<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/nia-court/tag-17488" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>NIA Court - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/17488/rss</link>
                <description>NIA Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ न्यायपालिका में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 17 न्यायिक अधिकारियों के तबादले</title>
                                    <description><![CDATA[अजय सिंह राजपूत बने NIA कोर्ट के स्पेशल जज, ओमप्रकाश जायसवाल को हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) की जिम्मेदारी; कई जिलों में जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के पदों पर बदलाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-administrative-reshuffle-in-chhattisgarh-judiciary-transfer-of-17-judicial/article-57783"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-high-court-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की न्यायिक व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए उच्च न्यायिक सेवा संवर्ग के 17 न्यायिक अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापनाओं के आदेश जारी किए हैं। रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी इस आदेश के तहत जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायालयों के न्यायाधीशों और हाईकोर्ट में पदस्थ कई वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। न्यायपालिका में इस व्यापक प्रशासनिक पुनर्गठन को न्यायिक कार्यों की बेहतर निगरानी, प्रशासनिक संतुलन और मामलों के प्रभावी निपटारे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जारी आदेश के अनुसार, जगदलपुर के प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत को अब स्पेशल जज (NIA कोर्ट), जगदलपुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जुड़े संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली इस अदालत में उनकी नियुक्ति को अहम माना जा रहा है। वहीं, हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी के सचिव ओमप्रकाश जायसवाल को हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) नियुक्त किया गया है। न्यायिक प्रशासन और अदालतों के संचालन में रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, बलौदाबाजार के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अब्दुल जाहिद कुरैशी को हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार (विजिलेंस) नियुक्त किया गया है। यह पद न्यायिक व्यवस्था में अनुशासन, निगरानी और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं, बलौदाबाजार के प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार वर्मा को छत्तीसगढ़ न्यायिक अकादमी, बिलासपुर में एडिशनल डायरेक्टर बनाया गया है, जहां वे न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने बिलासपुर, रायपुर, बलरामपुर, सारंगढ़ और अन्य जिलों में भी कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। द्वितीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर रूपनारायण पात्रे को हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी का सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, सिद्धार्थ अग्रवाल को द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जगदलपुर से पदोन्नत करते हुए प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जगदलपुर बनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार किरण कुमार जांगड़े को प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बलरामपुर-रामानुजगंज नियुक्त किया गया है। विनय कुमार प्रधान को एफटीसी (POCSO), रायपुर से रायपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट में पदस्थ किया गया है। वहीं, डमरूधर चौहान को षष्ठम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रायपुर से स्थानांतरित कर दशम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रायपुर बनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">तबादला सूची में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नए दायित्व भी तय किए गए हैं। विनिता वारनेर को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सूरजपुर से बलौदाबाजार भेजा गया है। वहीं, थामस एक्का को प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, सूरजपुर से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सूरजपुर नियुक्त किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पेशल जज (NIA), जगदलपुर के पद पर कार्यरत संगीता नवीन तिवारी को प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बलौदाबाजार बनाया गया है। डॉ. मनोज कुमार प्रजापति को प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बलरामपुर-रामानुजगंज से सारंगढ़ स्थानांतरित किया गया है। अमित राठौर को द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सारंगढ़ से रायपुर भेजा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) पद पर कार्यरत सुमित कपूर को जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रायपुर नियुक्त किया गया है। वहीं, छत्तीसगढ़ न्यायिक अकादमी के एडिशनल डायरेक्टर अमित कुमार कोहली को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बलरामपुर-रामानुजगंज की जिम्मेदारी दी गई है। इन नियुक्तियों को न्यायिक अनुभव और प्रशासनिक दक्षता के आधार पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की ओर से जारी यह आदेश आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है। संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय के भीतर अपने नए पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायिक प्रशासन से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि समय-समय पर इस तरह के स्थानांतरण से न्यायिक व्यवस्था में कार्यकुशलता बढ़ती है और विभिन्न जिलों में लंबित मामलों के प्रभावी निपटारे में भी सहायता मिलती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-administrative-reshuffle-in-chhattisgarh-judiciary-transfer-of-17-judicial/article-57783</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-administrative-reshuffle-in-chhattisgarh-judiciary-transfer-of-17-judicial/article-57783</guid>
