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                <title>IOC - दैनिक जागरण</title>
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                <description>IOC RSS Feed</description>
                
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                <title>पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर फैसला 2-3 महीने बाद, महंगे कच्चे तेल के असर से सरकार ने जताई इंतजार की बात</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान संकट के दौरान खरीदे गए महंगे कच्चे तेल की प्रोसेसिंग जारी, सरकारी तेल कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/decision-on-petrol-and-diesel-prices-will-be-taken-after/article-57712"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/petrol-diesel-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत का इंतजार कर रहे लोगों को अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को दिल्ली में कहा कि पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे या नहीं, इस पर कोई फैसला अगले दो से तीन महीनों में ही संभव होगा। फिलहाल सरकार या सरकारी तेल कंपनियां कीमतों में कटौती को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहतीं। मंत्री के अनुसार, हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जरूर आई है, लेकिन इसका असर घरेलू बाजार में तुरंत दिखाई नहीं देगा क्योंकि भारतीय रिफाइनरियां अभी भी उस महंगे कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं जिसे ईरान संकट के दौरान ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि जब ईरान से जुड़े तनाव और युद्ध जैसे हालात बने थे, तब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। उस समय देश की तेल कंपनियों ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए ऊंचे दामों पर कच्चा तेल खरीदा था। अब वही स्टॉक रिफाइनरियों में प्रोसेस हो रहा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम होने के बावजूद घरेलू स्तर पर तत्काल राहत देना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि आने वाले दो-तीन महीनों तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह नियंत्रित बनी रहती हैं, तब पेट्रोल और डीजल के दाम घटाने पर विचार किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केंद्रीय मंत्री ने सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस बेचने की वजह से सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ा है। 30 जून तक इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) को कुल 74,781 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह नुकसान केवल मौजूदा अवधि तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले महीनों की भरपाई का असर भी इसमें शामिल है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार अप्रैल से जून की तिमाही में केवल पेट्रोल पर लगभग 19,905 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी दर्ज की गई। वहीं डीजल पर नुकसान का आंकड़ा और भी अधिक रहा। इसके अलावा घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर भी कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। मंत्री ने कहा कि यदि पिछले वर्षों और पिछली तिमाहियों के एलपीजी नुकसान को भी इसमें जोड़ दिया जाए तो कुल अंडर-रिकवरी का आंकड़ा 2.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। हालांकि विभिन्न वित्तीय समायोजनों के बाद मौजूदा कुल नुकसान 74,781 करोड़ रुपये बताया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गौरतलब है कि इसी वर्ष मई महीने में सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में चरणबद्ध तरीके से 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में से करीब 90 प्रतिशत पर इन्हीं तीन सरकारी कंपनियों का संचालन है। ऐसे में इनके द्वारा लिया गया कोई भी फैसला सीधे तौर पर करोड़ों उपभोक्ताओं को प्रभावित करता है। फिलहाल इन कंपनियों ने कीमतों में किसी तरह की कटौती की घोषणा नहीं की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर निजी क्षेत्र की प्रमुख ईंधन विक्रेता कंपनी नायरा एनर्जी ने ग्राहकों को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में कमी की है। कंपनी ने पेट्रोल पर 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इसके बाद भोपाल में नायरा के पेट्रोल की कीमत 119.79 रुपये से घटकर 114.79 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल की कीमत 102.57 रुपये से घटकर 99.57 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। इससे यह संकेत मिला है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं तो अन्य कंपनियां भी भविष्य में इसी दिशा में कदम उठा सकती हैं।पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर लौट आई हैं। इससे ऊर्जा बाजार में कुछ स्थिरता आई है। हालांकि सरकारी तेल कंपनियां अभी भी पुराने महंगे स्टॉक के प्रभाव से बाहर नहीं निकली हैं। यही वजह है कि आम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:09:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>पेट्रोल-डीजल की थोक खरीद पर केंद्र की सख्ती, डीजल बिक्री पर नई सीमा लागू</title>
                                    <description><![CDATA[भू-राजनीतिक तनाव और ईंधन आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने औद्योगिक व व्यावसायिक उपभोक्ताओं की खुदरा पेट्रोल पंपों से खरीद पर रोक लगाई, डीजल खरीद 200 लीटर प्रतिदिन तक सीमित की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/centers-strictness-on-bulk-purchase-of-petrol-and-diesel-new/article-55707"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/petrol-diesel-restrictions.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देशभर में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को बनाए रखने और संभावित जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए खुदरा पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही डीजल की बिक्री को प्रति ग्राहक या वाहन प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर तक सीमित कर दिया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों तक लागू रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे असर को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के महीनों में देश के कई हिस्सों में डीजल की मांग अचानक बढ़ी थी। इसके पीछे एक बड़ी वजह खुदरा और थोक ईंधन कीमतों के बीच बढ़ता अंतर बताया जा रहा है। कई उद्योग, संस्थान और बड़े व्यावसायिक उपभोक्ता अपेक्षाकृत सस्ता ईंधन खरीदने के लिए सीधे पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे थे। इससे उन खुदरा केंद्रों पर दबाव बढ़ने लगा जो आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं। सरकार का मानना है कि अगर यह स्थिति जारी रहती तो कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी और आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ सकता था। यही कारण है कि मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी आदेश जारी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए आदेश के तहत औद्योगिक, संस्थागत और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अब अपनी जरूरत का ईंधन निर्धारित थोक आपूर्ति केंद्रों या अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों से लेना होगा। खुदरा पेट्रोल पंपों से की जाने वाली बड़ी खरीदारी पर प्रभावी रूप से रोक लगा दी गई है। साथ ही डीजल केवल वाहनों के ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा स्वीकृत कंटेनरों में ही दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस तरह खरीदा गया डीजल दोबारा बेचा नहीं जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य आम लोगों के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है ताकि किसी भी तरह की कृत्रिम कमी पैदा न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में खुदरा पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत करीब 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि थोक ग्राहकों के लिए इसकी कीमत लगभग 134.50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। कीमतों में इस बड़े अंतर के कारण कई बड़े उपभोक्ता खुदरा बाजार से ईंधन खरीदने लगे थे। बताया जा रहा है कि टेलीकॉम टावर संचालक, निर्माण क्षेत्र से जुड़े संस्थान और कई औद्योगिक इकाइयां भी खुदरा पंपों से डीजल खरीद रही थीं। इससे सरकारी तेल कंपनियों के खुदरा बिक्री आंकड़ों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। मई महीने में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों की पेट्रोल बिक्री में 4.8 प्रतिशत और डीजल बिक्री में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने अपने आदेश में मौजूदा वैश्विक हालात का भी उल्लेख किया है। मंत्रालय के अनुसार दुनिया के कुछ हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम आपूर्ति श्रृंखला और शिपिंग नेटवर्क को प्रभावित कर रही है। ऐसे हालात में ईंधन संसाधनों का सावधानीपूर्वक प्रबंधन आवश्यक हो गया है। सूत्रों का कहना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति पर और दबाव बढ़ता है तो कई देशों को ऊर्जा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आदेश में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करें। जमाखोरी, कालाबाजारी, अनधिकृत खरीद और ईंधन की अवैध बिक्री जैसी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों और अधिकृत ईंधन विक्रेताओं को भी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों में किसी उपभोक्ता, क्षेत्र या लेनदेन को इस आदेश से छूट दी जा सकती है। हालांकि इसके लिए अलग से विशेष आदेश जारी किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:20:11 +0530</pubDate>
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