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                <title>TrinamoolCongress - दैनिक जागरण</title>
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                <title>TMC में सियासी संकट गहराया, बागी गुट आज चुनाव आयोग से करेगा नई कार्यकारिणी को मान्यता देने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[58 विधायक और 20 सांसदों के समर्थन का दावा करने वाला तृणमूल कांग्रेस का बागी गुट नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी को मान्यता दिलाने के लिए चुनाव आयोग पहुंचेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/political-crisis-deepens-in-tmc-rebel-group-will-demand-from/article-57603"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tmc-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी सियासी संकट अब एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। पार्टी का बागी गुट गुरुवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा और हाल ही में गठित नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (नेशनल वर्किंग कमेटी) को आधिकारिक मान्यता देने की मांग करेगा। बागी नेताओं का दावा है कि पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत किए गए हैं और उन्हें संवैधानिक मान्यता मिलनी चाहिए। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज कर दी है। बागी गुट के नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि चुनाव आयोग ने प्रतिनिधिमंडल को दोपहर 12 बजे मिलने का समय दिया है। करीब 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आयोग के सामने उन सभी दस्तावेजों को पेश करेगा, जिनमें नई कार्यकारिणी के गठन और संगठनात्मक बदलावों का उल्लेख है। उनके अनुसार 22 जून को कोलकाता में आयोजित प्रतिनिधि बैठक में पार्टी के नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया था। इस बैठक की जानकारी पहले ही चुनाव आयोग को भेजी जा चुकी है और अब उसी के आधार पर औपचारिक मान्यता की मांग की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">टीएमसी में यह संकट विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद खुलकर सामने आया। तीन जून को पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग होने का फैसला लिया। इसके बाद इन विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन पत्र सौंपते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग की। बाद में इस मांग को मंजूरी भी मिल गई। इसके कुछ दिनों बाद लोकसभा में भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया। बाद में इन सांसदों ने एक अलग राजनीतिक मंच के साथ विलय का निर्णय लिया, जिससे टीएमसी के भीतर संकट और गहरा गया। बागी गुट का कहना है कि उसके पास पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायक और सांसदों का समर्थन है। दल-बदल कानून की दसवीं अनुसूची के तहत यदि किसी राजनीतिक दल के दो-तिहाई निर्वाचित सदस्य किसी अलग समूह का समर्थन करते हैं या विलय का फैसला लेते हैं, तो उन्हें कानूनी संरक्षण मिल सकता है। इसी आधार पर बागी गुट खुद को वैध संगठन बताते हुए चुनाव आयोग से नई कार्यकारिणी को मान्यता देने की मांग कर रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग, विधानसभा अध्यक्ष और आवश्यक होने पर न्यायपालिका के स्तर पर ही होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला केवल संगठनात्मक बदलाव तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर अधिकार को लेकर भी कानूनी लड़ाई तेज हो सकती है। यदि दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम रहते हैं तो मामला उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच सकता है। ऐसे में चुनाव आयोग की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टीएमसी के भीतर पैदा हुआ यह संकट कई राजनीतिक विश्लेषकों को महाराष्ट्र में शिवसेना में हुई बगावत की याद दिला रहा है। वहां भी बड़ी संख्या में विधायक तत्कालीन नेतृत्व से अलग हो गए थे और बाद में संगठन, चुनाव चिन्ह और वैधता को लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया चली थी। आखिरकार चुनाव आयोग और विधानसभा अध्यक्ष के फैसलों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। अब पश्चिम बंगाल में भी कुछ वैसी ही स्थिति बनने की चर्चा तेज हो गई है, हालांकि अंतिम फैसला संवैधानिक संस्थाओं के निर्णय पर निर्भर करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो ममता बनर्जी के पास विधानसभा में केवल 22 विधायक बचे होने का दावा किया जा रहा है, जबकि लोकसभा में भी उनके साथ सांसदों की संख्या काफी कम हो गई है। राज्यसभा में भी कुछ सांसदों के इस्तीफे के बाद उनकी संसदीय ताकत पहले की तुलना में कमजोर बताई जा रही है। हालांकि ममता समर्थक गुट इन दावों से सहमत नहीं है और पूरे घटनाक्रम को कानूनी चुनौती देने की तैयारी में जुटा हुआ है। यदि चुनाव आयोग बागी गुट के दावों पर विचार करता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दूसरी ओर यदि मामला अदालत तक जाता है तो अंतिम निर्णय आने में समय लग सकता है। इस दौरान दोनों गुट अपने-अपने समर्थकों को मजबूत करने और संगठन पर पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेंगे। जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक कई नेताओं की भूमिका भी आने वाले दिनों में बदल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल तृणमूल कांग्रेस तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्षी दल भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यदि पार्टी में टूट और गहराती है तो आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों, उपचुनावों और भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में भी ममता बनर्जी की भूमिका और विपक्षी गठबंधन में उनकी स्थिति को लेकर नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। आयोग के सामने रखे जाने वाले दस्तावेज, दोनों पक्षों के दावे और आगे की कानूनी प्रक्रिया यह तय करेगी कि तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक विवाद का अगला अध्याय किस दिशा में आगे बढ़ेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 10:10:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>TMC ने चुनाव आयोग को भेजी नई सूची, ममता बनर्जी को फिर बताया पार्टी प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[बागी गुट द्वारा समानांतर कार्यसमिति के गठन के एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची सौंपी। सूची में ममता बनर्जी अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी राष्ट्रीय महासचिव बने हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-sent-new-list-to-election-commission-and-again-declared/article-56718"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संगठनात्मक विवाद के बीच पार्टी ने चुनाव आयोग को अपने पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति की अद्यतन सूची भेज दी है। पार्टी द्वारा आयोग को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में ममता बनर्जी को अध्यक्ष, सुभ्रत बक्शी को उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के रूप में दर्शाया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब एक दिन पहले पार्टी के बागी गुट ने समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने और विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष घोषित करने का दावा किया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग को भेजी गई सूची 20 जून 2026 तक की संगठनात्मक स्थिति के आधार पर तैयार की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी नेतृत्व की वैधता और संगठनात्मक संरचना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इधर, तृणमूल कांग्रेस ने बागी गुट से जुड़े आठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी का आरोप है कि ये नेता संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और आधिकारिक लाइन से अलग काम कर रहे हैं। हालांकि बागी गुट का दावा है कि उसने पार्टी संविधान के तहत संगठनात्मक रिक्तता को भरने के लिए नई कार्यसमिति गठित की है।</p>
<h2>कार्यसमिति पर विवाद</h2>
<p class="isSelectedEnd">चुनाव आयोग को भेजी गई सूची के अनुसार, राष्ट्रीय कार्यसमिति में कुल 24 नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा महुआ मोइत्रा, सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी, मदन मित्रा, अमित मित्रा और चंद्रिमा भट्टाचार्य समेत कई वरिष्ठ नेताओं को कार्यसमिति में स्थान मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कोलकाता में बैठक कर समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का ऐलान किया था। इस गुट ने अरूप रॉय को अध्यक्ष तथा फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष घोषित किया था।</p>
<h2>नेतृत्व पर सियासी संदेश</h2>
<p class="isSelectedEnd">बागी नेताओं का कहना है कि फरवरी 2022 में गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल फरवरी 2026 में समाप्त हो गया था और नई समिति का गठन नहीं होने के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस दावे को खारिज कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि बागी गुट को तृणमूल कांग्रेस के नाम पर कोई समानांतर संगठन चलाने का अधिकार नहीं है। सांसद सौगत रॉय ने भी स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी पार्टी की संस्थापक और सर्वोच्च नेता हैं तथा संगठन की पहचान उनके नेतृत्व से ही जुड़ी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच हुगली जिले में तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय नेता के खिलाफ प्रदर्शन की घटना भी चर्चा में रही। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इसे स्थानीय स्तर का मामला बताया है और संगठनात्मक विवाद से जोड़ने से इनकार किया है।</p>
