोन कार्यालयों से मिल सकेगी। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि नागरिकों को इस नई व्यवस्था के बारे में जागरूक किया जाए। आने वाले दिनों में व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाने की भी योजना बनाई जा रही है ताकि लोग नियमों का पालन करें और व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय प्रशासन का मानना है कि यदि नागरिक निर्धारित स्थानों पर ही कुत्तों को भोजन कराएंगे तो शहर में पशु प्रबंधन से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान निकल सकता है। इससे कुत्तों की निगरानी, टीकाकरण और स्वास्थ्य संबंधी कार्यों को भी बेहतर तरीके से अंजाम दिया जा सकेगा। साथ ही आवारा कुत्तों को लेकर होने वाले विवादों और शिकायतों में भी कमी आने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:29:08 +0530</pubDate>
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