<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/rescue-operation/tag-17904" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>rescue-operation - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/17904/rss</link>
                <description>rescue-operation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>खिवनी में बाघों की वर्चस्व की लड़ाई, घायल युवराज को भोपाल किया गया शिफ्ट</title>
                                    <description><![CDATA[अल्फा मेल बाघ युवराज और युवा बाघ अधिराज के बीच संघर्ष के बाद वन विभाग ने बिना हाथी चार घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर घायल बाघ को वन विहार भोपाल पहुंचाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/tigers-fight-for-supremacy-in-khivni-injured-yuvraj-shifted-to/article-57196"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/khivni-tiger.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देवास जिले के खिवनी अभयारण्य में बाघों के बीच वर्चस्व की लड़ाई ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। करीब 10 साल तक इस क्षेत्र पर राज करने वाले अल्फा मेल बाघ 'युवराज' को युवा बाघ 'अधिराज' ने चुनौती दी। दोनों के बीच हुए संघर्ष में युवराज गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके अगले दोनों पंजों पर गहरे घाव मिले हैं, जिससे वह लंगड़ाकर चल रहा था और शिकार करने में भी असमर्थ हो गया था। वन विभाग की गश्ती टीम ने जब उसे घायल हालत में देखा तो तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद शनिवार को विशेष रेस्क्यू अभियान चलाकर उसे इलाज के लिए वन विहार भोपाल भेज दिया गया। वन अधिकारियों के अनुसार, युवराज लंबे समय से खिवनी अभयारण्य का प्रमुख नर बाघ माना जाता था। उसने अपने क्षेत्र पर कई वर्षों तक कब्जा बनाए रखा और अन्य बाघों को चुनौती नहीं देने दी। लेकिन हाल के दिनों में युवा बाघ अधिराज लगातार उसके इलाके में सक्रिय था। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ युवराज की ताकत पहले जैसी नहीं रही, जबकि अधिराज अपनी फुर्ती और ताकत के दम पर इलाके पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान दोनों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें युवराज बुरी तरह घायल हो गया और उसे अपना इलाका छोड़ना पड़ा। घायल बाघ की जानकारी मिलते ही वन विहार भोपाल के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम खिवनी अभयारण्य पहुंची। हालांकि इस अभियान की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मौके पर बाघ को ट्रैंकुलाइज करने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होने वाला हाथी उपलब्ध नहीं था। ऐसे में पूरी टीम को जमीन पर रहकर ही बेहद सावधानी और रणनीति के साथ ऑपरेशन चलाना पड़ा। घने जंगल और घायल बाघ की अनिश्चित गतिविधियों के कारण हर कदम जोखिम भरा था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">करीब चार घंटे तक चले इस रेस्क्यू अभियान के दौरान विशेषज्ञों ने लगातार बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी। सही समय मिलने पर उसे ट्रैंकुलाइजर डार्ट के जरिए बेहोश किया गया। बेहोश होने के बाद पशु चिकित्सकों ने उसकी प्राथमिक जांच की, जिसमें पंजों पर गंभीर चोट और शरीर पर संघर्ष के निशान पाए गए। प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे विशेष पिंजरे में सुरक्षित रखा गया और सड़क मार्ग से वन विहार भोपाल के लिए रवाना किया गया, जहां उसका विस्तृत उपचार और निगरानी की जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि खिवनी अभयारण्य में बिना हाथी के इस तरह का सफल बाघ रेस्क्यू पहली बार किया गया है। सामान्य परिस्थितियों में हाथी की मदद से बाघ के काफी करीब पहुंचना आसान होता है, लेकिन इस बार पूरी टीम को पैदल और वाहनों की सहायता से ऑपरेशन करना पड़ा। इसलिए इस अभियान को तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर संघर्ष सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है। प्रत्येक नर बाघ अपने इलाके पर अधिकार बनाए रखने की कोशिश करता है क्योंकि उसी क्षेत्र में उसे शिकार, पानी और प्रजनन के अवसर मिलते हैं। जब कोई युवा और ताकतवर बाघ परिपक्व होता है, तब वह पुराने अल्फा मेल को चुनौती देता है। ऐसे संघर्ष कई बार बेहद हिंसक हो जाते हैं और दोनों बाघ गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लड़ाई के दौरान बाघ अक्सर प्रतिद्वंद्वी के अगले पंजों और कंधों को निशाना बनाते हैं। इसका उद्देश्य सामने वाले बाघ को शिकार करने और तेजी से चलने में अक्षम बनाना होता है। यदि किसी बाघ के पंजे गंभीर रूप से घायल हो जाएं तो उसके लिए जंगल में जीवित रहना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि घायल युवराज को तत्काल उपचार के लिए सुरक्षित स्थान पर ले जाना जरूरी समझा गया। खिवनी अभयारण्य में युवराज का विशेष महत्व रहा है। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, बाघिन मीरा के साथ उसकी जोड़ी ने इस क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। वर्तमान में अभयारण्य में मौजूद अधिकांश बाघों का संबंध इसी कुनबे से माना जाता है। कई वर्षों तक युवराज ने अपने क्षेत्र में संतुलन बनाए रखा और उसकी मौजूदगी के कारण दूसरे बाघों की गतिविधियां भी नियंत्रित रहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अब अधिराज के इलाके पर कब्जा जमाने के बाद अभयारण्य में बाघों की गतिविधियों पर वन विभाग विशेष नजर रखे हुए है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कैमरा ट्रैप और नियमित गश्त के जरिए अधिराज की गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। वहीं वन विहार भोपाल में युवराज की हालत पर लगातार नजर रखी जाएगी। डॉक्टरों का प्रयास रहेगा कि इलाज के बाद यदि उसकी स्थिति सामान्य होती है तो भविष्य में विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आगे का निर्णय लिया जाएगा। वन विभाग का मानना है कि यह घटना जंगल में प्राकृतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा जरूर है, लेकिन घायल वन्यजीवों को समय पर उपचार देना संरक्षण की जिम्मेदारी भी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/tigers-fight-for-supremacy-in-khivni-injured-yuvraj-shifted-to/article-57196</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/tigers-fight-for-supremacy-in-khivni-injured-yuvraj-shifted-to/article-57196</guid>
                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 13:56:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/khivni-tiger.jpg"                         length="309606"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल में तेज बहाव वाले नाले से बुजुर्ग को पुलिस ने बचाया, आधी रात चला रेस्क्यू</title>
                                    <description><![CDATA[लगातार बारिश के बीच नाले में फंसे बुजुर्ग की पुलिस जवानों ने जान बचाई। मौके पर सीपीआर देकर सांसें लौटाईं और अस्पताल पहुंचाकर समय पर इलाज कराया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/police-saved-an-elderly-man-from-a-fast-flowing-drain/article-57195"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-news-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल में लगातार हो रही बारिश के बीच शनिवार और रविवार की दरमियानी रात इंसानियत और पुलिस की सतर्कता की एक मिसाल देखने को मिली। हनुमानगंज थाना क्षेत्र में तेज बहाव वाले नाले में फंसे करीब 60 वर्षीय बुजुर्ग की जान पुलिस जवानों ने जोखिम उठाकर बचा ली। देर रात हुए इस रेस्क्यू ऑपरेशन का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मी तेज बहाव और दलदल के बीच उतरकर बुजुर्ग को सुरक्षित बाहर निकालते दिखाई दे रहे हैं। समय रहते किए गए इस प्रयास की वजह से एक बड़ी अनहोनी टल गई। प्राथमिक उपचार के बाद बुजुर्ग को हमीदिया अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत खतरे से बाहर बताई है। घटना शनिवार देर रात करीब 12 बजे की है। हनुमानगंज थाना की चार्ली-2/1 पर तैनात आरक्षक मोहित शिवहरे और राजेंद्र रघुवंशी छोला रोड इलाके में नियमित गश्त कर रहे थे। इसी दौरान पुट्ठा मिल स्थित अग्रवाल तिराहा के पास से गुजरते समय उन्हें नाले की तरफ से किसी के मदद के लिए चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। दोनों पुलिसकर्मी तुरंत मौके की ओर दौड़े। वहां पहुंचने पर उन्होंने देखा कि एक बुजुर्ग तेज बहाव वाले नाले में गिर गया था। उसके सिर पर चोट भी लगी थी और वह खुद को बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन लगातार बढ़ते पानी और दलदल के कारण ऐसा कर पाना संभव नहीं हो पा रहा था। लगातार बारिश के चलते नाले का जलस्तर बढ़ चुका था। पानी का बहाव इतना