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                <title>CBI Probe - दैनिक जागरण</title>
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                <title>कोरिया ट्रिपल मर्डर केस की जांच अब CBI करेगी, छत्तीसगढ़ सरकार ने दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[नौगई गांव में एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या के मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश, अवैध रेत खनन से जुड़े विवाद के आरोपों की भी होगी पड़ताल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/now-cbi-will-investigate-korea-triple-murder-case-chhattisgarh-government/article-57524"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/koriya-triple-murder.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देशभर में चर्चा का विषय बने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के चर्चित नौगई ट्रिपल मर्डर मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) करेगी। राज्य सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच की औपचारिक सिफारिश करते हुए आवश्यक अनुमति प्रदान कर दी है। गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद अब सीबीआई इस मामले से जुड़े दोनों प्रकरणों की जांच अपने हाथ में लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी। इस फैसले को मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह मामला 16 जून की रात को कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र के नौगई गांव में हुई दर्दनाक घटना से जुड़ा है। घटना में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दो पक्षों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद हिंसक रूप ले बैठा। आरोप है कि पीड़ितों की फॉर्च्यूनर गाड़ी को पहले एक टिपर वाहन से कई बार टक्कर मारी गई, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त होकर रुक गया। इसके बाद वाहन में आग लगा दी गई। इस घटना में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य ने बाद में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मृतकों की पहचान भारत सिंह, नागेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह के रूप में हुई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। पीड़ित परिवार लगातार इस मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग कर रहा था। परिवार का आरोप है कि हत्या के पीछे अवैध रेत खनन से जुड़ा विवाद और उससे जुड़े प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। राज्य सरकार ने अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया है। गृह विभाग द्वारा दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 के तहत आवश्यक सहमति जारी की गई है, जिससे केंद्रीय एजेंसी को इस मामले की जांच का अधिकार मिल गया है। अधिसूचना में सोनहत थाना में दर्ज दोनों एफआईआर का उल्लेख किया गया है, जिनकी जांच अब सीबीआई करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारियों के अनुसार सीबीआई पहले सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करेगी। इसके बाद राज्य पुलिस से केस डायरी, साक्ष्य, दस्तावेज और अन्य जांच सामग्री अपने कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू की जाएगी। जांच एजेंसी घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण भी कर सकती है और अब तक दर्ज किए गए बयानों के अलावा नए सिरे से गवाहों से पूछताछ भी संभव है। घटना के लगभग दो सप्ताह बाद जांच सीबीआई को सौंपे जाने का निर्णय सामने आया है। इस दौरान पीड़ित परिवार लगातार निष्पक्ष जांच की मांग करता रहा। इसी बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। यह मुलाकात मृतकों के तेरहवीं संस्कार के दिन हुई, जिसके बाद सरकार की ओर से सीबीआई जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी गंभीर आपराधिक मामले में जब जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जाती है तो उसका उद्देश्य सभी पहलुओं की निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करना होता है। सीबीआई तकनीकी साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने का प्रयास करेगी। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। जिस तरह वाहन को रोककर उस पर हमला किया गया और बाद में आग लगा दी गई, उसने कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए। हालांकि पुलिस ने घटना के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की थी और कई पहलुओं पर काम किया था। अब सीबीआई के आने के बाद जांच नए चरण में प्रवेश करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे मामलों में वैज्ञानिक जांच और सभी उपलब्ध साक्ष्यों का गहराई से विश्लेषण बेहद महत्वपूर्ण होता है। फॉरेंसिक जांच, घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्य, वाहन की तकनीकी जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभाते हैं। सीबीआई आमतौर पर इसी प्रक्रिया के तहत जांच को आगे बढ़ाती है। इस मामले पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि केंद्रीय एजेंसी की जांच से घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आएंगी और यदि किसी स्तर पर कोई साजिश या संगठित अपराध से जुड़ा पहलू होगा तो उसकी भी जांच की जाएगी। वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच एजेंसी को हर स्तर पर पूरा सहयोग दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:14:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट की तत्काल सुनवाई से इनकार, छुट्टियों के बाद होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- इतनी जल्द सुनवाई की जरूरत क्या है?