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                <title>ayodhya - दैनिक जागरण</title>
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                            <item>
                <title>राम मंदिर दान विवाद में नया मोड़: 23 कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा, सुप्रीम कोर्ट में 13 जुलाई को होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[दान गिनने वाले कर्मचारियों ने बढ़े कार्यभार और बदली व्यवस्था पर जताई नाराजगी, दान प्रबंधन और कथित गड़बड़ी मामले में CBI जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-twist-in-ram-temple-donation-dispute-mass-resignation-of/article-58425"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-master-plan-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा श्रद्धालुओं की आस्था या धार्मिक आयोजन को लेकर नहीं, बल्कि मंदिर में आने वाले दान की गिनती और उससे जुड़े प्रशासनिक विवाद को लेकर हो रही है। दान की गिनती का जिम्मा संभाल रहे 23 कर्मचारियों ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि दान चोरी का मामला सामने आने के बाद दान की प्रकृति बदल गई है, जिससे उनका कार्यभार पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। इसी बीच इस पूरे मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को सुनवाई करेगा, जिससे इस विवाद पर सभी की नजरें टिक गई हैं। मंदिर में आने वाले दान की गिनती का कार्य बैंक कर्मचारियों की टीम करती थी। पहले दान में बड़ी संख्या में 500 रुपये के नोट आते थे, जिससे गिनती का काम अपेक्षाकृत तेजी से पूरा हो जाता था। कर्मचारियों के मुताबिक पहले प्रतिदिन 500 रुपये के नोटों के 70 से 80 बंडल तैयार हो जाते थे। लेकिन दान चोरी की खबरें सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के दान देने के तरीके में बदलाव देखने को मिला है। अब मंदिर में 10 और 20 रुपये के नोटों की संख्या काफी बढ़ गई है, जबकि 500 रुपये के नोटों की संख्या पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">कर्मचारियों का कहना है कि छोटे मूल्य के नोटों की गिनती में अधिक समय लगता है। पहले जहां दो शिफ्टों में काम होता था और प्रत्येक कर्मचारी लगभग छह घंटे की ड्यूटी करता था, वहीं अब पूरी व्यवस्था बदल दी गई है। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक लगातार काम करना पड़ रहा है। इसके बावजूद उनके वेतन में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई। बढ़े हुए कार्यभार और लंबी ड्यूटी के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता गया और अंततः 23 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। बताया जा रहा है कि इस्तीफों के बाद अब केवल 13 कर्मचारी ही दान गिनने का काम संभाल रहे हैं। ऐसे में मंदिर में प्रतिदिन आने वाले दान की गिनती और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। यदि जल्द ही नई नियुक्तियां नहीं की गईं या कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में दान प्रबंधन की व्यवस्था और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, राम मंदिर दान प्रबंधन से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में दान चोरी के आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने, विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और मंदिर में दान प्रबंधन की पूरी व्यवस्था की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है। इन सभी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ 13 जुलाई को सुनवाई करेगी। इस सुनवाई को पूरे देश में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे आगे की जांच और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर दिशा तय हो सकती है। दान विवाद पर देश ही नहीं बल्कि पड़ोसी नेपाल से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। नेपाल के जनकपुर स्थित प्रसिद्ध जानकी मंदिर के महंत रोशन दास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के किसी मंदिर में दान से जुड़ी ऐसी घटना पहले कभी सुनने या देखने को नहीं मिली। उनके अनुसार, जब से उन्हें अयोध्या में दान से जुड़े विवाद की जानकारी मिली है, तब से वे बेहद दुखी और चिंतित हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। राम मंदिर देशभर के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर की दान व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। श्रद्धालु यह उम्मीद कर रहे हैं कि दान की राशि का पूरी पारदर्शिता के साथ उपयोग हो और उसकी गिनती एवं प्रबंधन की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित तथा विश्वसनीय बनी रहे। अब सभी की निगाहें 13 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के निर्देशों के आधार पर इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि जांच एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी जाती है या दान प्रबंधन प्रणाली में बदलाव के निर्देश दिए जाते हैं, तो इसका असर भविष्य में मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी दिखाई दे सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर चंपत राय की पहली प्रतिक्रिया, बोले- SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद दूंगा हर सवाल का जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीरामचरितमानस की चौपाई साझा कर तोड़ी चुप्पी, पत्र जारी कर कहा- मौन इसलिए हूं क्योंकि जांच पूरी होने का इंतजार है; ट्रस्ट और SIT की कार्रवाई जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/champat-rais-first-reaction-on-the-ram-temple-offering-controversy/article-58124"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ram-mandir-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर श्रीरामचरितमानस की एक प्रसिद्ध चौपाई साझा करते हुए संकेत दिया कि कठिन समय में धैर्य और सत्य की परीक्षा होती है। इसके साथ ही उन्होंने रामभक्तों के नाम एक हस्तलिखित पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि वह फिलहाल किसी भी आरोप का जवाब नहीं देंगे और विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। चंपत राय ने अपने संदेश में लिखा कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं, लेकिन उन्होंने जांच की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए मौन रहने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट की बैठक में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जिसके बाद उससे जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक हो गईं। उन्होंने भरोसा जताया कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद सभी तथ्यों के साथ जवाब दिया जाएगा और सच्चाई सभी के सामने होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 1991 में उन्हें संगठन की ओर से अयोध्या की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और तब से लेकर अब तक का उनका सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है। उन्होंने कहा कि दशकों के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने हमेशा संगठन और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन किया