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                            <item>
                <title>अमरनाथ यात्रा 2026 शुरू: जम्मू और पहलगाम से पहला जत्था बाबा बर्फानी के दर्शन को रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जम्मू और पहलगाम के नुनवान बेस कैंप से अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था पवित्र गुफा के लिए रवाना हुआ। 57 दिनों तक चलने वाली यात्रा के पहले दिन श्रद्धालुओं में उत्साह और आस्था का विशेष माहौल देखने को मिला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a4743bba9a6c/article-57751"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/amarnath-yatra-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में शामिल श्री अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ शुक्रवार को श्रद्धा, उत्साह और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच हुआ। जम्मू और पहलगाम के नुनवान बेस कैंप से श्रद्धालुओं का पहला जत्था बाबा बर्फानी के पवित्र दर्शन के लिए रवाना हुआ। इसके साथ ही 57 दिनों तक चलने वाली वार्षिक अमरनाथ यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो गई। यात्रा के पहले दिन श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और पूरा वातावरण "हर-हर महादेव", "बम-बम भोले" और "चलो बुलावा आया है, बाबा बर्फानी ने बुलाया है" के जयघोष से गूंज उठा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जम्मू से रवाना हुए पहले जत्थे को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस जत्थे में 4,800 से अधिक श्रद्धालु शामिल थे। सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में सभी श्रद्धालुओं को वाहनों के काफिले के साथ कश्मीर घाटी तक पहुंचाया गया। घाटी में प्रवेश के बाद विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों, स्वयंसेवी संस्थाओं और प्रशासन की ओर से फूल-मालाओं और पारंपरिक स्वागत के साथ यात्रियों का अभिनंदन किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहलगाम के नुनवान बेस कैंप और बालटाल बेस कैंप से शुक्रवार सुबह श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा की ओर अपनी पैदल यात्रा शुरू की। दोनों मार्गों पर प्रशासन ने चिकित्सा, सुरक्षा, संचार, भोजन और ठहरने की व्यापक व्यवस्था की है। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह स्वास्थ्य शिविर, विश्राम केंद्र और आपातकालीन सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। यात्रा शुरू होने से पहले पहलगाम क्षेत्र में कुछ समय के लिए भारी बारिश हुई, जिसके कारण सुरक्षा के मद्देनजर पहलगाम मार्ग पर यात्रियों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी गई। मौसम में सुधार होने और मार्ग की स्थिति सामान्य होने के बाद प्रशासन ने यात्रा दोबारा शुरू कर दी। अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बल, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की व्यापक तैनाती की गई है। यात्रा मार्ग पर सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन निगरानी और आधुनिक संचार प्रणाली के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किए हैं ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके। यात्रा के नोडल अधिकारी राहुल यादव ने बताया कि जिला प्रशासन ने बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सुविधाओं, पेयजल, स्वच्छता, बिजली, आपातकालीन सेवाओं और यातायात प्रबंधन के लिए अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रशासन लगातार यात्रा मार्ग की निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पारंपरिक धार्मिक वेशभूषा में बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना हुए। कई श्रद्धालु परिवार के साथ पहुंचे, जबकि बड़ी संख्या में युवा और बुजुर्ग भी यात्रा में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने कहा कि वर्षों से बाबा बर्फानी के दर्शन की इच्छा थी और इस बार यात्रा शुरू होते ही उन्हें पवित्र गुफा जाने का अवसर मिला है। उन्होंने प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमरनाथ यात्रा का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है। समुद्र तल से लगभग 3,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव ने इसी गुफा में माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। यही कारण है कि इस यात्रा को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रशासन ने यात्रियों से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी जांच पूरी करने, मौसम के अनुसार आवश्यक सामान साथ रखने और प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है। यात्रा मार्ग पर चिकित्सा दल, बचाव दल और आपदा प्रबंधन की टीमें भी लगातार तैनात हैं। इस वर्ष यात्रा अवधि 57 दिनों की निर्धारित की गई है। प्रशासन को उम्मीद है कि पूरे यात्रा काल में लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए आवास, भोजन, चिकित्सा और परिवहन की व्यवस्थाओं को पहले की तुलना में और मजबूत किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां भी पूरे यात्रा मार्ग पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:25:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे बेटे मुजतबा, सुरक्षा एजेंसियों ने जताया इजराइली हमले का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से बेटे मुजतबा खामेनेई को अंतिम संस्कार से दूर रहने की सलाह दी गई है, जबकि कई देशों के प्रतिनिधि भी समारोह में शामिल होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/son-mujtaba-will-not-attend-khameneis-funeral-security-agencies-expressed/article-57704"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ali-khamenei.