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                <title>World Cup - दैनिक जागरण</title>
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                <description>World Cup RSS Feed</description>
                
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                <title>स्पेन से हारकर पुर्तगाल वर्ल्ड कप से बाहर, रोनाल्डो के करियर का यादगार अध्याय हुआ खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[क्वार्टर फाइनल में स्पेन ने 1-0 से दर्ज की जीत, बेल्जियम ने मेजबान अमेरिका को 4-1 से हराकर अंतिम आठ में बनाई जगह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/the-memorable-chapter-of-ronaldos-career-ended-after-portugal-lost/article-58098"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/fifa-world-cup-2026-(13).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फुटबॉल विश्व कप में मंगलवार का दिन कई बड़े उलटफेर और भावुक पलों का गवाह बना। दुनिया के महान फुटबॉल खिलाड़ियों में शुमार क्रिस्टियानो रोनाल्डो की टीम पुर्तगाल टूर्नामेंट से बाहर हो गई। क्वार्टर फाइनल में स्पेन ने शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन करते हुए पुर्तगाल को 1-0 से मात दी और सेमीफाइनल की ओर मजबूत कदम बढ़ाया। इस हार के साथ ही 41 वर्षीय रोनाल्डो के विश्व कप करियर का भी अंत हो गया। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने खड़े होकर तालियों के साथ उनका सम्मान किया। रोनाल्डो ने भी भावुक अंदाज में हाथ हिलाकर प्रशंसकों का अभिवादन किया, लेकिन उनके चेहरे पर हार की मायूसी साफ दिखाई दे रही थी। स्पेन ने पूरे मुकाबले में अनुशासित खेल का प्रदर्शन किया। टीम की मजबूत डिफेंस लाइन ने पुर्तगाल के आक्रमण को लगभग पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया। रोनाल्डो को मैच में कुछ मौके जरूर मिले, लेकिन स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन ने बेहतरीन बचाव करते हुए उन्हें गोल करने का कोई अवसर नहीं दिया। पहले हाफ में रोनाल्डो के दो खतरनाक प्रयासों को सिमोन ने शानदार तरीके से रोककर मैच का रुख बदल दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस जीत के साथ स्पेन ने विश्व कप इतिहास में लगातार छह मुकाबलों तक क्लीन शीट रखने का नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। इससे पहले लगातार पांच मैचों तक गोल नहीं खाने का रिकॉर्ड इटली और स्विट्जरलैंड के नाम था। स्पेन की यह उपलब्धि उसकी मजबूत रक्षात्मक रणनीति और खिलाड़ियों के बेहतरीन तालमेल को दर्शाती है। स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन ने व्यक्तिगत उपलब्धि भी हासिल की। उन्होंने लगातार 609 मिनट तक गोल नहीं खाकर विश्व कप का नया रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले यह रिकॉर्ड इटली के महान गोलकीपर वाल्टर जेंगा के नाम था। सिमोन की लगातार शानदार फॉर्म ने स्पेन को खिताब का मजबूत दावेदार बना दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">क्रिस्टियानो रोनाल्डो का विश्व कप सफर भी इस मुकाबले के साथ समाप्त हो गया। उन्होंने वर्ष 2006 में पहली बार विश्व कप खेला था और उसी टूर्नामेंट में पुर्तगाल को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद कई विश्व कप में उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व किया और कई यादगार मुकाबले खेले। वर्ष 2018 में स्पेन के खिलाफ उनकी हैट्रिक आज भी फुटबॉल प्रेमियों को याद है। हालांकि इस बार उनका सपना अधूरा रह गया और वे विश्व कप ट्रॉफी जीतने से एक बार फिर चूक गए। मैच समाप्त होने के बाद स्टेडियम में भावुक माहौल देखने को मिला। पुर्तगाल के खिलाड़ी निराश नजर आए, जबकि स्पेन के खिलाड़ियों ने अपनी ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि स्पेन की संतुलित टीम और मजबूत रक्षा पंक्ति उसे इस विश्व कप का सबसे बड़ा दावेदार बना रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बेल्जियम ने मेजबान अमेरिका को 4-1 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। मैच की शुरुआत से ही बेल्जियम ने आक्रामक खेल दिखाया। आठवें मिनट में चार्ल्स डी केटेलारे ने पहला गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। अमेरिका ने 31वें मिनट में फ्री-किक के जरिए बराबरी कर ली, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी।सिर्फ एक मिनट बाद डी केटेलारे ने दूसरा गोल कर बेल्जियम को फिर बढ़त दिला दी। इसके बाद अमेरिकी टीम दबाव में आ गई। 57वें मिनट में गोलकीपर की गलती का फायदा उठाकर हैंस वानाकेन ने तीसरा गोल किया। अतिरिक्त समय में अनुभवी स्ट्राइकर रोमेलु लुकाकू ने चौथा गोल दागकर बेल्जियम की जीत पूरी तरह सुनिश्चित कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बेल्जियम की जीत में चार्ल्स डी केटेलारे सबसे बड़े नायक साबित हुए। उन्होंने दो गोल करने के अलावा एक अन्य गोल में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम के मिडफील्ड और डिफेंस ने भी शानदार प्रदर्शन किया, जिससे अमेरिका को वापसी का कोई मौका नहीं मिला। मेजबान अमेरिका के लिए यह हार निराशाजनक रही। घरेलू दर्शकों के सामने टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन रक्षात्मक गलतियां और गोलकीपर की चूक टीम पर भारी पड़ गई। पूरे मैच में अमेरिका ने कुछ अच्छे अवसर बनाए, लेकिन उन्हें गोल में बदलने में सफलता नहीं मिल सकी। अब विश्व कप के क्वार्टर फाइनल मुकाबले और भी रोमांचक होने की उम्मीद है। स्पेन और बेल्जियम जैसी टीमें शानदार लय में दिखाई दे रही हैं। स्पेन जहां अपनी मजबूत रक्षा के दम पर आगे बढ़ रहा है, वहीं बेल्जियम का आक्रामक खेल विरोधी टीमों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:47:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रम्प के फोन के बाद फीफा ने रद्द किया रेड कार्ड, फैसले पर उठा बड़ा विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को एक मैच के प्रतिबंध से राहत मिली, लेकिन बेल्जियम से हारकर अमेरिका विश्व कप से बाहर हो गया। फीफा के फैसले ने खेल प्रशासन की निष्पक्षता पर नई बहस छेड़ दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/after-trumps-call-fifa-canceled-the-red-card-decision-big/article-58048"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/_folarin-balogun.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">फीफा फुटबॉल विश्व कप के दौरान अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द किए जाने का मामला दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बातचीत कर इस फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की थी। इसके बाद फीफा की अनुशासन समिति ने बालोगुन पर लगाया गया एक मैच का प्रतिबंध हटा दिया और उन्हें बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में खेलने की अनुमति मिल गई। हालांकि मैदान पर वापसी के बावजूद अमेरिकी टीम कोई बड़ा उलटफेर नहीं कर सकी और बेल्जियम ने 4-1 से जीत दर्ज करते हुए अमेरिका का टूर्नामेंट खत्म कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने फीफा के निर्णयों की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक 25 वर्षीय फोलारिन बालोगुन को पिछले नॉकआउट मुकाबले में बोस्निया-हर्जेगोविना के खिलाफ खेलते समय रेड कार्ड दिखाया गया था। रेफरी ने डिफेंडर तारिक मुहारेमोविक पर किए गए फाउल को गंभीर मानते हुए उन्हें सीधे मैदान से बाहर भेज दिया था। सामान्य नियमों के अनुसार रेड कार्ड मिलने वाले खिलाड़ी को अगला मुकाबला नहीं खेलने दिया जाता है, लेकिन इस बार मामला अलग दिशा में चला गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बात कर बालोगुन के मामले की समीक्षा करने का अनुरोध किया था। ट्रम्प का कहना था कि उन्हें यह फाउल इतना गंभीर नहीं लगा और खिलाड़ी पर लगाया गया प्रतिबंध उचित नहीं था। इसी के बाद फीफा ने अनुशासन समिति के स्तर पर मामले की समीक्षा की और प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">बालोगुन के खेलने की अनुमति मिलने के बाद बेल्जियम फुटबॉल महासंघ ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। यूरोपीय फुटबॉल से जुड़े कई