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                <title>football - दैनिक जागरण</title>
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                <title>फ्रांस लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में, मोरक्को को 2-0 से हराकर रचा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[कप्तान किलियन एम्बाप्पे और उस्मान डेम्बेले के गोल से मिली जीत, एम्बाप्पे ने मेसी के वर्ल्ड कप गोल रिकॉर्ड की बराबरी की; लंदन में जश्न के बीच हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/france-created-history-by-defeating-morocco-2-0-in-the-world/article-58352"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lionel-messi-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस ने एक बार फिर अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरी बार सेमीफाइनल में जगह बना ली है। क्वार्टर फाइनल मुकाबले में फ्रांसीसी टीम ने मोरक्को को 2-0 से हराकर न सिर्फ जीत दर्ज की, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि पिछले कई वर्षों से विश्व फुटबॉल में उसकी बादशाहत कायम है। इस मुकाबले में कप्तान किलियन एम्बाप्पे और उस्मान डेम्बेले ने शानदार प्रदर्शन किया। दोनों खिलाड़ियों के गोल की बदौलत फ्रांस ने मुकाबले पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा और मोरक्को की चुनौती को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया। इस जीत के साथ फ्रांस लगातार तीसरे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंच गया। इससे पहले टीम 2018 और 2022 में भी अंतिम चार में पहुंची थी। अब उसकी नजर लगातार तीसरी बार फाइनल में जगह बनाने और एक और विश्व कप खिताब जीतने पर होगी। सेमीफाइनल में फ्रांस का सामना स्पेन और बेल्जियम के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से होगा।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lionel-messi-(5).jpg" alt="Lionel Messi" width="1366" height="858"></img></p>
<p>मैच की शुरुआत से ही फ्रांस ने आक्रामक अंदाज अपनाया। शुरुआती मिनटों में ही किलियन एम्बाप्पे ने गोल करने की कोशिश की, लेकिन मोरक्को के गोलकीपर यासीन बूनू ने शानदार बचाव करते हुए टीम को शुरुआती झटका लगने से बचा लिया। इसके बाद भी फ्रांस लगातार हमले करता रहा। दायो उपामेकानो, उस्मान डेम्बेले और माइकल ओलीसे ने कई मौके बनाए, लेकिन मोरक्को की मजबूत रक्षापंक्ति ने पहले हाफ तक मुकाबले को गोलरहित बनाए रखा। पहले हाफ का सबसे अहम पल 26वें मिनट में आया, जब बॉक्स के भीतर एम्बाप्पे को गिराए जाने पर फ्रांस को पेनल्टी मिली। पूरी दुनिया की निगाहें एम्बाप्पे पर थीं, लेकिन मोरक्को के गोलकीपर यासीन बूनू ने शानदार डाइव लगाकर उनका शॉट रोक दिया। इस बचाव ने मोरक्को के खिलाड़ियों और समर्थकों में नई उम्मीद जगा दी और पहला हाफ बिना किसी गोल के समाप्त हुआ।दूसरे हाफ में फ्रांस ने अपनी रणनीति में और आक्रामकता दिखाई। टीम लगातार गेंद पर कब्जा बनाए रही और मोरक्को के डिफेंस पर दबाव बनाती रही। आखिरकार 60वें मिनट में कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने बॉक्स के बाहर से शानदार कर्लिंग शॉट लगाकर गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के साथ फ्रांस को महत्वपूर्ण बढ़त मिल गई और स्टेडियम में मौजूद फ्रांसीसी समर्थकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/kylian-mbappe-(1).jpg" alt="Kylian Mbappe" width="1366" height="768"></img></p>
<p>एम्बाप्पे के गोल के केवल छह मिनट बाद उस्मान डेम्बेले ने शानदार स्ट्राइक लगाकर फ्रांस की बढ़त 2-0 कर दी। मोरक्को के गोलकीपर ने गेंद को रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन शॉट इतना सटीक था कि गेंद गोललाइन पार कर गई। इसके बाद फ्रांस ने संयमित खेल दिखाते हुए मुकाबले को अपने नियंत्रण में रखा और मोरक्को को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इस मुकाबले में किलियन एम्बाप्पे ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। टूर्नामेंट में यह उनका आठवां गोल था, जिसके साथ उन्होंने अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी की बराबरी कर ली। दोनों खिलाड़ियों के अब इस वर्ल्ड कप में आठ-आठ गोल हैं। हालांकि एम्बाप्पे तीन असिस्ट के कारण गोल्डन बूट की दौड़ में फिलहाल सबसे आगे पहुंच गए हैं। कुल मिलाकर वर्ल्ड कप इतिहास में एम्बाप्पे के अब 20 गोल हो चुके हैं, जबकि मेसी के नाम 21 गोल दर्ज हैं। इससे साफ है कि युवा फ्रांसीसी कप्तान विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े रिकॉर्ड की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/fifa-world-cup-2026-(15).jpg" alt="FIFA World Cup 2026" width="1366" height="996"></img></p>
<p>मोरक्को के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। अफ्रीकी टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया था और क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर इतिहास रचा था। लेकिन फ्रांस जैसी मजबूत टीम के सामने उसके खिलाड़ियों की मेहनत रंग नहीं ला सकी। इस हार के साथ टूर्नामेंट में अफ्रीका की आखिरी उम्मीद भी समाप्त हो गई। हालांकि मोरक्को ने अपने जुझारू खेल से दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का दिल जरूर जीता। मैच समाप्त होने के बाद फ्रांस के खिलाड़ी मैदान पर जश्न मनाते नजर आए। कप्तान एम्बाप्पे ने अपने साथियों और समर्थकों का अभिवादन किया, जबकि मोरक्को के खिलाड़ी हार के बाद भावुक दिखाई दिए। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने दोनों टीमों के प्रदर्शन की सराहना की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:21:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>एमबाप्पे पर पैराग्वे की सीनेटर का विवादित हमला: इंटरव्यू में दी गाली, फुटबॉल वर्ल्ड कप में बढ़ा नया बवाल</title>
                                    <description><![CDATA[मैच के बाद हाथ न मिलाने की घटना से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा, पैराग्वे सरकार ने भी सीनेटर के बयान से बनाई दूरी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/controversial-attack-by-paraguay-senator-on-mbapp%C3%A9-abuses-in-interview/article-58299"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/kylian-mbappe.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान मैदान पर खिलाड़ियों के बीच हुई एक छोटी-सी घटना अब अंतरराष्ट्रीय विवाद का रूप ले चुकी है। फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे और पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमारिला के बीच शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब अमारिला ने एक इंटरव्यू में एमबाप्पे के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें ‘सन ऑफ बिच’ कहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने पहले दिए गए विवादित बयानों पर माफी मांगने से भी साफ इनकार कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने खेल जगत के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी नई बहस छेड़ दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह विवाद 5 जुलाई को खेले गए फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ-16 मुकाबले के बाद शुरू हुआ था। इस मैच में फ्रांस ने पैराग्वे को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। मुकाबला खत्म होने के बाद पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे से हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़े। आरोप है कि एमबाप्पे ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया और बिना हाथ मिलाए आगे बढ़ गए। इस व्यवहार से नाराज होकर गिल ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए फुटबॉल उनकी ओर उछाल दी थी। यह दृश्य कैमरों में कैद हो गया और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। घटना