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                <title>CourtHearing - दैनिक जागरण</title>
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                <description>CourtHearing RSS Feed</description>
                
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                <title>मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आज से नियमित सुनवाई शुरू, सभी बेंचें करेंगी काम</title>
                                    <description><![CDATA[समर वेकेशन समाप्त होने के बाद जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में फिर शुरू होगा नियमित न्यायिक कार्य, प्रशासनिक बदलावों की भी चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/somvati-amavasya-today-a-rare-coincidence-of-amrit-siddhi-yoga/article-55957"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-high-court-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक महीने के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सोमवार से नियमित न्यायिक कार्य फिर शुरू हो गया है। जबलपुर स्थित मुख्यपीठ के साथ-साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में भी सभी नियमित बेंचें अब पूर्व की तरह मामलों की सुनवाई करेंगी। लंबे अवकाश के बाद अदालतों में एक बार फिर सामान्य गतिविधियां लौटने से वकीलों, पक्षकारों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले एक महीने के दौरान केवल जरूरी और अत्यावश्यक मामलों की ही सुनवाई हो रही थी, जबकि बड़ी संख्या में नियमित मामलों की सुनवाई अवकाश समाप्त होने का इंतजार कर रही थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस वर्ष हाईकोर्ट का समर वेकेशन 16 मई से शुरू होकर 14 जून तक चला। इस दौरान अदालत पूरी तरह बंद नहीं रही बल्कि विशेष व्यवस्था के तहत वेकेशन बेंचों का गठन किया गया था। इन बेंचों ने आवश्यक मामलों पर सुनवाई जारी रखी। हालांकि नियमित मामलों की संख्या काफी अधिक होने के कारण बड़ी संख्या में प्रकरण लंबित रहे, जिनकी सुनवाई अब शुरू होगी। न्यायिक हलकों में माना जा रहा है कि अवकाश के बाद शुरुआती दिनों में अदालतों में मामलों की संख्या सामान्य से अधिक रह सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में लंबित याचिकाएं और अपीलें सूचीबद्ध की जाएंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बार समर वेकेशन के दौरान सुनवाई की व्यवस्था भी कुछ अलग रही। आमतौर पर ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान वेकेशन बेंच सप्ताह में केवल दो दिन बैठती थी, लेकिन न्यायिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से इस बार नई व्यवस्था लागू की गई। विशेष बेंचों ने सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को सुनवाई की। अधिकारियों के अनुसार इस व्यवस्था का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला और कई अर्जेंट मामलों का समय पर निराकरण हो सका। साथ ही लंबित मामलों के दबाव को भी कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई की शुरुआत ऐसे समय हो रही है जब न्यायिक प्रशासन में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद हाईकोर्ट की जिम्मेदारी फिलहाल एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया संभाल रहे हैं। उनके नेतृत्व में अब नियमित बेंचों का संचालन किया जाएगा। न्यायिक समुदाय की नजरें इस बात पर भी टिकी हुई हैं कि आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर क्या बदलाव किए जाते हैं और न्यायिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर खंडपीठ में भी जल्द प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। इंदौर खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायाधीश जस्टिस विजय कुमार शुक्ला इस महीने के अंत में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। उनकी सेवानिवृत्ति से पहले और उसके बाद न्यायिक जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। न्यायिक सूत्रों का कहना है कि मुख्यपीठ से किसी वरिष्ठ न्यायाधीश को इंदौर भेजा जा सकता है ताकि प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनी रहे। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस सुबोध अभ्यंकर के नाम संभावित प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए चर्चा में हैं। यदि ऐसा होता है तो इंदौर खंडपीठ के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव देखने को मिल सकता है। न्यायिक हलकों का मानना है कि प्रशासनिक पदों पर अनुभवी न्यायाधीशों की नियुक्ति से मामलों के प्रबंधन और न्यायिक कार्यों के संचालन में गति आएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सामने एक बड़ी चुनौती न्यायाधीशों के रिक्त पदों की भी है। वर्तमान में हाईकोर्ट में कुल 53 न्यायाधीशों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन सभी पद भरे नहीं हैं। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की सेवानिवृत्ति के बाद कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या और कम होकर 37 रह जाएगी। इसका मतलब है कि कुल 16 पद रिक्त हो जाएंगे। न्यायिक विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायाधीशों की कमी का सीधा असर मामलों के निपटारे की गति पर पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पहले से ही बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। ऐसे में रिक्त पदों को जल्द भरना आवश्यक माना जा रहा है।  