अधिकारियों ने भी सवाल उठाए कि यदि मैदान पर रेफरी का फैसला अंतिम माना जाता है तो फिर इस तरह के मामलों में बाहरी दबाव या राजनीतिक बयानबाजी के बाद निर्णय क्यों बदला गया। बेल्जियम फुटबॉल संघ ने फीफा के सामने औपचारिक अपील भी दायर की, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। इसी वजह से यह मामला खेल जगत में और ज्यादा चर्चा का विषय बन गया। कई विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे फैसले दूसरे देशों और टीमों के लिए भी विवाद की वजह बन सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मैदान पर लौटे बालोगुन से अमेरिकी टीम को काफी उम्मीदें थीं। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में तीन गोल किए थे और टीम के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे। लेकिन बेल्जियम के खिलाफ खेले गए मुकाबले में अमेरिकी टीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। बेल्जियम ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और अमेरिका की रक्षापंक्ति पर लगातार दबाव बनाए रखा। आखिरकार मुकाबला 4-1 के अंतर से बेल्जियम के पक्ष में समाप्त हुआ और अमेरिका का विश्व कप अभियान यहीं खत्म हो गया। हार के बाद भी चर्चा मैच से ज्यादा रेड कार्ड विवाद को लेकर होती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने सिर्फ यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि खिलाड़ी के साथ न्याय हो। उनके मुताबिक यदि प्रतिबंध बरकरार रहता तो यह टूर्नामेंट के लिए गलत संदेश होता। दूसरी ओर फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने सोशल मीडिया पर कहा कि अनुशासन समिति ने पूरी स्वतंत्रता के साथ उपलब्ध तथ्यों और नियमों का मूल्यांकन किया। उन्होंने यह भी दोहराया कि फीफा के फैसले किसी राजनीतिक दबाव के आधार पर नहीं लिए जाते। हालांकि आलोचकों का कहना है कि ट्रम्प की सार्वजनिक टिप्पणी और उसके तुरंत बाद आए फैसले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">फुटबॉल इतिहास पर नजर डालें तो इस तरह का मामला बेहद दुर्लभ माना जाता है। वर्ष 2018 विश्व कप के दौरान भी कुछ देशों के नेताओं ने रेफरी के फैसलों पर सार्वजनिक टिप्पणी की थी, लेकिन तब फीफा ने किसी सजा या फैसले में बदलाव नहीं किया था। 2002 विश्व कप में दक्षिण कोरिया से जुड़े कुछ विवादित निर्णयों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हुई थीं, लेकिन किसी खिलाड़ी की सजा वापस नहीं ली गई थी। ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम को विश्व कप इतिहास का पहला ऐसा मामला माना जा रहा है, जब किसी राष्ट्राध्यक्ष की पैरवी के बाद रेड कार्ड से जुड़े प्रतिबंध में बदलाव किया गया। हालांकि विश्व कप इतिहास में रेड कार्ड रद्द होने की एक पुरानी मिसाल भी मिलती है। वर्ष 1962 में ब्राजील के दिग्गज खिलाड़ी गरिंचा को सेमीफाइनल में रेड कार्ड दिखाया गया था, लेकिन बाद में वह फाइनल मुकाबला खेलने उतरे थे। उस समय नियम अलग थे और रेड कार्ड के बाद स्वतः प्रतिबंध लागू नहीं होता था। अनुशासन समिति उपलब्ध सबूतों के आधार पर अलग से फैसला सुनाती थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>62 शॉट, फिर भी नहीं हुआ एक गोल; तुर्किये वर्ल्ड कप से बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के खिलाफ कुल 62 शॉट लगाए, लेकिन एक भी गोल नहीं कर सकी टीम; कोच मोंटेला भी रहे हैरान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/62-shots-still-no-goal-scored-turkey-out-of-world/article-56503"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/turkey-world-cup-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई। पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है। शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया। टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है।  शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्य कोच विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी। यही कमी अंततः तुर्किये के वर्ल्ड कप अभियान का अंत बन गई। विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 17:08:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>कांगो ने रचा इतिहास, पुर्तगाल को 1-1 ड्रॉ पर रोका वर्ल्ड कप में</title>
