<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/nmc/tag-17882" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>NMC - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/17882/rss</link>
                <description>NMC RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों को बड़ी राहत, सिम्स बिलासपुर की 150 एमबीबीएस सीटों को मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए मान्यता का नवीनीकरण किया, अब 150 नए विद्यार्थियों के प्रवेश का रास्ता साफ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-relief-to-medical-students-of-chhattisgarh-150-mbbs-seats/article-57526"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sims-bilaspur.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी), नई दिल्ली ने बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नवीनीकरण कर दिया है। इस फैसले के साथ ही आगामी सत्र में 150 नए विद्यार्थियों के प्रवेश का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह निर्णय प्रदेश के उन हजारों छात्रों के लिए राहत लेकर आया है, जो हर वर्ष मेडिकल की पढ़ाई के लिए बेहतर संस्थानों में प्रवेश का सपना देखते हैं। एनएमसी के स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी आदेश के बाद सिम्स प्रशासन ने इसे संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताया है। मान्यता के नवीनीकरण का अर्थ है कि संस्थान ने मेडिकल शिक्षा, शिक्षकों की उपलब्धता, अस्पताल की सुविधाओं, क्लिनिकल प्रशिक्षण, प्रयोगशालाओं और अन्य आवश्यक मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसके बाद अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नियमित रूप से 150 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जा सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक मंजूरी नहीं बल्कि संस्थान की गुणवत्ता, मेहनत और निरंतर सुधार की दिशा में किए गए प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि है। उन्होंने बताया कि संस्थान में विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसमें अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल शिक्षण व्यवस्था, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और अस्पताल में व्यापक क्लिनिकल प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। मेडिकल सीटों की उपलब्धता बढ़ने से प्रदेश के विद्यार्थियों को बाहर के राज्यों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के माध्यम से एमबीबीएस में प्रवेश का प्रयास करते हैं, लेकिन सीमित सीटों के कारण कई योग्य छात्रों को अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे में सिम्स की 150 सीटों का नवीनीकरण मेडिकल शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिलासपुर स्थित सिम्स लंबे समय से छत्तीसगढ़ के प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थानों में शामिल है। यहां न केवल एमबीबीएस की पढ़ाई कराई जाती है, बल्कि बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार भी होता है। मेडिकल छात्र पढ़ाई के साथ-साथ अस्पताल में मरीजों के उपचार की वास्तविक प्रक्रिया को भी करीब से सीखते हैं। यही व्यावहारिक प्रशिक्षण भविष्य में उन्हें बेहतर चिकित्सक बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग समय-समय पर सभी मेडिकल कॉलेजों का मूल्यांकन करता है। इस दौरान फैकल्टी की संख्या, अस्पताल में मरीजों की उपलब्धता, उपकरण, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, हॉस्टल, अनुसंधान सुविधाएं और शैक्षणिक व्यवस्था सहित कई बिंदुओं की समीक्षा की जाती है। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों की मान्यता का नवीनीकरण किया जाता है। सिम्स का इस प्रक्रिया में सफल होना संस्थान की निरंतर प्रगति का संकेत माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में डॉक्टरों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए मेडिकल शिक्षा का विस्तार बेहद जरूरी है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना समय की आवश्यकता है। ऐसे में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटें बढ़ना या उनकी मान्यता का नवीनीकरण होना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी सकारात्मक माना जाता है। प्रदेश के विद्यार्थियों और अभिभावकों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई का खर्च निजी संस्थानों की तुलना में काफी कम होता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी छात्रों को भी डॉक्टर बनने का अवसर मिलता है। सीटों की निरंतर उपलब्धता से प्रतिस्पर्धा के बीच योग्य छात्रों के लिए बेहतर संभावनाएं तैयार होंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिम्स प्रशासन के अनुसार आने वाले समय में संस्थान में शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को और बेहतर बनाने की दिशा में कार्य जारी रहेगा। नई तकनीकों को शिक्षा में शामिल करने, अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। इससे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। ऐसे निर्णय प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को भी मजबूत बनाते हैं। अधिक संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टर तैयार होने से भविष्य में सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की संभावना भी मजबूत होगी। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा सिम्स बिलासपुर की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण छत्तीसगढ़ के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे न केवल नए विद्यार्थियों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है, बल्कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-relief-to-medical-students-of-chhattisgarh-150-mbbs-seats/article-57526</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-relief-to-medical-students-of-chhattisgarh-150-mbbs-seats/article-57526</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:13:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/sims-bilaspur.jpg"                         length="349748"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ के 5 नए मेडिकल कॉलेजों को NMC से नहीं मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और जरूरी दस्तावेजों की कमी के चलते राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने पांच प्रस्तावित सरकारी मेडिकल कॉलेजों के आवेदन खारिज किए, 250 नई एमबीबीएस सीटों पर फिलहाल लगा विराम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a2bbc754f70f/article-55720"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-medical-colleges.