के बाद पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमारिला ने सोशल मीडिया पर एमबाप्पे की आलोचना करते हुए उन्हें घमंडी करार दिया था। इसके साथ ही उन्होंने ऐसी टिप्पणियां भी कीं, जिन्हें नस्लीय और व्यक्तिगत माना गया। उनके इन बयानों की दुनियाभर में आलोचना हुई और कई लोगों ने इसे खेल भावना के खिलाफ बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">विवाद यहीं नहीं रुका। स्पेन के अखबार 'मार्का' को दिए एक इंटरव्यू में अमारिला ने अपने बयान को और तीखा करते हुए कहा कि जब ऑरलैंडो गिल ने पूरी विनम्रता के साथ एक पैराग्वेयन खिलाड़ी की तरह हाथ बढ़ाया, तब एमबाप्पे ने हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। उन्होंने इस व्यवहार को अपमानजनक बताते हुए एमबाप्पे के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि ऐसा व्यवहार फ्रांसीसी संस्कृति का हिस्सा नहीं हो सकता। अमारिला ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि उनका गुस्सा फ्रांस से नहीं बल्कि केवल एमबाप्पे के व्यवहार से है। उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने बचपन से फ्रेंच स्कूल में पढ़ाई की है, फ्रेंच भाषा जानती हैं और फ्रांस से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष उन्होंने अपने परिवार के साथ फ्रांस में क्रिसमस मनाया था, इसलिए उनके बयान को पूरे फ्रांस के खिलाफ नहीं देखा जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर एमबाप्पे ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने अमारिला को 'घृणित महिला' बताते हुए कहा था कि इस तरह की टिप्पणियां किसी सार्वजनिक प्रतिनिधि को शोभा नहीं देतीं। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान पर हार-जीत होती रहती है, लेकिन खिलाड़ियों के खिलाफ व्यक्तिगत और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। विवाद बढ़ने के बाद पैराग्वे सरकार को भी सामने आना पड़ा। सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर सीनेटर अमारिला की टिप्पणियों से दूरी बना ली। सरकार ने कहा कि यह बयान उन मूल्यों और सिद्धांतों के खिलाफ हैं, जिनका पालन पैराग्वे करता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि खेल के मंच पर सम्मान और आपसी सौहार्द बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब फुटबॉल वर्ल्ड कप पहले से ही कई विवादों के कारण चर्चा में है। हाल के दिनों में टूर्नामेंट के दौरान कई ऐसे घटनाक्रम हुए हैं, जिन्होंने खेल से ज्यादा विवादों को सुर्खियों में ला दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कड़ी में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से जुड़ा मामला भी काफी चर्चा में रहा। ट्रम्प ने दावा किया कि उनके हस्तक्षेप के बाद अमेरिकी खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन का एक मैच का प्रतिबंध हटाया गया। इस फैसले के बाद फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो पर राजनीतिक दबाव में निर्णय लेने के आरोप लगे। इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के एथिक्स कमीशन तक शिकायत पहुंची और खेल प्रशासन में राजनीतिक दखल को लेकर नई बहस शुरू हो गई। वर्ल्ड कप का एक और बड़ा विवाद अर्जेंटीना और मिस्र के बीच खेले गए मुकाबले में देखने को मिला। मिस्र फुटबॉल संघ ने रेफरी के फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) का गलत इस्तेमाल किया गया। संघ ने आरोप लगाया कि विवादित फैसलों ने मैच का परिणाम प्रभावित किया। हालांकि फीफा ने रेफरी का बचाव करते हुए कहा कि मैच अधिकारियों ने नियमों के अनुसार ही निर्णय लिए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 15:40:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>फ्रांस और मोरक्को की टक्कर आज, एमबाप्पे के पास मेसी को पीछे छोड़ने का सुनहरा मौका</title>
                                    <description><![CDATA[FIFA वर्ल्ड कप 2026 के पहले क्वार्टर फाइनल में फ्रांस का सामना मोरक्को से होगा। सात गोल कर चुके किलियन एमबाप्पे गोल्डन बूट की दौड़ में लियोनेल मेसी के आठ गोल के रिकॉर्ड की बराबरी या उससे आगे निकलने की कोशिश करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/todays-clash-between-france-and-morocco-mbappe-has-a-golden/article-58256"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/fifa-world-cup-2026-(14).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">FIFA वर्ल्ड कप 2026 अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। टूर्नामेंट का पहला क्वार्टर फाइनल मुकाबला शुक्रवार देर रात फ्रांस और मोरक्को के बीच खेला जाएगा। दोनों टीमें बोस्टन स्टेडियम में आमने-सामने होंगी। मुकाबला भारतीय समयानुसार रात 1:30 बजे शुरू होगा। इस मैच पर दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की नजरें टिकी हैं, क्योंकि एक ओर मौजूदा चैंपियन फ्रांस है तो दूसरी ओर इस विश्व कप की सबसे बड़ी सरप्राइज टीम मोरक्को, जिसने अपने शानदार प्रदर्शन से कई मजबूत टीमों को चुनौती दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस मुकाबले का सबसे बड़ा आकर्षण फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे होंगे। टूर्नामेंट में अब तक एमबाप्पे सात गोल दाग चुके हैं और गोल्डन बूट की दौड़ में दूसरे स्थान पर हैं। अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी आठ गोल के साथ फिलहाल सबसे आगे हैं। ऐसे में यदि एमबाप्पे इस मैच में गोल करने में सफल रहते हैं तो वह मेसी की बराबरी कर सकते हैं या उनसे आगे भी निकल सकते हैं। यही वजह है कि यह मुकाबला सिर्फ क्वार्टर फाइनल नहीं बल्कि गोल्डन बूट की रेस के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फ्रांस की टीम पूरे टूर्नामेंट में शानदार लय में नजर आई है। टीम ने अब तक खेले सभी मुकाबलों में जीत दर्ज की है और किसी भी प्रतिद्वंद्वी को वापसी का मौका नहीं दिया। ग्रुप चरण में फ्रांस ने नॉर्वे को 4-1, इराक को 3-0 और सेनेगल को 3-1 से हराकर शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके बाद नॉकआउट चरण में स्वीडन को 3-0 और फिर पैराग्वे को 1-0 से हराकर टीम ने क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। मजबूत आक्रमण और संतुलित मिडफील्ड फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर मोरक्को ने भी अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है। टीम अभी तक टूर्नामेंट में अजेय रही है और उसने कई मजबूत टीमों के खिलाफ बेहतरीन खेल दिखाया है। ग्रुप स्टेज में मोरक्को ने हैती को 4-2 से हराया, स्कॉटलैंड को 1-0 से मात दी और ब्राजील जैसी दिग्गज टीम को 1-1 की बराबरी पर रोक दिया। नॉकआउट चरण में नीदरलैंड के खिलाफ पेनाल्टी शूटआउट में जीत दर्ज करने के बाद टीम ने राउंड ऑफ-16 में कनाडा को 3-0 से हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई। मोरक्को का आत्मविश्वास इस समय काफी ऊंचा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फ्रांस और मोरक्को के बीच अब तक छह अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले गए हैं। इनमें फ्रांस का पलड़ा भारी रहा है। फ्रांस ने चार मैच जीते हैं, जबकि मोरक्को को केवल एक जीत मिली है। एक मुकाबला ड्रॉ रहा। विश्व कप इतिहास में दोनों टीमें दूसरी बार आमने-सामने होंगी। इससे पहले 2022 के विश्व कप सेमीफाइनल में फ्रांस ने मोरक्को को 2-0 से हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया था। ऐसे में मोरक्को के पास इस हार का बदला लेने का भी अच्छा अवसर होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस मुकाबले में सबसे दिलचस्प भिड़ंत फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे और मोरक्को के कप्तान अचराफ हकीमी के बीच देखने को मिल सकती है। दोनों खिलाड़ी क्लब फुटबॉल में लंबे समय तक एक साथ खेल चुके हैं और एक-दूसरे की ताकत व कमजोरियों से अच्छी तरह परिचित हैं। एमबाप्पे अपनी तेज रफ्तार, शानदार ड्रिब्लिंग और सटीक फिनिशिंग के लिए जाने जाते हैं, जबकि हकीमी अपनी मजबूत डिफेंस, गति और टैकलिंग क्षमता के दम पर किसी भी बड़े खिलाड़ी को रोकने का माद्दा रखते हैं। यही मुकाबला इस क्वार्टर फाइनल का निर्णायक पहलू बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फ्रांस के कोच को उम्मीद होगी कि उनकी टीम शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाए और जल्दी बढ़त हासिल करे। वहीं मोरक्को की रणनीति मजबूत रक्षात्मक खेल के साथ जवाबी हमलों पर आधारित रहने की संभावना है। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में इसी रणनीति के दम पर कई बड़ी टीमों को परेशान किया है। संभावित प्लेइंग इलेवन की बात करें तो फ्रांस की ओर से माइक मैग्नन गोलकीपर की भूमिका निभा सकते हैं। डिफेंस में जूल्स कौंडे, उपामेकानो, विलियम सलीबा और थियो हर्नांडेज जिम्मेदारी संभालेंगे। मिडफील्ड में चुआमेनी और एड्रियन रैबियो के साथ माइकल ओलिस खेल सकते हैं, जबकि आक्रमण की जिम्मेदारी उस्मान डेमबेले, बार्कोला और किलियन एमबाप्पे के कंधों पर होगी। मोरक्को की संभावित टीम में यासीन बोनो गोलकीपर होंगे। डिफेंस में अचराफ हकीमी, नायेफ अगुएर्ड, रोमन साइस और नुसैर मजरौई शामिल हो सकते हैं। मिडफील्ड में सोफयान अमराबत, अजेदीन औनाही और सेलिम अमल्लाह खेलेंगे। आगे की पंक्ति में हाकिम जियेच, यूसुफ एन-नेसिरी और सोफियान बौफाल टीम के लिए गोल करने की कोशिश करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 12:07:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>13 मिनट में तीन गोल, मिस्र को हराकर अर्जेंटीना क्वार्टर फाइनल में पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[दो गोल से पिछड़ने के बाद डिफेंडिंग चैंपियन की ऐतिहासिक वापसी, लियोनेल मेसी ने टूर्नामेंट का आठवां गोल दागा और अर्जेंटीना ने 3-2 से रोमांचक जीत दर्ज की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/argentina-reached-quarter-finals-by-defeating-egypt-by-three-goals-in/article-58186"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/argentina-vs-egypt.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना ने फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप में ऐसा शानदार प्रदर्शन किया, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होगी। अटलांटा स्टेडियम में मंगलवार को खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना ने मिस्र को 3-2 से हराकर अंतिम आठ में जगह बना ली। मैच के 78वें मिनट तक अर्जेंटीना दो गोल से पीछे था और ऐसा लग रहा था कि मौजूदा विश्व चैंपियन का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा। लेकिन अगले 13 मिनट में पूरी तस्वीर बदल गई। क्रिस्टियन रोमेरो, कप्तान लियोनेल मेसी और एंजो फर्नांडीज ने लगातार तीन गोल दागकर टीम को यादगार जीत दिला दी। विश्व कप इतिहास में यह पहला मौका भी बना, जब अर्जेंटीना दो गोल से पिछड़ने के बाद मुकाबला जीतने में सफल रहा।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lionel-messi-(1).jpg" alt="Lionel Messi" width="1366" height="761"></img></p>
<p style="text-align:justify;">मुकाबले की शुरुआत से ही मिस्र ने आक्रामक अंदाज अपनाया। टीम ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण रखा और अर्जेंटीना के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाया। इसका फायदा उसे 15वें मिनट में मिला, जब यासिर इब्राहिम ने शानदार मूव को गोल में बदलते हुए मिस्र को 1-0 की बढ़त दिला दी। शुरुआती झटके के बाद अर्जेंटीना ने वापसी की कोशिश की और कई हमले किए, लेकिन मिस्र के गोलकीपर मुस्तफा शौबीर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक के बाद एक बेहतरीन बचाव किए। पहले हाफ में अर्जेंटीना को बराबरी का सबसे बड़ा मौका 21वें मिनट में मिला, जब टीम को पेनाल्टी मिली। कप्तान लियोनेल मेसी गेंद लेकर आए, लेकिन शौबीर ने शानदार डाइव लगाकर उनका शॉट रोक दिया। पेनाल्टी चूकने के बाद मेसी और अर्जेंटीना के खिलाड़ी निराश दिखाई दिए, जबकि मिस्र का आत्मविश्वास और बढ़ गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lionel-messi-(2).jpg" alt="Lionel Messi" width="1366" height="865"></img></p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में भी मिस्र ने अपनी लय बरकरार रखी। 67वें मिनट में मुस्तफा जीको ने बेहतरीन मैदानी गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया। इस गोल के बाद स्टेडियम में मौजूद मिस्र के समर्थकों का उत्साह चरम पर था। दूसरी ओर अर्जेंटीना के प्रशंसकों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी। 78 मिनट तक मिस्र पूरी तरह मुकाबले पर नियंत्रण बनाए हुए था और ऐसा लग रहा था कि वह बड़ी उलटफेर करने जा रहा है। लेकिन फुटबॉल में आखिरी सीटी बजने तक कुछ भी तय नहीं माना जाता। अर्जेंटीना ने भी यही साबित किया। 79वें मिनट में लियोनेल मेसी के शानदार क्रॉस पर क्रिस्टियन रोमेरो ने हेडर के जरिए गोल कर टीम की वापसी की शुरुआत की। इस गोल ने पूरे मैच का रुख बदल दिया। अर्जेंटीना के खिलाड़ियों में नया जोश भर गया और उन्होंने लगातार मिस्र के गोल पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। महज चार मिनट बाद 83वें मिनट में कप्तान मेसी ने शानदार फिनिश के साथ गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाकर स्कोर 2-2 कर दिया। स्टेडियम अर्जेंटीना समर्थकों की खुशी से गूंज उठा और मैच पूरी तरह खुल गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/argentina-vs-egypt-(1).jpg" alt="Argentina vs Egypt" width="1366" height="1005"></img></p>
<p style="text-align:justify;">बराबरी के बाद दोनों टीमें जीत का गोल तलाशने लगीं, लेकिन निर्णायक पल इंजरी टाइम में आया। अतिरिक्त समय के तीसरे मिनट में लाउतारो मार्टिनेज के सटीक क्रॉस पर एंजो फर्नांडीज ने शानदार हेडर लगाया और गेंद सीधे गोलपोस्ट में पहुंच गई। इस गोल के साथ अर्जेंटीना ने 3-2 की बढ़त हासिल कर ली। यह गोल फीफा विश्व कप इतिहास का 3000वां गोल भी बन गया। अंतिम मिनटों में मिस्र ने बराबरी की पूरी कोशिश की, लेकिन अर्जेंटीना के डिफेंडरों ने कोई मौका नहीं दिया और अंतिम सीटी बजते ही खिलाड़ियों के साथ लाखों प्रशंसकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lionel-messi-(3).jpg" alt="Lionel Messi" width="1366" height="759"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस मुकाबले में कप्तान लियोनेल मेसी ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने टूर्नामेंट में अपना आठवां गोल दागा और गोल्डन बूट की दौड़ में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए। इसके साथ ही विश्व कप में उनके कुल गोलों की संख्या 21 हो गई, जिससे वह टूर्नामेंट के सर्वकालिक सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने हुए हैं। मेसी ने लगातार नौ अलग-अलग विश्व कप मुकाबलों में गोल करने का अपना ही रिकॉर्ड और मजबूत किया। मैच खत्म होने के बाद मेसी भावुक हो गए और मैदान पर ही उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। साथी खिलाड़ियों ने उन्हें गले लगाया और जीत का जश्न पूरे मैदान में देखने को मिला।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/argentina-vs-egypt-(2).jpg" alt="Argentina vs Egypt" width="1366" height="918"></img></p>
