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                <title>काला हिरण विवाद पर निर्देशक का जवाब, बोले- फिल्म किसी अभिनेता पर आधारित नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रिलीज रोकने की मांग के बीच भरत श्रीनेत ने कहा- किरदार और सलमान खान के बीच दिखाई दे रही समानताएं महज संयोग, फैसला दर्शक करेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/directors-response-to-black-deer-controversy-the-film-is-not/article-56504"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/salman-khan-movie-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">फिल्म <em>काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी</em> की घोषणा के बाद से शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। फिल्म को लेकर अभिनेता सलमान खान और फिल्म निर्माताओं के बीच तनातनी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। हाल ही में सलमान खान की ओर से फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया, जिसके बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया। इसी बीच फिल्म के निर्देशक भरत एस श्रीनेत ने खुलकर अपनी बात रखी है और साफ शब्दों में कहा है कि उनकी फिल्म किसी व्यक्ति विशेष पर आधारित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सलमान खान न तो भगवान हैं और न ही ऐसे व्यक्ति जो किसी की फिल्म या करियर को रोक सकें। फिल्म को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ जब इसका पोस्टर और टीजर सामने आया। कई लोगों ने दावा किया कि फिल्म का मुख्य किरदार सलमान खान से मिलता-जुलता दिखाई देता है। इतना ही नहीं, पोस्टर में अभिनेता के हाथ में दिखाए गए ब्रेसलेट को भी सलमान खान के मशहूर फ़िरोज़ा ब्रेसलेट से जोड़कर देखा गया। सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चाएं शुरू हो गईं कि फिल्म कहीं न कहीं सलमान खान और उनके चर्चित काला हिरण शिकार मामले से प्रेरित है। इसके बाद फिल्म को लेकर बहस और तेज हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">निर्देशक भरत श्रीनेत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के हाथ में ब्रेसलेट दिख जाने भर से यह नहीं माना जा सकता कि पूरा किरदार उसी पर आधारित है। उन्होंने कहा कि ब्रेसलेट कोई ऐसी चीज नहीं है जिस पर किसी एक व्यक्ति का अधिकार हो। अगर किसी को लगता है कि केवल वही इसे पहन सकता है तो उसे उसका पेटेंट करवा लेना चाहिए। निर्देशक ने कहा कि फिल्म का उद्देश्य किसी अभिनेता या सार्वजनिक व्यक्ति की छवि को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि यह एक स्वतंत्र कहानी है जिसे रचनात्मक दृष्टिकोण से तैयार किया गया है। भरत श्रीनेत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे अभिनेता कासिम इकबाल खान को जानबूझकर सलमान खान जैसा दिखाने की कोशिश नहीं की गई है। उनके मुताबिक कासिम की शक्ल और व्यक्तित्व स्वाभाविक रूप से कुछ लोगों को सलमान की याद दिला सकते हैं, लेकिन इसके लिए किसी तरह के मेकअप, प्रोस्थेटिक्स या विशेष तकनीक का उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बायोपिक फिल्मों में कलाकारों को किसी नेता या अभिनेता जैसा दिखाने के लिए विशेष तैयारी की जाती है, लेकिन उनकी फिल्म में ऐसा कुछ नहीं किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">विवाद बढ़ने के बाद सलमान खान की ओर से अदालत में याचिका दाखिल की गई। याचिका में दावा किया गया कि फिल्म उनकी अनुमति के बिना उनके जीवन से जुड़े संवेदनशील मामलों और विवादों का उपयोग करती नजर आती है। इसमें 1998 के काला हिरण शिकार मामले और हाल के वर्षों में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े घटनाक्रमों का अप्रत्यक्ष संदर्भ होने का आरोप लगाया गया। इसी आधार पर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच ने फिलहाल फिल्म पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पहले दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं को जवाब दाखिल करने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को निर्धारित की गई है। अदालत के इस फैसले के बाद फिल्म की रिलीज को लेकर बनी अनिश्चितता कुछ हद तक कम हुई है, लेकिन विवाद अब भी जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में फिल्म के निर्माता अमित जानी भी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें पिछले दो वर्षों से लगातार धमकियां मिल रही हैं। उनका आरोप है कि विभिन्न नंबरों से उन्हें फोन और संदेश भेजे जा रहे हैं, जिनमें फिल्म छोड़ने और रिलीज रोकने की चेतावनी दी जा रही है। उन्होंने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और मामले की जांच की मांग की है। अमित जानी का कहना है कि वह ऐसे विषयों पर फिल्में बनाते हैं जो समाज और समकालीन घटनाओं से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि एक फिल्म निर्माता के तौर पर उन्हें अपनी बात कहने और अपनी कहानियां दर्शकों तक पहुंचाने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माण में कई लोगों की मेहनत और समय लगता है, ऐसे में रिलीज से पहले विवाद खड़ा होना पूरी टीम के लिए निराशाजनक है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर बहस जारी है। कुछ लोग फिल्म निर्माताओं के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बता रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सलमान खान के समर्थकों का कहना है कि यदि किसी फिल्म में किसी व्यक्ति की पहचान या उससे जुड़े मामलों का उपयोग किया जा रहा है तो उसकी सहमति जरूरी होनी चाहिए। दोनों पक्षों के समर्थक अपने-अपने तर्क रख रहे हैं, जिससे यह विवाद और ज्यादा चर्चा में आ गया है। इस तरह के विवाद नई बात नहीं हैं। अतीत में भी कई फिल्मों को लेकर कानूनी आपत्तियां और सार्वजनिक बहस देखने को मिली हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 17:32:58 +0530</pubDate>