तेज था कि बुजुर्ग धीरे-धीरे बहते हुए आगे बने संकरे पुल की दिशा में जा रहा था। आसपास की पीली मिट्टी दलदल में बदल चुकी थी, जिससे वह और ज्यादा फंसता चला गया। हालात हर मिनट गंभीर होते जा रहे थे। यदि कुछ देर और हो जाती तो तेज बहाव उसे काफी दूर तक बहा ले जाता और उसकी जान बचाना बेहद मुश्किल हो सकता था। स्थिति को देखते हुए आरक्षक मोहित शिवहरे ने बिना समय गंवाए खुद नाले में उतरने का फैसला किया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना बुजुर्ग तक पहुंचकर उसे संभाला ताकि तेज बहाव में वह आगे न बह सके। दूसरी ओर आरक्षक राजेंद्र रघुवंशी ने तुरंत अन्य पुलिसकर्मियों और कंट्रोल रूम को सूचना दी। कुछ ही देर में रात्रि अधिकारी उप निरीक्षक रामसजीवन और एफआरवी की टीम भी मौके पर पहुंच गई। सभी ने मिलकर समन्वय के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">काफी मशक्कत के बाद पुलिस टीम बुजुर्ग को सुरक्षित नाले से बाहर निकालने में सफल रही। हालांकि बाहर निकालने तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि उन्होंने काफी मात्रा में पानी निगल लिया था और सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। ऐसे में मौके पर मौजूद आरक्षक मोहित शिवहरे ने तुरंत सीपीआर देना शुरू किया। कुछ देर की कोशिश के बाद बुजुर्ग की सांसें सामान्य होने लगीं और उनके मुंह से पानी भी बाहर निकाला गया। प्राथमिक राहत मिलने के बाद पुलिसकर्मियों ने बिना एंबुलेंस का इंतजार किए ऑटो की मदद से उन्हें हमीदिया अस्पताल पहुंचाया, ताकि इलाज में कोई देरी न हो। अस्पताल में डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया। शुरुआती जांच के बाद चिकित्सकों ने बताया कि समय पर रेस्क्यू और मौके पर दिए गए सीपीआर की वजह से बुजुर्ग की जान बच सकी। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और वे खतरे से बाहर हैं। पुलिस ने बताया कि बुजुर्ग की पहचान कराने का प्रयास किया जा रहा है, क्योंकि घटना के समय उनके पास कोई पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं मिले। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने भी पुलिस टीम की सराहना की। लोगों का कहना है कि जिस तरह बारिश, अंधेरा और तेज बहाव के बीच पुलिसकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर रेस्क्यू किया, वह साहस और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण है। यदि पुलिस टीम कुछ मिनट देर से पहुंचती तो शायद परिणाम अलग हो सकता था। बारिश के मौसम में भोपाल समेत प्रदेश के कई शहरों में नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि तेज बारिश के दौरान उफनते नालों और पुल-पुलियों के पास जाने से बचें। विशेष रूप से रात के समय ऐसे स्थानों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि पानी की गहराई और बहाव का सही अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/police-saved-an-elderly-man-from-a-fast-flowing-drain/article-57195</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/police-saved-an-elderly-man-from-a-fast-flowing-drain/article-57195</guid>
                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 13:56:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/bhopal-news-%283%29.jpg"                         length="123166"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नंदिनी की खदान में डूबने से 13 वर्षीय बालक की मौत, हाथ में मिली कोल्ड ड्रिंक की बोतल</title>
                                    <description><![CDATA[दुर्ग जिले के पथरिया खदान में हुआ दर्दनाक हादसा, एसडीआरएफ ने 50 फीट गहरे पानी से निकाला शव; सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/13-year-old-boy-dies-due-to-drowning-in-nandini/article-55733"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/durg-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। नंदिनी थाना क्षेत्र के ग्राम पथरिया स्थित एक खदान में 13 वर्षीय बालक का शव गहरे पानी से बरामद किया गया। बालक गुरुवार शाम से लापता था और परिजन पूरी रात उसकी तलाश करते रहे। शुक्रवार सुबह राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीम ने करीब 50 फीट गहरे पानी में खोज अभियान चलाकर उसका शव बाहर निकाला। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिवार सदमे में है। मृतक की पहचान आयुष मार्कंडेय के रूप में हुई है, जो ग्राम पथरिया का रहने वाला था। उसके पिता का नाम नंदकुमार मार्कंडेय बताया गया है। परिजनों के अनुसार आयुष गुरुवार शाम करीब साढ़े चार बजे घर से बाहर निकला था। आम दिनों की तरह परिवार को लगा कि वह आसपास के बच्चों के साथ खेल रहा होगा, लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटने पर चिंता बढ़ने लगी। परिवार के लोगों ने पहले आसपास तलाश की, रिश्तेदारों और परिचितों से जानकारी ली, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। रात बढ़ने के साथ परिजनों की चिंता और बढ़ गई। स्थानीय लोगों की मदद से गांव और आसपास के क्षेत्रों में खोजबीन की गई। इसी दौरान कुछ लोगों ने आशंका जताई कि आयुष को आखिरी बार खदान क्षेत्र की ओर जाते देखा गया था। इसके बाद परिजनों ने नंदिनी पुलिस और एसडीआरएफ को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचा, लेकिन खदान की गहराई और अंधेरा होने के कारण रात में रेस्क्यू अभियान शुरू नहीं किया जा सका। अधिकारियों के अनुसार खदान में पानी काफी गहरा था और रात के समय दृश्यता बेहद कम थी। ऐसे में बचाव दल ने जोखिम को देखते हुए सुबह अभियान शुरू करने का निर्णय लिया। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे एसडीआरएफ की 10 सदस्यीय टीम घटनास्थल पर पहुंची। जिला सेनानी और जिला अग्निशमन अधिकारी नागेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर अभियान शुरू किया गया। टीम में शामिल डिप डाइविंग विशेषज्ञ राजकुमार यादव और चंद्रप्रताप जघेल ने पानी के भीतर उतरकर तलाश शुरू की। करीब डेढ़ घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद सुबह लगभग सात बजे आयुष का शव खदान के गहरे हिस्से से बरामद किया गया। शव मिलने के बाद उसे बाहर निकालकर पुलिस के हवाले कर दिया गया। मौके पर मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जिस उम्मीद के साथ परिवार पूरी रात बेटे की तलाश कर रहा था, वह सुबह एक दुखद खबर में बदल गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उस कोल्ड ड्रिंक की बोतल को लेकर हो रही है, जो आयुष के हाथ में मिली। परिजनों ने बताया कि आयुष को खाली बोतलों और अन्य सामानों से खेलने का शौक था। प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि वह किसी बोतल को उठाने या पकड़ने के प्रयास में खदान के किनारे पहुंच गया होगा। घटनास्थल पर फिसलन और कुछ निशान भी मिले हैं, जिससे आशंका है कि उसका पैर अचानक फिसल गया और वह सीधे गहरे पानी में जा गिरा। स्थानीय लोगों का कहना है कि खदान के आसपास अक्सर बच्चे खेलते दिखाई देते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई जगहों पर गहरी खदानों के आसपास न तो मजबूत बैरिकेडिंग है और न ही पर्याप्त चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती तो शायद इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से खदान क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि खुले और पानी से भरे खदान क्षेत्र बच्चों और राहगीरों के लिए हमेशा खतरा बने रहते हैं। कई बार स्थानीय स्तर पर इस संबंध में शिकायतें भी की गई हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। अब इस घटना के बाद लोगों ने फिर से सुरक्षा उपायों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की पूरी पुष्टि हो सकेगी। हालांकि शुरुआती जांच में डूबने से मौत की बात सामने आ रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय आयुष अकेला था या उसके साथ कोई अन्य बच्चा भी मौजूद था। इस हादसे ने एक बार फिर परित्यक्त और पानी से भरी खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। ऐसे क्षेत्रों में नियमित निगरानी, चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा घेराबंदी और स्थानीय जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं। खासकर गर्मी और छुट्टियों के दौरान बच्चे अक्सर ऐसे स्थानों की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/13-year-old-boy-dies-due-to-drowning-in-nandini/article-55733</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/13-year-old-boy-dies-due-to-drowning-in-nandini/article-55733</guid>
                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:20:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/durg-news.jpg"                         length="276917"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        