                                    <description><![CDATA[52 साल बाद वापसी करने वाली कांगो ने पहला गोल दागा, रोनाल्डो गोल से रहे वंचित; इंग्लैंड ने क्रोएशिया को 4-2 से हराया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/congo-created-history-by-holding-portugal-to-1-1-draw-in/article-56280"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/congo-vs-portugal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में बुधवार का दिन कई बड़े उलटफेर और ऐतिहासिक पलों का गवाह बना। जहां एक ओर 43वीं रैंकिंग वाली कांगो गणराज्य ने दिग्गज टीम पुर्तगाल को 1-1 की बराबरी पर रोककर सभी को चौंका दिया, वहीं दूसरी ओर इंग्लैंड ने क्रोएशिया को 4-2 से हराकर अपने अभियान की दमदार शुरुआत की। इन मुकाबलों ने यह साबित कर दिया कि इस बार का वर्ल्ड कप पूरी तरह प्रतिस्पर्धी और अप्रत्याशित परिणामों से भरा हुआ है। ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में खेले गए ग्रुप-के मुकाबले में पुर्तगाल और कांगो के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। मुकाबले की शुरुआत पुर्तगाल ने आक्रामक अंदाज में की और केवल छठे मिनट में ही बढ़त हासिल कर ली। जोआओ नेवेस ने पेड्रो नेटो के शानदार क्रॉस पर हेडर लगाकर टीम को 1-0 से आगे कर दिया। शुरुआती बढ़त के बाद लग रहा था कि पुर्तगाल आसानी से मैच पर नियंत्रण बना लेगा, लेकिन कांगो ने धीरे-धीरे खेल में वापसी कर मुकाबले को बराबरी पर ला दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले हाफ के अंतिम क्षणों में कांगो ने शानदार संयम दिखाया। अतिरिक्त समय के 45+5वें मिनट में योआने वीसा ने आर्थर मासुआकु के क्रॉस पर बेहतरीन हेडर लगाकर गोल दागा और स्कोर 1-1 कर दिया। यह गोल न सिर्फ मैच को बराबरी पर ले आया, बल्कि कांगो के लिए वर्ल्ड कप इतिहास का पहला गोल भी साबित हुआ। यह पल टीम और देश दोनों के लिए बेहद खास बन गया, क्योंकि कांगो ने 52 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी की थी। दूसरे हाफ में दोनों टीमों ने बढ़त बनाने के लिए कई प्रयास किए। पुर्तगाल ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार आक्रमण किए, लेकिन कांगो की डिफेंस लाइन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए हर प्रयास को नाकाम कर दिया। 55वें मिनट में पुर्तगाल ने एक बार फिर गेंद को नेट में पहुंचाया जब जोआओ कैंसेलो ने बाइसिकल किक से शानदार गोल किया, लेकिन VAR जांच में उन्हें ऑफसाइड करार दिया गया और यह गोल अमान्य हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद पुर्तगाल के स्टार खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो लगातार गोल की तलाश में दिखे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। 68वें और 73वें मिनट में उन्हें दो बेहतरीन मौके मिले, लेकिन दोनों ही प्रयास गोलपोस्ट से बाहर चले गए। 90वें मिनट में ब्रूनो फर्नांडिस के पास भी मैच जीताने का मौका था, लेकिन उनका शॉट लक्ष्य से चूक गया। रोनाल्डो इस मैच में पूरी कोशिश के बावजूद स्कोरशीट में अपना नाम दर्ज नहीं कर सके। कांगो के लिए यह मुकाबला ऐतिहासिक इसलिए भी रहा क्योंकि यह उनका वर्ल्ड कप इतिहास का पहला गोल था। इससे पहले 1974 में जब टीम जायर के नाम से खेली थी, तब कोई भी गोल नहीं कर सकी थी। इस बार योआने वीसा का गोल पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बन गया। गोल के बाद वीसा ने कहा कि यह उनके परिवार, टीम और पूरे देश के लिए बेहद भावनात्मक पल है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस ड्रॉ के बाद ग्रुप-के की स्थिति और भी रोमांचक हो गई है। पुर्तगाल को अब अगले मुकाबलों में जीत हासिल करनी होगी ताकि वह नॉकआउट दौर में अपनी जगह पक्की कर सके। टीम का अगला मुकाबला उज्बेकिस्तान और कोलंबिया से होना है, जो बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर ग्रुप-एल के मुकाबले में इंग्लैंड ने क्रोएशिया को 