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                <title>Muharram - दैनिक जागरण</title>
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                <title>रतलाम में मुहर्रम जुलूस के दौरान बड़ा हादसा, हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से 3 की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[पिपलोदा के हतनारा गांव में ताजिया जुलूस के दौरान करंट फैलने से 10 से ज्यादा लोग झुलसे, कई घायलों की हालत गंभीर, हादसे की जांच में जुटा प्रशासन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/major-accident-during-muharram-procession-in-ratlam-3-killed-after/article-56996"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ratlam-news,-muharram-procession.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रतलाम जिले के पिपलोदा क्षेत्र के हतनारा गांव में गुरुवार रात मुहर्रम के ताजिया जुलूस के दौरान बड़ा हादसा हो गया। जुलूस के दौरान ताजिया हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गया, जिससे अचानक करंट फैल गया और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग झुलस गए। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। मुहर्रम के अवसर पर गांव में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला जा रहा था। जुलूस में करीब 200 लोग शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जुलूस जैसे ही एक स्थान से गुजर रहा था, उसी दौरान करीब 20 फीट ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में ताजिया आ गया। संपर्क होते ही बिजली का करंट पूरे ताजिया में फैल गया और उसके आसपास चल रहे कई लोग इसकी चपेट में आ गए। कुछ लोग मौके पर ही गिर पड़े, जबकि अन्य में भगदड़ मच गई। हादसे में मृतकों की पहचान रशीद खान, सड्डू हुसैन और अरबाज खान के रूप में हुई है। हालांकि प्रशासन की ओर से शुरुआत में दो मौतों की पुष्टि की गई थी, जबकि मेडिकल कॉलेज के ड्यूटी डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल तीन लोगों को मृत अवस्था में लाया गया था। बताया गया कि एक मृतक के परिजन औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही उसे दूसरे अस्पताल ले गए थे, जिसके कारण शुरुआती आंकड़ों में अंतर दिखाई दिया। घायलों को तुरंत स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल कई लोगों का इलाज रतलाम मेडिकल कॉलेज में चल रहा है, जबकि कुछ अन्य को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों की निगरानी कर रही है। प्रशासन ने सभी अस्पतालों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। करंट फैलते ही जुलूस में शामिल लोग इधर-उधर भागने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और अस्पताल भेजने में मदद की। कुछ लोगों ने एंबुलेंस आने से पहले निजी वाहनों से भी घायलों को अस्पताल पहुंचाया। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हादसे के बाद का माहौल दिखाई देता है। वीडियो में लोग घायलों की मदद करते नजर आ रहे हैं और घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल दिखाई देता है। हालांकि प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अपुष्ट वीडियो और अफवाहों पर भरोसा न करें तथा केवल आधिकारिक जानकारी को ही सही मानें। रतलाम के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश पंद्रो ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंच गया था। पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और क्या सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया था। साथ ही बिजली लाइन की ऊंचाई, मार्ग की स्थिति और आयोजन से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। प्रशासन बिजली विभाग से भी रिपोर्ट मांग रहा है। जांच में यह देखा जाएगा कि जिस स्थान से जुलूस गुजर रहा था वहां हाईटेंशन लाइन की स्थिति निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान घायलों के उपचार और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर है। गांव में हादसे के बाद शोक का माहौल है। स्थानीय लोग लगातार अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल ले रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और जांच पूरी होने तक किसी भी तरह की अफवाह फैलाने से बचने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:24:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भोपाल में मुहर्रम पर निकले मातमी जुलूस, करबला की याद में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने शहर से करबला तक निकले ताजिए और मातमी जुलूस, सुरक्षा के बीच ट्रैफिक डायवर्जन लागू, शाम तक कई मार्गों पर यातायात प्रभावित रहने की संभावना।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/mourning-procession-taken-out-on-muharram-in-bhopal-crowd-of/article-56991"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-muharram.