है। इधर, चढ़ावा मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने अब जांच का दायरा और व्यापक कर दिया है। जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी अब राम मंदिर से जुड़े प्रमुख आयोजनों में हुए खर्च का भी परीक्षण कर रही है। विशेष रूप से 22 जनवरी 2024 को आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह और नवंबर 2025 में हुए ध्वजारोहण कार्यक्रम से संबंधित बिल, भुगतान और वित्तीय दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर लगभग 113 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि ध्वजारोहण कार्यक्रम पर करीब 10.12 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया। जांच एजेंसियां इन खर्चों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं ताकि वित्तीय प्रक्रिया की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। हालांकि, जांच अभी जारी है और किसी भी प्रकार की अंतिम टिप्पणी या निष्कर्ष सामने नहीं आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार चंपत राय का इस कथित मामले से कोई व्यक्तिगत या चारित्रिक संबंध नहीं हो सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि प्रशासनिक स्तर पर कुछ चूक हुई होगी, जिसका फायदा कुछ लोगों ने उठाया। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की व्यवस्था लागू की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, ट्रस्ट में नए महासचिव के रूप में कृष्ण मोहन दास ने अपना कार्यभार संभाल लिया है। ट्रस्ट प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह जारी रहेगी और आवश्यक प्रशासनिक सुधार भी किए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो। वहीं, मामले में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड भी मिली है। जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बीच विश्व हिंदू परिषद ने भी चंपत राय को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। संगठन का कहना है कि जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप जांच में सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक उसके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। इसी कारण चंपत राय संगठन में अपनी वर्तमान जिम्मेदारी पर बने रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की रिपोर्ट, CCTV में 70 संदिग्ध घटनाएं कैद</title>
                                    <description><![CDATA[प्रारंभिक जांच में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, चढ़ावे की गिनती प्रक्रिया में गंभीर खामियां; कई कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/sit-report-in-ram-temple-offering-theft-case-70-suspicious/article-58042"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ram-mandir-donation-theft-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के राममंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 27 अप्रैल से 5 जून के बीच चढ़ावे की गिनती वाले कमरे में लगे सीसीटीवी कैमरों में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं रिकॉर्ड हुई हैं। जांच में सामने आया कि गिनती का काम कर रहे कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और मोजों में छिपाते हुए दिखाई दिए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से कई की गतिविधियां फुटेज में साफ नजर आई हैं। इसी बीच राममंदिर ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे भी स्वीकार किए गए, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर की नकदी गिनती और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच टीम का कहना है कि चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां थीं, जिनका फायदा उठाकर लगातार चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नकदी प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था की निगरानी से जुड़े डॉ. अनिल मिश्रा को पहले से सुरक्षा व्यवस्था में कमियों की जानकारी दी गई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी लिखित निर्देश जारी नहीं किए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं ली जाती थी, जिससे नकदी बाहर ले जाना आसान हो गया। अधिकारियों के अनुसार कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति, तय यूनिफॉर्म, निजी सामान पर नियंत्रण, नकदी का रिकॉर्ड और दैनिक निगरानी जैसी व्यवस्थाएं पूरी तरह प्रभावी नहीं थीं। ऐसे हालात में सुरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ती गई और चोरी की घटनाएं लगातार होती रहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया कि चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना किसी औपचारिक लिखित आदेश के मंदिर की हुंडियों और गिनती कक्ष से जुड़ी चाबियों का नियंत्रण था। इतना ही नहीं, उसकी सिफारिश पर मनीष कुमार यादव को चढ़ावे की गिनती के काम में लगाया गया, जो बाद में आरोपियों में शामिल पाया गया। एसआईटी ने इसे सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना है। रिपोर्ट के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज में कई बार कर्मचारी एक-दूसरे को इशारों से सतर्क करते भी दिखाई दिए, जिससे जांच टीम को यह गतिविधि संगठित तरीके से होने का संदेह हुआ। जांच अधिकारियों ने इन घटनाओं को अलग-अलग नहीं बल्कि लगातार दोहराए गए पैटर्न के रूप में दर्ज किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच के आधार पर अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। एसआईटी का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, बरामद नकदी और बैंक खातों की जांच में इनके खिलाफ पर्याप्त शुरुआती साक्ष्य मिले हैं। रिपोर्ट में इनके खिलाफ चोरी, आपराधिक न्यासभंग, आपराधिक दुर्विनियोग, षड्यंत्र और चोरी की संपत्ति रखने जैसी धाराओं में कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट की ओर से मामला दर्ज कराया गया था, जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आरोपी अविनाश शुक्ला के पास से अब तक 20.39 लाख रुपये नकद, 1121 अमेरिकी डॉलर, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 20 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों के बैंक खातों में लाखों रुपये के लेन-देन दर्ज मिले हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी ने परिवार और दोस्तों पर बड़ी रकम खर्च करने की बात भी स्वीकार की है। एक भाई की शादी पर लाखों रुपये खर्च करने, दूसरे भाई को नकद राशि देने, कार खरीदने और दोस्तों को पैसे ट्रांसफर करने जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि चोरी की रकम को बैंक खातों और संपत्तियों के जरिए खपाने की कोशिश की गई हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआती जांच है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल अभी बाकी है। निगरानी व्यवस्था में लापरवाही, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका, सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार और अन्य संभावित लोगों की संलिप्तता को लेकर विस्तृत जांच जारी है। अंतिम रिपोर्ट में इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत निष्कर्ष और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव सरकार को सौंपे जाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दिग्विजय सिंह का ऐलान: महाकाल से अयोध्या तक करेंगे 1000 किमी पदयात्रा, राम मंदिर चंदे का हिसाब मांगेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[2 अक्टूबर से शुरू होगी यात्रा, कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी; यात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए सोशल मीडिया से दूरी बनाने की घोषणा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a48b697e584e/article-57851"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/digvijaya-singh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे की पारदर्शिता को लेकर बड़ा ऐलान किया है। भोपाल में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह आगामी 2 अक्टूबर से उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर से अयोध्या की राम जन्मभूमि तक करीब 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकालेंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य किसी दल या संगठन के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे का सार्वजनिक हिसाब मांगना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान कांग्रेस का प्रचार नहीं किया जाएगा और न ही वे फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे। उनके अनुसार उन्होंने स्वयं भी राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपये का योगदान दिया था और आज भी उस दान की रसीद तथा चेक की प्रति उनके पास सुरक्षित है। उनका कहना है कि जिन श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ दान दिया है, उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने बताया कि पदयात्रा शुरू होने से पहले वह वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह लेंगे। उन्होंने कहा कि 5 या 6 जुलाई को वकीलों से चर्चा के बाद अयोध्या जाकर अदालत में याचिका दायर करने की तैयारी है। उनका कहना है कि न्यायालय से राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित धन का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करने की मांग की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय न्यायालय और जांच प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों की आस्था बहुत गहरी होती है, इसलिए आर्थिक मामलों में भी स्पष्टता बनी रहनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पदयात्रा में उन सभी लोगों का स्वागत होगा जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन या आम नागरिक को यदि चंदे के उपयोग में पारदर्शिता की अपेक्षा है तो वह इस यात्रा में शामिल हो सकता है। उनके अनुसार यात्रा के दौरान वह अपने साथ दान की रसीद और चेक की प्रतियां भी रखेंगे ताकि यह दिखाया जा सके कि उन्होंने स्वयं भी इस अभियान में योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों ने भगवान राम के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए स्वेच्छा से दान दिया था और ऐसे में यदि चंदे के उपयोग को लेकर कोई सवाल उठते हैं तो उनका समाधान भी पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत में किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी साबित होती है तो वह अपना दिया गया चंदा वापस लेकर उसे किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान कर देंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर क्षेत्र में बने एक गेस्ट हाउस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना और उससे जुड़े आर्थिक पहलुओं पर भी पारदर्शिता होनी चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी सभी संस्थाओं और ट्रस्टों के आर्थिक लेन-देन का समय-समय पर सार्वजनिक विवरण उपलब्ध होना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग केवल एक ट्रस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धार्मिक ट्रस्टों के लिए समान रूप से पारदर्शिता लागू होनी चाहिए। उन्होंने अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाने की भी घोषणा की, जिस पर लिखा होगा कि "मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है।" इसे उन्होंने प्रतीकात्मक संदेश बताया। दिग्विजय सिंह ने दोहराया कि उनकी पूरी यात्रा शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में होगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं बल्कि दानदाताओं के मन में उठ रहे सवालों को उचित मंच पर रखना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:38:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले में सियासी हलचल, अयोध्या में कांग्रेस नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर अयोध्या में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले पुलिस ने कई नेताओं पर एहतियाती कार्रवाई की, जबकि मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/political-stir-in-ram-temple-offering-case-police-action-against/article-57413"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ayodhya-ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े मामले को लेकर अयोध्या में मंगलवार को राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ अयोध्या पहुंचे थे। पार्टी की ओर से मंदिर ट्रस्ट कार्यालय के बाहर विरोध कार्यक्रम की घोषणा की गई थी। इससे पहले सोमवार देर रात पुलिस ने अजय राय को अयोध्या के एक होटल में रोक दिया। बाद में उन्हें कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस ले जाया गया। प्रशासन ने इसे एहतियाती कदम बताया। इसी दौरान कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं और जनप्रतिनिधियों को भी उनके आवास पर ही रोक दिया गया, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। मंगलवार दोपहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राम जन्मभूमि परिसर की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने मंदिर क्षेत्र से पहले टेढ़ी बाजार इलाके में बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया। इस दौरान कुछ देर के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। हालात को देखते हुए पुलिस ने कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया। पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा के सभी आवश्यक इंतजाम पहले से किए गए थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर, अजय राय की पत्नी रीना राय ने वाराणसी से एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने अपने पति की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और कहा कि वह जल्द से जल्द उनसे मिलने की उम्मीद कर रही हैं। कांग्रेस की ओर से भी कहा गया कि पार्टी इस मुद्दे पर अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखेगी। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और सभी फैसले उसी के अनुसार लिए गए। इस बीच चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। जांच के क्रम में राम मंदिर परिसर में लंबे समय से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (आरएमओ) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। वह करीब 17 वर्षों से अयोध्या में तैनात थे। उनकी जिम्मेदारी मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी नेटवर्क की निगरानी से जुड़ी थी। बताया जाता है कि चढ़ावा गिनती वाले कक्ष सहित पूरे मंदिर परिसर में लगे लगभग 1600 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> विशेष जांच दल (एसआईटी) इस पूरे मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी देखी जा रही है। अर्जुन देव की लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। जांच के सिलसिले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय से भी पुलिस ने पूछताछ की। जानकारी के अनुसार उनसे यह जानने का प्रयास किया गया कि उन्हें मामले की जानकारी पहली बार कब मिली और उसके बाद क्या कदम उठाए गए। इससे पहले इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत अदालत ने 14 दिन के लिए बढ़ा दी थी। जांच एजेंसियां अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद राज्य सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल का गठन किया। 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई और मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसी दिन मंदिर ट्रस्ट से जुड़े दो पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से जांच लगातार जारी है और संबंधित दस्तावेजों व अन्य पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह कड़ी रखी गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती जारी है। वहीं जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:17:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस का बड़ा एक्शन, 8 आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी</title>
                                    <description><![CDATA[सुबह 7 बजे पुलिस की आठ टीमों ने एक साथ दी दबिश, कई घरों पर मिले ताले, परिजनों और पड़ोसियों से पूछताछ; संपत्तियों और बैंक खातों की भी जांच तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/big-police-action-in-ram-mandir-offering-theft-case-simultaneous/article-57177"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-donation-theft.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या में राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। रविवार सुबह पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किए जा चुके आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी कर कार्रवाई को और तेज कर दिया। सुबह करीब 7 बजे पुलिस की अलग-अलग आठ टीमों ने एक ही समय पर सभी आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान कई घरों पर ताले लगे मिले, जबकि कुछ स्थानों पर पुलिस ने परिजनों और आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ कर जरूरी जानकारी जुटाई। अधिकारियों के अनुसार मामले से जुड़े आर्थिक पहलुओं और आरोपियों की संपत्तियों की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर पर शुरुआत में ताला लगा मिला। कुछ देर बाद उनकी मां मौके पर पहुंचीं और घर का ताला खोला। इसके बाद पुलिस ने घर के अंदर तलाशी ली और जरूरी दस्तावेजों की जांच की। इसी तरह टिन्नू के भतीजे और सह-आरोपी मनीष यादव के घर पर भी ताला लगा मिला। पुलिस टीम वहां भी कुछ समय तक मौजूद रही और आसपास के लोगों से पूछताछ की। तीसरे आरोपी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के घर पर भी कोई मौजूद नहीं था और बाहर ताला लगा मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी अनुकल्प मिश्रा के घर पर भी लंबी कार्रवाई की। यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिकारियों ने घर के अंदर मौजूद दस्तावेजों की जांच की और खरीदी गई संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले। साथ ही बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी भी जुटाई गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं चोरी की रकम का इस्तेमाल संपत्ति खरीदने या अन्य निवेश में तो नहीं किया गया। छापेमारी अभियान में पुलिस के साथ राजस्व विभाग के अधिकारी, विशेष रूप से लेखपालों को भी शामिल किया गया। इनकी मदद से आरोपियों के नाम पर दर्ज जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों का सत्यापन किया जा रहा है। यदि जांच में किसी प्रकार की अवैध संपत्ति या संदिग्ध निवेश सामने आता है तो संबंधित कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। पुलिस परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज कर रही है ताकि मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि की जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला 7 जून को सामने आया था, जब राममंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और चोरी की जानकारी सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी ने विभिन्न दस्तावेजों, रिकॉर्ड और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी। इसके बाद जांच में मिले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। 25 जून को मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित आठ लोगों को नामजद किया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अगले दिन 26 जून को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने सभी आरोपियों को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इसके बाद से लगातार मामले की जांच जारी है और पुलिस विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच मंदिर ट्रस्ट में भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला। शनिवार को श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि की। हालांकि ट्रस्ट की ओर से इस्तीफों के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन यह घटनाक्रम मामले की जांच के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसे भी जांच के दायरे में लाया जाएगा। फिलहाल पुलिस दस्तावेजों, बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान कर रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके। अधिकारियों के अनुसार जांच निष्पक्ष और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आगे बढ़ाई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/big-police-action-in-ram-mandir-offering-theft-case-simultaneous/article-57177</link>
