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                <title>Encroachment - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Encroachment RSS Feed</description>
                
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                <title>भोपाल के बड़ा तालाब किनारे अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, FTL क्षेत्र से फार्म हाउस और बंगले हटाने शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[एनजीटी के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई तेज, पहले चरण में छह अवैध निर्माण हटाए जाएंगे; 21 चिन्हित अतिक्रमणों पर चलेगा अभियान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/big-action-on-encroachment-on-the-banks-of-bada-talab/article-57879"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-big-lake.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भोपाल के ऐतिहासिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बड़ा तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम ने शनिवार से व्यापक अभियान शुरू कर दिया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों और नगर निगम की कार्ययोजना के तहत फुल टैंक लेवल (FTL) क्षेत्र में बने अवैध फार्म हाउस, बंगले और अन्य निर्माणों को हटाने की कार्रवाई प्रारंभ की गई। प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य भोज वेटलैंड और बड़ा तालाब के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखना है।</p>
<p style="text-align:justify;">शनिवार सुबह से ही जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीमें गौरागांव, बिशनखेड़ी और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचीं। जेसीबी मशीनों और अन्य संसाधनों की मदद से चिन्हित अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। अभियान के पहले दिन छह अतिक्रमणों को हटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पूरे अभियान की निगरानी नगर निगम के उपायुक्त भुवन गुप्ता कर रहे हैं, जबकि टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा और तहसीलदार कुणाल राउत सहित अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। नगर निगम ने कुछ दिन पहले ही एनजीटी में अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि बड़ा तालाब के आसपास एफटीएल क्षेत्र में चिन्हित 21 अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसी योजना के तहत अब अभियान को धरातल पर लागू किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन के अनुसार जिन निर्माणों को हटाया जा रहा है, वे फुल टैंक लेवल और उसके निर्धारित सुरक्षा दायरे के भीतर आते हैं। संबंधित भवन मालिकों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे। नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि भोज वेटलैंड के सीमांकन के बाद एफटीएल से 50 मीटर के भीतर आने वाले सभी अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद जब अवैध निर्माण नहीं हटाए गए, तब प्रशासन ने संयुक्त अभियान शुरू किया। नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार सेवनिया गौंड, गौरा विशनखेड़ी और प्रेमपुरा क्षेत्र में कुल 21 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इनमें से तीन निर्माण वर्ष 2022 से पहले के बताए गए हैं, जबकि शेष 18 निर्माण वर्ष 2022 के बाद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश निर्माण बिना किसी वैध भवन अनुमति के किए गए हैं, इसलिए नियमानुसार इन्हें हटाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़ा तालाब भोपाल ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की पहचान माना जाता है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। यहां अनेक दुर्लभ पक्षियों का निवास है और यह शहर के प्रमुख जल स्रोतों में शामिल है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि तालाब के कैचमेंट और एफटीएल क्षेत्र में लगातार हो रहे अवैध निर्माणों से जल संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण समय-समय पर न्यायालयों और पर्यावरण संस्थाओं ने अतिक्रमण हटाने पर जोर दिया है। हालांकि यह पहला अवसर नहीं है जब बड़ा तालाब क्षेत्र में कार्रवाई की जा रही हो। जानकारी के अनुसार इस वर्ष सीमांकन अभियान के दौरान प्रशासन ने कुल 347 अतिक्रमण चिन्हित किए थे, लेकिन अब तक केवल 51 छोटे अतिक्रमण ही हटाए जा सके थे। इनमें टीटी नगर क्षेत्र के 39 और बैरागढ़ क्षेत्र के 12 निर्माण शामिल थे। अभी भी लगभग 296 अतिक्रमण शेष हैं, जिन पर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मामले में सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कार्रवाई की जा रही है। जिन निर्माणों को हटाया जा रहा है, उनके पास वैध स्वीकृति या भवन निर्माण की अनुमति उपलब्ध नहीं है। प्रशासन का दावा है कि अभियान पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर संचालित किया जा रहा है। बड़ा तालाब के आसपास भू-माफियाओं की सक्रियता भी प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। आरोप हैं कि कई क्षेत्रों में कम कीमत पर प्लॉट बेचने के नाम पर लोगों को गुमराह किया गया। इतना ही नहीं, एफटीएल सीमा को लेकर भ्रम पैदा करने के लिए कथित तौर पर अलग-अलग प्रकार की सीमांकन मुनारें भी स्थापित कर दी गईं। मौके पर पांच प्रकार की मुनारें मिलने की बात सामने आई है, जिनमें केवल कुछ पर ही नगर निगम का स्पष्ट चिन्ह अंकित है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की भी जांच की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़ा तालाब की सीमा निर्धारण को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई सर्वे किए जा चुके हैं। वर्ष 2016 में डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (DGPS) तकनीक से सर्वे कराया गया था, जिसमें तालाब का क्षेत्रफल पहले की तुलना में अधिक दर्ज किया गया। इसके बाद एनजीटी के निर्देश पर सीमांकन हुआ, जिसमें कई मुनारें गायब मिलीं। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद भी नया सर्वे कराया गया, हालांकि उसकी विस्तृत रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। राज्य सरकार भी बड़ा तालाब संरक्षण को लेकर गंभीरता जता चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले संबंधित विभागों को नए सिरे से सर्वे कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। वहीं भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भी बड़ा तालाब के संरक्षण के लिए मास्टर प्लान तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि दीर्घकालिक योजना के बिना तालाब क्षेत्र को सुरक्षित रखना कठिन होगा। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सभी चिन्हित अवैध निर्माणों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का उद्देश्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं, बल्कि भोपाल की इस ऐतिहासिक जल धरोहर को सुरक्षित और संरक्षित रखना भी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरणीय महत्व का लाभ उठा सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 16:19:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर प्रशासन का जोर</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर के नकटी गांव में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत कई मकानों को हटाया। कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास व्यवस्था को लेकर अपनी समस्याएं सामने रखीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/administrations-emphasis-on-rehabilitation-of-affected-families-action-taken-to/article-57418"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nakti-village.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रायपुर के नकटी गांव में सोमवार तड़के प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, जिसके बाद पूरे इलाके में दिनभर हलचल का माहौल बना रहा। सुबह करीब चार बजे से शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, नगर निगम की टीम और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे। कार्रवाई के तहत कई मकानों को हटाया गया। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने खुले स्थानों पर दिन और रात बिताई। इनमें महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी शामिल थे। प्रभावित लोगों का कहना है कि अचानक शुरू हुई कार्रवाई के कारण उन्हें अपना सामान समेटने और वैकल्पिक व्यवस्था करने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="9k="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">कार्रवाई के बाद कई परिवार अपने टूटे हुए मकानों के पास ही बैठे रहे। कुछ लोग मलबे के बीच अपने घरेलू सामान को सुरक्षित रखने की कोशिश करते दिखाई दिए। कई महिलाओं और बुजुर्गों ने बताया कि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अब रहने की सुरक्षित जगह और बच्चों की देखभाल की है। बारिश का मौसम शुरू होने के कारण लोगों की चिंता और बढ़ गई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि फिलहाल उनके पास रहने के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं है और उन्हें जल्द से जल्द मूलभूत सुविधाओं के साथ पुनर्वास की आवश्यकता है। रात में कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे। इस दौरान कई लोगों ने अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं। ग्रामीणों का कहना था कि पुनर्वास के लिए जो मकान उपलब्ध कराए जा रहे हैं, वे बड़े परिवारों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कुछ लोगों ने दावा किया कि 12 से 14 सदस्यों वाले परिवारों को एक ही कमरा आवंटित किया जा रहा है। साथ ही बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से इन व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है। स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान उन्हें भरोसा दिया गया था कि बरसात के मौसम तक किसी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं होगी। कार्रवाई शुरू होने के बाद कई ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी भी जताई। वहीं इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं और विभिन्न दलों के नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर बयान दिए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इस पूरे अभियान को नियमानुसार की गई कार्रवाई बताया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="9k="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">कार्रवाई के दौरान कुछ समय के लिए विरोध की स्थिति भी बनी। कई ग्रामीण अपने परिवारों के साथ मौके पर ही बैठ गए और कार्रवाई रोकने की मांग करने लगे। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल ने लोगों को वहां से हटाया ताकि अभियान प्रभावित न हो। मौके पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात रहा और पूरे क्षेत्र की निगरानी की जाती रही। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। इस बीच प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर भी जानकारी दी है। अधिकारियों के अनुसार नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में पात्र परिवारों को बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रभावित लोगों के सामान को भी नगर निगम की टीम की मदद से नए स्थान तक पहुंचाया गया। प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी और पात्र परिवारों को निर्धारित नियमों के अनुसार आवास उपलब्ध कराए जाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">दिनभर चली कार्रवाई के दौरान कई भावुक दृश्य भी सामने आए। कुछ बच्चे अपने टूटे हुए घरों के सामने बैठे दिखाई दिए, जबकि कई परिवार अपने सामान के साथ खुले में इंतजार करते रहे। प्रभावित लोगों का कहना है कि सुबह से उन्हें भोजन बनाने का अवसर नहीं मिला और छोटे बच्चों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर प्रशासनिक टीम की ओर से मौके पर मौजूद लोगों और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए नाश्ते के पैकेट भी वितरित किए गए। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए बरसात के मौसम में इस तरह की कार्रवाई पर चिंता जताई। वहीं कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए बेहतर पुनर्वास व्यवस्था की मांग की। दूसरी ओर प्रशासन ने दोहराया कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास और आवास आवंटन की प्रक्रिया जारी है तथा सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। नकटी गांव में कार्रवाई के बाद हालात सामान्य करने के प्रयास जारी हैं। प्रशासन का ध्यान पुनर्वास प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर है, जबकि प्रभावित परिवार बेहतर आवास और मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर में होटल अमृतसरी सील, बाथरूम के पास बन रही थी बिरयानी</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की कार्रवाई में भारी गंदगी का खुलासा, 1 लाख रुपए का जुर्माना; वर्षों से बकाया राशि नहीं चुकाने का भी आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/biryani-was-being-made-near-the-bathroom-of-hotel-amritsari/article-56089"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/hotel-amritsari.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र घड़ी चौक स्थित होटल अमृतसरी के खिलाफ नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए होटल को सील कर दिया है। निगम की संयुक्त टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में होटल के भीतर गंभीर स्वच्छता अनियमितताएं सामने आईं। जांच के दौरान ऐसी तस्वीरें और हालात देखने को मिले, जिन्होंने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया। होटल संचालक पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल स्वच्छता नियमों के उल्लंघन के कारण नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित बकाया राशि का भुगतान नहीं करने की वजह से भी की गई है। सोमवार को नगर निगम की टीम जब होटल अमृतसरी पहुंची तो वहां कई तरह की खामियां सामने आईं। अधिकारियों के मुताबिक होटल परिसर में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब थी। कई जगह कचरा जमा मिला और भोजन तैयार करने वाले क्षेत्र में भी स्वच्छता के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि बिरयानी और अन्य खाद्य सामग्री बाथरूम से सटे स्थान पर रखी गई थी। इसके अलावा सड़क किनारे अस्थायी तरीके से किचन संचालित किए जाने के भी प्रमाण मिले। अधिकारियों ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि होटल प्रबंधन को पहले भी कई बार नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें साफ-सफाई सुधारने, बकाया राशि जमा करने और नियमों के अनुरूप संचालन करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन बार-बार चेतावनी के बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। ऐसे में निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए होटल को सील करने का फैसला लिया। अधिकारियों के अनुसार यदि भविष्य में होटल दोबारा शुरू करना है तो उसे सभी नियमों का पालन करते हुए आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करनी होंगी। जांच में यह भी सामने आया कि होटल अमृतसरी पर नगर निगम का कई वर्षों से बकाया चल रहा था। निगम की ओर से कई बार भुगतान के लिए नोटिस भेजे गए, लेकिन प्रबंधन ने राशि जमा नहीं की। इसके बाद राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग, बाजार शाखा और नगर निवेश विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई। इसी क्रम में होटल को सील किया गया और जुर्माना लगाया गया। अधिकारियों का कहना है कि निगम राजस्व की वसूली और नियमों के पालन को लेकर अब और सख्ती बरतेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">होटल पर कार्रवाई के साथ-साथ नगर निगम ने शहर के अन्य बाजार क्षेत्रों में भी व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया। गोलबाजार, मालवीय रोड और आसपास के प्रमुख कारोबारी इलाकों में दुकानों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान 17 दुकानों में गंदगी, कचरा प्रबंधन में लापरवाही और स्वच्छता नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए। इन दुकानदारों पर कुल 18 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण जारी रहेंगे। इसी अभियान के तहत नगर निवेश विभाग ने सड़क पर अतिक्रमण कर व्यवसाय चलाने वाले दुकानदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की। करीब 25 दुकानदारों से सड़क बाधा शुल्क के रूप में लगभग 50 हजार रुपए वसूले गए। कई स्थानों पर सड़क पर रखा सामान हटाया गया और कुछ मामलों में सामान जब्त भी किया गया। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल रहे। कार्रवाई के दौरान राजस्व, स्वास्थ्य, बाजार और नगर निवेश विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। अधिकारियों का कहना है कि शहर में खाद्य प्रतिष्ठानों, होटल, रेस्टोरेंट और बाजार क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाएगी ताकि लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिल सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर समय-समय पर सख्त जांच जरूरी है। खासकर ऐसे प्रतिष्ठानों में जहां बड़ी संख्या में लोग भोजन करने पहुंचते हैं। वहीं निगम अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से अन्य होटल और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को भी नियमों का पालन करने का संदेश जाएगा। होटल अमृतसरी को सील कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। नगर निगम ने साफ कर दिया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:27:24 +0530</pubDate>