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल में मुहर्रम के मौके पर शनिवार को अकीदत और गम का माहौल देखने को मिला। शहर के अलग-अलग इलाकों से मातमी जुलूस निकाले गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। करबला की शहादत की याद में आयोजित इन जुलूसों में ताजिए, बुर्राक, सवारियां और इस्लामी परचम आकर्षण का केंद्र रहे। कई स्थानों पर लोग काले लिबास में नजर आए और इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मातम किया। जुलूसों के दौरान धार्मिक अनुशासन बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए। पुराने शहर के प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा, जबकि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया। सुबह से ही फतेहगढ़, पीर गेट, मोती मस्जिद, शाहजहांनाबाद, भारत टॉकीज और आसपास के इलाकों में लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी थी। पहला बड़ा मातमी जुलूस फतेहगढ़ क्षेत्र से रवाना हुआ, जो विभिन्न मार्गों से होकर वीआईपी रोड स्थित करबला पहुंचा। इसके अलावा शहर के अलग-अलग हिस्सों से निकले जुलूस भी पीर गेट क्षेत्र में एकत्रित होने के बाद करबला की ओर बढ़े। जुलूसों के साथ जगह-जगह ताजियों की सलामी दी गई और अकीदतमंदों ने पूरी श्रद्धा के साथ धार्मिक परंपराओं का पालन किया। कई स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ भी जुलूस निकाला गया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रास्ते में प्रमुख चौराहों पर उलेमाओं की तकरीरें भी आयोजित की गईं। इन तकरीरों में करबला की जंग, इमाम हुसैन की कुर्बानी और इंसाफ, सब्र तथा इंसानियत के संदेश पर विस्तार से चर्चा की गई। बाहर से आए धार्मिक विद्वानों ने भी अपने संबोधन में करबला की घटना को मानवता के लिए प्रेरणा बताया। अकीदतमंद बड़ी तादाद में इन तकरीरों को सुनने पहुंचे। पूरे माहौल में धार्मिक अनुशासन और श्रद्धा साफ दिखाई दी। मुहर्रम के अवसर पर शुक्रवार रात भी शहर के विभिन्न इलाकों में ताजियों और सवारियों की गश्त निकाली गई थी। इस दौरान प्रमुख दरगाहों और इमामबाड़ों पर सलामी की रस्म अदा की गई। हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में लोगों ने इन धार्मिक आयोजनों में भाग लिया। मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि मुहर्रम केवल मातम का अवसर नहीं बल्कि सत्य, न्याय और बलिदान की याद को जीवित रखने का भी दिन है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जुलूसों को देखते हुए भोपाल यातायात पुलिस ने पुराने शहर के कई मार्गों पर विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया। भारत टॉकीज से करबला तक जाने वाले मार्ग पर भारी और व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई गई। भारत टॉकीज, अल्पना तिराहा, नादरा बस स्टैंड, भोपाल टॉकीज, शाहजहांनाबाद, रॉयल मार्केट, कोहेफिजा तिराहा और करबला क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे आवश्यक होने पर ही इन मार्गों का उपयोग करें और वैकल्पिक रास्तों का सहारा लें। राजाभोज विमानतल जाने वाले यात्रियों के लिए भी प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग तय किए हैं। एयरपोर्ट जाने वाले वाहन भारत माता चौराहा, भदभदा, नीलबड़, नाथूबरखेड़ा रोड, मुगालिया छाप, खजूरी सड़क और मुबारकपुर मार्ग का उपयोग कर सकते हैं। वहीं रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए प्रभात चौराहा, 80 फीट रोड और बजरिया मार्ग को उपयुक्त बताया गया है। प्रशासन ने लोगों से यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करने और अनावश्यक भीड़ से बचने की अपील की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना माना जाता है और इसकी दसवीं तारीख को आशूरा के रूप में याद किया जाता है। इसी दिन करबला की ऐतिहासिक जंग में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने शहादत दी थी। माना जाता है कि उन्होंने अन्याय और अत्याचार के सामने झुकने के बजाय सत्य और इंसाफ का रास्ता चुना। यही कारण है कि हर वर्ष मुहर्रम के दौरान दुनिया भर में शिया समुदाय सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हुए मातमी जुलूस निकालते हैं और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। करबला की यह परंपरा इराक के पवित्र शहर करबला से जुड़ी हुई है, जहां वर्ष 680 ईस्वी में यह ऐतिहासिक घटना हुई थी। समय के साथ यह परंपरा भारत सहित दुनिया के कई देशों तक पहुंची। भारत में भी मुहर्रम के जुलूसों का लंबा इतिहास रहा है और आज यह धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द का भी प्रतीक माना जाता है। भोपाल में भी हर साल बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल होकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं। प्रशासन ने पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा, ट्रैफिक और निगरानी के व्यापक इंतजाम किए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:23:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मोहर्रम और उर्स आयोजनों को लेकर वक्फ बोर्ड सख्त, डीजे-बैंड पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने धार्मिक आयोजनों में गैर-शरई गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया, उल्लंघन करने वाली समितियों पर 50 हजार रुपये तक जुर्माने और मान्यता रद्द करने की चेतावनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a2bc048b19ba/article-55722"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-waqf-board.