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/supreme-court-refuses-to-give-immediate-hearing-in-ram-temple/article-57320"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-donation-case-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और हेरफेर के आरोपों से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता की जल्द सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की और स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई अब न्यायालय की छुट्टियां समाप्त होने के बाद नियमित प्रक्रिया के तहत होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल इस मामले में किसी प्रकार की तत्काल न्यायिक कार्रवाई नहीं होगी। याचिका में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर मंदिर में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि चढ़ावे की राशि और उससे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड में कथित अनियमितताएं हुई हैं। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अगुवाई में गठित विशेष जांच दल से कराई जाए। साथ ही यह भी अनुरोध किया गया कि पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तय समय सीमा के भीतर पूरी कराई जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की गई। उनका तर्क था कि मामला सार्वजनिक आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं से जुड़ा है, इसलिए इसमें देरी नहीं होनी चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से सहमति नहीं जताई। अदालत ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि आखिर इस मामले में इतनी जल्द सुनवाई की आवश्यकता क्या है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद तत्काल सुनवाई की मांग खारिज कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख का मतलब यह नहीं है कि याचिका खारिज कर दी गई है। अदालत ने केवल तत्काल सुनवाई से इनकार किया है। अब यह मामला न्यायालय की नियमित प्रक्रिया के अनुसार सूचीबद्ध होने के बाद सुना जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय आमतौर पर उन्हीं मामलों में तत्काल सुनवाई करता है, जहां किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों पर तत्काल प्रभाव पड़ रहा हो या स्थिति अत्यंत आपातकालीन हो। अन्य मामलों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध किया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही मंदिर में चढ़ावे के संग्रह, लेखा-जोखा और उपयोग की पूरी व्यवस्था की स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की पारदर्शिता संबंधी शंका न रहे। हालांकि इन आरोपों पर अभी तक अदालत की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है और न ही आरोपों की सत्यता पर कोई न्यायिक निष्कर्ष सामने आया है।मामले को लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से भी अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं आई है। कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही ट्रस्ट की ओर से अदालत में जवाब दाखिल किया जा सकता है। ऐसे मामलों में अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परियोजनाओं में से एक है और यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर निर्माण के बाद से चढ़ावे की राशि में लगातार वृद्धि हुई है। ऐसे में चढ़ावे के प्रबंधन और लेखा प्रणाली को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक चर्चा भी होती रही है। हालांकि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता का आरोप तभी कानूनी रूप से स्थापित माना जाएगा, जब जांच एजेंसियां या अदालत उसके संबंध में कोई निष्कर्ष दें। अदालत का तत्काल सुनवाई से इनकार करना किसी पक्ष के पक्ष या विपक्ष में फैसला नहीं माना जा सकता। यह केवल न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। यदि अदालत को सुनवाई के दौरान प्रथम दृष्टया जांच की आवश्यकता महसूस होती है तो वह संबंधित एजेंसियों को निर्देश दे सकती है। फिलहाल ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। इस बीच याचिका को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि बिना जांच पूरी हुए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना आवश्यक है ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति पैदा न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:57:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उज्जैन से उठी राम मंदिर ट्रस्ट भंग करने की मांग, पीएम को भेजा पत्र; CBI जांच की भी अपील</title>
