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                <title>Red Card - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ट्रम्प के फोन के बाद फीफा ने रद्द किया रेड कार्ड, फैसले पर उठा बड़ा विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को एक मैच के प्रतिबंध से राहत मिली, लेकिन बेल्जियम से हारकर अमेरिका विश्व कप से बाहर हो गया। फीफा के फैसले ने खेल प्रशासन की निष्पक्षता पर नई बहस छेड़ दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/after-trumps-call-fifa-canceled-the-red-card-decision-big/article-58048"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/_folarin-balogun.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">फीफा फुटबॉल विश्व कप के दौरान अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द किए जाने का मामला दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बातचीत कर इस फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की थी। इसके बाद फीफा की अनुशासन समिति ने बालोगुन पर लगाया गया एक मैच का प्रतिबंध हटा दिया और उन्हें बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में खेलने की अनुमति मिल गई। हालांकि मैदान पर वापसी के बावजूद अमेरिकी टीम कोई बड़ा उलटफेर नहीं कर सकी और बेल्जियम ने 4-1 से जीत दर्ज करते हुए अमेरिका का टूर्नामेंट खत्म कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने फीफा के निर्णयों की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक 25 वर्षीय फोलारिन बालोगुन को पिछले नॉकआउट मुकाबले में बोस्निया-हर्जेगोविना के खिलाफ खेलते समय रेड कार्ड दिखाया गया था। रेफरी ने डिफेंडर तारिक मुहारेमोविक पर किए गए फाउल को गंभीर मानते हुए उन्हें सीधे मैदान से बाहर भेज दिया था। सामान्य नियमों के अनुसार रेड कार्ड मिलने वाले खिलाड़ी को अगला मुकाबला नहीं खेलने दिया जाता है, लेकिन इस बार मामला अलग दिशा में चला गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बात कर बालोगुन के मामले की समीक्षा करने का अनुरोध किया था। ट्रम्प का कहना था कि उन्हें यह फाउल इतना गंभीर नहीं लगा और खिलाड़ी पर लगाया गया प्रतिबंध उचित नहीं था। इसी के बाद फीफा ने अनुशासन समिति के स्तर पर मामले की समीक्षा की और प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">बालोगुन के खेलने की अनुमति मिलने के बाद बेल्जियम फुटबॉल महासंघ ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। यूरोपीय फुटबॉल से जुड़े कई अधिकारियों ने भी सवाल उठाए कि यदि मैदान पर रेफरी का फैसला अंतिम माना जाता है तो फिर इस तरह के मामलों में बाहरी दबाव या राजनीतिक बयानबाजी के बाद निर्णय क्यों बदला गया। बेल्जियम फुटबॉल संघ ने फीफा के सामने औपचारिक अपील भी दायर की, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। इसी वजह से यह मामला खेल जगत में और ज्यादा चर्चा का विषय बन गया। कई विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे फैसले दूसरे देशों और टीमों के लिए भी विवाद की वजह बन सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मैदान पर लौटे बालोगुन से अमेरिकी टीम को काफी उम्मीदें थीं। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में तीन गोल किए थे और टीम के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे। लेकिन बेल्जियम के खिलाफ खेले गए मुकाबले में अमेरिकी टीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। बेल्जियम ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और अमेरिका की रक्षापंक्ति पर लगातार दबाव बनाए रखा। आखिरकार मुकाबला 4-1 के अंतर से बेल्जियम के पक्ष में समाप्त हुआ और अमेरिका का विश्व कप अभियान यहीं खत्म हो गया। हार के बाद भी चर्चा मैच से ज्यादा रेड कार्ड विवाद को लेकर होती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने सिर्फ यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि खिलाड़ी के साथ न्याय हो। उनके मुताबिक यदि प्रतिबंध बरकरार रहता तो यह टूर्नामेंट के लिए गलत संदेश होता। दूसरी ओर फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने सोशल मीडिया पर कहा कि अनुशासन समिति ने पूरी स्वतंत्रता के साथ उपलब्ध तथ्यों और नियमों का मूल्यांकन किया। उन्होंने यह भी दोहराया कि फीफा के फैसले किसी राजनीतिक दबाव के आधार पर नहीं लिए जाते। हालांकि आलोचकों का कहना है कि ट्रम्प की सार्वजनिक टिप्पणी और उसके तुरंत बाद आए फैसले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">फुटबॉल इतिहास पर नजर डालें तो इस तरह का मामला बेहद दुर्लभ माना जाता है। वर्ष 2018 विश्व कप के दौरान भी कुछ देशों के नेताओं ने रेफरी के फैसलों पर सार्वजनिक टिप्पणी की थी, लेकिन तब फीफा ने किसी सजा या फैसले में बदलाव नहीं किया था। 2002 विश्व कप में दक्षिण कोरिया से जुड़े कुछ विवादित निर्णयों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हुई थीं, लेकिन किसी खिलाड़ी की सजा वापस नहीं ली गई थी। ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम को विश्व कप इतिहास का पहला ऐसा मामला माना जा रहा है, जब किसी राष्ट्राध्यक्ष की पैरवी के बाद रेड कार्ड से जुड़े प्रतिबंध में बदलाव किया गया। हालांकि विश्व कप इतिहास में रेड कार्ड रद्द होने की एक पुरानी मिसाल भी मिलती है। वर्ष 1962 में ब्राजील के दिग्गज खिलाड़ी गरिंचा को सेमीफाइनल में रेड कार्ड दिखाया गया था, लेकिन बाद में वह फाइनल मुकाबला खेलने उतरे थे। उस समय नियम अलग थे और रेड कार्ड के बाद स्वतः प्रतिबंध लागू नहीं होता था। अनुशासन समिति उपलब्ध सबूतों के आधार पर अलग से फैसला सुनाती थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>कनाडा की वर्ल्ड कप में पहली जीत, जोनाथन डेविड की हैट्रिक से कतर 6-0 से पराजित</title>
                                    <description><![CDATA[कतर के दो खिलाड़ियों को रेड कार्ड, 9 खिलाड़ियों के साथ खेली टीम; स्विट्जरलैंड ने भी बोस्निया को 4-1 से हराकर बढ़ाया नॉकआउट की ओर कदम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/canadas-first-win-in-the-world-cup-jonathan-davids-hat-trick/article-56408"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/canada-vs-qatar.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फुटबॉल वर्ल्ड कप में कनाडा ने इतिहास रचते हुए टूर्नामेंट की अपनी पहली जीत दर्ज कर ली। वैंकूवर के बीसी प्लेस स्टेडियम में खेले गए ग्रुप-बी मुकाबले में कनाडा ने कतर को 6-0 से हराकर न केवल तीन महत्वपूर्ण अंक हासिल किए बल्कि दुनिया को अपनी ताकत का भी अहसास कराया। इस शानदार जीत के सबसे बड़े नायक स्ट्राइकर जोनाथन डेविड रहे, जिन्होंने हैट्रिक लगाकर मैच को यादगार बना दिया। घरेलू दर्शकों के सामने खेल रही कनाडाई टीम शुरुआत से ही आक्रामक नजर आई और कतर को पूरे मुकाबले में वापसी का कोई मौका नहीं दिया। मैच के शुरुआती मिनटों से ही कनाडा ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा। टीम की तेज पासिंग और लगातार हमलों ने कतर की रक्षापंक्ति पर दबाव बना दिया था। इसका असर 16वें मिनट में देखने को मिला जब साइल लारिन ने शानदार गोल कर कनाडा को 1-0 की बढ़त दिलाई। इस गोल के बाद टीम का आत्मविश्वास और बढ़ गया। 29वें मिनट में जोनाथन डेविड ने अपना पहला गोल दागकर स्कोर 2-0 कर दिया। कतर की टीम इस झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि पहले हाफ के इंजरी टाइम में डेविड ने एक और गोल कर बढ़त को 3-0 तक पहुंचा दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालात उस समय और बिगड़ गए जब कतर के खिलाड़ियों ने दबाव में आकर गलतियां करनी शुरू कर दीं। 33वें मिनट में ताजोन बुकेनन पर किए गए फाउल के लिए होमन अहमद को सीधे रेड कार्ड दिखाया गया। एक खिलाड़ी कम होने के बाद भी कतर ने मुकाबले में बने रहने की कोशिश की, लेकिन दूसरे हाफ की शुरुआत में एक और बड़ा झटका लग गया। 51वें मिनट में अस्सिम मादीबो ने इस्माइल कोन पर खतरनाक टैकल किया, जिसके बाद रेफरी ने उन्हें भी रेड कार्ड दिखा दिया। इस टक्कर में कोन गंभीर रूप से चोटिल हो गए और उन्हें स्ट्रेचर के सहारे मैदान से बाहर ले जाना पड़ा।  दो खिलाड़ियों के बाहर होने के बाद कतर को लगभग पूरा दूसरा हाफ केवल 9 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। ऐसे में कनाडा को खुले मैदान में खेलने का भरपूर मौका मिला। 