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                <title>खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ट्रंप का बयान बना विवाद, ईरान में शोक तो अमेरिका में सियासी हमला</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान में भारी भीड़ के बीच अंतिम विदाई की प्रक्रिया जारी, वहीं डोनाल्ड ट्रंप के भाषण की टिप्पणी ने दोनों देशों के बीच तनाव और राजनीतिक बहस को तेज कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-statement-becomes-controversy-amid-khameneis-funeral-mourning-in-iran/article-57842"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ketan-agrawal-murder-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">ईरान में शनिवार को पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग राजधानी तेहरान की सड़कों पर जुटे। सुबह से ही शहर के कई हिस्सों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और प्रमुख मार्गों पर आम वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। काले कपड़ों में पहुंचे हजारों लोग हाथों में खामेनेई की तस्वीरें और बैनर लेकर ग्रैंड मोसाला की ओर बढ़ते दिखाई दिए। पूरे शहर में शोक का माहौल रहा। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। अपने संबोधन में ट्रंप ने ईरान को लेकर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका ने अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह की मोहलत दी, क्योंकि "हम अच्छे लोग हैं।" उनके इस बयान के बाद नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई और दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव फिर सुर्खियों में आ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">तेहरान में आयोजित अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं। अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। शहर के कई इलाकों में विशेष निगरानी रखी गई और हवाई क्षेत्र पर भी सख्त नियंत्रण किया गया। ग्रैंड मोसाला परिसर के आसपास सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। शिया परंपरा के अनुसार कई लोग शोक व्यक्त करते हुए अपनी छाती पीटते नजर आए, जबकि महिलाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में नागरिक अपने नेता को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे। पूरे इलाके में खामेनेई के बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर लगाए गए थे, जिससे माहौल पूरी तरह शोकमय दिखाई दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने माउंट रशमोर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए ईरान पर तीखा हमला बोला। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाया है और यदि भविष्य में कोई समझौता होता है तो उसे अमेरिकी शर्तों पर ही होना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि ईरान को अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया क्योंकि अमेरिका "अच्छे लोगों" का देश है। ट्रंप के इस बयान पर सभा में मौजूद समर्थकों ने तालियां बजाईं और हंसी के साथ प्रतिक्रिया दी। हालांकि इस टिप्पणी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान में अंतिम संस्कार के दौरान लोगों की भावनाएं स्पष्ट रूप से दिखाई दीं। राजधानी ही नहीं बल्कि दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग तेहरान पहुंचे। कई नागरिकों ने इसे देश के लिए भावुक क्षण बताया। जनाजे में शामिल होने आए लोगों का कहना था कि वे अपने नेता को अंतिम सम्मान देने और राष्ट्रीय एकजुटता दिखाने के लिए यहां पहुंचे हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में देश को एकजुट रहने की जरूरत है। शोक समारोह के दौरान धार्मिक परंपराओं का पालन किया गया और सुरक्षा एजेंसियों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया गया कि ग्रैंड मोसाला परिसर में तैयार किया गया मंच उसी शैली में बनाया गया, जहां खामेनेई अपने सार्वजनिक संबोधन किया करते थे। समारोह में शामिल कई लोगों ने इसे उनके सार्वजनिक जीवन की यादों से जोड़कर देखा। दूर-दराज के शहरों से आए नागरिकों ने कहा कि वे इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनना चाहते थे। कई परिवार सुबह से ही समारोह स्थल के बाहर मौजूद रहे और श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लंबी