4-2 से हराकर शानदार शुरुआत की। इंग्लैंड की ओर से कप्तान हैरी केन ने दो गोल किए, जबकि जूड बेलिंगहैम और मार्कस रैशफोर्ड ने एक-एक गोल दागा। टीम ने पूरे मैच में आक्रामक खेल दिखाया और शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा। क्रोएशिया ने भी मुकाबले में वापसी की कोशिश की और केमार्टिन बातुरीना तथा पेटार मूसा ने गोल दागकर मुकाबले को रोमांचक बनाया, लेकिन इंग्लैंड की मजबूत आक्रमण पंक्ति के आगे उनकी एक न चली। यह मुकाबला 2018 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल की याद दिलाने वाला रहा, लेकिन इस बार परिणाम इंग्लैंड के पक्ष में गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:00:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>स्पेन का झटका, केप वर्डे से वर्ल्ड कप में 0-0 ड्रॉ</title>
                                    <description><![CDATA[लॉस एंजेलिस में खेले गए मुकाबले में स्पेन 27 शॉट्स के बावजूद गोल नहीं कर सका, युवा स्टार यामाल की कमी साफ दिखी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/spains-shock-0-0-draw-with-cape-verde-in-world-cup/article-56072"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/spain-vs-cape-verde.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लॉस एंजेलिस में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप मुकाबले में स्पेन और केप वर्डे के बीच 0-0 का हैरान करने वाला ड्रॉ दर्ज हुआ, जहां मुकाबले से पहले स्पेन को साफ तौर पर मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन मैदान पर कहानी बिल्कुल अलग नजर आई। यूरोपीय चैंपियन स्पेन ने पूरे मैच में दबदबा बनाए रखा, 27 शॉट्स लगाए और कई मौके बनाए, लेकिन इसके बावजूद गेंद गोल लाइन पार नहीं कर सकी। दूसरी तरफ केप वर्डे की टीम ने अनुशासित डिफेंस और शानदार गोलकीपिंग के दम पर बड़ा उलटफेर करने से रोक दिया। मैच में सबसे बड़ा नाम केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा रहे, जिन्होंने 40 साल की उम्र में सात बेहतरीन सेव करते हुए टीम को हार से बचा लिया। स्पेन की टीम से सबसे ज्यादा उम्मीद युवा स्टार लामिन यामाल को लेकर थी, लेकिन वह शुरुआती 70 मिनट तक मैदान पर नहीं उतरे, जिसका असर टीम के खेल पर साफ दिखा। स्पेन ने शुरुआत से ही गेंद पर नियंत्रण रखा और लगभग 700 से ज्यादा पास पूरे किए, लेकिन यह पासिंग अधिकतर साइडवेज ही रही और आक्रामकता की कमी दिखी। फर्नान टोरेस और मार्क कुकुरेला ने बाएं फ्लैंक से कुछ मौके बनाए, लेकिन फिनिशिंग में टीम बार-बार चूकती रही। पहले हाफ में टोरेस का एक शॉट बार से टकराया और ओयार्जाबल का रिबाउंड भी गोलकीपर ने शानदार तरीके से रोक लिया। इसके अलावा आयमेरिक लापोर्टे का हेडर भी गोल के बेहद करीब जाकर बाहर निकल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">कोच लुइस डे ला फुएंते ने मैच से पहले ही कहा था कि यामाल फिट हैं लेकिन शुरुआत से खेलने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी फैसले ने मैच की दिशा प्रभावित की, क्योंकि जब तक यामाल मैदान पर आए, तब तक खेल का रुख काफी हद तक स्थिर हो चुका था। उनके आते ही स्पेन के खेल में थोड़ी तेजी और रचनात्मकता आई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। यामाल ने पहले ही टच में डिफेंडर को छकाने की कोशिश की और एक अच्छा मौका भी बनाया, लेकिन टीम उसे गोल में तब्दील नहीं कर सकी। बाद में निको विलियम्स को भी देर से मैदान पर उतारा गया, जिससे स्पेन का अटैक और देर से सक्रिय हुआ। दूसरी तरफ केप वर्डे की टीम ने पूरे मैच में बेहद संगठित और अनुशासित प्रदर्शन किया। फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर अपनी क्षमता साबित करते हुए उन्होंने स्पेन के लगातार हमलों को रोकने के लिए शानदार रणनीति अपनाई। टीम के कोच बुबिस्टा ने मैच के बाद कहा कि उनकी टीम ने बिना डर के खेल दिखाया और हर खिलाड़ी ने अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाई। यह नतीजा केप वर्डे जैसे छोटे देश के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है, जिसने दुनिया की टॉप टीमों