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                <title>हाईकोर्ट से CMHO डॉ. हसानी को बड़ी राहत: 62 नहीं, 65 वर्ष की उम्र में होंगे रिटायर</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर खंडपीठ का अहम फैसला, कहा- मेडिकल अधिकारियों की सेवाएं स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जरूरी; डॉ. हसानी 65 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रख सकेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-relief-to-cmho-dr-hasani-from-high-court-he/article-58179"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cmho-dr-madhav-prasad-hasani.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत उन्हें 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त किया जाना था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि डॉ. हसानी 65 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने के पात्र हैं और राज्य सरकार को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि प्रदेश के चिकित्सा अधिकारियों के सेवा नियमों और सेवानिवृत्ति आयु से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार द्वारा चिकित्सा अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित करने का उद्देश्य अनुभवी डॉक्टरों की सेवाओं का अधिक समय तक लाभ स्वास्थ्य व्यवस्था को उपलब्ध कराना है।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 30 जनवरी 2026 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त करने के निर्देश दिए गए थे। याचिका में कहा गया कि उन्होंने वर्ष 1999 में संविदा ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। इसके बाद वर्ष 2005 में उनकी सेवाओं का नियमितीकरण किया गया और तब से उन्होंने लगातार चिकित्सा सेवाएं प्रदान की हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि डॉ. हसानी ने लंबे समय तक क्लीनिकल सेवाएं दीं और बाद में विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाते हुए मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उनके अनुभव और सेवा अवधि को देखते हुए उन्हें 65 वर्ष तक सेवा का लाभ मिलना चाहिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क रखा गया कि मध्यप्रदेश सरकार पहले ही मेडिकल अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित कर चुकी है। इसके अलावा हाईकोर्ट पूर्व में भी डॉ. कांतिलाल साहू सहित कई मामलों में इसी प्रकार का फैसला दे चुका है। ऐसे में समान परिस्थितियों में डॉ. हसानी को अलग तरीके से सेवानिवृत्त करना न्यायसंगत नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि 65 वर्ष तक सेवा जारी रखने का लाभ केवल उन्हीं अधिकारियों को मिल सकता है, जो नियमों में निर्धारित सभी शर्तों को पूरा करते हों। सरकार का कहना था कि याचिकाकर्ता उन निर्धारित शर्तों के अनुरूप पात्र नहीं हैं, इसलिए उन्हें 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त करने का आदेश जारी किया गया था। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने मामले का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि डॉ. हसानी वर्ष 1999 से लगातार चिकित्सा सेवाओं से जुड़े रहे हैं और उनके मामले के तथ्य पूर्व में दिए गए न्यायिक निर्णयों से काफी हद तक मेल खाते हैं। अदालत ने यह भी माना कि उन्होंने लंबे समय तक चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है और स्वास्थ्य सेवाओं में उनका अनुभव महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मेडिकल अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का उद्देश्य केवल सेवा अवधि बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में इस नीति की भावना को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि 30 जनवरी 2026 को जारी किया गया सेवानिवृत्ति आदेश विधिसम्मत नहीं है और इसे निरस्त किया जाता है। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि डॉ. माधव प्रसाद हसानी को 65 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखने की अनुमति दी जाए और राज्य सरकार आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करे। इस फैसले के बाद स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि जिन चिकित्सा अधिकारियों के मामले समान परिस्थितियों वाले हैं, वे भी इस निर्णय का हवाला देते हुए कानूनी राहत की मांग कर सकते हैं। हालांकि प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर ही होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:54:52 +0530</pubDate>
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                <title>केन विलियमसन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा, 16 साल का शानदार करियर खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान ने तत्काल प्रभाव से संन्यास की घोषणा की, विश्व क्रिकेट के सबसे सम्मानित बल्लेबाजों में रहे शामिल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/kane-williamson-bids-goodbye-to-international-cricket-ending-16-years/article-55764"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/kane-williamson-retirement.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">न्यूजीलैंड क्रिकेट के सबसे बड़े नामों में शामिल केन विलियमसन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। 