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन इस बीच सबसे बड़ी चर्चा उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को लेकर हो रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने की सलाह दी है। बताया जा रहा है कि इजराइल की ओर से संभावित हमले की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि इस मामले में ईरानी अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सुप्रीम लीडर के एक प्रतिनिधि के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। ऐसे में अंतिम संस्कार से पहले ईरान में सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई है। अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद शहर में दफनाया जाएगा, जबकि अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक और राजकीय कार्यक्रमों की शुरुआत 4 जुलाई से होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन के दौरान किसी भी तरह का हमला या सुरक्षा उल्लंघन होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से मुजतबा खामेनेई की सार्वजनिक मौजूदगी को फिलहाल सीमित रखने की सलाह दी गई है। पिछले दिनों अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़े तनाव के दौरान ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि मुजतबा खामेनेई हमलों में घायल हो गए थे। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी और उसके बाद से वह सार्वजनिक तौर पर भी नजर नहीं आए। अब अंतिम संस्कार में उनकी गैरमौजूदगी ने इन अटकलों को और तेज कर दिया है। ईरानी प्रशासन फिलहाल सुरक्षा से जुड़ी रणनीति पर ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने से बच रहा है। बताया जा रहा है कि मशहद में अंतिम संस्कार को लेकर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। शहर के प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है और समारोह स्थल के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि देने आने वाले लोगों को देखते हुए प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान देने की तैयारी की है। अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा कई देशों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है, जिससे यह समारोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की ओर से भी अंतिम संस्कार में आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ईरान पहुंचकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए इस यात्रा को अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात भी कर सकता है, हालांकि कार्यक्रम का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। अयातुल्ला अली खामेनेई कई दशकों तक ईरान की राजनीति और विदेश नीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में रहे। उनके नेतृत्व में ईरान ने कई अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना किया और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में लगातार तनाव भी बना रहा। उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। धार्मिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर भी शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मशहद में होने वाला अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच क्षेत्रीय हालात भी लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। इजराइल और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहतीं। बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा जोखिम पहले से अधिक बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि मुजतबा खामेनेई की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि ईरान का नया नेतृत्व इस संवेदनशील दौर में किस तरह आगे बढ़ता है और क्षेत्रीय हालात पर इसका क्या असर पड़ता है। दूसरी ओर, मुजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन आधिकारिक स्तर पर सुरक्षा को ही इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:03:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था जम्मू से रवाना, कड़ी सुरक्षा के बीच बाबा बर्फानी के दर्शन को निकले श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[सिर्फ रजिस्टर्ड श्रद्धालुओं को मिली यात्रा की अनुमति, चारधाम में भी लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/the-first-batch-of-amarnath-yatra-left-from-jammu-devotees/article-57608"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/amarnath-yatra-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से गुरुवार तड़के अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना हो गया। सुबह करीब चार बजे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रद्धालुओं की बसों को हरी झंडी दिखाकर यात्रा की औपचारिक शुरुआत की। पूरे परिसर में 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 57 दिनों तक चलेगी और 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त, रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी। श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों से पवित्र गुफा तक पहुंचेंगे। प्रशासन ने पहले जत्थे में केवल उन्हीं श्रद्धालुओं को शामिल किया, जिन्होंने पहले से ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराया था। यात्रा में शामिल होने के लिए RFID कार्ड और ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करना भी अनिवार्य रखा गया। अधिकारियों के अनुसार इस व्यवस्था का उद्देश्य यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। यात्रा शुरू होने से पहले सभी यात्रियों की पहचान और दस्तावेजों की जांच की गई, जिसके बाद उन्हें निर्धारित सुरक्षा घेरे में रवाना किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। अब तक करीब चार लाख श्रद्धालु यात्रा के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं। प्रशासन ने बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, परिवहन, ठहरने की व्यवस्था, पेयजल, बिजली और आपातकालीन सहायता जैसी सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली हैं। यात्रा मार्ग पर मेडिकल कैंप, हेल्प डेस्क और राहत केंद्र भी स्थापित किए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। यात्रा शुरू होने से पहले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू स्थित बेस कैंप का निरीक्षण किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं, यात्री आवास, भोजन, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और हर स्तर पर बेहतर समन्वय बनाए रखा जाए। यात्रा की पूर्व संध्या पर उन्होंने तवी नदी के तट पर आयोजित तवी आरती में भी भाग लिया और यात्रा की सफलता तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा की कामना की।</p>