में से एक को गोल करने से रोक दिया। स्पेन के लिए यह ड्रॉ चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि टीम को टूर्नामेंट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। हालांकि कोच ने बाद में कहा कि यह एक लंबा टूर्नामेंट है और टीम धीरे-धीरे बेहतर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि स्पेन ने पिछले 32 मैचों में हार नहीं झेली है, जिससे टीम का आत्मविश्वास बना हुआ है। अब स्पेन का अगला मुकाबला सऊदी अरब के खिलाफ होगा, जहां टीम पर जीत दर्ज करने का दबाव और बढ़ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:25:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया की शानदार शुरुआत, तुर्किये को 2-0 से हराया</title>
                                    <description><![CDATA[नेस्टोरी इरानकुंडा और कॉनर मेटकाफ के गोलों की बदौलत ग्रुप डी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने दर्ज की जीत, 24 साल बाद वर्ल्ड कप में लौटी तुर्किये की शुरुआत रही निराशाजनक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/australia-made-a-great-start-in-fifa-world-cup-2026/article-55905"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/fifa-world-cup-2026-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए ग्रुप डी के मुकाबले में तुर्किये को 2-0 से हराकर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के वैंकूवर में खेले गए इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने आक्रामक खेल और मजबूत रक्षा पंक्ति का शानदार प्रदर्शन किया। मैच के दौरान तुर्किये की टीम कई मौकों पर वापसी की कोशिश करती दिखाई दी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के अनुशासित खेल के सामने उसकी एक नहीं चली। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने टूर्नामेंट में अपने इरादे साफ कर दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुकाबले की शुरुआत दोनों टीमों ने सावधानी के साथ की। शुरुआती मिनटों में गेंद पर कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। तुर्किये की टीम 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी कर रही थी, इसलिए उसके खिलाड़ियों में उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। हालांकि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही दबाव बनाना शुरू कर दिया। टीम लगातार आक्रमण करती रही और विपक्षी रक्षा पंक्ति को व्यस्त रखा। मैच के 27वें मिनट में ऑस्ट्रेलिया को उसकी मेहनत का फल मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">युवा स्टार नेस्टोरी इरानकुंडा ने शानदार गोल दागकर ऑस्ट्रेलिया को 1-0 की बढ़त दिला दी। इरानकुंडा ने बेहतरीन नियंत्रण और सटीक निशाने का प्रदर्शन करते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाया। इस गोल के बाद स्टेडियम में मौजूद ऑस्ट्रेलियाई समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। तुर्किये के खिलाड़ियों ने गोल खाने के बाद जवाबी हमला करने की कोशिश की, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की रक्षा पंक्ति ने उन्हें ज्यादा मौके नहीं दिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहले हाफ के बाकी समय में तुर्किये ने बराबरी का गोल करने के लिए कई प्रयास किए। टीम ने मिडफील्ड से खेल को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के डिफेंडरों ने संयम बनाए रखा। गोलकीपर ने भी कुछ महत्वपूर्ण बचाव किए, जिससे तुर्किये का स्कोर खोलने का सपना अधूरा रह गया। पहले हाफ की समाप्ति तक ऑस्ट्रेलिया 1-0 की बढ़त बनाए रखने में सफल रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में तुर्किये ने अधिक आक्रामक रवैया अपनाया। टीम ने लगातार आगे बढ़कर हमले किए और ऑस्ट्रेलिया पर दबाव बनाने की कोशिश की। कुछ मौकों पर ऐसा लगा कि तुर्किये बराबरी का गोल कर सकती है, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने बेहतरीन तालमेल और अनुशासन का परिचय दिया। रक्षा पंक्ति ने हर हमले को विफल करते हुए विपक्षी खिलाड़ियों को निराश किया। मैच आगे बढ़ने के साथ तुर्किये पर दबाव बढ़ता गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुकाबले के 75वें मिनट में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी बढ़त दोगुनी कर दी। मिडफील्डर कॉनर मेटकाफ ने लगभग 20 गज की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को गोल में पहुंचा दिया। यह गोल तुर्किये के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। 