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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 12:42:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले पर मुकेश खन्ना का गुस्सा, बोले- भगवान को भी लूट रहे हैं</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेता ने चढ़ावा घोटाले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए नकद और गहनों का चढ़ावा बंद करने की अपील की, मामले में अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/mukesh-khannas-anger-on-ram-temple-offering-issue-says/article-57142"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mukesh-khanna.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर में सामने आए कथित चढ़ावा अनियमितता मामले को लेकर वरिष्ठ अभिनेता मुकेश खन्ना ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक लंबा संदेश साझा करते हुए मंदिरों में चढ़ावे की व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि जो लोग भगवान के नाम पर चढ़ाए गए धन में गड़बड़ी करते हैं, वे साधारण चोर या बेईमान नहीं, बल्कि उनसे भी बड़े अपराधी हैं। अभिनेता ने श्रद्धालुओं से अपील की कि जब तक व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी नहीं हो जाती, तब तक मंदिरों में नकद राशि और गहनों का चढ़ावा देने से बचना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है और लोग अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। मुकेश खन्ना ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली नकद राशि हमेशा भगवान तक नहीं पहुंचती और बीच में ही उसका दुरुपयोग हो जाता है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि समाज में पहले भी चोर, डाकू और बेईमान लोगों की चर्चा होती रही है, लेकिन मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी करने वाले लोग उनसे भी आगे हैं क्योंकि वे केवल भक्तों का ही नहीं बल्कि भगवान के नाम पर दिए गए विश्वास का भी नुकसान कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि यदि चढ़ावा ही नहीं चढ़ेगा तो ऐसे घोटालों की संभावना भी खत्म हो जाएगी। अभिनेता ने विशेष रूप से लोगों से अपील की कि मंदिरों में नकद धनराशि और कीमती गहने चढ़ाने के बजाय अन्य माध्यमों से धार्मिक कार्यों में सहयोग करें। उनका कहना था कि भगवान आस्था से प्रसन्न होते हैं, धन से नहीं। उन्होंने अपने संदेश में एक कहावत का उल्लेख करते हुए लिखा कि यदि चढ़ावा ही नहीं होगा तो घोटाले की गुंजाइश भी समाप्त हो जाएगी। यह बयान सामने आने के बाद उनके समर्थकों और अन्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच इस विषय पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पूरा मामला 7 जून को सामने आया था, जब राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आई। इसके बाद राज्य सरकार के निर्देश पर मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। शुरुआती जांच में दान, चढ़ावे और प्रबंधन से जुड़े कुछ मामलों में अनियमितताओं के संकेत मिलने की बात सामने आई। इसके आधार पर आगे की जांच शुरू की गई और संबंधित दस्तावेजों व रिकॉर्ड की भी जांच की गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके। इसी घटनाक्रम के बीच मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ बड़े प्रशासनिक बदलाव भी देखने को मिले। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। मंदिर निर्माण से जुड़े प्रभारी गोपाल राव को भी मंदिर की व्यवस्थाओं से अलग कर दिया गया है। हालांकि इन बदलावों के पीछे आधिकारिक तौर पर क्या कारण रहे, इस पर संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।मामले के सामने आने के बाद देशभर में मंदिरों के दान प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों और धार्मिक मामलों के जानकारों का मानना है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास बना रहे। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि किसी एक मामले के आधार पर सभी धार्मिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा और जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।चूंकि मामला जांच के दायरे में है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। पुलिस और जांच एजेंसियां अपने स्तर पर साक्ष्य जुटाने में लगी हैं। यदि जांच में और तथ्य सामने आते हैं तो आरोपियों की संख्या या धाराओं में बदलाव भी संभव है। वहीं जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उन्हें कानून के तहत अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है। मुकेश खन्ना के बयान ने इस पूरे मामले को एक नई चर्चा दे दी है। एक ओर लोग उनके बयान को आस्था और पारदर्शिता से जोड़कर देख रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ लोग इसे व्यक्तिगत राय मान रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 16:08:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी पर उठे सवाल, केजरीवाल ने मांगी स्वतंत्र जांच</title>
                                    <description><![CDATA[आम आदमी पार्टी प्रमुख ने जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए, कहा- मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत जांच जरूरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/questions-raised-on-sit-in-ram-temple-offering-case-kejriwal/article-56890"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-donation-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावा और दान प्रबंधन के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं हैं और जांच प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता आनी चाहिए। केजरीवाल का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विषय में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है। उनके बयान के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने कहा कि किसी भी गंभीर आरोप की जांच ऐसी होनी चाहिए जिस पर किसी प्रकार का संदेह न रहे। उन्होंने दावा किया कि एसआईटी के गठन और उसकी शक्तियों को लेकर कई प्रश्न उठ रहे हैं। उनके अनुसार, जनता यह जानना चाहती है कि जांच किस प्रक्रिया के तहत की जा रही है और किन तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी मामले में जांच एजेंसियां निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करती हैं तो उससे लोगों का विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है, इसलिए इससे जुड़े किसी भी आरोप की जांच पूरी गंभीरता से होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केजरीवाल ने अपने बयान में कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा हो रही है। उनका कहना था कि लोग यह जानना चाहते हैं कि जांच में अब तक क्या प्रगति हुई है और किन-किन पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों को सामने लाना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच को लेकर पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है, जिसके कारण सवाल उठ रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। उधर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जांच से जुड़े अधिकारियों को पत्र और ईमेल भेजकर कुछ दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा है। उनका दावा है कि उनके पास ऐसे तथ्य हैं जिन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखा जाना चाहिए। संजय सिंह ने कहा कि यदि सभी दस्तावेजों और लेनदेन की विस्तृत जांच की जाए तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक संस्था से जुड़े मामले में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है। संबंधित अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि उपलब्ध तथ्यों और शिकायतों के आधार पर जांच की जा रही है और जो भी जानकारी सामने आएगी, उसके अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करना है और किसी भी स्तर पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां विभिन्न दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध जानकारियों की समीक्षा कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सही तस्वीर सामने लाई जा सके। अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे हमेशा संवेदनशील और चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे में जब भी किसी प्रकार का आरोप सामने आता है, उस पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी तेजी से सामने आने लगती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में तथ्यों और आरोपों के बीच अंतर करना बेहद जरूरी होता है। जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता। यही कारण है कि कई जानकार सभी पक्षों से संयम बरतने और आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कह रहे हैं। श्रीराम मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में दान व चढ़ावा भी अर्पित करते हैं। ऐसे में मंदिर से जुड़े किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक मामले पर लोगों की विशेष नजर रहती है। जानकारों का कहना है कि श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखने के लिए सभी प्रक्रियाओं का पारदर्शी होना आवश्यक है। यदि किसी प्रकार की शिकायत या विवाद सामने आता है तो उसकी निष्पक्ष जांच लोगों के भरोसे को मजबूत करती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 13:21:48 +0530</pubDate>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अयोध्या पहुंचे योगी, बोले- अपराधी कोई भी हो बचेगा नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रामलला के दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- एसआईटी जांच करेगी दूध का दूध और पानी का पानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/yogi-who-reached-ayodhya-amid-the-ram-temple-offering-controversy/article-56419"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/yogi-adityanath-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर जारी विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की और उसके बाद राम जन्मभूमि परिसर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। अयोध्या दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने जनसभा को भी संबोधित किया और राम मंदिर से जुड़ी चल रही जांच तथा विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर किसी भी स्तर पर कोई दोषी पाया जाता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। अपराधी चाहे कोई भी हो, कानून अपना काम करेगा और जांच एजेंसियां पूरी निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करेंगी। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश ने पांच सौ वर्षों तक संघर्ष किया है। ऐसे में कुछ आरोपों और अफवाहों के आधार पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास नहीं होना चाहिए। उन्होंने रामभक्तों से अपील करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने मर्यादा और धैर्य का संदेश दिया है। इसलिए सभी लोग संयम बनाए रखें और जांच पूरी होने का इंतजार करें। उन्होंने कहा कि पांच सौ साल तक इंतजार किया गया है तो पंद्रह दिन और इंतजार किया जा सकता है। जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अतीत में रामभक्तों पर गोली चलवाई थी, वे आज रामभक्तों के सम्मान की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दलों ने राम मंदिर निर्माण को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालतों में भी राम मंदिर निर्माण के खिलाफ तर्क दिए गए, लेकिन आज वही लोग अयोध्या और राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है। यह टीम पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और किसी भी स्तर पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति या संस्था के पास इस मामले से जुड़े प्रमाण हैं तो उन्हें जांच एजेंसी को सौंपना चाहिए ताकि तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जा सके।दरअसल राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने दावा किया कि मंदिर से करोड़ों रुपये की दान राशि गायब हुई है। उन्होंने आरोप लगाया था कि चढ़ावे की रकम में पांच से साढ़े सात करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी हो सकती है। इसके बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विवाद बढ़ने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी सफाई दी गई। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि अब तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है जिससे बड़े पैमाने पर चोरी या गबन की बात साबित होती हो। हालांकि बढ़ते विवाद के बीच भाजपा के कुछ नेताओं ने भी मामले की गहन जांच की मांग की। इसी क्रम में भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की थी। बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ट्रस्ट से इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। जांच के दौरान अब तक पांच लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू शामिल बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में इन लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं क्योंकि ये सभी दान राशि की गिनती और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं में किसी न किसी रूप में शामिल थे। जांच एजेंसियों ने अब तक करीब दो करोड़ रुपये की रकम बरामद किए जाने की जानकारी दी है। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर से सोना मिलने की भी चर्चा रही, हालांकि उसकी मात्रा और मूल्य को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एसआईटी लगातार कई दिनों से जांच में जुटी हुई है। टीम ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, आमंत्रित सदस्य गोपाल राव, बैंक अधिकारियों और नोटों की गिनती करने वाली एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ की है। बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और दान राशि जमा करने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। जांच टीम ने संबंधित कर्मचारियों से अलग-अलग पूछताछ कर उनके बयानों का मिलान भी किया है ताकि किसी प्रकार की विसंगति सामने आने पर उसे दर्ज किया जा सके।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने पर किसी को भी राहत नहीं मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:40:20 +0530</pubDate>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अयोध्या पहुंचेंगे योगी, चंपत राय को कार्यक्रम से दूर रहने का संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[चढ़ावा चोरी जांच तेज, सीएम योगी के दौरे से पहले प्रशासन की सख्ती बढ़ी, मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/yogi-champat-rai-will-reach-ayodhya-amid-ram-temple-offering/article-56342"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राम मंदिर में चढ़ावा राशि की कथित चोरी को लेकर चल रहे विवाद और जांच के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब मंदिर प्रबंधन, दान राशि की सुरक्षा व्यवस्था और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामलला के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे। हालांकि इस दौरे को लेकर जारी प्रोटोकॉल में एक ऐसा बिंदु सामने आया है जिसने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। बताया जा रहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को कार्यक्रम में शामिल