<p>राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, चुनाव आयोग को भेजी गई नई सूची तृणमूल कांग्रेस की ओर से संगठनात्मक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बागी गुट की गतिविधियों पर पार्टी क्या अनुशासनात्मक कदम उठाती है और चुनाव आयोग के समक्ष संगठनात्मक विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार, भारत समाचार अपडेट तथा ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:54:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>TMC में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, कल्याण बनर्जी के बयान से हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा सांसद के इस्तीफे और संगठन के भीतर उठते सवालों के बीच पार्टी नेतृत्व पर बढ़ा दबाव, कई दावों ने तेज की राजनीतिक चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/internal-tussle-increased-in-tmc-stir-due-to-kalyan-banerjees/article-55673"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। पार्टी के भीतर मतभेदों और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी का बयान चर्चा के केंद्र में आ गया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को यह तय करना होगा कि वह उनके साथ हैं या फिर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ। इस बयान ने न केवल पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को उजागर किया है, बल्कि आने वाले दिनों की राजनीति को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कल्याण बनर्जी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें एक मामले से जुड़े वकीलों की सूची में बदलाव की जानकारी देर रात दी गई, जबकि वह भी उस मामले से जुड़े हुए थे। उनके अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया उन्हें अपमानजनक लगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को उचित सम्मान मिलना चाहिए और संगठन में संवाद की कमी नहीं होनी चाहिए। उनके बयान को पार्टी के भीतर चल रही असहमति के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच तृणमूल कांग्रेस को एक और झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों और जनादेश को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होगी, इसका फैसला समय के साथ होगा। हालांकि उन्होंने अपने अगले कदम को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। पिछले कुछ दिनों में पार्टी से जुड़े कई घटनाक्रमों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। राज्यसभा के कुछ सदस्यों के इस्तीफे और पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों के कारण तृणमूल कांग्रेस लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। वहीं दूसरी तरफ पार्टी के कुछ सांसदों और नेताओं ने खुलकर कहा है कि वे अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में पूरा भरोसा रखते हैं और पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभिनेता से राजनेता बने सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ तौर पर कहा कि ममता बनर्जी एक मजबूत नेता हैं और कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने संघर्ष करने की क्षमता दिखाई है। उन्होंने यह भी कहा कि वह पार्टी के साथ हैं और नेतृत्व पर उनका भरोसा कायम है। इसी तरह अन्य कई नेताओं ने भी पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है। इस बीच कुछ बागी नेताओं और पूर्व नेताओं के बयान भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। कई नेताओं ने संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व शैली और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े दल में चुनावी नतीजों और संगठनात्मक बदलावों के बाद इस तरह की असहमति सामने आना असामान्य नहीं माना जाता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक हलकों में उन दावों पर भी चर्चा हो रही है जिनमें कुछ सांसदों और विधायकों के अलग गुट बनाने की बात कही गई है। हालांकि इन दावों को लेकर अब तक आधिकारिक स्तर पर कोई अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। संबंधित नेताओं की ओर से भी कई मामलों में अलग-अलग बयान सामने आए हैं, जिससे स्थिति को लेकर भ्रम बना हुआ है। ऐसे में सभी की नजर आने वाले दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है। इधर, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के संभावित विलय को लेकर चल रही चर्चाओं को भी कांग्रेस नेतृत्व ने खारिज कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और दोनों दलों के नेताओं के बीच हुई मुलाकातें सामान्य राजनीतिक संवाद का हिस्सा थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी प्रकार के विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर, अभिषेक बनर्जी से जुड़े एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दी है। साथ ही जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया है। इस मामले पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर पार्टी की आंतरिक राजनीति पर पड़ सकता है। तृणमूल कांग्रेस के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकता बनाए रखने की है। यदि नेतृत्व स्तर पर मतभेद बढ़ते हैं तो इसका असर भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर पड़ सकता है। दूसरी ओर यदि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं को साथ लेकर चलने में सफल रहता है तो मौजूदा स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:53:31 +0530</pubDate>
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