<p style="text-align:justify;">अब अर्जेंटीना का सामना 12 जुलाई को क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड से होगा। स्विट्जरलैंड ने 72 साल बाद पहली बार विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई है। दूसरी ओर मोरक्को लगातार दूसरे विश्व कप में नॉकआउट चरण तक पहुंचने वाली पहली अफ्रीकी टीम बन गई है। इस बार के क्वार्टर फाइनल में मोरक्को, बेल्जियम, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड जैसी टीमें भी शामिल हैं, जिन्होंने अब तक विश्व कप का खिताब नहीं जीता है। ऐसे में आगे का मुकाबला और भी रोमांचक होने की उम्मीद है। अर्जेंटीना की यह जीत केवल स्कोरलाइन की वजह से नहीं, बल्कि उसके संघर्ष, धैर्य और आखिरी मिनट तक हार नहीं मानने वाले जज्बे के कारण भी याद रखी जाएगी। दो गोल से पिछड़ने के बाद जिस तरह टीम ने 13 मिनट में तीन गोल कर इतिहास रचा, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े टूर्नामेंट में अनुभव, आत्मविश्वास और टीम भावना किसी भी मैच का परिणाम बदल सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:51:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>स्पेन से हारकर पुर्तगाल वर्ल्ड कप से बाहर, रोनाल्डो के करियर का यादगार अध्याय हुआ खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[क्वार्टर फाइनल में स्पेन ने 1-0 से दर्ज की जीत, बेल्जियम ने मेजबान अमेरिका को 4-1 से हराकर अंतिम आठ में बनाई जगह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/the-memorable-chapter-of-ronaldos-career-ended-after-portugal-lost/article-58098"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/fifa-world-cup-2026-(13).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फुटबॉल विश्व कप में मंगलवार का दिन कई बड़े उलटफेर और भावुक पलों का गवाह बना। दुनिया के महान फुटबॉल खिलाड़ियों में शुमार क्रिस्टियानो रोनाल्डो की टीम पुर्तगाल टूर्नामेंट से बाहर हो गई। क्वार्टर फाइनल में स्पेन ने शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन करते हुए पुर्तगाल को 1-0 से मात दी और सेमीफाइनल की ओर मजबूत कदम बढ़ाया। इस हार के साथ ही 41 वर्षीय रोनाल्डो के विश्व कप करियर का भी अंत हो गया। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने खड़े होकर तालियों के साथ उनका सम्मान किया। रोनाल्डो ने भी भावुक अंदाज में हाथ हिलाकर प्रशंसकों का अभिवादन किया, लेकिन उनके चेहरे पर हार की मायूसी साफ दिखाई दे रही थी। स्पेन ने पूरे मुकाबले में अनुशासित खेल का प्रदर्शन किया। टीम की मजबूत डिफेंस लाइन ने पुर्तगाल के आक्रमण को लगभग पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया। रोनाल्डो को मैच में कुछ मौके जरूर मिले, लेकिन स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन ने बेहतरीन बचाव करते हुए उन्हें गोल करने का कोई अवसर नहीं दिया। पहले हाफ में रोनाल्डो के दो खतरनाक प्रयासों को सिमोन ने शानदार तरीके से रोककर मैच का रुख बदल दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस जीत के साथ स्पेन ने विश्व कप इतिहास में लगातार छह मुकाबलों तक क्लीन शीट रखने का नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। इससे पहले लगातार पांच मैचों तक गोल नहीं खाने का रिकॉर्ड इटली और स्विट्जरलैंड के नाम था। स्पेन की यह उपलब्धि उसकी मजबूत रक्षात्मक रणनीति और खिलाड़ियों के बेहतरीन तालमेल को दर्शाती है। स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन ने व्यक्तिगत उपलब्धि भी हासिल की। उन्होंने लगातार 609 मिनट तक गोल नहीं खाकर विश्व कप का नया रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले यह रिकॉर्ड इटली के महान गोलकीपर वाल्टर जेंगा के नाम था। सिमोन की लगातार शानदार फॉर्म ने स्पेन को खिताब का मजबूत दावेदार बना दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">क्रिस्टियानो रोनाल्डो का विश्व कप सफर भी इस मुकाबले के साथ समाप्त हो गया। उन्होंने वर्ष 2006 में पहली बार विश्व कप खेला था और उसी टूर्नामेंट में पुर्तगाल को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद कई विश्व कप में उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व किया और कई यादगार मुकाबले खेले। वर्ष 2018 में स्पेन के खिलाफ उनकी हैट्रिक आज भी फुटबॉल प्रेमियों को याद है। हालांकि इस बार उनका सपना अधूरा रह गया और वे विश्व कप ट्रॉफी जीतने से एक बार फिर चूक गए। मैच समाप्त होने के बाद स्टेडियम में भावुक माहौल देखने को मिला। पुर्तगाल के खिलाड़ी निराश नजर आए, जबकि स्पेन के खिलाड़ियों ने अपनी ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि स्पेन की संतुलित टीम और मजबूत रक्षा पंक्ति उसे इस विश्व कप का सबसे बड़ा दावेदार बना रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बेल्जियम ने मेजबान अमेरिका को 4-1 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। मैच की शुरुआत से ही बेल्जियम ने आक्रामक खेल दिखाया। आठवें मिनट में चार्ल्स डी केटेलारे ने पहला गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। अमेरिका ने 31वें मिनट में फ्री-किक के जरिए बराबरी कर ली, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी।सिर्फ एक मिनट बाद डी केटेलारे ने दूसरा गोल कर बेल्जियम को फिर बढ़त दिला दी। इसके बाद अमेरिकी टीम दबाव में आ गई। 57वें मिनट में गोलकीपर की गलती का फायदा उठाकर हैंस वानाकेन ने तीसरा गोल किया। अतिरिक्त समय में अनुभवी स्ट्राइकर रोमेलु लुकाकू ने चौथा गोल दागकर बेल्जियम की जीत पूरी तरह सुनिश्चित कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बेल्जियम की जीत में चार्ल्स डी केटेलारे सबसे बड़े नायक साबित हुए। उन्होंने दो गोल करने के अलावा एक अन्य गोल में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम के मिडफील्ड और डिफेंस ने भी शानदार प्रदर्शन किया, जिससे अमेरिका को वापसी का कोई मौका नहीं मिला। मेजबान अमेरिका के लिए यह हार निराशाजनक रही। घरेलू दर्शकों के सामने टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन रक्षात्मक गलतियां और गोलकीपर की चूक टीम पर भारी पड़ गई। पूरे मैच में अमेरिका ने कुछ अच्छे अवसर बनाए, लेकिन उन्हें गोल में बदलने में सफलता नहीं मिल सकी। अब विश्व कप के क्वार्टर फाइनल मुकाबले और भी रोमांचक होने की उम्मीद है। स्पेन और बेल्जियम जैसी टीमें शानदार लय में दिखाई दे रही हैं। स्पेन जहां अपनी मजबूत रक्षा के दम पर आगे बढ़ रहा है, वहीं बेल्जियम का आक्रामक खेल विरोधी टीमों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:47:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ब्राजील को हराकर इतिहास रचने वाले कोच स्टॉल सोलबाकेन की प्रेरणादायक वापसी की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[25 साल पहले सात मिनट तक थम गई थी दिल की धड़कन, 26 घंटे कोमा में रहने के बाद मैदान से दूर हुए; अब कोच के रूप में नॉर्वे को पहली बार फुटबॉल विश्व कप क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/the-inspirational-comeback-story-of-coach-stoll-solbakken-who-created/article-58101"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/stale-solbakken.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फुटबॉल विश्व कप में नॉर्वे की ब्राजील पर जीत को इस टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील को हराकर नॉर्वे ने पहली बार विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई और इस ऐतिहासिक जीत के बाद सबसे ज्यादा चर्चा टीम के मुख्य कोच स्टॉल सोलबाकेन की हो रही है। मैच खत्म होने के बाद जब सोलबाकेन अपने परिवार से गले मिले तो वह सिर्फ जीत का जश्न नहीं था, बल्कि जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई जीतने वाले इंसान की भावुक वापसी भी थी। करीब 25 साल पहले उनका दिल सात मिनट तक धड़कना बंद हो गया था। डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी और उनका फुटबॉल करियर लगभग खत्म मान लिया गया था। आज वही शख्स दुनिया की सबसे बड़ी फुटबॉल प्रतियोगिता में अपनी टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाकर इतिहास रच चुका है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्टॉल सोलबाकेन की कहानी केवल फुटबॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, धैर्य और दोबारा खड़े होने की मिसाल भी मानी जा रही है। वर्ष 2001 में खिलाड़ी रहते हुए अभ्यास सत्र के दौरान उन्हें गंभीर हृदयाघात हुआ। उस दौरान उनकी धड़कन करीब सात मिनट तक बंद रही और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की