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                <title>गुरुवार की भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, उमड़ा श्रद्धा का सैलाब</title>
                                    <description><![CDATA[भांग, ड्रायफ्रूट, रजत आभूषण और सुगंधित पुष्पों से हुआ दिव्य श्रृंगार, भस्म आरती में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया आशीर्वाद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/baba-mahakal-dressed-as-a-king-witnessed-a-flood-of/article-55594"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakaleshwar-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य और आकर्षक श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना रहा। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजन-अर्चन की प्रक्रिया शुरू हुई। गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में गूंजते मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच श्रद्धालु आध्यात्मिक वातावरण में डूबे नजर आए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक धार्मिक अनुष्ठानों के बाद प्रथम घंटा बजाकर भगवान महाकाल को हरि-ओम का जल अर्पित किया गया। कर्पूर आरती के दौरान गर्भगृह का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। इसके बाद जटाधारी भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार आरंभ हुआ। उनके मस्तक पर रजत चंद्र धारण कराया गया और भांग, चंदन तथा गुलाब के पुष्पों से अलंकरण किया गया। रजत मुकुट और त्रिपुंड के साथ भगवान महाकाल का स्वरूप अत्यंत मनोहारी दिखाई दिया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु इस दिव्य दृश्य को देखकर भावविभोर हो उठे। बताया जाता है कि भस्म आरती के दौरान होने वाला यह श्रृंगार भगवान शिव के महाकाल स्वरूप की विशेष अभिव्यक्ति माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को परंपरा अनुसार वस्त्र से ढंककर भस्म रमाई गई। यह प्रक्रिया भस्म आरती का सबसे महत्वपूर्ण और विशेष हिस्सा मानी जाती है। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी विश्वास के कारण देश-दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। गुरुवार को भी मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की अच्छी खासी मौजूदगी देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म अर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान उन्हें भांग, ड्रायफ्रूट्स, रजत आभूषणों और सुगंधित पुष्पों से सजाया गया। भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की गईं। गुलाब और अन्य पुष्पों से तैयार विशेष मालाओं ने उनके स्वरूप को और भी आकर्षक बना दिया। गर्भगृह में उपस्थित पुजारियों और सेवकों ने पारंपरिक विधि से श्रृंगार को पूर्ण किया। जैसे-जैसे श्रृंगार आगे बढ़ता गया, श्रद्धालुओं में उत्साह भी बढ़ता गया। कई भक्त हाथ जोड़कर बाबा महाकाल का ध्यान करते दिखाई दिए, जबकि कुछ लोग आरती के दौरान मंत्रोच्चार में शामिल हुए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं, लेकिन गुरुवार और विशेष पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ जाती है। गुरुवार को भी देश के विभिन्न राज्यों से आए भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि तथा मंगल कामना के लिए प्रार्थना की। मंदिर परिसर में सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि उज्जैन की आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर दिन होने वाली यह आरती भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और सनातन परंपराओं की जीवंत झलक प्रस्तुत करती है। बाबा महाकाल के राजा स्वरूप के दर्शन करने वाले श्रद्धालु इसे अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं। गुरुवार की भस्म आरती में भी यही दृश्य देखने को मिला, जहां भक्ति, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम नजर आया और पूरा मंदिर परिसर शिवमय वातावरण में डूबा रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:51:09 +0530</pubDate>
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