                                    <description><![CDATA[अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज पर उठाए सवाल, कहा- आस्था से जुड़े मामले में पूरी पारदर्शिता जरूरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/demand-for-dissolution-of-ram-mandir-trust-raised-from-ujjain/article-56078"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-trust-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं की चर्चाओं के बीच उज्जैन से एक नई मांग उठी है। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। संगठन ने पत्र में मामले की सीबीआई जांच कराने, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और ट्रस्ट के पुनर्गठन पर विचार करने की मांग की है। इस मुद्दे को लेकर धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में चर्चा तेज हो गई है। महासंघ का कहना है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इसके संचालन से जुड़ा हर फैसला पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश शर्मा ने उज्जैन में मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि राम मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक परियोजना नहीं था, बल्कि यह देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और दशकों लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए लोगों ने बढ़-चढ़कर आर्थिक सहयोग किया था। कई श्रद्धालुओं ने नकद दान दिया तो कई लोगों ने सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं मंदिर को समर्पित कीं। ऐसे में यदि दान राशि के उपयोग या उसके प्रबंधन को लेकर किसी प्रकार के सवाल सामने आते हैं तो उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि लोगों की आस्था से जुड़े मामले में हर पहलू स्पष्ट होना चाहिए ताकि किसी भी तरह की शंका की स्थिति न बने।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महेश शर्मा ने कहा कि हाल के दिनों में विभिन्न माध्यमों से राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज को लेकर सवाल उठे हैं। भले ही इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई हो, लेकिन जिस तरह की चर्चाएं सामने आई हैं, उससे श्रद्धालुओं के मन में जिज्ञासा और चिंता दोनों पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो जांच से सच्चाई सामने आएगी और यदि कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए समय-समय पर पारदर्शिता जरूरी होती है। राम मंदिर परिसर में विभिन्न स्थानों पर दान पेटियां स्थापित हैं, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार दान करते हैं। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट को ऑनलाइन और अन्य माध्यमों से भी बड़ी मात्रा में आर्थिक सहयोग प्राप्त होता है। ऐसे में दान राशि के प्रबंधन और उपयोग को लेकर लोगों की स्वाभाविक रुचि बनी रहती है। महासंघ का मानना है कि यदि किसी प्रकार की शिकायत या संदेह सामने आता है तो उसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महासंघ के राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने भी ट्रस्ट के पुनर्गठन का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े परिवारों के प्रतिनिधियों को ट्रस्ट में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि ऐसे परिवारों ने वर्षों तक आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और कई लोगों ने व्यक्तिगत स्तर पर बड़े त्याग किए। कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनके सदस्य आंदोलन के दौरान विभिन्न परिस्थितियों में प्रभावित हुए थे। ऐसे लोगों की भागीदारी से ट्रस्ट का स्वरूप और अधिक जनभावनाओं से जुड़ा हुआ दिखाई देगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रूपेश मेहता ने कहा कि ट्रस्ट में शामिल किए जाने वाले लोगों का चयन उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर होना चाहिए। उनका कहना है कि मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत करने के लिए व्यापक प्रतिनिधित्व जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी धार्मिक संस्था की मजबूती केवल उसके संसाधनों से नहीं बल्कि लोगों के विश्वास से तय होती है। इसलिए ट्रस्ट की संरचना और कार्यप्रणाली दोनों में पारदर्शिता दिखाई देना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में महासंघ ने कथित वित्तीय अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग को प्रमुखता से रखा है। संगठन का कहना है कि देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियों में शामिल सीबीआई यदि मामले की जांच करती है तो निष्पक्षता को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं रहेगा। साथ ही जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, वे सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य होंगे। महासंघ ने यह भी कहा है कि यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो इससे ट्रस्ट की छवि और मजबूत होगी, जबकि अनियमितता मिलने की स्थिति में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। इस पूरे मामले को लेकर अभी तक राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि धार्मिक और सामाजिक संगठनों के बीच इस विषय पर चर्चा जारी है। कई लोग इसे पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों का इंतजार किया जाना चाहिए। फिलहाल महासंघ की मांग के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:39:25 +0530</pubDate>
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                <title>राजा रघुवंशी हत्याकांड में फिर उठी CBI जांच की मांग, भाई बोले- इंसाफ अभी अधूरा</title>