कतारों में खड़े दिखाई दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी रहीं। पश्चिम एशिया पहले से ही राजनीतिक और सैन्य तनाव का सामना कर रहा है। ऐसे समय में अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी ने नई चर्चाओं को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयान दोनों देशों के संबंधों पर असर डाल सकते हैं। यदि आने वाले दिनों में कूटनीतिक संवाद आगे बढ़ता है तो दोनों पक्षों के आधिकारिक रुख पर भी दुनिया की नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 12:53:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका आजादी के 250वें वर्ष पर दफन करेगा 408 किलो का टाइम कैप्सूल, 2276 में खुलेगा इतिहास का यह अनोखा संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में 10 फीट नीचे रखा जाएगा विशेष टाइम कैप्सूल, जिसमें AI की भविष्यवाणी, ऐतिहासिक दस्तावेज, व्हेल की हड्डी और 50 राज्यों से चुनी गई यादगार वस्तुएं शामिल हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-will-bury-a-408-kg-time-capsule-on-the/article-57815"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/america-time-capsule.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">अमेरिका अपनी आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक ऐसा कदम उठाने जा रहा है, जो आने वाली कई पीढ़ियों के लिए इतिहास का अनमोल दस्तावेज बन सकता है। 4 जुलाई को फिलाडेल्फिया स्थित इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में करीब 408 किलो वजनी एक विशेष टाइम कैप्सूल जमीन के भीतर दफन किया जाएगा। इसे अब से ठीक 250 साल बाद यानी वर्ष 2276 में खोला जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य केवल कुछ वस्तुओं को सुरक्षित रखना नहीं है, बल्कि 2026 के अमेरिका की सोच, तकनीक, संस्कृति और सामाजिक जीवन की झलक भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है। बताया जा रहा है कि इस टाइम कैप्सूल का रिकॉर्ड भी आधिकारिक रूप से दर्ज कर दिया गया है, ताकि आने वाले समय में इसकी सही पहचान और स्थान सुरक्षित रहे।</p>
<p>फिलाडेल्फिया को इस ऐतिहासिक पहल के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यही वह शहर है, जहां 4 जुलाई 1776 को अमेरिका के स्वतंत्रता घोषणा पत्र को मंजूरी मिली थी। इसी कारण इस स्थान को अमेरिकी लोकतंत्र और आजादी का प्रतीक माना जाता है। अधिकारियों के अनुसार, टाइम कैप्सूल में रखी गई वस्तुएं केवल सरकारी संस्थानों ने नहीं चुनीं, बल्कि देश के सभी 50 राज्यों और आम नागरिकों की भागीदारी से उनका चयन किया गया है। इनमें व्हेल की हड्डी, दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत, राइट बंधुओं के ऐतिहासिक विमान का कपड़ा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से जुड़ी भविष्यवाणियां, महत्वपूर्ण दस्तावेज और कई ऐसी वस्तुएं शामिल हैं, जो वर्तमान समय की पहचान मानी जाती हैं।</p>
<p>टाइम कैप्सूल एक ऐसा बंद कंटेनर होता है, जिसमें किसी खास दौर की वस्तुओं को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है। इसका मकसद भविष्य के लोगों को यह बताना होता है कि उस समय समाज कैसा था, लोग किस तरह का जीवन जीते थे और विज्ञान तथा तकनीक किस स्तर पर पहुंच चुके थे। यही वजह है कि इस बार तैयार किया गया अमेरिकी टाइम कैप्सूल केवल इतिहास का संग्रह नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी की ओर से भविष्य के लोगों के लिए एक संदेश भी माना जा रहा है।</p>
<p>इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती टाइम कैप्सूल को तैयार करना नहीं, बल्कि उसे पूरे 250 वर्षों तक सुरक्षित बनाए रखना था। वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने कई वर्षों तक शोध करने के बाद ऐसा डिजाइन तैयार किया, जो नमी, पानी, जंग और मौसम के प्रभाव से लंबे समय तक बचा रह सके। कैप्सूल को पारंपरिक चौकोर आकार की बजाय बेलनाकार बनाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चौकोर कंटेनरों के कोनों पर समय के साथ दबाव अधिक पड़ता है और वहीं से पानी अंदर जाने की संभावना बढ़ जाती है। इसके विपरीत बेलनाकार संरचना अधिक मजबूत और टिकाऊ मानी जाती है।</p>