लगातार कोशिशों के बाद उनकी जान बच सकी, लेकिन वे लगभग 26 घंटे तक कोमा में रहे। बाद में सोलबाकेन ने कई इंटरव्यू में बताया था कि उस समय उनकी मां तक ने यह मान लिया था कि शायद अब वह वापस नहीं लौट पाएंगे। उन्होंने एक बार कहा था कि परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी तक करने लगा था। हालांकि किस्मत ने उन्हें दूसरा मौका दिया और वहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। स्वास्थ्य कारणों से उनका पेशेवर फुटबॉल करियर समय से पहले समाप्त हो गया, लेकिन उन्होंने खेल से दूरी नहीं बनाई। मैदान पर खिलाड़ी के रूप में लौटना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने कोचिंग को अपना नया रास्ता बनाया। धीरे-धीरे उन्होंने क्लब फुटबॉल में अपनी पहचान बनाई और डेनमार्क, इंग्लैंड तथा जर्मनी में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। सबसे अधिक सफलता उन्हें एफसी कोपेनहेगन के साथ मिली, जहां उन्होंने कई घरेलू खिताब जीतकर खुद को सफल कोच के रूप में स्थापित किया। उनकी रणनीति, अनुशासन और युवा खिलाड़ियों को निखारने की क्षमता की काफी सराहना हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोलबाकेन का ब्राजील से जुड़ा रिश्ता भी काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1998 के फुटबॉल विश्व कप में वह नॉर्वे की टीम के अहम मिडफील्डर थे। उसी टूर्नामेंट के ग्रुप चरण में नॉर्वे ने तत्कालीन विश्व चैंपियन ब्राजील को 2-1 से हराकर इतिहास रचा था। उस जीत की बदौलत नॉर्वे पहली बार नॉकआउट दौर में पहुंचा था। लगभग तीन दशक बाद इतिहास ने फिर खुद को दोहराया, लेकिन इस बार सोलबाकेन मैदान पर खिलाड़ी नहीं बल्कि टीम के मुख्य कोच थे। उनकी रणनीति के दम पर नॉर्वे ने एक बार फिर ब्राजील को हराया और पहली बार विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। इस उपलब्धि ने उन्हें नॉर्वे फुटबॉल के सबसे सफल कोचों की सूची में ला खड़ा किया है। दिसंबर 2020 में जब उन्हें नॉर्वे की राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब हालात आसान नहीं थे। टीम लगातार बड़े टूर्नामेंटों के लिए क्वालिफाई करने में नाकाम रही थी। नॉर्वे 2022 विश्व कप और 2024 यूरोपीय चैम्पियनशिप में जगह नहीं बना सका। उस दौरान सोलबाकेन की रणनीति पर सवाल भी उठे, लेकिन फुटबॉल संघ ने उन पर भरोसा बनाए रखा। इसी भरोसे का नतीजा रहा कि टीम ने 2026 विश्व कप क्वालिफायर में शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी आठ मुकाबले जीते और सीधे मुख्य टूर्नामेंट में जगह बनाई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व कप में भी नॉर्वे ने लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया। ग्रुप चरण पार करने के बाद टीम ने पहले आइवरी कोस्ट को हराया और फिर प्री-क्वार्टर फाइनल में ब्राजील जैसी मजबूत टीम को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस जीत में स्टार स्ट्राइकर इर्लिंग हालैंड ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने ब्राजील के खिलाफ दो गोल दागे और पूरे टूर्नामेंट में अपने गोलों की संख्या सात तक पहुंचा दी। कप्तान मार्टिन ओडेगार्ड और अलेक्जेंडर सोरलोथ जैसे खिलाड़ियों ने भी टीम के प्रदर्शन को नई ऊंचाई दी।  ब्राजील पर ऐतिहासिक जीत के बाद सोलबाकेन ने कहा कि यह सिर्फ उनकी टीम की जीत नहीं बल्कि पूरे नॉर्वे के फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा दिन है। उन्होंने खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए कहा कि इस पीढ़ी ने देश की फुटबॉल पहचान बदल दी है। दूसरी ओर नॉर्वे के प्रशंसकों के लिए यह पल लंबे इंतजार के बाद मिली सबसे बड़ी खुशी बन गया। अब टीम की नजर क्वार्टर फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास को और आगे बढ़ाने पर है। स्टॉल सोलबाकेन की कहानी यह बताती है कि कठिन परिस्थितियां किसी इंसान की मंजिल तय नहीं करतीं। सात मिनट तक धड़कन रुकने और करियर खत्म होने जैसी स्थिति से निकलकर विश्व कप में इतिहास रचने तक का उनका सफर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है। आज उनकी पहचान सिर्फ एक सफल कोच के रूप में नहीं, बल्कि उस इंसान के रूप में भी की जा रही है जिसने जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई जीतकर असंभव को संभव कर दिखाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:45:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अर्जेंटीना फुटबॉल वर्ल्ड कप के अंतिम-16 में पहुंचा, केप वर्डे को हराया; मेसी ने लगातार आठवें मैच में गोल कर बनाया नया रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[मियामी में खेले गए रोमांचक मुकाबले में अर्जेंटीना ने 3-2 से दर्ज की जीत, लियोनल मेसी ने फिर दिखाई चमक, अब प्री-क्वार्टर फाइनल में मिस्र से होगी भिड़ंत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/argentina-reached-the-last-16-of-the-football-world-cup/article-57822"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lionel-messi.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अर्जेंटीना ने अपने खिताब बचाने के अभियान को आगे बढ़ाते हुए फुटबॉल वर्ल्ड कप के अंतिम-16 में जगह बना ली है। शनिवार सुबह मियामी स्टेडियम में खेले गए बेहद रोमांचक मुकाबले में अर्जेंटीना ने वर्ल्ड कप में पहली बार खेल रही केप वर्डे की टीम को 3-2 से हराया। मैच का फैसला अतिरिक्त समय में हुए एक ऑन गोल से हुआ, लेकिन पूरी रात चर्चा लियोनल मेसी की रही। कप्तान मेसी ने मैच में गोल दागते हुए लगातार आठवें वर्ल्ड कप मुकाबले में गोल करने का नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इसी जीत के साथ अर्जेंटीना अब प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंच गया है, जहां मंगलवार को उसका सामना मिस्र से होगा। दूसरी ओर मिस्र ने ऑस्ट्रेलिया को पेनल्टी शूटआउट में 4-2 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। वहीं एक अन्य मुकाबले में कोलंबिया ने घाना को 1-0 से हराते हुए अगले दौर का टिकट हासिल किया।</p>
<p style="text-align:justify;">मियामी स्टेडियम में शुरुआत से ही अर्जेंटीना ने आक्रामक खेल दिखाया। गेंद पर उसका नियंत्रण बेहतर रहा और लगातार हमलों का दबाव केप वर्डे की रक्षा पंक्ति पर साफ दिखाई दिया। कप्तान लियोनल मेसी ने 29वें मिनट में शानदार फिनिश के साथ पहला गोल किया और टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद स्टेडियम में मौजूद हजारों अर्जेंटीनी समर्थकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। हालांकि केप वर्डे ने भी हार नहीं मानी। दूसरे हाफ में उसने वापसी करते हुए 59वें मिनट में डर्लो डुआर्टे के गोल की बदौलत स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इसके बाद मुकाबला पूरी तरह खुल गया और दोनों टीमों ने लगातार हमले किए।</p>