                                    <description><![CDATA[सोनम के जमानत पर बाहर आने के बाद परिवार की चिंता बढ़ी, राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने कहा- निष्पक्ष जांच के लिए मामला CBI को सौंपा जाए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/demand-for-cbi-investigation-raised-again-in-raja-raghuvanshi-murder/article-55715"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raja-raghuvanshi-murder-case-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">राजा रघुवंशी हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है। मामले में मृतक राजा रघुवंशी के परिवार ने सीबीआई जांच की मांग दोहराई है। राजा के भाई विपिन रघुवंशी का कहना है कि इतने चर्चित और गंभीर मामले में अभी तक सीबीआई जांच नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि मामले की मुख्य आरोपी मानी जा रही सोनम रघुवंशी फिलहाल जमानत पर बाहर है और ऐसे में सबूतों के प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। परिवार का कहना है कि उन्हें अब भी न्याय का इंतजार है और सच्चाई पूरी तरह सामने आना बाकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या का मामला सामने आने के बाद पूरे देश में इसकी चर्चा हुई थी। राजा अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून मनाने शिलांग गए थे। आरोप है कि इसी दौरान सुनियोजित तरीके से उनकी हत्या कर दी गई और शव को खाई में फेंक दिया गया। घटना के बाद कई दिनों तक मामले को लेकर रहस्य बना रहा। बाद में पुलिस जांच के दौरान सोनम सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने दावा किया था कि हत्या की साजिश पहले से रची गई थी और इसमें कई लोग शामिल थे।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी चलती रही। इसी बीच सोनम रघुवंशी को जमानत मिलने के बाद राजा के परिवार की चिंता बढ़ गई है। विपिन रघुवंशी का कहना है कि जब तक मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा नहीं की जाएगी, तब तक परिवार पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो सकता। उनका मानना है कि सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर सकती है और उन तथ्यों को भी सामने ला सकती है जो अब तक सामने नहीं आए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">विपिन ने कहा कि देश में कई संवेदनशील मामलों में सीबीआई जांच कराई जाती है। यदि किसी युवती की मौत या अन्य चर्चित मामलों में सीबीआई जांच हो सकती है तो राजा रघुवंशी हत्याकांड को भी उसी गंभीरता से देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि इसमें कई राज्यों से जुड़े पहलू भी सामने आए हैं। घटना मध्य प्रदेश से जुड़े परिवार की है जबकि वारदात मेघालय में हुई। ऐसे में अंतरराज्यीय पहलुओं को देखते हुए भी केंद्रीय एजेंसी की जांच जरूरी लगती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">परिवार का आरोप है कि अब तक की जांच में कई सवाल ऐसे हैं जिनके जवाब उन्हें नहीं मिले हैं। विपिन का कहना है कि सोनम के जमानत पर बाहर रहने से परिवार के मन में आशंकाएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ होती है तो न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि वे लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं कि मामले को सीबीआई को सौंपा जाए ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस पूरे मामले ने शुरुआत से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय मीडिया तक इस केस को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। पुलिस की कार्रवाई, गिरफ्तारी और अदालत में चल रही प्रक्रिया को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बनी रही। लेकिन परिवार का कहना है कि मीडिया में चर्चा होना और न्याय मिलना दो अलग बातें हैं। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि राजा की मौत के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आए और दोषियों को कड़ी सजा मिले।</p>
<p class="isSelectedEnd">परिवार आने वाले दिनों में अपनी मांग को लेकर और सक्रिय हो सकता है। यदि जरूरत पड़ी तो वे राज्य सरकार और केंद्र सरकार के सामने भी अपनी बात रखने की तैयारी में हैं। परिवार का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से ही लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा। अदालत में कानूनी प्रक्रिया जारी है और जांच एजेंसियां भी अपने स्तर पर कार्रवाई कर रही हैं।</p>
<p>उधर इस मामले में अब तक किसी नई जांच एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपे जाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सरकार की ओर से भी सीबीआई जांच की मांग पर फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में राजा रघुवंशी के परिवार की निगाहें आने वाले फैसलों पर टिकी हुई हैं। परिवार का कहना है कि वे अपने भाई के लिए न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे और तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक उन्हें पूरी तरह संतोषजनक जांच और न्याय नहीं मिल जाता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 13:58:30 +0530</pubDate>
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