<p>कैप्सूल को विशेष गुणवत्ता वाले स्टेनलेस स्टील से तैयार किया गया है, जिसका उपयोग वैज्ञानिक उपकरणों और अत्यधिक सुरक्षित संरचनाओं में किया जाता है। इसे पहले ही पूरी तरह सील किया जा चुका है और 4 जुलाई को केवल जमीन के भीतर स्थापित किया जाएगा। सीलिंग के लिए इंडियम नाम की विशेष धातु का इस्तेमाल किया गया है। यह धातु बेहद मुलायम होती है और ढक्कन बंद करते समय सबसे छोटी दरार को भी भर देती है। इससे हवा और पानी के प्रवेश की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।</p>
<p>वैज्ञानिकों ने कैप्सूल के भीतर नमी का स्तर भी सावधानी से नियंत्रित किया है। यदि नमी अधिक होती तो कागज और अन्य सामग्री खराब हो सकती थी, जबकि अत्यधिक सूखापन कुछ वस्तुओं को नुकसान पहुंचा सकता था। इसलिए इसके अंदर लगभग 35 प्रतिशत आर्द्रता बनाए रखी गई है। इसे करीब 10 फीट गहराई में दफनाया जाएगा, जहां तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहता है और मौसम के बदलाव का असर बहुत कम होता है।</p>
<p>इस टाइम कैप्सूल की सुरक्षा के लिए एक अतिरिक्त स्टील सिलेंडर भी लगाया जाएगा। दोनों परतों के बीच मौजूद हवा पानी को भीतर पहुंचने से रोकेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भविष्य में भूजल का स्तर बढ़ भी जाए या बाढ़ जैसी स्थिति बन जाए, तब भी यह संरचना लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती है। परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसी दिन इस कैप्सूल तक पानी पहुंच गया, तो इसका मतलब होगा कि पूरा क्षेत्र गंभीर प्राकृतिक संकट का सामना कर रहा होगा।</p>
<p>अमेरिका इस पहल के जरिए केवल अपनी उपलब्धियों को संरक्षित नहीं करना चाहता, बल्कि यह भी दिखाना चाहता है कि वर्ष 2026 का समाज किस तरह सोचता था और किन तकनीकों का उपयोग कर रहा था। यही कारण है कि इसमें सरकारी दस्तावेजों के साथ आम लोगों की ओर से चुनी गई वस्तुओं को भी समान महत्व दिया गया है। इससे भविष्य की पीढ़ियां उस दौर को केवल किताबों के माध्यम से नहीं, बल्कि वास्तविक वस्तुओं के जरिए भी समझ सकेंगी।</p>
<p>दुनिया में इससे पहले भी कई प्रसिद्ध टाइम कैप्सूल बनाए जा चुके हैं। अमेरिका का 'क्रिप्ट ऑफ सिविलाइजेशन' सबसे चर्चित उदाहरणों में शामिल है, जिसे लगभग 6,000 वर्षों तक बंद रखने की योजना बनाई गई है और इसे वर्ष 8113 में खोला जाएगा। वहीं 1939 में न्यूयॉर्क में दफन किया गया वेस्टिंगहाउस टाइम कैप्सूल भी भविष्य के लिए सुरक्षित रखा गया है। भारत में भी 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान लाल किले के पास 'कलपात्र' नाम से टाइम कैप्सूल दफन किया गया था, जिसे बाद में नई सरकार बनने पर बाहर निकाल लिया गया। हालांकि उसमें मौजूद सामग्री को लेकर आज भी कई चर्चाएं होती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:14:49 +0530</pubDate>
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                <title>अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी मिसाइल हमला, 13 की मौत; दोनों देशों में बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान ने बच्चों और नागरिकों को निशाना बनाने का लगाया आरोप, पाकिस्तान बोला- 26 आतंकवादी मारे गए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pakistani-missile-attack-on-afghanistan-kills-13-tension-increases-between/article-55551"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pakistan-afghanistan-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार देर रात पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान के कई सीमावर्ती इलाकों में किए गए मिसाइल हमलों के बाद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अफगान तालिबान सरकार का दावा है कि इन हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल हैं। इसके अलावा कई महिलाएं और अन्य नागरिक घायल हुए हैं। तालिबान प्रशासन का आरोप है कि हमले रिहायशी इलाकों पर किए गए, जबकि पाकिस्तान का कहना है कि उसकी कार्रवाई आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने घटना के बाद पाकिस्तान की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उनका कहना है कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में आम नागरिकों के घरों को निशाना बनाया गया। तालिबान ने हमले के बाद घायलों और मृतकों की तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं, जिनमें बच्चों के घायल होने और मारे जाने के दावे किए गए हैं। अफगान प्रशासन का कहना है