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                <title>रायपुर में अवैध निर्माण पर निगम का बुलडोजर, दो मकान ढहाए</title>
                                    <description><![CDATA[डुप्सा तालाब और वृंदावन कॉलोनी में बिना अनुमति बन रहे निर्माण हटाए गए, मलबा सड़क पर फैलाने और ग्रीन नेट नहीं लगाने वालों से 7 हजार रुपए जुर्माना वसूला गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/corporations-bulldozer-demolished-two-houses-due-to-illegal-construction-in/article-55637"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/illegal-construction.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई लगातार जारी है। गुरुवार को निगम की जोन-8 टीम ने रायपुरा क्षेत्र में बड़े स्तर पर अभियान चलाते हुए बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण कार्यों पर बुलडोजर चलाया। कार्रवाई के दौरान डुप्सा तालाब के पास बनाए जा रहे एक अवैध निर्माण को तोड़ा गया, वहीं वृंदावन कॉलोनी में निर्माणाधीन दो मकानों को भी ध्वस्त कर दिया गया। इसके अलावा निर्माण कार्यों में तय नियमों का पालन नहीं करने वाले लोगों पर आर्थिक दंड भी लगाया गया। निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर में अवैध निर्माण और निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम को पिछले कुछ दिनों से रायपुरा स्थित डुप्सा तालाब के आसपास अवैध निर्माण की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों की जांच के बाद अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि संत रविदास वार्ड क्रमांक-70 के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में करीब 1100 वर्गफीट जमीन पर बिना किसी वैध स्वीकृति के निर्माण कार्य चल रहा था। अधिकारियों के अनुसार निर्माणकर्ता की ओर से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। इसके बाद निगम की टीम पुलिस बल और अमले के साथ मौके पर पहुंची और निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू की। बुलडोजर की मदद से अवैध हिस्से को तोड़ दिया गया। कार्रवाई के दौरान आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई और काफी देर तक इलाके में हलचल बनी रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी अभियान के तहत निगम अधिकारियों ने इंद्रप्रस्थ कॉलोनी के पास स्थित वृंदावन कॉलोनी में भी निरीक्षण किया। यहां करीब 1000-1000 वर्गफीट क्षेत्र में दो मकानों का निर्माण किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में दोनों निर्माण कार्य बिना स्वीकृति के पाए गए। अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों की जांच की और निर्माण को अवैध मानते हुए उसे हटाने का निर्णय लिया। इसके बाद दोनों मकानों के निर्माणाधीन हिस्सों को मशीनों की मदद से तोड़ दिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में लंबे समय से कुछ निर्माण कार्यों को लेकर शिकायतें की जा रही थीं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम की कार्रवाई केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं रही। अभियान के दौरान विभिन्न वार्डों में चल रहे निर्माण कार्यों की भी जांच की गई। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर निर्माण मलबा यानी सी एंड डी वेस्ट सड़क पर फैला हुआ मिला। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ धूल और गंदगी की समस्या भी बढ़ रही थी। अधिकारियों ने संबंधित लोगों को नियमों की जानकारी देते हुए ई-चालान जारी किए। वहीं कुछ निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए ग्रीन नेट नहीं लगाया गया था। निर्माण कार्यों के दौरान ग्रीन नेट लगाना अनिवार्य माना जाता है ताकि आसपास के क्षेत्रों में धूल का प्रभाव कम हो सके। नियमों की अनदेखी करने वालों पर जुर्माना लगाया गया और कुल 7 हजार रुपए की राशि वसूल की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों का कहना है कि शहर में तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों के बीच नियमों का पालन कराना जरूरी है। बिना अनुमति निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि भविष्य में विवाद और सुरक्षा संबंधी समस्याओं का कारण भी बन सकता है। इसी वजह से निगम लगातार निगरानी कर रहा है। जिन क्षेत्रों से शिकायतें मिल रही हैं वहां विशेष अभियान चलाकर जांच की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार का निर्माण शुरू करने से पहले आवश्यक स्वीकृति और दस्तावेज प्राप्त करें। साथ ही निर्माण सामग्री और मलबा सड़क पर न फैलाएं तथा धूल नियंत्रण के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">नगर निगम का कहना है कि आने वाले दिनों में भी यह अभियान जारी रहेगा। अवैध निर्माण, सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण और निर्माण नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जाएगी। निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियमों को नजरअंदाज करने वाले लोगों पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर निर्माण हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 15:03:40 +0530</pubDate>
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