64वें मिनट में नाथन सालिबा ने फ्री-किक पर शानदार गोल कर स्कोर 4-0 कर दिया। इस गोल के बाद उन्होंने इस्माइल कोन की जर्सी दिखाकर अपना गोल चोटिल साथी को समर्पित किया। मैच के 75वें मिनट में मोहम्मद मनाई का आत्मघाती गोल कतर की मुश्किलें और बढ़ा गया। गेंद को क्लियर करने के प्रयास में वह अपनी ही टीम के गोलपोस्ट में पहुंच गई और स्कोर 5-0 हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुकाबले के अंतिम क्षणों में भी कनाडा का आक्रमण जारी रहा। इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में जोनाथन डेविड ने नाथन सालिबा के पास को शानदार तरीके से नियंत्रित किया और जोरदार शॉट लगाकर गेंद को नेट में पहुंचा दिया। इसी के साथ उन्होंने अपनी हैट्रिक पूरी की और कनाडा की 6-0 की ऐतिहासिक जीत पर मुहर लगा दी। डेविड फुटबॉल वर्ल्ड कप में हैट्रिक लगाने वाले कनाडा के पहले खिलाड़ी बन गए हैं। इसके अलावा वह घरेलू मैदान पर वर्ल्ड कप में हैट्रिक लगाने वाले इतिहास के केवल दूसरे खिलाड़ी भी बने। इससे पहले यह उपलब्धि 1966 में इंग्लैंड के ज्योफ हर्स्ट ने हासिल की थी। मैच के बाद कनाडा के स्ट्राइकर साइल लारिन ने कहा कि उनकी टीम ने दुनिया को दिखा दिया है कि कनाडा अब केवल भाग लेने नहीं बल्कि मुकाबला जीतने के लिए आया है। उन्होंने कहा कि टीम के कई खिलाड़ी ऐसे हैं जो ज्यादा चर्चा में नहीं रहे, लेकिन उन्होंने अपने खेल और जज्बे से साबित कर दिया कि वे विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। लारिन ने यह भी कहा कि इस्माइल कोन की चोट टीम के लिए भावुक पल था, लेकिन खिलाड़ियों ने मैदान पर लौटकर अपना काम पूरा किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर ग्रुप-बी के एक अन्य मुकाबले में स्विट्जरलैंड ने बोस्निया-हर्जेगोविना को 4-1 से हराकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। लॉस एंजिलिस के स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में लंबे समय तक दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। हालांकि दूसरे हाफ में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी जोहान मंजाम्बी ने मैच का रुख बदल दिया। 71वें मिनट में मैदान पर आए मंजाम्बी ने तीन मिनट बाद ही शानदार वॉली से स्विट्जरलैंड को बढ़त दिला दी। इसके बाद 84वें मिनट में रुबिन वर्गास ने गोल कर अंतर 2-0 कर दिया। मंजाम्बी ने 90वें मिनट में अपना दूसरा गोल दागा, जबकि इंजरी टाइम में कप्तान ग्रेनिट झाका ने पेनाल्टी को गोल में बदलकर स्कोर 4-0 कर दिया। बोस्निया के लिए एरमिन माहमिक ने अंतिम क्षणों में एक गोल जरूर किया, लेकिन हार का अंतर कम करने से ज्यादा कुछ नहीं कर सके। बोस्निया को भी मैच के दौरान एक खिलाड़ी के रेड कार्ड का नुकसान उठाना पड़ा। तारिक मुहरेमोविच को खतरनाक टैकल के लिए मैदान छोड़ना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:54:24 +0530</pubDate>
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                <title>वर्ल्ड कप 2026 की धमाकेदार शुरुआत, पहले ही दिन तीन रेड कार्ड और VAR पर छिड़ी बहस</title>
                                    <description><![CDATA[मेक्सिको ने साउथ अफ्रीका को 2-0 से हराया, रेड कार्ड, वॉटर ब्रेक और VAR फैसलों ने खींचा ध्यान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/world-cup-2026-started-with-a-bang-three-red-cards/article-55765"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/fifa-world-cup-2026-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आगाज शानदार अंदाज में हो चुका है और टूर्नामेंट के पहले ही दिन फुटबॉल प्रेमियों को रोमांच, विवाद, रिकॉर्ड और कई यादगार पल देखने को मिले। मेक्सिको सिटी के प्रतिष्ठित एज्टेका स्टेडियम में खेले गए उद्घाटन मुकाबले में मेक्सिको ने साउथ अफ्रीका को 2-0 से हराकर जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत की। हालांकि मैच का नतीजा जितना चर्चा में रहा, उससे कहीं ज्यादा रेड कार्ड, वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) और अनिवार्य वॉटर ब्रेक को लेकर बहस ने सुर्खियां