कि सीमा पार इस तरह की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है और इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी तरफ पाकिस्तान ने तालिबान सरकार के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली थी कि सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं और पाकिस्तान के खिलाफ हमलों की तैयारी कर रहे हैं। उनके मुताबिक सैन्य अभियान पूरी तरह लक्षित था और इसमें चार बड़े आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया। पाकिस्तान का दावा है कि इस कार्रवाई में 26 भारत समर्थित आतंकवादी मारे गए हैं। अधिकारियों के अनुसार जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया उनमें प्रशिक्षण केंद्र, हथियारों के गोदाम और आतंकी कमांडरों के संचालन केंद्र शामिल थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस हमले की पृष्ठभूमि में एक दिन पहले पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में हुई हिंसक घटना को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 9 जून को सीमा के पास एक चौकी पर हुए हमले में छह पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी। पाकिस्तान का आरोप है कि हमलावरों ने चौकी पर कब्जा करने की कोशिश की थी। जवाबी कार्रवाई में आठ आतंकवादियों के मारे जाने का दावा भी किया गया। इसके बाद से ही पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर थीं और सीमा क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी गई थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाकिस्तान लंबे समय से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी को अपने लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा मानता रहा है। इस्लामाबाद का आरोप है कि टीटीपी के लड़ाके अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में घुसपैठ और हमले करते हैं। पाकिस्तान कई बार तालिबान सरकार से इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग कर चुका है। हालांकि काबुल स्थित तालिबान प्रशासन लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है। तालिबान का कहना है कि वह किसी भी विदेशी या क्षेत्रीय आतंकी संगठन को अपनी जमीन इस्तेमाल नहीं करने देता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दोनों देशों के बीच तनाव पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ता जा रहा है। फरवरी में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में एयरस्ट्राइक की थी। उस समय पाकिस्तान ने दावा किया था कि टीटीपी के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया और बड़ी संख्या में लड़ाके मारे गए। इसके कुछ दिनों बाद अफगानिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी। इसके बाद सीमा क्षेत्रों में कई बार गोलीबारी और सैन्य झड़पों की खबरें सामने आती रहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तालिबान सरकार का दावा है कि मार्च 2026 में पाकिस्तान द्वारा किए गए एक बड़े हवाई हमले में सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। अफगान अधिकारियों के अनुसार काबुल में स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र पर बमबारी के कारण भारी जनहानि हुई थी। उस समय भी दोनों देशों के बीच गंभीर विवाद पैदा हो गया था। हालांकि पाकिस्तान ने उस घटना में नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज किया था और कहा था कि कार्रवाई केवल सैन्य और आतंकी ठिकानों के खिलाफ की गई थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मौजूदा तनाव केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसके पीछे टीटीपी, क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और राजनीतिक अविश्वास जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से पाकिस्तान को उम्मीद थी कि सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों में कमी आएगी, लेकिन इसके उलट दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता गया। ताजा मिसाइल हमले के बाद क्षेत्रीय हालात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। दोनों देशों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं और वास्तविक स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:28:39 +0530</pubDate>
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