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को बड़ा झटका लगा है। राज्य में प्रस्तावित पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मान्यता नहीं मिल पाई है। आयोग ने सभी कॉलेजों के आवेदन खारिज कर दिए हैं, जिसके चलते इस शैक्षणिक सत्र से शुरू होने वाली 250 नई एमबीबीएस सीटों का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है। इस फैसले के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग की तैयारियों और योजनाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं। जिन पांच मेडिकल कॉलेजों को मान्यता नहीं मिली है, वे कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, दंतेवाड़ा और कुनकुरी में प्रस्तावित थे। प्रत्येक कॉलेज में 50 एमबीबीएस सीटों का प्रस्ताव रखा गया था। यदि इन संस्थानों को मंजूरी मिल जाती तो राज्य में मेडिकल शिक्षा का दायरा और बढ़ता तथा बड़ी संख्या में छात्रों को इसका लाभ मिलता। प्रदेश में हर साल हजारों छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में शामिल होते हैं। सीटों की सीमित संख्या के कारण प्रतियोगिता काफी कठिन रहती है। ऐसे में 250 नई सीटें जुड़ने से छात्रों के लिए अवसर बढ़ सकते थे। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई सीटों के जुड़ने से प्रवेश प्रक्रिया में कुछ राहत मिलती और कटऑफ पर भी प्रभाव देखने को मिल सकता था। छत्तीसगढ़ में 10 सरकारी और 5 निजी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जिनमें कुल 2330 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। राज्य सरकार लंबे समय से मेडिकल शिक्षा के विस्तार की दिशा में काम कर रही थी और इन नए कॉलेजों को उसी योजना का हिस्सा माना जा रहा था। हालांकि आवश्यक तैयारियां पूरी नहीं होने के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनएमसी की टीम द्वारा तय मानकों के आधार पर आवेदन की समीक्षा की गई थी। जांच में पाया गया कि कई कॉलेजों में पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं था। कुछ स्थानों पर भवन निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाओं का काम अधूरा बताया गया। वहीं मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए जरूरी फैकल्टी और चिकित्सा संसाधनों की भी कमी सामने आई। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने कई प्रस्तावित कॉलेजों में केवल डीन और अस्पताल अधीक्षक की प्रभार नियुक्तियां की थीं। नियमित शिक्षकों और विशेषज्ञ फैकल्टी की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। मेडिकल शिक्षा में फैकल्टी की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण मानकों में से एक मानी जाती है और इसी क्षेत्र में सबसे अधिक कमी देखने को मिली। मामले से जुड़े जानकारों का कहना है कि जिला अस्पतालों में कार्यरत कुछ डॉक्टरों को असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रेजिडेंट के रूप में पदस्थ करने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन यह व्यवस्था एनएमसी के मानकों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी गई। आयोग कॉलेजों में स्थायी और निर्धारित संख्या में शिक्षकों की उपलब्धता को प्राथमिकता देता है। इस पूरे मामले में डॉक्टरों के लंबित प्रमोशन को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार प्रदेश में लगभग 296 डॉक्टर पदोन्नति के पात्र हैं, जबकि कई असिस्टेंट प्रोफेसरों का प्रोबेशन पीरियड भी समय पर पूरा नहीं किया गया। यदि इन पदोन्नतियों की प्रक्रिया पहले पूरी हो जाती तो नए कॉलेजों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति आसान हो सकती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों को इस बात का भरोसा था कि सरकारी मेडिकल कॉलेज होने के कारण उन्हें आसानी से मंजूरी मिल जाएगी। लेकिन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग पिछले कुछ वर्षों से निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन कर रहा है। वर्ष 2023 के बाद से निरीक्षण और मूल्यांकन की प्रक्रिया और अधिक कठोर हो गई है। ऐसे में केवल प्रस्ताव और प्रशासनिक मंजूरी के आधार पर मेडिकल कॉलेजों को मान्यता नहीं मिल सकती। एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि जिन कॉलेजों के आवेदन खारिज हुए, उनमें से कुछ संस्थानों ने आवेदन के साथ हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी का एफिलिएशन सर्टिफिकेट भी संलग्न नहीं किया था। यह दस्तावेज किसी भी मेडिकल कॉलेज की मान्यता प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा माना जाता है। ऐसे में दस्तावेजी कमियों ने भी आवेदन पर नकारात्मक प्रभाव डाला। इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ सकता है जो राज्य में मेडिकल सीटों के बढ़ने की उम्मीद कर रहे थे। हर साल सीमित सीटों के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को दूसरे राज्यों या निजी संस्थानों का रुख करना पड़ता है। नई सीटें शुरू होने से उन्हें अतिरिक्त अवसर मिल सकते थे, लेकिन अब उन्हें अगले चरण की प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन कमियों को दूर करना है। यदि इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा किया जाए तो भविष्य में इन कॉलेजों को मान्यता मिलने की संभावना बढ़ सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a2bbc754f70f/article-55720</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a2bbc754f70f/article-55720</guid>
                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 14:00:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/chhattisgarh-medical-colleges.jpg"                         length="134810"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        