<p style="text-align:justify;">अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग सहित संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। सुरक्षाबल लगातार वाहन जांच अभियान चला रहे हैं और प्रमुख मार्गों पर पैदल गश्त भी की जा रही है। रामबन, बनिहाल और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सेना, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और स्थानीय पुलिस के जवान संयुक्त रूप से सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। यात्रा की निगरानी के लिए जम्मू में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) भी सक्रिय किया गया है, जहां से पूरे यात्रा मार्ग पर नजर रखी जा रही है। उधर, उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा में भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक जुलाई तक बद्रीनाथ धाम में करीब 14.5 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि केदारनाथ धाम में यह संख्या लगभग 13.75 लाख तक पहुंच गई है। पिछले कुछ सप्ताह में यात्रियों की संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मई के अंत तक केदारनाथ में श्रद्धालुओं की संख्या बद्रीनाथ से काफी अधिक थी, लेकिन जून के तीसरे सप्ताह के बाद बद्रीनाथ में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी और अब बद्रीनाथ आगे निकल गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मई के दौरान केदारनाथ में प्रतिदिन 25 से 28 हजार श्रद्धालु पहुंच रहे थे, जबकि बद्रीनाथ में रोजाना 15 से 18 हजार श्रद्धालु दर्शन कर रहे थे। जून के अंतिम सप्ताह में यह तस्वीर बदल गई और अब बद्रीनाथ में प्रतिदिन 18 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि मौसम अनुकूल रहने और बेहतर व्यवस्थाओं के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा का रुख कर रहे हैं। धार्मिक यात्राओं को लेकर देशभर में श्रद्धालुओं का उत्साह इस वर्ष पहले के मुकाबले अधिक दिखाई दे रहा है। अमरनाथ यात्रा हो या चारधाम यात्रा, दोनों जगह प्रशासन सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल निर्धारित नियमों का पालन करते हुए यात्रा करें, अधिकृत पंजीकरण के बाद ही यात्रा पर निकलें और मौसम व प्रशासन की सलाह का पालन करें। इससे यात्रा सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 10:10:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले में सियासी हलचल, अयोध्या में कांग्रेस नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर अयोध्या में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले पुलिस ने कई नेताओं पर एहतियाती कार्रवाई की, जबकि मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/political-stir-in-ram-temple-offering-case-police-action-against/article-57413"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ayodhya-ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े मामले को लेकर अयोध्या में मंगलवार को राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ अयोध्या पहुंचे थे। पार्टी की ओर से मंदिर ट्रस्ट कार्यालय के बाहर विरोध कार्यक्रम की घोषणा की गई थी। इससे पहले सोमवार देर रात पुलिस ने अजय राय को अयोध्या के एक होटल में रोक दिया। बाद में उन्हें कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस ले जाया गया। प्रशासन ने इसे एहतियाती कदम बताया। इसी दौरान कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं और जनप्रतिनिधियों को भी उनके आवास पर ही रोक दिया गया, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। मंगलवार दोपहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राम जन्मभूमि परिसर की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने मंदिर क्षेत्र से पहले टेढ़ी बाजार इलाके में बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया। इस दौरान कुछ देर के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। हालात को देखते हुए पुलिस ने कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया। पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा के सभी आवश्यक इंतजाम पहले से किए गए थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर, अजय राय की पत्नी रीना राय ने वाराणसी से एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने अपने पति की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और कहा कि वह जल्द से जल्द उनसे मिलने की उम्मीद कर रही हैं। कांग्रेस की ओर से भी कहा गया कि पार्टी इस मुद्दे पर अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखेगी। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और सभी फैसले उसी के अनुसार लिए गए। इस बीच चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। जांच के क्रम में राम मंदिर परिसर में लंबे समय से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (आरएमओ) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। वह करीब 17 वर्षों से अयोध्या में तैनात थे। उनकी जिम्मेदारी मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी नेटवर्क की निगरानी से जुड़ी थी। बताया जाता है कि चढ़ावा गिनती वाले कक्ष सहित पूरे मंदिर परिसर में लगे लगभग 1600 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> विशेष जांच दल (एसआईटी) इस पूरे मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी देखी जा रही है। अर्जुन देव की लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। जांच के सिलसिले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय से भी पुलिस ने पूछताछ की। जानकारी के अनुसार उनसे यह जानने का प्रयास किया गया कि उन्हें मामले की जानकारी पहली बार कब मिली और उसके बाद क्या कदम उठाए गए। इससे पहले इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत अदालत ने 14 दिन के लिए बढ़ा दी थी। जांच एजेंसियां अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद राज्य सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल का गठन किया। 