न होने और अपने स्थान पर किसी प्रतिनिधि को नामित करने का सुझाव दिया गया है। प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों में इस संबंध में जानकारी ड्यूटी मजिस्ट्रेट को देने के लिए भी कहा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल चंपत राय मंदिर ट्रस्ट के सबसे प्रभावशाली पदाधिकारियों में गिने जाते हैं। मंदिर निर्माण से लेकर प्रबंधन और वीआईपी कार्यक्रमों तक उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान उनकी अनुपस्थिति की संभावना को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दूसरी ओर, चढ़ावा चोरी मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) चौथे दिन भी सुबह से ही राम मंदिर परिसर पहुंची और जांच प्रक्रिया जारी रखी। सूत्रों के मुताबिक टीम ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की और दान राशि की गिनती एवं सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दान राशि की गिनती, उसके भंडारण और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई। इसी क्रम में मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र से भी पूछताछ किए जाने की खबर सामने आई है। अब तक की जांच में पांच लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी किसी न किसी रूप में दान राशि की गिनती और उससे संबंधित कार्यों से जुड़े थे। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों की निशानदेही पर अब तक करीब दो करोड़ रुपये की बरामदगी भी की जा चुकी है। हालांकि मामले की अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को उठाकर सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रही हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी गुरुवार को अयोध्या पहुंचे और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावा राशि से जुड़े मामले में बड़े लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और पूरी सच्चाई जनता के सामने लाई जानी चाहिए। इससे पहले समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी दावा किया था कि मंदिर में करोड़ों रुपये की दान राशि के गबन की आशंका है। हालांकि मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है। विवाद बढ़ने के बाद भाजपा के कुछ नेताओं ने भी मामले की जांच की मांग की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा भी मंदिर ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगे जाने की खबर सामने आई थी, जिससे यह मामला और अधिक गंभीर हो गया। इसके बाद राज्य स्तर पर जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच एक और महत्वपूर्ण चर्चा राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर शुरू हुई है। बताया जा रहा है कि काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर राम मंदिर में भी किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को सीईओ बनाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो मंदिर की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं की निगरानी और अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सकेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पूरा मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक दलों की बयानबाजी, जांच एजेंसियों की सक्रियता और मंदिर प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सभी की नजरें इस दौरे पर टिकी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:27:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>उज्जैन से उठी राम मंदिर ट्रस्ट भंग करने की मांग, पीएम को भेजा पत्र; CBI जांच की भी अपील</title>
                                    <description><![CDATA[अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज पर उठाए सवाल, कहा- आस्था से जुड़े मामले में पूरी पारदर्शिता जरूरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/demand-for-dissolution-of-ram-mandir-trust-raised-from-ujjain/article-56078"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-trust-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं की चर्चाओं के बीच उज्जैन से एक नई मांग उठी है। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। संगठन ने पत्र में मामले की सीबीआई जांच कराने, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और ट्रस्ट के पुनर्गठन पर विचार करने की मांग की है। इस मुद्दे को लेकर धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में चर्चा तेज हो गई है। महासंघ का कहना है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इसके संचालन से जुड़ा हर फैसला पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश शर्मा ने उज्जैन में मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि राम मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक परियोजना नहीं था, बल्कि यह देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और दशकों लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए लोगों ने बढ़-चढ़कर आर्थिक सहयोग किया था। कई श्रद्धालुओं ने नकद दान दिया तो कई लोगों ने सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं मंदिर को समर्पित कीं। ऐसे में यदि दान राशि के उपयोग या उसके प्रबंधन को लेकर किसी प्रकार के सवाल सामने आते हैं तो उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि लोगों की आस्था से जुड़े मामले में हर पहलू स्पष्ट होना चाहिए ताकि किसी भी तरह की शंका की स्थिति न बने।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महेश शर्मा ने कहा कि हाल के दिनों में विभिन्न माध्यमों से राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज को लेकर सवाल उठे हैं। भले ही इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई हो, लेकिन जिस तरह की चर्चाएं सामने आई हैं, उससे श्रद्धालुओं के मन में जिज्ञासा और चिंता दोनों पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो जांच से सच्चाई सामने आएगी और यदि कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए समय-समय पर पारदर्शिता जरूरी होती है। राम मंदिर परिसर में विभिन्न स्थानों पर दान पेटियां स्थापित हैं, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार दान करते हैं। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट को ऑनलाइन और अन्य माध्यमों से भी बड़ी मात्रा में आर्थिक सहयोग प्राप्त होता है। ऐसे में दान राशि के प्रबंधन और उपयोग को लेकर लोगों की स्वाभाविक रुचि बनी रहती है। महासंघ का मानना है कि यदि किसी प्रकार की शिकायत या संदेह सामने आता है तो उसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महासंघ के राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने भी ट्रस्ट के पुनर्गठन का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े परिवारों के प्रतिनिधियों को ट्रस्ट में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि ऐसे परिवारों ने वर्षों तक आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और कई लोगों ने व्यक्तिगत स्तर पर बड़े त्याग किए। कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनके सदस्य आंदोलन के दौरान विभिन्न परिस्थितियों में प्रभावित हुए थे। ऐसे लोगों की भागीदारी से ट्रस्ट का स्वरूप और अधिक जनभावनाओं से जुड़ा हुआ दिखाई देगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रूपेश मेहता ने कहा कि ट्रस्ट में शामिल किए जाने वाले लोगों का चयन उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर होना चाहिए। उनका कहना है कि मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत करने के लिए व्यापक प्रतिनिधित्व जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी धार्मिक संस्था की मजबूती केवल उसके संसाधनों से नहीं बल्कि लोगों के विश्वास से तय होती है। इसलिए ट्रस्ट की संरचना और कार्यप्रणाली दोनों में पारदर्शिता दिखाई देना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में महासंघ ने कथित वित्तीय अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग को प्रमुखता से रखा है। संगठन का कहना है कि देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियों में शामिल सीबीआई यदि मामले की जांच करती है तो निष्पक्षता को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं रहेगा। साथ ही जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, वे सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य होंगे। महासंघ ने यह भी कहा है कि यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो इससे ट्रस्ट की छवि और मजबूत होगी, जबकि अनियमितता मिलने की स्थिति में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। इस पूरे मामले को लेकर अभी तक राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि धार्मिक और सामाजिक संगठनों के बीच इस विषय पर चर्चा जारी है। कई लोग इसे पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों का इंतजार किया जाना चाहिए। फिलहाल महासंघ की मांग के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:39:25 +0530</pubDate>
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                <title>राम मंदिर चंदे को लेकर अखिलेश यादव के सवाल, निष्पक्ष जांच की उठाई मांग</title>
                                    <description><![CDATA[दान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों पर सपा प्रमुख ने अदालत से हस्तक्षेप की अपील की, कहा- मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/akhilesh-yadavs-questions-regarding-ram-temple-donation-demand-for-impartial/article-55767"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-donation.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">राम मंदिर को मिले चंदे को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंदिर निर्माण के लिए जुटाई गई दान राशि के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि करोड़ों रुपये के चंदे में गड़बड़ी से जुड़ी खबरें सामने आ रही हैं, जिनकी सच्चाई देश के सामने आनी चाहिए। इस मुद्दे को बेहद संवेदनशील बताते हुए उन्होंने अदालत से स्वतः संज्ञान लेने और मामले की न्यायिक निगरानी में जांच कराने का आग्रह किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अखिलेश यादव ने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। देश ही नहीं, दुनिया भर में रहने वाले सनातन धर्म के अनुयायियों ने मंदिर निर्माण के लिए अपनी श्रद्धा के अनुसार आर्थिक सहयोग दिया था। ऐसे में यदि दान राशि के उपयोग को लेकर किसी तरह की शंका या आरोप सामने आते हैं, तो उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह केवल पैसों का मामला नहीं है, बल्कि उन लोगों के विश्वास का भी प्रश्न है जिन्होंने मंदिर निर्माण के लिए योगदान दिया। सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि दान राशि में कथित अनियमितताओं की खबरें चिंता पैदा करने वाली हैं। उन्होंने कहा कि यदि आरोप गलत हैं तो संबंधित संस्थाओं को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनके अनुसार पारदर्शिता ही किसी भी संस्था की विश्वसनीयता की सबसे बड़ी कसौटी होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अखिलेश यादव ने मंदिर ट्रस्ट और संबंधित पक्षों की ओर से अब तक स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन चुका है और लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं, तब संबंधित संस्थाओं की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आनी चाहिए। उनका कहना है कि चुप्पी से संदेह और भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जबकि पारदर्शी संवाद लोगों का भरोसा मजबूत करता है। उन्होंने अदालत से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि न्यायपालिका की निगरानी में होने वाली जांच से सच्चाई सामने आएगी और लोगों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकेगा। अखिलेश यादव ने कहा कि न्यायपालिका पर देश की जनता को भरोसा है और यदि अदालत इस मामले में स्वतः संज्ञान लेती है तो इससे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी कोई सवाल नहीं उठेगा। उन्होंने कहा कि जांच का उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि तथ्यों को स्पष्ट करना होना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं का कहना है कि राम मंदिर निर्माण प्रक्रिया के दौरान पहले भी जमीन खरीद और अन्य मामलों को लेकर सवाल उठाए गए थे। उनका आरोप है कि समय-समय पर कई तरह की अनियमितताओं की चर्चा होती रही है और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि इन आरोपों को लेकर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग समय पर स्पष्टीकरण भी दिए जाते रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">अखिलेश यादव ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए वित्तीय पारदर्शिता आवश्यक है। जब श्रद्धालु किसी धार्मिक या सामाजिक उद्देश्य के लिए दान देते हैं तो उन्हें उम्मीद होती है कि उनकी राशि का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया जाएगा। ऐसे में यदि कोई विवाद सामने आता है तो उसे स्पष्ट करना संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी बन जाती है। उनका कहना है कि जांच होने से यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो इससे संस्था की विश्वसनीयता और मजबूत होगी। राम मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों में से एक है, इसलिए इससे जुड़े किसी भी आरोप या विवाद का प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई देता है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग स्वाभाविक मानी जाती है। हालांकि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों और आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">राम मंदिर चंदे को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू कर दी है। एक ओर विपक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित ट्रस्ट और अन्य पक्ष इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है। इस बीच अखिलेश यादव लगातार यह दोहरा रहे हैं कि मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि सच्चाई सामने आने से ही लोगों का भरोसा बना रहेगा और किसी भी तरह की शंका का समाधान हो सकेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 17:35:19 +0530</pubDate>
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