<p style="text-align:justify;">निर्धारित समय के अंतिम क्षणों में अर्जेंटीना ने फिर बढ़त बना ली। इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में एमिलियानो मार्टिनेज ने गोल कर अपनी टीम को 2-1 से आगे कर दिया। ऐसा लग रहा था कि मुकाबला यहीं खत्म हो जाएगा, लेकिन केप वर्डे ने एक बार फिर शानदार जज्बा दिखाया। सिडनी लोपेज ने अंतिम क्षणों में गोल दागकर स्कोर 2-2 कर दिया और मैच अतिरिक्त समय में पहुंच गया। अतिरिक्त समय में दोनों टीमों ने जीत के लिए पूरा जोर लगाया। आखिरकार 111वें मिनट में केप वर्डे के खिलाड़ी डिनये से दुर्भाग्यपूर्ण ऑन गोल हो गया, जिसने मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल दिया। यही गोल अर्जेंटीना की जीत का कारण बना और टीम ने 3-2 से मुकाबला अपने नाम कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मुकाबले में लियोनल मेसी ने एक बार फिर साबित किया कि बड़े मैचों में उनका अनुभव और क्लास आज भी सबसे अलग है। उनके गोल के साथ कई नए रिकॉर्ड भी बने। मेसी अब वर्ल्ड कप इतिहास में 30 मैच खेलने वाले पहले फुटबॉलर बन गए हैं। इसके अलावा मौजूदा टूर्नामेंट में उनके नाम अब सात गोल हो चुके हैं और वह गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। फ्रांस के किलियन एमबाप्पे छह गोल के साथ दूसरे स्थान पर हैं। मेसी दो अलग-अलग वर्ल्ड कप संस्करणों में सात या उससे अधिक गोल करने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी भी बन गए हैं। उनके नाम अब वर्ल्ड कप करियर में कुल 20 गोल दर्ज हो चुके हैं, जो इस प्रतियोगिता के इतिहास में सर्वाधिक हैं। लगातार आठ वर्ल्ड कप मैचों में गोल करने का रिकॉर्ड भी अब उनके नाम दर्ज हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि अर्जेंटीना की जीत जितनी चर्चा में रही, उतनी ही सराहना केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा की भी हुई। 40 वर्षीय अनुभवी गोलकीपर ने पूरे मैच में कुल 10 शानदार बचाव किए। इनमें से पांच बचाव सीधे मेसी के प्रयासों पर रहे। उनकी बेहतरीन गोलकीपिंग की वजह से अर्जेंटीना को आसान जीत नहीं मिल सकी। मैच के दौरान कई मौकों पर उन्होंने शानदार रिफ्लेक्स दिखाए और अपनी टीम को मुकाबले में बनाए रखा। स्टेडियम में मौजूद अर्जेंटीना के समर्थकों ने भी उनके प्रदर्शन की सराहना करते हुए तालियां बजाईं, जो खेल भावना का बेहतरीन उदाहरण माना गया।</p>
<p style="text-align:justify;">केप वर्डे भले ही यह मुकाबला हार गया, लेकिन उसने मौजूदा चैंपियन को आखिर तक कड़ी चुनौती देकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। वर्ल्ड कप में पहली बार हिस्सा लेने वाली इस टीम ने दिखा दिया कि अब अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में छोटे देशों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। दूसरी ओर अर्जेंटीना के लिए यह जीत राहत लेकर आई, लेकिन टीम के कोचिंग स्टाफ को यह भी एहसास हुआ कि आगे की राह पहले से कहीं अधिक कठिन होगी। प्री-क्वार्टर फाइनल में मिस्र जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अर्जेंटीना को अपने खेल में और संतुलन लाना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:14:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जर्मनी वर्ल्ड कप से बाहर, ब्राजील और मोरक्को ने दर्ज की यादगार जीत</title>
                                    <description><![CDATA[पैराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को हराया, ब्राजील ने आखिरी मिनट में जापान को मात देकर अंतिम-16 में बनाई जगह, मोरक्को ने भी नीदरलैंड को बाहर किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/germany-out-of-world-cup-brazil-and-morocco-recorded-memorable/article-57384"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/germany-vs-paraguay.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">फुटबॉल वर्ल्ड कप में मंगलवार को ऐसा दिन देखने को मिला, जिसने टूर्नामेंट की तस्वीर ही बदल दी। चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी का सफर राउंड ऑफ-32 में ही खत्म हो गया। पैराग्वे ने बेहद रोमांचक मुकाबले में पेनल्टी शूटआउट के दौरान 4-3 से जीत दर्ज कर टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया। निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय के बाद दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर थीं, लेकिन फैसला पेनल्टी शूटआउट में हुआ, जहां गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने दो शानदार बचाव कर पैराग्वे को ऐतिहासिक जीत दिलाई। दूसरी ओर, ब्राजील ने इंजरी टाइम में गैब्रियल मार्टिनेली के गोल की बदौलत जापान को 2-1 से हराकर अंतिम-16 में जगह बनाई। वहीं, मोरक्को ने भी नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराकर अगले दौर का टिकट पक्का कर लिया। एक ही दिन में तीन मुकाबलों के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि इस बार वर्ल्ड कप में कोई भी टीम सुरक्षित नहीं है और छोटे माने जाने वाले देश भी बड़े उलटफेर करने का दम रखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">फॉक्सबोरो में खेले गए जर्मनी और पैराग्वे के मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। जर्मनी ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा और लगातार आक्रमण किए, लेकिन पैराग्वे की रक्षापंक्ति ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। 42वें मिनट में मिगेल अल्मिरोन के शानदार मूव पर मातियास गालार्सा ने गेंद बॉक्स में पहुंचाई, जहां जूलियो एनसिसो ने हेडर लगाकर पैराग्वे को 1-0 की बढ़त दिला दी। पहले हाफ में पीछे रहने के बाद जर्मनी ने दूसरे हाफ में दबाव बढ़ाया और 52वें मिनट में फ्लोरियन विर्ट्ज के क्रॉस पर काई हैवर्ट्ज ने शानदार हेडर के जरिए स्कोर 1-1 कर दिया। इसके बाद जर्मनी ने लगातार कई मौके बनाए, लेकिन पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल बार-बार दीवार बनकर सामने खड़े रहे। अतिरिक्त समय के 102वें मिनट में जोनाथन ताह ने कॉर्नर पर गोल भी कर दिया था, लेकिन वीडियो रिव्यू में गोलकीपर पर फाउल मिलने के बाद रेफरी ने गोल रद्द कर दिया। इसके बाद मुकाबला पेनल्टी शूटआउट तक पहुंचा। शुरुआती चार राउंड के बाद दोनों टीमें बराबरी पर थीं, लेकिन निर्णायक क्षण में ऑरलैंडो गिल ने दो अहम पेनल्टी रोक दीं और जोस कैनाले ने विजयी पेनल्टी को गोल में बदलकर पैराग्वे को यादगार जीत दिला दी। मैच के बाद गिल ने कहा कि टीम ने जर्मनी के हर खिलाड़ी की पेनल्टी लेने की शैली का पहले से अध्ययन किया था और उसी तैयारी का फायदा उन्हें मिला। दूसरी तरफ जर्मनी के खिलाड़ियों ने माना कि टीम कई अच्छे मौके भुनाने में नाकाम रही और यही हार की सबसे बड़ी वजह बनी।</p>
<p class="isSelectedEnd">ह्यूस्टन में ब्राजील और जापान के बीच मुकाबला भी आखिरी सेकेंड तक रोमांच से भरपूर रहा। जापान ने 29वें मिनट में काइशू सानो के शानदार लंबी दूरी के गोल से बढ़त हासिल कर ली। ब्राजील ने पहले हाफ में कई मौके बनाए लेकिन बराबरी नहीं कर सका। दूसरे हाफ की शुरुआत के बाद टीम ने आक्रामक खेल दिखाया और 56वें मिनट में कैसेमीरो ने हेडर के जरिए स्कोर 1-1 कर दिया। इसके बाद विनीसियस जूनियर और रोड्रिगो को भी गोल करने के अवसर मिले, लेकिन जापानी गोलकीपर जियोन सुजुकी लगातार बेहतरीन बचाव करते रहे। मुकाबला ड्रॉ की ओर बढ़ रहा था, तभी दूसरे हाफ में सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतरे गैब्रियल मार्टिनेली ने इंजरी टाइम के छठे मिनट में शानदार गोल दागकर ब्राजील को 2-1 की जीत दिला दी। यह जीत ब्राजील के लिए कई मायनों में खास रही। टीम लगातार 20वीं बार वर्ल्ड कप के अंतिम-16 में पहुंची और यह जीत उसी दिन मिली, जिस दिन ब्राजील ने 1958 में अपना पहला विश्व कप खिताब जीता था। मैच के बाद कोच कार्लो एंसेलोटी ने कहा कि उनकी टीम ने दबाव में धैर्य बनाए रखा और आखिरी मिनट तक जीत के लिए संघर्ष किया। उन्होंने मार्टिनेली की तारीफ करते हुए कहा कि वह हमेशा टीम में नई ऊर्जा लेकर आते हैं। वहीं, स्टार खिलाड़ी नेमार इस मुकाबले में मैदान पर नहीं उतरे। कोच ने बताया कि उन्हें खेलने पर विचार किया गया था, लेकिन टीम को उसकी जरूरत महसूस नहीं हुई।</p>
<p>तीसरे मुकाबले में मोरक्को और नीदरलैंड के बीच भी जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। निर्धारित समय में दोनों टीमों ने एक-एक गोल किए। नीदरलैंड ने 72वें मिनट में कोडी गाक्पो के गोल से बढ़त बनाई थी और जीत के बेहद करीब पहुंच गया था, लेकिन इंजरी टाइम के 91वें मिनट में इस्सा डियोप ने हेडर लगाकर मोरक्को को बराबरी दिला दी। अतिरिक्त समय में दोनों टीमों ने कई मौके बनाए, लेकिन कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। इसके बाद फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ। मोरक्को के अनुभवी गोलकीपर यासीन बूनू ने क्रिसेंसियो समरविल की पेनल्टी रोककर मैच का रुख बदल दिया। इसके बाद इस्माइल सैबारी ने निर्णायक पेनल्टी को गोल में बदलते हुए मोरक्को को 3-2 से जीत दिला दी। इस जीत के साथ मोरक्को ने 1994 विश्व कप में नीदरलैंड से मिली हार का हिसाब भी बराबर कर लिया। अब अगले दौर में ब्राजील का सामना आइवरी कोस्ट या नॉर्वे से होगा, जबकि पैराग्वे फ्रांस और स्वीडन के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से भिड़ेगा। मोरक्को की टीम 4 जुलाई को कनाडा के खिलाफ मैदान पर उतरेगी। मंगलवार के इन नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में सिर्फ इतिहास या रैंकिंग नहीं, बल्कि उस दिन का प्रदर्शन ही जीत और हार तय करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:45:47 +0530</pubDate>