                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:26:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/chhattisgarh-high-court-%288%29.jpg"                         length="182798"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्तर में NIA की विशेष अदालत शुरू, नक्सल मामलों की सुनवाई होगी तेज</title>
                                    <description><![CDATA[जगदलपुर को मिला विशेष अधिकार क्षेत्र, लंबे समय से लंबित संवेदनशील मामलों के निपटारे की बढ़ी उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/nia-special-court-started-in-bastar-hearing-of-naxal-cases/article-55529"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bastar-nia-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">बस्तर संभाग में नक्सल मामलों की सुनवाई को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग आखिरकार पूरी हो गई है। केंद्र सरकार ने जगदलपुर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत की स्थापना को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के बाद जगदलपुर स्थित नामित अपर सत्र न्यायालय को अब एनआईए के विशेष न्यायालय के रूप में अधिसूचित किया गया है। इस फैसले को बस्तर के न्यायिक ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच किए गए मामलों की सुनवाई स्थानीय स्तर पर ही की जा सकेगी, जिससे वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बस्तर क्षेत्र लंबे समय से नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है। यहां हुए कई बड़े हमले और संवेदनशील घटनाएं राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनीं। ऐसे मामलों की जांच अक्सर एनआईए को सौंपी जाती रही है, लेकिन सुनवाई के लिए अलग-अलग अदालतों पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे न्यायिक प्रक्रिया में समय अधिक लगता था और कई बार गवाहों, जांच अधिकारियों तथा पक्षकारों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन चुनौतियों में काफी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक यह फैसला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और राज्य सरकार से परामर्श के बाद लिया गया है। विशेष अदालत का अधिकार क्षेत्र बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों तक रहेगा। इनमें दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर और बस्तर जिले सहित अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्र शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि अदालत केवल एनआईए द्वारा जांच किए गए मामलों की सुनवाई करेगी। इससे मामलों के संचालन में विशेषज्ञता भी बढ़ेगी और प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">बस्तर में कई ऐसे मामले हैं जो वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित हैं। झीरम घाटी हमला, भाजपा नेता भीमा मंडावी की हत्या, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के कई नक्सली हमले जैसे मामलों को देश के सबसे संवेदनशील मामलों में गिना जाता है। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी और इनके राजनीतिक तथा सुरक्षा संबंधी प्रभाव भी काफी व्यापक रहे हैं। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। एनआईए भी समय-समय पर इस संबंध में अपनी जरूरत जाहिर कर चुकी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय स्तर पर अदालत स्थापित होने से सबसे अधिक राहत गवाहों और जांच अधिकारियों को मिलने की उम्मीद है। अब उन्हें सुनवाई के लिए दूर-दराज के शहरों की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। कई मामलों में गवाहों की अनुपस्थिति या समय पर पेशी नहीं हो पाने के कारण सुनवाई प्रभावित होती थी। नई अदालत के गठन से दस्तावेजों की उपलब्धता, केस डायरी की प्रस्तुति और अन्य न्यायिक प्रक्रियाएं भी पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएंगी। इससे मामलों के शीघ्र निपटारे की संभावना मजबूत हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में न्यायिक संस्थाओं की मजबूत मौजूदगी लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करती है। जब गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा होता है तो लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है। बस्तर जैसे क्षेत्र में, जहां लंबे समय तक सुरक्षा चुनौतियां बनी रही हैं, वहां इस तरह की विशेष अदालत का गठन प्रशासनिक और न्यायिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय लोगों के बीच भी इस फैसले को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि इससे न केवल लंबित मामलों को गति मिलेगी बल्कि पीड़ित परिवारों को भी न्याय मिलने की प्रक्रिया तेज होगी। वहीं सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि विशेष अदालत के माध्यम से जांच और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा। जगदलपुर में स्थापित यह विशेष अदालत बस्तर के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में यह अदालत नक्सल हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई में कितनी तेजी ला पाती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/nia-special-court-started-in-bastar-hearing-of-naxal-cases/article-55529</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/nia-special-court-started-in-bastar-hearing-of-naxal-cases/article-55529</guid>
                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:08:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/bastar-nia-court.jpg"                         length="147963"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        