16 साल तक ब्लैक कैप्स का प्रतिनिधित्व करने वाले विलियमसन ने तत्काल प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। उनके इस फैसले ने क्रिकेट जगत को भावुक कर दिया है। शांत स्वभाव, बेहतरीन बल्लेबाजी और शानदार नेतृत्व क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले विलियमसन ने अपने करियर के दौरान न्यूजीलैंड क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। न्यूजीलैंड क्रिकेट की ओर से जारी बयान में विलियमसन ने कहा कि वह पिछले कुछ समय से इस फैसले पर विचार कर रहे थे। उन्होंने बताया कि बीते कुछ दिनों में उन्हें महसूस हुआ कि अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई लेने का सही समय आ गया है। उन्होंने कहा कि उनके भीतर हमेशा देश के लिए खेलने की भूख और जुनून रहा, लेकिन वह यह भी मानते हैं कि किसी भी खिलाड़ी को तभी तक खेलना चाहिए जब तक वह अपना शत-प्रतिशत योगदान दे सके। विलियमसन ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने न्यूजीलैंड के लिए खेले हर मुकाबले में पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ योगदान देने की कोशिश की। उनका मानना है कि यदि वह पहले जैसी प्रतिबद्धता के साथ टीम को अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे सकते, तो आगे खेलते रहना सही नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस बात से खुश हैं कि उन्हें अपने निर्णय खुद लेने का अवसर मिला और वह अपने तरीके से करियर का समापन कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने विदाई संदेश में केन विलियमसन ने न्यूजीलैंड टीम के भविष्य को लेकर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा टीम में काफी प्रतिभा मौजूद है और खिलाड़ी कुछ बड़ा हासिल करने की इच्छा रखते हैं। उनके अनुसार न्यूजीलैंड क्रिकेट का भविष्य उज्ज्वल है और आने वाले वर्षों में यह टीम कई उपलब्धियां हासिल कर सकती है। उन्होंने कहा कि ब्लैक कैप्स हमेशा उनके दिल के करीब रहेंगे और वह आगे भी टीम की सफलता के लिए शुभकामनाएं देते रहेंगे। केन विलियमसन का अंतरराष्ट्रीय करियर आधुनिक क्रिकेट के सबसे शानदार अध्यायों में गिना जाता है। अपनी तकनीकी मजबूती, धैर्य और निरंतरता के दम पर उन्होंने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में जगह बनाई। टेस्ट क्रिकेट हो, वनडे या टी20, हर प्रारूप में उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की। कई मौकों पर उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभाला और यादगार पारियां खेलीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कप्तान के रूप में भी उनका योगदान बेहद अहम रहा। उनकी अगुआई में न्यूजीलैंड टीम ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। वर्ष 2019 में उनकी कप्तानी में न्यूजीलैंड आईसीसी क्रिकेट विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा था। वह फाइनल क्रिकेट इतिहास के सबसे रोमांचक मुकाबलों में गिना जाता है। हालांकि न्यूजीलैंड खिताब जीतने से चूक गया था, लेकिन पूरी दुनिया ने विलियमसन के नेतृत्व और खेल भावना की सराहना की थी। इसके बाद वर्ष 2021 में उन्होंने न्यूजीलैंड को आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब दिलाया। फाइनल में न्यूजीलैंड ने भारत को हराकर टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा सम्मान हासिल किया था। यह न्यूजीलैंड क्रिकेट के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है। उस जीत ने विलियमसन को देश के सबसे सफल कप्तानों की सूची में शामिल कर दिया। उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने हमेशा टीम की जरूरत के अनुसार खेला। वह आक्रामकता और धैर्य के बीच संतुलन बनाने में माहिर थे। उनकी तकनीक, मानसिक मजबूती और खेल की समझ उन्हें अपने दौर के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में शामिल करती है। मैदान पर उनका शांत व्यवहार भी उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग पहचान देता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विलियमसन के संन्यास का असर न्यूजीलैंड की मौजूदा टीम पर भी पड़ेगा। उनके इस फैसले के बाद वह इंग्लैंड के खिलाफ जारी श्रृंखला का हिस्सा नहीं रहेंगे। न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अभी तक उनके स्थान पर किसी खिलाड़ी की घोषणा नहीं की है। ऐसे में चयनकर्ताओं के सामने अब टीम में उनके अनुभव और नेतृत्व की कमी को भरने की चुनौती होगी। क्रिकेट जगत के कई पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों ने विलियमसन के संन्यास पर प्रतिक्रिया दी है। उन्हें आधुनिक क्रिकेट का एक महान खिलाड़ी बताते हुए उनके योगदान को याद किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसक उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं और उनके शानदार करियर को सलाम कर रहे हैं। 16 वर्षों तक न्यूजीलैंड क्रिकेट की पहचान बने रहे केन विलियमसन ने मैदान पर कई ऐसे पल दिए जिन्हें क्रिकेट प्रेमी लंबे समय तक याद रखेंगे। उनके बल्ले से निकले रन, कप्तानी में मिली सफलताएं और खेल के प्रति उनका सम्मान उन्हें महान खिलाड़ियों की श्रेणी में खड़ा करता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से उनकी विदाई एक युग के अंत की तरह मानी जा रही है, लेकिन उनके योगदान और उपलब्धियां हमेशा क्रिकेट इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 17:35:35 +0530</pubDate>
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