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में आगामी मोहर्रम, उर्स और अन्य धार्मिक आयोजनों को लेकर राज्य वक्फ बोर्ड ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने प्रदेशभर की ताजिया कमेटियों, दरगाह कमेटियों, उर्स कमेटियों, मुतवल्लियान और इंतेजामिया कमेटियों से अपील की है कि सभी धार्मिक कार्यक्रम पूरी तरह शरीअत, कुरआन और हदीस के अनुसार आयोजित किए जाएं। इसके साथ ही बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान डीजे, बैंड-बाजा, धुमाल, नाच-गाना, आतिशबाजी और अन्य गैर-शरई गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज द्वारा जारी इस अपील को धार्मिक आयोजनों की पवित्रता और अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बोर्ड का कहना है कि मोहर्रम और उर्स जैसे आयोजन इस्लामी परंपराओं, त्याग, बलिदान और आध्यात्मिक संदेशों से जुड़े होते हैं। ऐसे आयोजनों में उन गतिविधियों से बचना आवश्यक है जो धार्मिक मूल्यों और परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं। बोर्ड की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि आयोजन समितियां यह सुनिश्चित करें कि जुलूस, मजलिस, उर्स और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में केवल वही गतिविधियां हों जो धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप हों। किसी भी प्रकार के मनोरंजन आधारित कार्यक्रम, तेज ध्वनि वाले उपकरण या ऐसी गतिविधियां जो धार्मिक आयोजन की गरिमा को प्रभावित करती हों, उन्हें पूरी तरह प्रतिबंधित रखा जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मोहर्रम इस्लामी इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना कर्बला की याद में मनाया जाता है। इस अवसर पर हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियों को याद किया जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार यह समय शोक, सब्र, इबादत और आत्मचिंतन का होता है। इसी वजह से कई मुस्लिम संगठनों और धार्मिक संस्थाओं द्वारा हमेशा सादगीपूर्ण तरीके से मोहर्रम मनाने की अपील की जाती रही है। वक्फ बोर्ड ने भी अपने संदेश में इसी भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि यदि किसी जुलूस, उर्स या धार्मिक आयोजन में प्रतिबंधित गतिविधियां पाई जाती हैं तो संबंधित समिति और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड ने साफ किया है कि आवश्यक होने पर समिति की मान्यता तक समाप्त की जा सकती है। इस चेतावनी को आयोजकों के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि नियमों के पालन में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। वक्फ बोर्ड ने आर्थिक दंड का भी प्रावधान रखा है। जारी निर्देश के अनुसार यदि किसी समिति द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उस पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। बोर्ड का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से धार्मिक आयोजनों में अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलेगी और समितियां निर्धारित दिशा-निर्देशों का गंभीरता से पालन करेंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बोर्ड ने केवल समितियों को ही नहीं बल्कि प्रदेश के मुस्लिम समाज को भी विशेष संदेश दिया है। अपील में कहा गया है कि मोहर्रम को हजरत इमाम हुसैन और शहीद-ए-कर्बला की कुर्बानियों की याद में सादगी, इबादत, सब्र और अच्छे आचरण के साथ मनाया जाए। धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य सामाजिक सौहार्द, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करना होना चाहिए। इस संबंध में प्रदेश की मस्जिदों के इमाम साहबान, मुतवल्लियान और इंतेजामिया कमेटियों को भी निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड ने कहा है कि यह संदेश जुमे की नमाज से पहले लोगों को पढ़कर सुनाया जाए ताकि अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंच सके। इसके अलावा मस्जिदों के नोटिस बोर्ड पर भी इस घोषणा को चस्पा करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इससे समाज के सभी वर्गों तक बोर्ड की अपील प्रभावी तरीके से पहुंच पाएगी। हाल के वर्षों में कई स्थानों पर धार्मिक आयोजनों के दौरान आधुनिक मनोरंजन साधनों के इस्तेमाल को लेकर बहस होती रही है। कुछ धार्मिक संगठनों का मानना है कि ऐसे आयोजन अपनी मूल भावना और उद्देश्य से भटक रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में वक्फ बोर्ड की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदेश में मोहर्रम और उर्स के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों और जुलूसों में शामिल होते हैं। प्रशासन भी इन आयोजनों के दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम करता है। ऐसे में बोर्ड की यह अपील न केवल धार्मिक अनुशासन बल्कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के प्रयास के रूप में भी देखी जा रही है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:19:59 +0530</pubDate>
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