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई और मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसी दिन मंदिर ट्रस्ट से जुड़े दो पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से जांच लगातार जारी है और संबंधित दस्तावेजों व अन्य पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह कड़ी रखी गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती जारी है। वहीं जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:17:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों का दावा, 36 नागरिकों की मौत; सीमा पर फिर बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान सरकार ने महिलाओं और बच्चों समेत 36 लोगों के मारे जाने का दावा किया, पाकिस्तान बोला- हालिया आतंकी हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a423786ad3d6/article-57312"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/afghanistan-pakistan-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर एक बार फिर तनाव गहरा गया है। तालिबान सरकार ने सोमवार को आरोप लगाया कि पाकिस्तान की ओर से किए गए सीमा-पार हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 36 नागरिकों की मौत हो गई, जबकि 163 लोग घायल हुए हैं। तालिबान प्रशासन का कहना है कि पक्तिया, पक्तिका और कुनर प्रांतों में कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया, जिससे भारी जनहानि और संपत्ति का नुकसान हुआ। दूसरी ओर पाकिस्तान ने इन आरोपों के बीच अपनी कार्रवाई को हाल के आतंकी हमलों के जवाब में चलाया गया खुफिया-आधारित सैन्य अभियान बताया है। तालिबान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार बीती रात हुए हमलों में 36 नागरिकों की मौत हुई है और 163 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि हमलों में तीन रिहायशी मकान पूरी तरह नष्ट हो गए। उनके मुताबिक मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। अफगान प्रशासन ने इस घटना को नागरिक आबादी पर सीधा हमला बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।<br /><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">फितरत ने आरोप लगाया कि पक्तिया प्रांत के चमकनी जिले के मंडोखेल गांव में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने एक नागरिक के घर को निशाना बनाया। इस हमले में एक बुजुर्ग और एक बच्चे की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि जब गांव के लोग घायलों की मदद के लिए मौके पर पहुंचे तो उसी स्थान पर दूसरी बार भी बमबारी की गई। तालिबान प्रशासन का दावा है कि इस दूसरी कार्रवाई में 28 ग्रामीणों की मौत हो गई और 158 लोग घायल हो गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। तालिबान सरकार ने यह भी कहा कि पक्तिका प्रांत के गियान जिले के वालुस्त गांव में भी एक घर पर हमला किया गया। इस घटना में छह लोगों की मौत होने का दावा किया गया है, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे बताए गए हैं। वहीं कुनर प्रांत के मनोगई जिले के बारोलो गांव में भी एक रिहायशी मकान को नुकसान पहुंचा। इस हमले में किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन मकान पूरी तरह तबाह हो गया और परिवार को भारी नुकसान उठाना पड़ा। दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय आतंकी समूहों के खिलाफ की गई। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर सीमावर्ती क्षेत्र में सुनियोजित सैन्य अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और कराची में हुए आतंकी हमलों के बाद यह कार्रवाई आवश्यक हो गई थी। पाकिस्तान का दावा है कि उसका निशाना केवल आतंकी ठिकाने थे, न कि आम नागरिक।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">सीमा पर बढ़े तनाव की एक बड़ी वजह हाल में पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ हमला भी माना जा रहा है। कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित सिंध रेंजर्स के प्रांतीय मुख्यालय पर शनिवार रात हमला हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार हमलावरों ने एक वाहन से मुख्य द्वार को टक्कर मारी, जिसके बाद गोलीबारी और विस्फोट हुए। इस हमले में तीन अर्द्धसैनिक जवान और तीन हमलावर मारे गए थे। पाकिस्तान ने इस हमले को गंभीर सुरक्षा चुनौती बताया था। कराची हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से अलग हुए एक संगठन ने ली है। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की सीमा से संचालित आतंकी संगठन उसके भीतर हमलों को अंजाम दे रहे हैं। वहीं तालिबान सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है और कहती है कि वह किसी भी देश के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगी। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद, आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कई बार सीमा पार गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसी घटनाओं का सबसे अधिक असर सीमावर्ती गांवों में रहने वाले आम नागरिकों पर पड़ता है, जिन्हें बार-बार विस्थापन और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। यदि दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया मजबूत नहीं हुई तो सीमा पर हालात और जटिल हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पहले कई मौकों पर दोनों पक्षों से संयम बरतने और विवादों का समाधान बातचीत के जरिए निकालने की अपील कर चुका है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से अपने-अपने दावों पर कायम रहने के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अफगानिस्तान में हुए इन हमलों ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तालिबान सरकार नागरिकों के मारे जाने की बात कह रही है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:55:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी मिसाइल हमला, 13 की मौत; दोनों देशों में बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान ने बच्चों और नागरिकों को निशाना बनाने का लगाया आरोप, पाकिस्तान बोला- 26 आतंकवादी मारे गए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pakistani-missile-attack-on-afghanistan-kills-13-tension-increases-between/article-55551"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pakistan-afghanistan-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार देर रात पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान के कई सीमावर्ती इलाकों में किए गए मिसाइल हमलों के बाद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अफगान तालिबान सरकार का दावा है कि इन हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल हैं। इसके अलावा कई महिलाएं और अन्य नागरिक घायल हुए हैं। तालिबान प्रशासन का आरोप है कि हमले रिहायशी इलाकों पर किए गए, जबकि पाकिस्तान का कहना है कि उसकी कार्रवाई आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने घटना के बाद पाकिस्तान की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उनका कहना है कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में आम नागरिकों के घरों को निशाना बनाया गया। तालिबान ने हमले के बाद घायलों और मृतकों की तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं, जिनमें बच्चों के घायल होने और मारे जाने के दावे किए गए हैं। अफगान प्रशासन का कहना है कि सीमा पार इस तरह की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है और इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी तरफ पाकिस्तान ने तालिबान सरकार के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली थी कि सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं और पाकिस्तान के खिलाफ हमलों की तैयारी कर रहे हैं। उनके मुताबिक सैन्य अभियान पूरी तरह लक्षित था और इसमें चार बड़े आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया। पाकिस्तान का दावा है कि इस कार्रवाई में 26 भारत समर्थित आतंकवादी मारे गए हैं। अधिकारियों के अनुसार जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया उनमें प्रशिक्षण केंद्र, हथियारों के गोदाम और आतंकी कमांडरों के संचालन केंद्र शामिल थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस हमले की पृष्ठभूमि में एक दिन पहले पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में हुई हिंसक घटना को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 9 जून को सीमा के पास एक चौकी पर हुए हमले में छह पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी। पाकिस्तान का आरोप है कि हमलावरों ने चौकी पर कब्जा करने की कोशिश की थी। जवाबी कार्रवाई में आठ आतंकवादियों के मारे जाने का दावा भी किया गया। इसके बाद से ही पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर थीं और सीमा क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी गई थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाकिस्तान लंबे समय से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी को अपने लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा मानता रहा है। इस्लामाबाद का आरोप है कि टीटीपी के लड़ाके अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में घुसपैठ और हमले करते हैं। पाकिस्तान कई बार तालिबान सरकार से इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग कर चुका है। हालांकि काबुल स्थित तालिबान प्रशासन लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है। तालिबान का कहना है कि वह किसी भी विदेशी या क्षेत्रीय आतंकी संगठन को अपनी जमीन इस्तेमाल नहीं करने देता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दोनों देशों के बीच तनाव पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ता जा रहा है। फरवरी में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में एयरस्ट्राइक की थी। उस समय पाकिस्तान ने दावा किया था कि टीटीपी के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया और बड़ी संख्या में लड़ाके मारे गए। इसके कुछ दिनों बाद अफगानिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी। इसके बाद सीमा क्षेत्रों में कई बार गोलीबारी और सैन्य झड़पों की खबरें सामने आती रहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तालिबान सरकार का दावा है कि मार्च 2026 में पाकिस्तान द्वारा किए गए एक बड़े हवाई हमले में सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। अफगान अधिकारियों के अनुसार काबुल में स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र पर बमबारी के कारण भारी जनहानि हुई थी। उस समय भी दोनों देशों के बीच गंभीर विवाद पैदा हो गया था। हालांकि पाकिस्तान ने उस घटना में नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज किया था और कहा था कि कार्रवाई केवल सैन्य और आतंकी ठिकानों के खिलाफ की गई थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मौजूदा तनाव केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसके पीछे टीटीपी, क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और राजनीतिक अविश्वास जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से पाकिस्तान को उम्मीद थी कि सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों में कमी आएगी, लेकिन इसके उलट दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता गया। ताजा मिसाइल हमले के बाद क्षेत्रीय हालात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। दोनों देशों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं और वास्तविक स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:28:39 +0530</pubDate>
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