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                <title>TempleNews - दैनिक जागरण</title>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी पर उठे सवाल, केजरीवाल ने मांगी स्वतंत्र जांच</title>
                                    <description><![CDATA[आम आदमी पार्टी प्रमुख ने जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए, कहा- मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत जांच जरूरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/questions-raised-on-sit-in-ram-temple-offering-case-kejriwal/article-56890"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-donation-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावा और दान प्रबंधन के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं हैं और जांच प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता आनी चाहिए। केजरीवाल का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विषय में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है। उनके बयान के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने कहा कि किसी भी गंभीर आरोप की जांच ऐसी होनी चाहिए जिस पर किसी प्रकार का संदेह न रहे। उन्होंने दावा किया कि एसआईटी के गठन और उसकी शक्तियों को लेकर कई प्रश्न उठ रहे हैं। उनके अनुसार, जनता यह जानना चाहती है कि जांच किस प्रक्रिया के तहत की जा रही है और किन तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी मामले में जांच एजेंसियां निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करती हैं तो उससे लोगों का विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है, इसलिए इससे जुड़े किसी भी आरोप की जांच पूरी गंभीरता से होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केजरीवाल ने अपने बयान में कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा हो रही है। उनका कहना था कि लोग यह जानना चाहते हैं कि जांच में अब तक क्या प्रगति हुई है और किन-किन पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों को सामने लाना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच को लेकर पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है, जिसके कारण सवाल उठ रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। उधर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जांच से जुड़े अधिकारियों को पत्र और ईमेल भेजकर कुछ दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा है। उनका दावा है कि उनके पास ऐसे तथ्य हैं जिन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखा जाना चाहिए। संजय सिंह ने कहा कि यदि सभी दस्तावेजों और लेनदेन की विस्तृत जांच की जाए तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक संस्था से जुड़े मामले में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है। संबंधित अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि उपलब्ध तथ्यों और शिकायतों के आधार पर जांच की जा रही है और जो भी जानकारी सामने आएगी, उसके अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करना है और किसी भी स्तर पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां विभिन्न दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध जानकारियों की समीक्षा कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सही तस्वीर सामने लाई जा सके। अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे हमेशा संवेदनशील और चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे में जब भी किसी प्रकार का आरोप सामने आता है, उस पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी तेजी से सामने आने लगती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में तथ्यों और आरोपों के बीच अंतर करना बेहद जरूरी होता है। जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता। यही कारण है कि कई जानकार सभी पक्षों से संयम बरतने और आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कह रहे हैं। श्रीराम मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में दान व चढ़ावा भी अर्पित करते हैं। ऐसे में मंदिर से जुड़े किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक मामले पर लोगों की विशेष नजर रहती है। जानकारों का कहना है कि श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखने के लिए सभी प्रक्रियाओं का पारदर्शी होना आवश्यक है। यदि किसी प्रकार की शिकायत या विवाद सामने आता है तो उसकी निष्पक्ष जांच लोगों के भरोसे को मजबूत करती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 13:21:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अयोध्या पहुंचे योगी, बोले- अपराधी कोई भी हो बचेगा नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रामलला के दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- एसआईटी जांच करेगी दूध का दूध और पानी का पानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/yogi-who-reached-ayodhya-amid-the-ram-temple-offering-controversy/article-56419"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/yogi-adityanath-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर जारी विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की और उसके बाद राम जन्मभूमि परिसर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। अयोध्या दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने जनसभा को भी संबोधित किया और राम मंदिर से जुड़ी चल रही जांच तथा विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर किसी भी स्तर पर कोई दोषी पाया जाता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। अपराधी चाहे कोई भी हो, कानून अपना काम करेगा और जांच एजेंसियां पूरी निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करेंगी। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश ने पांच सौ वर्षों तक संघर्ष किया है। ऐसे में कुछ आरोपों और अफवाहों के आधार पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास नहीं होना चाहिए। उन्होंने रामभक्तों से अपील करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने मर्यादा और धैर्य का संदेश दिया है। इसलिए सभी लोग संयम बनाए रखें और जांच पूरी होने का इंतजार करें। उन्होंने कहा कि पांच सौ साल तक इंतजार किया गया है तो पंद्रह दिन और इंतजार किया जा सकता है। जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अतीत में रामभक्तों पर गोली चलवाई थी, वे आज रामभक्तों के सम्मान की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दलों ने राम मंदिर निर्माण को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालतों में भी राम मंदिर निर्माण के खिलाफ तर्क दिए गए, लेकिन आज वही लोग अयोध्या और राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है। यह टीम पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और किसी भी स्तर पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति या संस्था के पास इस मामले से जुड़े प्रमाण हैं तो उन्हें जांच एजेंसी को सौंपना चाहिए ताकि तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जा सके।