बटोरीं। टूर्नामेंट के पहले ही मुकाबले में तीन खिलाड़ियों को रेड कार्ड दिखाए जाने से फुटबॉल जगत में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या यह विश्व कप इतिहास के सबसे अधिक रेड कार्ड वाले टूर्नामेंटों में शामिल होने जा रहा है। मेक्सिको और साउथ अफ्रीका के बीच खेले गए मुकाबले में साउथ अफ्रीका के याया सिथोले और थेम्बा ज्वाने को मैदान छोड़ना पड़ा, जबकि मेक्सिको के सेसर मोंटेस को भी रेड कार्ड दिखाया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> किसी भी बड़े टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों में रेफरी के फैसले आगे के मैचों की दिशा तय करते हैं। ऐसे में पहले ही दिन तीन रेड कार्ड दिए जाने को काफी अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि 2018 और 2022 के विश्व कप में पूरे टूर्नामेंट के दौरान कुल चार-चार रेड कार्ड ही दिखाए गए थे। ऐसे में उद्घाटन मैच में ही तीन खिलाड़ियों का बाहर होना एक असाधारण घटना मानी जा रही है। मैच के दौरान सबसे ज्यादा विवाद VAR के इस्तेमाल को लेकर हुआ। साउथ अफ्रीका के खिलाड़ी थेम्बा ज्वाने को दूसरे हाफ में रेड कार्ड दिखाया गया। शुरुआत में रेफरी विल्टन सांपाइयो ने उन्हें मैदान से बाहर नहीं भेजा था, लेकिन VAR की समीक्षा के बाद रेफरी ने अपना फैसला बदला और ज्वाने को रेड कार्ड दिखा दिया। इस फैसले ने सोशल मीडिया से लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों तक के बीच बहस छेड़ दी। कई लोगों का मानना था कि ज्वाने का इरादा विरोधी खिलाड़ी को चोट पहुंचाने का नहीं था और यह फैसला काफी सख्त था। रिप्ले में भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नजर नहीं आई। इसके बावजूद VAR की सलाह के बाद रेफरी ने इसे "हिंसक आचरण" मानते हुए रेड कार्ड दिया। साउथ अफ्रीका के मुख्य कोच ह्यूगो ब्रूस ने भी मैच के बाद इस फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके खिलाड़ी का रास्ता विरोधी खिलाड़ी ने रोका था और यह रेड कार्ड देने लायक स्थिति नहीं थी। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि रेफरी के फैसले को स्वीकार करना टीम की मजबूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">VAR को लेकर यह पहली बार नहीं है जब विवाद सामने आया हो। पिछले कई बड़े टूर्नामेंटों में भी इस तकनीक को लेकर खिलाड़ियों, कोचों और प्रशंसकों के बीच मतभेद देखने को मिले हैं। समर्थकों का कहना है कि इससे गलत फैसलों को सुधारा जा सकता है, जबकि आलोचकों का मानना है कि इससे खेल का स्वाभाविक प्रवाह प्रभावित होता है। उद्घाटन मैच का एक और प्रमुख पहलू वॉटर ब्रेक रहा। उत्तर अमेरिका में गर्म मौसम और खिलाड़ियों की फिटनेस को ध्यान में रखते हुए मैच के दौरान कई बार पानी पीने के लिए खेल रोका गया। कुछ प्रशंसकों ने इसे खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया, जबकि कुछ लोगों का मानना था कि इससे मैच की गति प्रभावित हुई। मैदान पर प्रदर्शन की बात करें तो मेक्सिको ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। टीम ने शुरुआती मिनटों में बढ़त हासिल कर ली और पूरे मैच में दबदबा बनाए रखा। साउथ अफ्रीका को दो रेड कार्ड मिलने के बाद मुकाबला और मुश्किल हो गया। नौ खिलाड़ियों के साथ खेल रही टीम वापसी नहीं कर सकी और मेक्सिको ने जीत सुनिश्चित कर ली। विश्व कप के उद्घाटन दिवस में कुल पांच गोल, चार वॉटर ब्रेक, तीन रेड कार्ड और कई विवादास्पद फैसले देखने को मिले। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह टूर्नामेंट रोमांच और चर्चा दोनों के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है। फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह सिर्फ शुरुआत है। अगले 39 दिनों तक चलने वाले इस मेगा टूर्नामेंट में 104 मुकाबले खेले जाएंगे और दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमें खिताब के लिए संघर्ष करेंगी। पहले ही दिन मिले संकेत बताते हैं कि वर्ल्ड कप 2026 में मैदान के भीतर और बाहर दोनों जगह भरपूर ड्रामा देखने को मिल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 17:35:28 +0530</pubDate>
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