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                <title>SupremeCourt - दैनिक जागरण</title>
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                <title>हनीमून मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक से किया इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[मेघालय सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश पर सवाल जरूर उठाए, लेकिन पहले से रिहा हो चुकी सोनम की जमानत तत्काल रद्द करने से इनकार किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/honeymoon-murder-case-supreme-court-refuses-to-stay-bail-of/article-57833"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sonam-raghuvanshi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मेघालय सरकार ने इस मामले में मेघालय हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत सोनम को जमानत दी गई थी। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले के कुछ पहलुओं पर सवाल जरूर उठाए, लेकिन यह भी माना कि सोनम पहले ही जेल से रिहा हो चुकी हैं और ट्रायल कोर्ट की ओर से तय की गई शर्तों का पालन करते हुए फिलहाल शिलांग में रह रही हैं। अदालत ने फिलहाल उनकी जमानत रद्द करने या उस पर रोक लगाने का कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया। यह मामला वर्ष 2025 में सामने आए चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ा है। आरोप है कि मेघालय में हनीमून के दौरान राजा रघुवंशी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी, उनके कथित प्रेमी और अन्य आरोपियों को जांच के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस केस ने देशभर में काफी सुर्खियां बटोरी थीं और जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार चर्चा में रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट और निचली अदालतों ने पहले ही सोनम के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार पाए थे। उन्होंने अदालत को बताया कि सोनम की जमानत याचिका पहले तीन बार खारिज हो चुकी थी। अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि जांच के दौरान इस बात की आशंका जताई गई थी कि यदि उन्हें राहत दी जाती है तो वह फरार हो सकती हैं, गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं या साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकती हैं। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले को लेकर कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। जस्टिस एमएम सुंदरेश ने सुनवाई के दौरान पूछा कि यदि पहले तथ्यों के आधार पर जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं, तो बाद में केवल तकनीकी आधार पर राहत देना किस हद तक उचित माना जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पहली नजर में हाई कोर्ट के आदेश के कुछ पहलुओं पर अदालत की आपत्तियां हैं। हालांकि पीठ ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि सोनम पहले ही रिहा हो चुकी हैं और फिलहाल अदालत द्वारा तय सभी शर्तों का पालन कर रही हैं। ऐसे में तत्काल उनकी जमानत पर रोक लगाने की जरूरत नहीं समझी गई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है और आगे विस्तृत सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया जाएगा।</p>
<p>इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू गिरफ्तारी के दौरान दर्ज की गई कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा रहा। रिकॉर्ड के अनुसार सोनम रघुवंशी को 27 अप्रैल को जमानत मिली थी और इस फैसले में गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में हुई एक गंभीर त्रुटि अहम कारण बनी। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 के तहत दर्ज किया गया था, जो हत्या के अपराध से संबंधित है। लेकिन जब सोनम को गिरफ्तारी के आधार बताए गए तो दस्तावेजों में बीएनएस की धारा 403(1) का उल्लेख किया गया। अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि बीएनएस में धारा 403(1) का कोई अस्तित्व ही नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि यही त्रुटि केवल एक दस्तावेज तक सीमित नहीं थी, बल्कि गिरफ्तारी मेमो, गिरफ्तारी चेकलिस्ट, निरीक्षण मेमो, अधिकारों की जानकारी से जुड़े रिकॉर्ड और केस डायरी सहित कई दस्तावेजों में दोहराई गई थी। हाई कोर्ट ने माना था कि किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों और गिरफ्तारी के वास्तविक आधार की स्पष्ट जानकारी देना उसका संवैधानिक और कानूनी अधिकार है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील को स्वीकार नहीं किया कि यह केवल क्लर्क की साधारण गलती थी। हाई कोर्ट का मानना था कि कई दस्तावेजों में एक जैसी त्रुटि होना गंभीर प्रक्रिया संबंधी कमी को दर्शाता है। इसी आधार पर सोनम को जमानत दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट इस आदेश की वैधता और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं की विस्तार से समीक्षा करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:51:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>आधार को नागरिकता का प्रमाण मानने पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[याचिका में कहा गया- आधार केवल पहचान का दस्तावेज, नागरिकता, निवास और जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करना कानून के खिलाफ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/question-on-considering-aadhaar-as-proof-of-citizenship-supreme-court/article-56124"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/aadhaar-card.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश में आधार कार्ड के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर कानूनी बहस तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, सभी राज्यों और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में मांग की गई है कि आधार कार्ड का उपयोग केवल पहचान साबित करने के लिए किया जाए और इसे नागरिकता, निवास, पते या जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार न किया जाए। अदालत के इस कदम ने आधार की कानूनी स्थिति और उसके विभिन्न सरकारी प्रक्रियाओं में उपयोग को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने की। याचिका अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 स्पष्ट रूप से बताती है कि आधार संख्या किसी व्यक्ति को नागरिकता या निवास का अधिकार प्रदान नहीं करती और न ही इसे नागरिकता या डोमिसाइल का प्रमाण माना जा सकता है। याचिकाकर्ता ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की अगस्त 2023 की अधिसूचना का भी उल्लेख किया है, जिसमें कहा गया था कि आधार केवल पहचान का प्रमाण है, न कि नागरिकता, पते या जन्मतिथि का प्रमाण।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">याचिका में आरोप लगाया गया है कि कानून और अधिसूचनाओं में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद देश के कई हिस्सों में आधार कार्ड को उम्र, निवास और नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। इसके तहत स्कूलों में प्रवेश, संपत्ति की खरीद-बिक्री, जन्म प्रमाण पत्र बनवाने, राशन कार्ड हासिल करने और ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने जैसी प्रक्रियाओं में आधार का उपयोग किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे कानून की मूल भावना प्रभावित हो रही है और आधार की सीमाओं का उल्लंघन हो रहा है। याचिका में विशेष रूप से नए मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि इस फॉर्म में आधार को जन्मतिथि और निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23(4) के तहत आधार का उपयोग केवल पहचान स्थापित करने के लिए किया जा सकता है, न कि उम्र या निवास साबित करने के लिए। इसलिए फॉर्म-6 में इस तरह का उपयोग कानून के अनुरूप नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया है कि आधार कार्ड प्राप्त करने के लिए भारतीय नागरिक होना आवश्यक नहीं है। आधार अधिनियम के अनुसार कोई भी निवासी, जिसने एक निर्धारित अवधि तक भारत में निवास किया हो, आधार संख्या प्राप्त करने के लिए पात्र हो सकता है। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने चिंता जताई है कि विदेशी नागरिक, अवैध प्रवासी या घुसपैठिए भी आधार प्राप्त कर सकते हैं और बाद में अन्य दस्तावेज हासिल करने में इसका उपयोग कर सकते हैं। याचिका में दावा किया गया है कि इसी प्रक्रिया के जरिए कुछ लोग मतदाता पहचान पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेज प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता ने अदालत से केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की है कि आधार कार्ड को केवल पहचान के दस्तावेज के रूप में ही इस्तेमाल किया जाए। इसके अलावा फॉर्म-6 में आधार को जन्मतिथि और निवास प्रमाण के रूप में स्वीकार करने की व्यवस्था को भी रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि यह व्यवस्था आधार अधिनियम, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 14 की भावना के विपरीत है। मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है। याचिका के अनुसार अवैध आव्रजन और घुसपैठ का असर चुनावी व्यवस्था, जनसांख्यिकीय संतुलन और सुरक्षा संबंधी मामलों पर पड़ सकता है। इसी कारण आधार के उपयोग की सीमा को स्पष्ट रूप से तय करना जरूरी है। हालांकि इन दावों पर अंतिम निर्णय अभी अदालत को करना है और केंद्र तथा राज्यों के जवाब के बाद ही मामले की विस्तृत सुनवाई आगे बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब इस मामले पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले समय में अदालत का फैसला आधार कार्ड के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकता है। यह मामला केवल एक दस्तावेज के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि पहचान, नागरिकता, चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने ला रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:09:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जैकलीन की याचिका पर सुनवाई से जज अलग, 200 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस में नई बेंच करेगी फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, 25 जून को नई बेंच के सामने होगी अगली सुनवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/6a2a8fff823b2/article-55648"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jacqueline-fernandez-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस से जुड़े 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि जैकलीन फर्नांडिस की याचिका अब किसी दूसरी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध की जाए। मामले की अगली सुनवाई 25 जून को होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला देश के चर्चित ठग सुकेश चंद्रशेखर और उससे जुड़े कथित 200 करोड़ रुपए के जबरन वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण से जुड़ा हुआ है। जैकलीन फर्नांडिस ने दिल्ली की एक निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने शुरुआत में ही स्पष्ट कर दिया कि यह मामला अब किसी अन्य पीठ के समक्ष सुना जाएगा। जस्टिस मिश्रा ने बताया कि एक संबंधित मामले में उनके पुत्र सरकार की ओर से पेश हो चुके हैं, इसलिए न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए वह इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर रहे हैं। अदालत ने मामले को 25 जून के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम के बाद अब सभी की नजरें नई बेंच पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि जैकलीन फर्नांडिस की याचिका पर आगे क्या निर्णय लिया जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुनवाई में देरी से मामले की प्रक्रिया कुछ समय के लिए आगे बढ़ सकती है, लेकिन इससे जांच या आरोपों की वैधता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि दिल्ली की एक अदालत ने 30 मई को जैकलीन फर्नांडिस, सुकेश चंद्रशेखर और 15 अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया था। अदालत ने माना था कि जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आगे की न्यायिक प्रक्रिया के लिए पर्याप्त हैं। इसी आदेश को चुनौती देते हुए जैकलीन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">3 जून को जैकलीन फर्नांडिस दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुई थीं। उस दौरान उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया था। अदालत में उनकी ओर से कहा गया था कि उनका इस कथित अपराध से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और उन्हें जानबूझकर इस मामले में फंसाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, यह पूरा मामला कथित महाठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है, जिस पर आरोप है कि उसने दिल्ली की रोहिणी जेल में रहते हुए फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से करीब 200 करोड़ रुपए की जबरन वसूली की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, इस अवैध धन का एक हिस्सा विभिन्न लोगों पर खर्च किया गया, जिसमें जैकलीन फर्नांडिस का नाम भी सामने आया।</p>
<p style="text-align:justify;">ईडी का दावा है कि सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन को करोड़ों रुपए के महंगे उपहार दिए थे। जांच में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार इन उपहारों में लग्जरी कारें, हीरे-जवाहरात, डिजाइनर बैग, महंगे कपड़े, विदेशी नस्ल के पालतू जानवर और अन्य कीमती वस्तुएं शामिल थीं। एजेंसी का आरोप है कि जैकलीन को यह जानकारी थी कि सुकेश की आय का स्रोत संदिग्ध है, इसके बावजूद उन्होंने उपहार स्वीकार किए।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच एजेंसी ने अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जैकलीन को आरोपी बनाया था। ईडी का कहना है कि उपलब्ध डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि अभिनेत्री को सुकेश की गतिविधियों के बारे में पर्याप्त जानकारी थी। इसी आधार पर उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि जैकलीन की कानूनी टीम लगातार इस दावे का विरोध कर रही है। उनके वकीलों का कहना है कि अभिनेत्री स्वयं सुकेश चंद्रशेखर की कथित धोखाधड़ी का शिकार हुई हैं। बचाव पक्ष का तर्क है कि जैकलीन ने सुकेश को एक सफल कारोबारी समझा था और उन्हें उसके आपराधिक अतीत की जानकारी नहीं थी। इसलिए उन्हें किसी भी प्रकार की आपराधिक साजिश या धन शोधन गतिविधि से जोड़ना उचित नहीं है। मामले की जांच के दौरान सुकेश और जैकलीन की कई निजी तस्वीरें भी सार्वजनिक हुई थीं, जिन्होंने इस प्रकरण को और अधिक चर्चित बना दिया था। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">आने वाली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है। यदि सुप्रीम कोर्ट जैकलीन की याचिका स्वीकार करता है तो आरोप तय करने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है, जबकि याचिका खारिज होने की स्थिति में निचली अदालत में मुकदमे की कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ेगी। 200 करोड़ रुपए के इस बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सभी पक्ष 25 जून को होने वाली अगली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:00:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार, आज दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक और राष्ट्रपति से मुलाकात प्रस्तावित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/congress-reaches-supreme-court-on-meenakshi-natarajans-nomination-dispute/article-55599"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर चल रहा राजनीतिक घटनाक्रम अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। कांग्रेस ने अपनी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। जानकारी के अनुसार यह याचिका बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात डिजिटल माध्यम से दाखिल की गई। पार्टी का कहना है कि नामांकन निरस्त करने का फैसला उचित नहीं है और मामले की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच चुनाव आयोग के रुख पर भी सभी की नजर बनी हुई है। कांग्रेस की ओर से आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा जा चुका है और अब फैसले का इंतजार किया जा रहा है। राजनीतिक हलकों में गुरुवार दोपहर 3 बजे तक की अवधि को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया में नाम वापसी की अंतिम समयसीमा इसी समय तक निर्धारित है। ऐसे में आयोग की ओर से आने वाला कोई भी निर्णय आगे की चुनावी तस्वीर को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल आयोग की तरफ से सार्वजनिक रूप से कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले को लेकर कांग्रेस ने दिल्ली में भी गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई गई है जिसमें मौजूदा स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई वरिष्ठ नेता, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और संगठन के प्रभारी शामिल हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि बैठक में कानूनी पहलुओं के साथ-साथ राजनीतिक स्थिति पर भी विचार किया जाएगा। इसी क्रम में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का कार्यक्रम भी तय किया गया है। पार्टी इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी राष्ट्रपति को देने और अपना पक्ष रखने की तैयारी में है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन 9 जून को जांच प्रक्रिया के दौरान निरस्त कर दिया गया था। नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के समय उनके हलफनामे से जुड़ी एक आपत्ति सामने आई थी। इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने उपलब्ध दस्तावेजों और आपत्तियों पर विचार करते हुए नामांकन रद्द करने का निर्णय लिया। यही फैसला अब विवाद का विषय बना हुआ है और कांग्रेस इसे चुनौती दे रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा। उनका कहना है कि जिस मामले का उल्लेख किया जा रहा है वह किसी आपराधिक मुकदमे की श्रेणी में नहीं आता। कांग्रेस का तर्क है कि संबंधित अदालत की ओर से केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और इसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर पार्टी का कहना है कि हलफनामे में उस जानकारी का उल्लेख अनिवार्य नहीं था। पार्टी का मानना है कि पूरे मामले की कानूनी स्थिति को देखते हुए नामांकन रद्द किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार होना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अब आगे की स्थिति चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर निर्भर करेगी। यदि आयोग किसी स्तर पर राहत देता है तो चुनाव प्रक्रिया में आगे बदलाव संभव हो सकता है। वहीं यदि आयोग अपने पूर्व निर्णय को बरकरार रखता है तो कानूनी लड़ाई अदालत में आगे बढ़ सकती है। दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई कब होगी, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार का दिन इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चुनावी प्रक्रिया की निर्धारित समयसीमाएं और संभावित कानूनी कदम आगे की दिशा तय कर सकते हैं। ऐसे में चुनाव आयोग और न्यायालय की अगली कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 12:37:03 +0530</pubDate>
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