दरअसल राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने दावा किया कि मंदिर से करोड़ों रुपये की दान राशि गायब हुई है। उन्होंने आरोप लगाया था कि चढ़ावे की रकम में पांच से साढ़े सात करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी हो सकती है। इसके बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विवाद बढ़ने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी सफाई दी गई। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि अब तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है जिससे बड़े पैमाने पर चोरी या गबन की बात साबित होती हो। हालांकि बढ़ते विवाद के बीच भाजपा के कुछ नेताओं ने भी मामले की गहन जांच की मांग की। इसी क्रम में भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की थी। बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ट्रस्ट से इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। जांच के दौरान अब तक पांच लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू शामिल बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में इन लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं क्योंकि ये सभी दान राशि की गिनती और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं में किसी न किसी रूप में शामिल थे। जांच एजेंसियों ने अब तक करीब दो करोड़ रुपये की रकम बरामद किए जाने की जानकारी दी है। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर से सोना मिलने की भी चर्चा रही, हालांकि उसकी मात्रा और मूल्य को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एसआईटी लगातार कई दिनों से जांच में जुटी हुई है। टीम ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, आमंत्रित सदस्य गोपाल राव, बैंक अधिकारियों और नोटों की गिनती करने वाली एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ की है। बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और दान राशि जमा करने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। जांच टीम ने संबंधित कर्मचारियों से अलग-अलग पूछताछ कर उनके बयानों का मिलान भी किया है ताकि किसी प्रकार की विसंगति सामने आने पर उसे दर्ज किया जा सके।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने पर किसी को भी राहत नहीं मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:40:20 +0530</pubDate>
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                <title>गुरुवार की भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, उमड़ा श्रद्धा का सैलाब</title>
                                    <description><![CDATA[भांग, ड्रायफ्रूट, रजत आभूषण और सुगंधित पुष्पों से हुआ दिव्य श्रृंगार, भस्म आरती में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया आशीर्वाद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/baba-mahakal-dressed-as-a-king-witnessed-a-flood-of/article-55594"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakaleshwar-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य और आकर्षक श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना रहा। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजन-अर्चन की प्रक्रिया शुरू हुई। गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में गूंजते मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच श्रद्धालु आध्यात्मिक वातावरण में डूबे नजर आए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक धार्मिक अनुष्ठानों के बाद प्रथम घंटा बजाकर भगवान महाकाल को हरि-ओम का जल अर्पित किया गया। कर्पूर आरती के दौरान गर्भगृह का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। इसके बाद जटाधारी भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार आरंभ हुआ। उनके मस्तक पर रजत चंद्र धारण कराया गया और भांग, चंदन तथा गुलाब के पुष्पों से अलंकरण किया गया। रजत मुकुट और त्रिपुंड के साथ भगवान महाकाल का स्वरूप अत्यंत मनोहारी दिखाई दिया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु इस दिव्य दृश्य को देखकर भावविभोर हो उठे। बताया जाता है कि भस्म आरती के दौरान होने वाला यह श्रृंगार भगवान शिव के महाकाल स्वरूप की विशेष अभिव्यक्ति माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को परंपरा अनुसार वस्त्र से ढंककर भस्म रमाई गई। यह प्रक्रिया भस्म आरती का सबसे महत्वपूर्ण और विशेष हिस्सा मानी जाती है। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी विश्वास के कारण देश-दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। गुरुवार को भी मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की अच्छी खासी मौजूदगी देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म अर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान उन्हें भांग, ड्रायफ्रूट्स, रजत आभूषणों और सुगंधित पुष्पों से सजाया गया। भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की गईं। गुलाब और अन्य पुष्पों से तैयार विशेष मालाओं ने उनके स्वरूप को और भी आकर्षक बना दिया। गर्भगृह में उपस्थित पुजारियों और सेवकों ने पारंपरिक विधि से श्रृंगार को पूर्ण किया। जैसे-जैसे श्रृंगार आगे बढ़ता गया, श्रद्धालुओं में उत्साह भी बढ़ता गया। कई भक्त हाथ जोड़कर बाबा महाकाल का ध्यान करते दिखाई दिए, जबकि कुछ लोग आरती के दौरान मंत्रोच्चार में शामिल हुए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं, लेकिन गुरुवार और विशेष पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ जाती है। गुरुवार को भी देश के विभिन्न राज्यों से आए भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि तथा मंगल कामना के लिए प्रार्थना की। मंदिर परिसर में सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि उज्जैन की आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर दिन होने वाली यह आरती भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और सनातन परंपराओं की जीवंत झलक प्रस्तुत करती है। बाबा महाकाल के राजा स्वरूप के दर्शन करने वाले श्रद्धालु इसे अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं। गुरुवार की भस्म आरती में भी यही दृश्य देखने को मिला, जहां भक्ति, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम नजर आया और पूरा मंदिर परिसर शिवमय वातावरण में डूबा रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:51:09 +0530</pubDate>
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