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                <title>स्पेस में फीफा वर्ल्ड कप का जश्न, ISS पर खेला फुटबॉल</title>
                                    <description><![CDATA[नासा और ESA के अंतरिक्ष यात्रियों ने ISS में ट्रिओंडा बॉल के साथ खेलकर मनाया FIFA World Cup 2026, वीडियो हुआ वायरल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/fifa-world-cup-celebration-in-space-football-played-on-iss/article-56681"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/fifa-world-cup-2026-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरिक्ष की दुनिया में भी फीफा वर्ल्ड कप 2026 का रंग चढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है, जिसमें नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के अंतरिक्ष यात्री फुटबॉल खेलते नजर आ रहे हैं। इस अनोखे जश्न में जेसिका मीर, क्रिस विलियम्स, जैक हैथवे और सोफी एडेनोट शामिल थे, जिन्होंने शून्य गुरुत्वाकर्षण में फुटबॉल खेलकर वर्ल्ड कप का उत्साह अलग ही अंदाज में दिखाया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अंतरिक्ष के भीतर तीन अलग-अलग फुटबॉल धीरे-धीरे तैरते हुए आगे बढ़ रहे हैं। गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण गेंदें हवा में स्थिर नहीं रहतीं और धीरे-धीरे घूमती रहती हैं, जिससे खेल का अनुभव पूरी तरह अलग और रोमांचक बन जाता है। अंतरिक्ष यात्रियों ने इस दौरान संदेश भी दिया कि चाहे आप किसी भी देश या टीम का समर्थन करें, पूरे उत्साह और दिल से खेल का आनंद लें। उन्होंने कहा कि स्पेस स्टेशन से भी वर्ल्ड कप का उत्साह धरती तक महसूस किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस खास मौके पर ट्रिओंडा नाम की आधिकारिक वर्ल्ड कप गेंद भी चर्चा में रही, जिसे एडिडास ने तैयार किया है। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के लिए बनाई गई यह गेंद तीन देशों अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी को दर्शाती है। ‘ट्रिओंडा’ नाम स्पेनिश भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘तीन लहरें’ होता है। यह नाम तीन मेजबान देशों की साझेदारी और एकता को दर्शाने के लिए चुना गया है। अंतरिक्ष से जुड़े इस आयोजन में इस गेंद का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से खास माना जा रहा है, जो खेल और विज्ञान के मेल को दर्शाता है। गेंद के डिजाइन में लाल, हरा और नीला रंग प्रमुख रूप से इस्तेमाल किया गया है, जो तीनों मेजबान देशों की पहचान को दर्शाते हैं। इसकी संरचना भी बेहद आधुनिक तकनीक पर आधारित है। चार पैनलों को मिलाकर इसे त्रिकोणीय आकार दिया गया है, जिससे गेंद की स्थिरता और नियंत्रण बेहतर होता है। इसमें गहरे सीम और उभरी हुई सतह दी गई है ताकि खिलाड़ियों को गीले या कठिन मौसम में भी बेहतर ग्रिप मिल सके। यह तकनीक गेंद की उड़ान को अधिक संतुलित और सटीक बनाती है। ISS पर हुआ यह अनोखा फुटबॉल खेल केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक संदेश भी देता है। अंतरिक्ष यात्रियों का मानना है कि खेल सीमाओं से परे होता है और यह लोगों को जोड़ने का काम करता है। शून्य गुरुत्वाकर्षण में खेलते हुए उन्होंने यह दिखाया कि विज्ञान और खेल मिलकर भी लोगों को एक साथ ला सकते हैं। यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और दुनियाभर में फुटबॉल प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरिक्ष में इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं होता, बल्कि यह लंबे अंतरिक्ष अभियानों के दौरान मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। ISS पर रहने वाले अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक पृथ्वी से दूर रहते हैं, ऐसे में छोटे-छोटे खेल और गतिविधियां उनके लिए तनाव कम करने का जरिया बनती हैं। फुटबॉल जैसे खेल उन्हें टीमवर्क और सहयोग की भावना से भी जोड़ते हैं। फीफा वर्ल्ड कप 2026 को लेकर पहले ही दुनियाभर में उत्साह चरम पर है, और अब अंतरिक्ष से आया यह वीडियो इस उत्साह को और बढ़ा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब अंतरिक्ष में किसी खेल का आयोजन हुआ हो, लेकिन फुटबॉल जैसे लोकप्रिय खेल का इस तरह शून्य गुरुत्वाकर्षण में खेला जाना इसे खास बना देता है। सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को लेकर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। लोग इसे खेल और विज्ञान का शानदार मेल बता रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि यह दृश्य दिखाता है कि फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि एक वैश्विक भावना है, जो पृथ्वी से लेकर अंतरिक्ष तक लोगों को जोड़ती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:53:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>फीफा वर्ल्ड कप 2026 में केप वर्डे का बड़ा उलटफेर, मिस्र की ऐतिहासिक जीत</title>
                                    <description><![CDATA[वर्ल्ड कप ग्रुप स्टेज में केप वर्डे ने उरुग्वे को 2-2 से रोककर सनसनी मचाई, जबकि मिस्र ने न्यूजीलैंड को हराकर 92 साल बाद अपनी पहली जीत दर्ज की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/cape-verdes-big-upset-in-fifa-world-cup-2026-egypts/article-56673"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/fifa-world-cup-2026-(7).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सोमवार का दिन फुटबॉल प्रेमियों के लिए बेहद रोमांचक और अप्रत्याशित नतीजों से भरा रहा। ग्रुप G और ग्रुप H में खेले गए मुकाबलों ने टूर्नामेंट की तस्वीर को और दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ जहां मिस्र ने 92 साल के लंबे इंतजार के बाद वर्ल्ड कप इतिहास में अपनी पहली जीत दर्ज की, वहीं दूसरी ओर केप वर्डे ने दो बार की चैंपियन उरुग्वे को 2-2 की बराबरी पर रोककर बड़ा उलटफेर कर दिया। ग्रुप G में मिस्र और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए मुकाबले में अफ्रीकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3-1 से जीत हासिल की। यह जीत मिस्र के लिए ऐतिहासिक रही क्योंकि 1934 में वर्ल्ड कप में डेब्यू करने के बाद यह उनकी पहली जीत थी। मैच में टीम के कप्तान मोहम्मद सालाह ने एक गोल करने के साथ-साथ एक असिस्ट भी दिया और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। मुस्तफा जीको ने भी एक गोल और एक असिस्ट कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। शुरुआती मिनटों से ही मिस्र ने आक्रामक खेल दिखाया और न्यूजीलैंड की डिफेंस लाइन को लगातार दबाव में रखा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस जीत के साथ मिस्र ग्रुप G में 4 अंकों के साथ शीर्ष पर पहुंच गया है और अब नॉकआउट दौर में उसकी उम्मीदें मजबूत हो गई हैं। वहीं न्यूजीलैंड ने भी कुछ मौकों पर अच्छा खेल दिखाया, लेकिन वह गोल करने में उतना प्रभावी नहीं रह सका। मैच के बाद टीम की रणनीति और फिनिशिंग को लेकर चर्चा भी हुई, लेकिन उसके बावजूद उसके पास आगे बढ़ने के अवसर अभी भी बने हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी ग्रुप में बेल्जियम और ईरान के बीच खेला गया मुकाबला गोलरहित ड्रॉ पर समाप्त हुआ। दोनों टीमों ने पूरे मैच में मजबूत डिफेंस दिखाया लेकिन गोल करने में विफल रहीं। बेल्जियम के स्टार खिलाड़ी रोमेलु लुकाकू लंबे समय बाद शुरुआती एकादश में लौटे, लेकिन वह भी टीम को जीत नहीं दिला सके। मैच के दौरान 66वें मिनट में बेल्जियम के एक डिफेंडर