2-0 की बढ़त मिलने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने खेल पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित कर लिया। तुर्किये की टीम अंतिम मिनटों में वापसी की कोशिश करती रही, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस जीत में ऑस्ट्रेलिया की रक्षा पंक्ति की भूमिका बेहद अहम रही। पूरी टीम ने सामूहिक प्रयास से तुर्किये के हमलों को नाकाम किया। खिलाड़ियों ने न केवल गोल किए बल्कि पूरे मैच में अनुशासित खेल भी दिखाया। कोच और टीम प्रबंधन इस प्रदर्शन से संतुष्ट नजर आएंगे क्योंकि टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में जीत आत्मविश्वास बढ़ाने का काम करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर तुर्किये के लिए यह हार निराशाजनक रही। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली टीम बेहतर शुरुआत की उम्मीद कर रही थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने उसके सपनों पर पानी फेर दिया। हालांकि टूर्नामेंट अभी लंबा है और तुर्किये के पास अगले मुकाबलों में वापसी का मौका रहेगा। टीम को अपनी आक्रमण क्षमता और फिनिशिंग में सुधार करने की जरूरत होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी दिन खेले गए अन्य मुकाबलों में भी रोमांच देखने को मिला। ग्रुप सी में ब्राजील और मोरक्को के बीच मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ। मोरक्को के लिए इस्माइल सैबारी ने गोल किया, जबकि ब्राजील की ओर से विनीसियस जूनियर ने बराबरी दिलाई। वहीं स्कॉटलैंड ने हैती को 1-0 से हराकर टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज की। जॉन मैकगिन के पहले हाफ में किए गए गोल की बदौलत स्कॉटलैंड को जीत मिली और टीम ग्रुप सी में शीर्ष स्थान पर पहुंच गई। ग्रुप डी में ऑस्ट्रेलिया ने जीत के साथ मजबूत शुरुआत कर दी है। टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है और अगले मुकाबलों में भी उससे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 15:15:45 +0530</pubDate>
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                <title>फीफा विश्व कप 2026 में दक्षिण कोरिया की शानदार वापसी, चेकिया को 2-1 से हराया</title>
                                    <description><![CDATA[एक गोल से पिछड़ने के बाद ह्वांग इन-बोम और ओह ह्योन-ग्यू ने दूसरे हाफ में दागे गोल, दक्षिण कोरिया ने जीत के साथ अभियान की शुरुआत की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/south-korea-makes-a-great-comeback-in-fifa-world-cup/article-55763"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/south-korea-vs-czechia.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फीफा विश्व कप 2026 के दूसरे मुकाबले में दक्षिण कोरिया ने शानदार वापसी करते हुए चेकिया को 2-1 से हरा दिया। मेक्सिको के ज़ापोपान में खेले गए ग्रुप ए के इस मुकाबले में दक्षिण कोरियाई टीम ने एक गोल से पिछड़ने के बाद दूसरे हाफ में दमदार खेल दिखाया और तीन महत्वपूर्ण अंक हासिल कर लिए। मैच के हीरो ह्वांग इन-बोम रहे, जिन्होंने एक गोल करने के साथ-साथ विजयी गोल में भी अहम भूमिका निभाई। उनकी शानदार प्रदर्शन की बदौलत दक्षिण कोरिया ने विश्व कप अभियान की सकारात्मक शुरुआत की। मुकाबले की शुरुआत से ही दक्षिण कोरिया ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा। कप्तान सोन ह्यूंग-मिन की अगुआई में टीम लगातार आक्रमण करती नजर आई, लेकिन पहले हाफ में कई अच्छे मौके गंवा दिए गए। दूसरी तरफ चेकिया की टीम रक्षात्मक रणनीति के साथ मैदान पर उतरी थी और उसने दक्षिण कोरिया को शुरुआती बढ़त लेने से रोके रखा। पहले 45 मिनट में दोनों टीमें गोल करने में असफल रहीं। मुकाबला इतना फीका रहा कि हाफ टाइम के दौरान कुछ दर्शकों ने दोनों टीमों के प्रदर्शन पर नाराजगी भी जताई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में खेल की तस्वीर बदल गई। 