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                <title>नंदिनी की खदान में डूबने से 13 वर्षीय बालक की मौत, हाथ में मिली कोल्ड ड्रिंक की बोतल</title>
                                    <description><![CDATA[दुर्ग जिले के पथरिया खदान में हुआ दर्दनाक हादसा, एसडीआरएफ ने 50 फीट गहरे पानी से निकाला शव; सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/13-year-old-boy-dies-due-to-drowning-in-nandini/article-55733"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/durg-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। नंदिनी थाना क्षेत्र के ग्राम पथरिया स्थित एक खदान में 13 वर्षीय बालक का शव गहरे पानी से बरामद किया गया। बालक गुरुवार शाम से लापता था और परिजन पूरी रात उसकी तलाश करते रहे। शुक्रवार सुबह राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीम ने करीब 50 फीट गहरे पानी में खोज अभियान चलाकर उसका शव बाहर निकाला। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिवार सदमे में है। मृतक की पहचान आयुष मार्कंडेय के रूप में हुई है, जो ग्राम पथरिया का रहने वाला था। उसके पिता का नाम नंदकुमार मार्कंडेय बताया गया है। परिजनों के अनुसार आयुष गुरुवार शाम करीब साढ़े चार बजे घर से बाहर निकला था। आम दिनों की तरह परिवार को लगा कि वह आसपास के बच्चों के साथ खेल रहा होगा, लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटने पर चिंता बढ़ने लगी। परिवार के लोगों ने पहले आसपास तलाश की, रिश्तेदारों और परिचितों से जानकारी ली, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। रात बढ़ने के साथ परिजनों की चिंता और बढ़ गई। स्थानीय लोगों की मदद से गांव और आसपास के क्षेत्रों में खोजबीन की गई। इसी दौरान कुछ लोगों ने आशंका जताई कि आयुष को आखिरी बार खदान क्षेत्र की ओर जाते देखा गया था। इसके बाद परिजनों ने नंदिनी पुलिस और एसडीआरएफ को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचा, लेकिन खदान की गहराई और अंधेरा होने के कारण रात में रेस्क्यू अभियान शुरू नहीं किया जा सका। अधिकारियों के अनुसार खदान में पानी काफी गहरा था और रात के समय दृश्यता बेहद कम थी। ऐसे में बचाव दल ने जोखिम को देखते हुए सुबह अभियान शुरू करने का निर्णय लिया। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे एसडीआरएफ की 10 सदस्यीय टीम घटनास्थल पर पहुंची। जिला सेनानी और जिला अग्निशमन अधिकारी नागेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर अभियान शुरू किया गया। टीम में शामिल डिप डाइविंग विशेषज्ञ राजकुमार यादव और चंद्रप्रताप जघेल ने पानी के भीतर उतरकर तलाश शुरू की। करीब डेढ़ घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद सुबह लगभग सात बजे आयुष का शव खदान के गहरे हिस्से से बरामद किया गया। शव मिलने के बाद उसे बाहर निकालकर पुलिस के हवाले कर दिया गया। मौके पर मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जिस उम्मीद के साथ परिवार पूरी रात बेटे की तलाश कर रहा था, वह सुबह एक दुखद खबर में बदल गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उस कोल्ड ड्रिंक की बोतल को लेकर हो रही है, जो आयुष के हाथ में मिली। परिजनों ने बताया कि आयुष को खाली बोतलों और अन्य सामानों से खेलने का शौक था। प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि वह किसी बोतल को उठाने या पकड़ने के प्रयास में खदान के किनारे पहुंच गया होगा। घटनास्थल पर फिसलन और कुछ निशान भी मिले हैं, जिससे आशंका है कि उसका पैर अचानक फिसल गया और वह सीधे गहरे पानी में जा गिरा। स्थानीय लोगों का कहना है कि खदान के आसपास अक्सर बच्चे खेलते दिखाई देते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई जगहों पर गहरी खदानों के आसपास न तो मजबूत बैरिकेडिंग है और न ही पर्याप्त चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती तो शायद इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से खदान क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि खुले और पानी से भरे खदान क्षेत्र बच्चों और राहगीरों के लिए हमेशा खतरा बने रहते हैं। कई बार स्थानीय स्तर पर इस संबंध में शिकायतें भी की गई हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। अब इस घटना के बाद लोगों ने फिर से सुरक्षा उपायों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की पूरी पुष्टि हो सकेगी। हालांकि शुरुआती जांच में डूबने से मौत की बात सामने आ रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय आयुष अकेला था या उसके साथ कोई अन्य बच्चा भी मौजूद था। इस हादसे ने एक बार फिर परित्यक्त और पानी से भरी खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। ऐसे क्षेत्रों में नियमित निगरानी, चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा घेराबंदी और स्थानीय जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं। खासकर गर्मी और छुट्टियों के दौरान बच्चे अक्सर ऐसे स्थानों की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:20:17 +0530</pubDate>
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