को रेड कार्ड मिलने से टीम को 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा, लेकिन ईरान इसका फायदा नहीं उठा सका। इस ड्रॉ के बाद दोनों टीमों के खाते में 2-2 अंक हैं और नॉकआउट की रेस अब और कड़ी हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रुप H में सबसे बड़ा आकर्षण केप वर्डे और उरुग्वे के बीच खेला गया मुकाबला रहा, जिसने फुटबॉल फैंस को हैरान कर दिया। मियामी में खेले गए इस मैच में केप वर्डे ने शानदार वापसी करते हुए 2-2 से ड्रॉ हासिल किया। मैच की शुरुआत में केप वर्डे ने बढ़त हासिल की थी जब केविन पिना ने 34 यार्ड की दूरी से शानदार फ्री-किक पर गोल दागा। हालांकि, हाफ टाइम से पहले उरुग्वे ने वापसी करते हुए मैक्सी अराउजो और ऑगस्टिन कैनोबियो के गोल की मदद से 2-1 की बढ़त बना ली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में केप वर्डे ने हार नहीं मानी और लगातार आक्रामक खेल जारी रखा। उरुग्वे की डिफेंस में हुई एक गलती का फायदा उठाकर वरेला ने बराबरी का गोल दाग दिया। इसके बाद उरुग्वे ने जीत के लिए कई प्रयास किए, लेकिन केप वर्डे का डिफेंस मजबूत बना रहा। पिको लोप्स और सिडनी लोप्स कैबरल की अगुआई में टीम ने आखिरी मिनटों तक दबाव झेला और मैच को 2-2 पर खत्म किया। इससे पहले केप वर्डे स्पेन जैसी मजबूत टीम को भी ड्रॉ पर रोक चुका है, जिससे उसकी प्रतिष्ठा और बढ़ी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रुप H की स्थिति अब बेहद रोमांचक हो गई है। स्पेन 4 अंकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि उरुग्वे और केप वर्डे दोनों 2-2 अंकों के साथ बराबरी पर हैं। ऐसे में अंतिम ग्रुप मैचों में नॉकआउट में पहुंचने की जंग और भी दिलचस्प हो गई है। यह दिन वर्ल्ड कप इतिहास में कई यादगार पलों को जोड़ गया। मिस्र की ऐतिहासिक जीत, केप वर्डे का शानदार संघर्ष और बेल्जियम-ईरान का ड्रॉ, सभी ने साबित किया कि इस बार का वर्ल्ड कप अप्रत्याशित नतीजों से भरा हुआ है और हर मैच के साथ कहानी बदलती जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:29:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>62 शॉट, फिर भी नहीं हुआ एक गोल; तुर्किये वर्ल्ड कप से बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के खिलाफ कुल 62 शॉट लगाए, लेकिन एक भी गोल नहीं कर सकी टीम; कोच मोंटेला भी रहे हैरान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/62-shots-still-no-goal-scored-turkey-out-of-world/article-56503"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/turkey-world-cup-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई। पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है। शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया। टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है।  शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्य कोच विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी। यही कमी अंततः तुर्किये के वर्ल्ड कप अभियान का अंत बन गई। विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 17:08:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कांगो ने रचा इतिहास, पुर्तगाल को 1-1 ड्रॉ पर रोका वर्ल्ड कप में</title>
                                    <description><![CDATA[52 साल बाद वापसी करने वाली कांगो ने पहला गोल दागा, रोनाल्डो गोल से रहे वंचित; इंग्लैंड ने क्रोएशिया को 4-2 से हराया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/congo-created-history-by-holding-portugal-to-1-1-draw-in/article-56280"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/congo-vs-portugal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में बुधवार का दिन कई बड़े उलटफेर और ऐतिहासिक पलों का गवाह बना। जहां एक ओर 43वीं रैंकिंग वाली कांगो गणराज्य ने दिग्गज टीम पुर्तगाल को 1-1 की बराबरी पर रोककर सभी को चौंका दिया, वहीं दूसरी ओर इंग्लैंड ने क्रोएशिया को 4-2 से हराकर अपने अभियान की दमदार शुरुआत की। इन मुकाबलों ने यह साबित कर दिया कि इस बार का वर्ल्ड कप पूरी तरह प्रतिस्पर्धी और अप्रत्याशित परिणामों से भरा हुआ है। ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में खेले गए ग्रुप-के मुकाबले में पुर्तगाल और कांगो के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। मुकाबले की शुरुआत पुर्तगाल ने आक्रामक अंदाज में की और केवल छठे मिनट में ही बढ़त हासिल कर ली। जोआओ नेवेस ने पेड्रो नेटो के शानदार क्रॉस पर हेडर लगाकर टीम को 1-0 से आगे कर दिया। शुरुआती बढ़त के बाद लग रहा था कि पुर्तगाल आसानी से मैच पर नियंत्रण बना लेगा, लेकिन कांगो ने धीरे-धीरे खेल में वापसी कर मुकाबले को बराबरी पर ला दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले हाफ के अंतिम क्षणों में कांगो ने शानदार संयम दिखाया। अतिरिक्त समय के 45+5वें मिनट में योआने वीसा ने आर्थर मासुआकु के क्रॉस पर बेहतरीन हेडर लगाकर गोल दागा और स्कोर 1-1 कर दिया। यह गोल न सिर्फ मैच को बराबरी पर ले आया, बल्कि कांगो के लिए वर्ल्ड कप इतिहास का पहला गोल भी साबित हुआ। यह पल टीम और देश दोनों के लिए बेहद खास बन गया, क्योंकि कांगो ने 52 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी की थी। दूसरे हाफ में दोनों टीमों ने बढ़त बनाने के लिए कई प्रयास किए। पुर्तगाल ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार आक्रमण किए, लेकिन कांगो की डिफेंस लाइन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए हर प्रयास को नाकाम कर दिया। 55वें मिनट में पुर्तगाल ने एक बार फिर गेंद को नेट में पहुंचाया जब जोआओ कैंसेलो ने बाइसिकल किक से शानदार गोल किया, लेकिन VAR जांच में उन्हें ऑफसाइड करार दिया गया और यह गोल अमान्य हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद पुर्तगाल के स्टार खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो लगातार गोल की तलाश में दिखे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। 68वें और 73वें मिनट में उन्हें दो बेहतरीन मौके मिले, लेकिन दोनों ही प्रयास गोलपोस्ट से बाहर चले गए। 90वें मिनट में ब्रूनो फर्नांडिस के पास भी मैच जीताने का मौका था, लेकिन उनका शॉट लक्ष्य से चूक गया। रोनाल्डो इस मैच में पूरी कोशिश के बावजूद स्कोरशीट में अपना नाम दर्ज नहीं कर सके। कांगो के लिए यह मुकाबला ऐतिहासिक इसलिए भी रहा क्योंकि यह उनका वर्ल्ड कप इतिहास का पहला गोल था। इससे पहले 1974 में जब टीम जायर के नाम से खेली थी, तब कोई भी गोल नहीं कर सकी थी। इस बार योआने वीसा का गोल पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बन गया। गोल के बाद वीसा ने कहा कि यह उनके परिवार, टीम और पूरे देश के लिए बेहद भावनात्मक पल है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस ड्रॉ के बाद ग्रुप-के की स्थिति और भी रोमांचक हो गई है। पुर्तगाल को अब अगले मुकाबलों में जीत हासिल करनी होगी ताकि वह नॉकआउट दौर में अपनी जगह पक्की कर सके। टीम का अगला मुकाबला उज्बेकिस्तान और कोलंबिया से होना है, जो बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर ग्रुप-एल के मुकाबले में इंग्लैंड ने क्रोएशिया को 4-2 से हराकर शानदार शुरुआत की। इंग्लैंड की ओर से कप्तान हैरी केन ने दो गोल किए, जबकि जूड बेलिंगहैम और मार्कस रैशफोर्ड ने एक-एक गोल दागा। टीम ने पूरे मैच में आक्रामक खेल दिखाया और शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा। क्रोएशिया ने भी मुकाबले में वापसी की कोशिश की और केमार्टिन बातुरीना तथा पेटार मूसा ने गोल दागकर मुकाबले को रोमांचक बनाया, लेकिन इंग्लैंड की मजबूत आक्रमण पंक्ति के आगे उनकी एक न चली। यह मुकाबला 2018 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल की याद दिलाने वाला रहा, लेकिन इस बार परिणाम इंग्लैंड के पक्ष में गया।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:00:33 +0530</pubDate>
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