59वें मिनट में चेकिया ने लंबी थ्रो-इन के बाद मिले मौके का फायदा उठाया। कप्तान लाडिस्लाव क्रेजी ने शानदार हेडर लगाकर गेंद को नेट में पहुंचा दिया और अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद ऐसा लग रहा था कि चेकिया मुकाबले पर पकड़ मजबूत कर लेगा, लेकिन दक्षिण कोरिया ने हार नहीं मानी। गोल खाने के बाद कोरियाई खिलाड़ियों ने आक्रमण की रफ्तार और बढ़ा दी। लगातार दबाव का असर 67वें मिनट में देखने को मिला जब ह्वांग इन-बोम ने बेहतरीन व्यक्तिगत कौशल का प्रदर्शन करते हुए बराबरी का गोल दाग दिया। उन्होंने शॉट मारने का भ्रम पैदा कर दो डिफेंडरों को छकाया और फिर सटीक फिनिश के साथ स्कोर 1-1 कर दिया। इस गोल ने मैच में नई जान डाल दी और दक्षिण कोरियाई समर्थकों का उत्साह बढ़ गया। बराबरी के बाद दक्षिण कोरिया लगातार आक्रमण करता रहा। चेकिया की टीम पर दबाव साफ दिखाई दे रहा था। आखिरकार 80वें मिनट में दक्षिण कोरिया को वह मौका मिल गया जिसका उसे इंतजार था। ह्वांग इन-बोम ने दाएं फ्लैंक से शानदार क्रॉस दिया, जिस पर ओह ह्योन-ग्यू ने सटीक स्ट्राइक लगाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के साथ दक्षिण कोरिया ने 2-1 की बढ़त हासिल कर ली। अंतिम मिनटों में चेकिया ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन कोरियाई डिफेंस ने कोई गलती नहीं की और टीम जीत दर्ज करने में सफल रही। फीफा रैंकिंग में 25वें स्थान पर मौजूद दक्षिण कोरिया पूरे मैच में बेहतर टीम नजर आई। आंकड़ों पर नजर डालें तो कोरियाई टीम ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा और गोल करने के ज्यादा मौके भी बनाए। हालांकि शुरुआती मौकों को भुनाने में असफल रहने के कारण मुकाबला अंत तक रोमांचक बना रहा। चेकिया, जो वर्ष 2006 के बाद पहली बार विश्व कप में खेल रही है, ने संघर्ष जरूर किया लेकिन बढ़त बनाए रखने में सफल नहीं हो सकी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुकाबला ग्वाडलाहारा स्टेडियम में खेला गया, जहां आधिकारिक उपस्थिति लगभग 44,985 दर्शकों की दर्ज की गई। हालांकि स्टेडियम की क्षमता 45 हजार से अधिक होने के बावजूद कई सीटें खाली नजर आईं। फिर भी मैदान पर मौजूद दर्शकों को दूसरे हाफ में शानदार फुटबॉल देखने को मिली। खासकर दक्षिण कोरिया की वापसी ने मैच को यादगार बना दिया। ग्रुप ए की अंक तालिका में इस जीत के बाद दक्षिण कोरिया तीन अंकों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। इससे पहले मेजबान मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराकर जीत के साथ टूर्नामेंट की शुरुआत की थी। बेहतर गोल अंतर के आधार पर मेक्सिको शीर्ष पर है जबकि दक्षिण कोरिया दूसरे स्थान पर मौजूद है। चेकिया तीसरे और दक्षिण अफ्रीका चौथे स्थान पर हैं।अब ग्रुप ए में अगला मुकाबला और भी दिलचस्प होने वाला है। 18 जून को दक्षिण कोरिया का सामना मेक्सिको से होगा, जबकि चेकिया की टीम दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैदान में उतरेगी। विश्व कप के नए प्रारूप के अनुसार प्रत्येक समूह से शीर्ष दो टीमें सीधे नॉकआउट दौर में पहुंचेंगी, जबकि सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों को भी अगले चरण में जगह मिलेगी। ऐसे में दक्षिण कोरिया की यह जीत आगे के सफर के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दक्षिण कोरिया के लिए यह सिर्फ तीन अंक नहीं बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाने वाली जीत भी है। टीम ने साबित कर दिया कि वह दबाव की स्थिति में भी मुकाबले को पलटने की क्षमता रखती है। अब सभी की नजरें मेक्सिको के खिलाफ होने वाले अगले बड़े मुकाबले पर टिकी होंगी, जहां दक्षिण कोरिया अपनी जीत की लय को बरकरार रखने की कोशिश करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 17:36:10 +0530</pubDate>
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