यदि समय रहते नियुक्तियां नहीं हुईं तो लंबित मामलों का बोझ और बढ़ सकता है। वहीं दूसरी ओर अदालतों में तकनीकी सुधार, ई-कोर्ट व्यवस्था और बेहतर केस मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए भी लंबित मामलों को कम करने की कोशिशें जारी हैं। समर वेकेशन समाप्त होने के साथ ही हाईकोर्ट की सभी नियमित बेंचों में कामकाज सामान्य हो गया है। पक्षकारों को अब अपने मामलों की सुनवाई के लिए नई तारीखों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और नियमित न्यायिक प्रक्रिया फिर से गति पकड़ती दिखाई दे रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:41:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>वायरल गर्ल की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई, 23 जून तक टली सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[दस्तावेजों में कथित हेरफेर और उम्र विवाद से जुड़े मामले में कोर्ट ने कमियां दूर करने के लिए दिया समय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/hearing-on-viral-girls-petition-postponed-in-high-court-till/article-55801"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/viral-girl.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">इंदौर हाईकोर्ट में शुक्रवार को सोशल मीडिया पर चर्चित ‘वायरल गर्ल’ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनके जन्म संबंधी दस्तावेजों में हेरफेर कर उनकी वैध शादी को अवैध साबित करने की कोशिश की गई है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से याचिका में कई त्रुटियों और दस्तावेजों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई। इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कमियां दूर करने के लिए समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 23 जून को तय की है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, याचिका में दावा किया गया है कि वायरल गर्ल के पिता ने जन्म रिकॉर्ड में बदलाव कर उन्हें नाबालिग दिखाने का प्रयास किया। याचिकाकर्ता का कहना है कि उनके छोटे भाई के दस्तावेजों को उनका बताकर रिकॉर्ड में गलत जानकारी प्रस्तुत की गई। उनका आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य उनकी उम्र को लेकर भ्रम पैदा करना और विवाह की वैधता पर सवाल खड़े करना था। इसी आधार पर हाईकोर्ट से रिकॉर्ड की जांच और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष पड़ताल की मांग की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामला उस समय ज्यादा चर्चा में आया जब वायरल गर्ल के विवाह को लेकर उम्र संबंधी विवाद सामने आया। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने के बाद उन्हें फिल्मों में काम करने के अवसर मिले थे। इसी दौरान केरल में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात एक युवक से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और मार्च 2026 में उन्होंने विवाह कर लिया। शादी के बाद यह मामला सार्वजनिक बहस का विषय बन गया और उम्र को लेकर कई तरह के दावे सामने आने लगे। विवाद तब और गहरा गया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने विवाह के समय वायरल गर्ल की उम्र लगभग 16 वर्ष होने की आशंका जताई। इसके बाद मामले ने कानूनी मोड़ ले लिया। खरगोन पुलिस ने संबंधित युवक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। इसी कार्रवाई के बाद उम्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच और उनकी प्रमाणिकता को लेकर सवाल उठने लगे। अब यही मुद्दा हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है।</p>
<p class="isSelectedEnd">याचिका में यह भी कहा गया है कि विवाह को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाई गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उनके निजी मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर गलत तथ्यों के आधार पर प्रचार किया गया। दंपति का कहना है कि इससे उनकी सामाजिक छवि प्रभावित हुई और उन्हें अनावश्यक विवादों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि उनके जन्म प्रमाण पत्र को मूल स्वरूप में बहाल किया जाए और रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ की स्वतंत्र जांच कराई जाए। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान वायरल गर्ल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता पी.वी. दिनेश वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। दूसरी ओर, राज्य सरकार की तरफ से याचिका की तकनीकी कमियों और दस्तावेजों की प्रतियों को लेकर सवाल उठाए गए। सरकारी पक्ष ने विशेष रूप से जन्म प्रमाण पत्र की प्रस्तुत प्रतिलिपि पर आपत्ति दर्ज कराई और रिकॉर्ड की स्पष्टता को लेकर अपनी बात रखी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने जन्म प्रमाण पत्र की मूल प्रति भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाकर्ता के वकीलों को याचिका में मौजूद कमियां दूर करने और जन्म प्रमाण पत्र की स्पष्ट एवं पठनीय प्रति रिकॉर्ड पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके लिए 10 दिन का समय दिया गया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट का ध्यान अभी याचिका की प्रक्रियात्मक कमियों को दूर कराने पर केंद्रित है। ऐसे में अब सभी की नजर 23 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि उस दिन दस्तावेजों और उम्र विवाद से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर आगे की सुनवाई हो सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 12:39:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जैकलीन की याचिका पर सुनवाई से जज अलग, 200 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस में नई बेंच करेगी फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, 25 जून को नई बेंच के सामने होगी अगली सुनवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/6a2a8fff823b2/article-55648"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jacqueline-fernandez-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस से जुड़े 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि जैकलीन फर्नांडिस की याचिका अब किसी दूसरी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध की जाए। मामले की अगली सुनवाई 25 जून को होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला देश के चर्चित ठग सुकेश चंद्रशेखर और उससे जुड़े कथित 200 करोड़ रुपए के जबरन वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण से जुड़ा हुआ है। जैकलीन फर्नांडिस ने दिल्ली की एक निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने शुरुआत में ही स्पष्ट कर दिया कि यह मामला अब किसी अन्य पीठ के समक्ष सुना जाएगा। जस्टिस मिश्रा ने बताया कि एक संबंधित मामले में उनके पुत्र सरकार की ओर से पेश हो चुके हैं, इसलिए न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए वह इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर रहे हैं। अदालत ने मामले को 25 जून के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम के बाद अब सभी की नजरें नई बेंच पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि जैकलीन फर्नांडिस की याचिका पर आगे क्या निर्णय लिया जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुनवाई में देरी से मामले की प्रक्रिया कुछ समय के लिए आगे बढ़ सकती है, लेकिन इससे जांच या आरोपों की वैधता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि दिल्ली की एक अदालत ने 30 मई को जैकलीन फर्नांडिस, सुकेश चंद्रशेखर और 15 अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया था। अदालत ने माना था कि जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आगे की न्यायिक प्रक्रिया के लिए पर्याप्त हैं। इसी आदेश को चुनौती देते हुए जैकलीन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">3 जून को जैकलीन फर्नांडिस दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुई थीं। उस दौरान उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया था। अदालत में उनकी ओर से कहा गया था कि उनका इस कथित अपराध से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और उन्हें जानबूझकर इस मामले में फंसाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, यह पूरा मामला कथित महाठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है, जिस पर आरोप है कि उसने दिल्ली की रोहिणी जेल में रहते हुए फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से करीब 200 करोड़ रुपए की जबरन वसूली की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, इस अवैध धन का एक हिस्सा विभिन्न लोगों पर खर्च किया गया, जिसमें जैकलीन फर्नांडिस का नाम भी सामने आया।</p>
<p style="text-align:justify;">ईडी का दावा है कि सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन को करोड़ों रुपए के महंगे उपहार दिए थे। जांच में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार इन उपहारों में लग्जरी कारें, हीरे-जवाहरात, डिजाइनर बैग, महंगे कपड़े, विदेशी नस्ल के पालतू जानवर और अन्य कीमती वस्तुएं शामिल थीं। एजेंसी का आरोप है कि जैकलीन को यह जानकारी थी कि सुकेश की आय का स्रोत संदिग्ध है, इसके बावजूद उन्होंने उपहार स्वीकार किए।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच एजेंसी ने अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जैकलीन को आरोपी बनाया था। ईडी का कहना है कि उपलब्ध डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि अभिनेत्री को सुकेश की गतिविधियों के बारे में पर्याप्त जानकारी थी। इसी आधार पर उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि जैकलीन की कानूनी टीम लगातार इस दावे का विरोध कर रही है। उनके वकीलों का कहना है कि अभिनेत्री स्वयं सुकेश चंद्रशेखर की कथित धोखाधड़ी का शिकार हुई हैं। बचाव पक्ष का तर्क है कि जैकलीन ने सुकेश को एक सफल कारोबारी समझा था और उन्हें उसके आपराधिक अतीत की जानकारी नहीं थी। इसलिए उन्हें किसी भी प्रकार की आपराधिक साजिश या धन शोधन गतिविधि से जोड़ना उचित नहीं है। मामले की जांच के दौरान सुकेश और जैकलीन की कई निजी तस्वीरें भी सार्वजनिक हुई थीं, जिन्होंने इस प्रकरण को और अधिक चर्चित बना दिया था। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">आने वाली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है। यदि सुप्रीम कोर्ट जैकलीन की याचिका स्वीकार करता है तो आरोप तय करने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है, जबकि याचिका खारिज होने की स्थिति में निचली अदालत में मुकदमे की कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ेगी। 200 करोड़ रुपए के इस बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सभी पक्ष 25 जून को होने वाली अगली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:00:03 +0530</pubDate>
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