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                <title>मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, सिंघवी बोले- फैसला कानूनी रूप से गलत</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन खारिज होने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई, निजी शिकायत के आधार पर कार्रवाई को चुनौती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/hearing-in-supreme-court-on-cancellation-of-nomination-of-meenakshi/article-55719"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द किए जाने का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने नामांकन निरस्त किए जाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत के सामने दलील दी कि जिस निजी शिकायत के आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किया गया, उस मामले में अब तक किसी सक्षम अदालत ने संज्ञान तक नहीं लिया है। ऐसे में नामांकन रद्द करने का फैसला कानून की भावना और चुनावी प्रक्रिया दोनों के खिलाफ है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सिंघवी ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए के तहत उम्मीदवारों को केवल उन्हीं आपराधिक मामलों की जानकारी देना अनिवार्य होता है, जिनमें सक्षम अदालत द्वारा आरोप तय किए जा चुके हों और जिन अपराधों में दो वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान मामले में न तो कोई आरोप तय हुए हैं और न ही अदालत ने किसी प्रकार का संज्ञान लिया है। ऐसे में निजी शिकायत के आधार पर उम्मीदवार का नामांकन खारिज करना कानूनी रूप से उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामला उस समय चर्चा में आया जब कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने 8 जून को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। अगले दिन 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच यानी स्क्रूटनी के दौरान भारतीय जनता पार्टी की ओर से उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई गई। भाजपा का आरोप था कि नटराजन ने अपने खिलाफ लंबित एक मामले की जानकारी नामांकन पत्र में शामिल नहीं की। इस आपत्ति पर विचार करने के बाद रिटर्निंग अधिकारी ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया था। इसके बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने तत्काल सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। पार्टी की ओर से देर रात ऑनलाइन याचिका दायर की गई और मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की गई। कांग्रेस ने अदालत से यह भी अनुरोध किया था कि अंतिम निर्णय आने तक चुनाव परिणामों की घोषणा पर रोक लगाई जाए। हालांकि अदालत ने तत्काल कोई अंतरिम राहत नहीं दी और मामले को नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी उम्मीदवार के खिलाफ केवल आरोप या शिकायत दर्ज होना और अदालत द्वारा उस पर संज्ञान लेना दो अलग-अलग स्थितियां हैं। यदि किसी मामले में अभी तक न्यायिक प्रक्रिया प्रारंभ ही नहीं हुई है, तो उसे छिपाई गई जानकारी मानना उचित नहीं होगा। पार्टी का कहना है कि नामांकन रद्द करने का निर्णय जल्दबाजी में लिया गया और इससे एक उम्मीदवार के चुनाव लड़ने के अधिकार पर असर पड़ा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर भाजपा ने अदालत में दायर अपने हलफनामे में दावा किया है कि उम्मीदवार को अपने खिलाफ लंबित मामले की जानकारी देनी चाहिए थी। भाजपा का कहना है कि मतदाताओं और निर्वाचन प्रक्रिया के हित में उम्मीदवारों से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक होना आवश्यक हैं। पार्टी का तर्क है कि चुनावी पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और जानकारी छिपाने के किसी भी प्रयास को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">मीनाक्षी नटराजन ने भी अपने नामांकन रद्द किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने के लिए इस तरह की कार्रवाई की गई। नटराजन का कहना है कि उन्होंने कानून के अनुसार सभी आवश्यक जानकारियां प्रस्तुत की थीं और उनका नामांकन रद्द करना अनुचित है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह मामला केवल एक उम्मीदवार के नामांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में उम्मीदवारों द्वारा दी जाने वाली जानकारी और उसकी कानूनी व्याख्या से भी जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। विशेष रूप से यह स्पष्ट हो सकता है कि निजी शिकायत, लंबित मामला और अदालत द्वारा संज्ञान लेने की स्थिति को चुनावी दस्तावेजों में किस तरह देखा जाना चाहिए। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों की व्याख्या इस मामले में अहम भूमिका निभाएगी। अदालत को यह तय करना होगा कि क्या केवल किसी शिकायत का अस्तित्व उम्मीदवार पर जानकारी देने का दायित्व बनाता है या फिर इसके लिए अदालत द्वारा औपचारिक संज्ञान और आरोप तय होने जैसी प्रक्रिया आवश्यक है। यही बिंदु पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 14:00:42 +0530</pubDate>
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