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                <title>Metro Rail - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Metro Rail RSS Feed</description>
                
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                <title>भोपाल मेट्रो के सिग्नलिंग सिस्टम की बड़ी परीक्षा, पहली बार आमने-सामने आईं दो ट्रेनें</title>
                                    <description><![CDATA[CMRS टीम ने ट्रैक पर उतरकर किया निरीक्षण, नए सिस्टम के बाद बढ़ेगी रफ्तार और कम होगा इंतजार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/a-big-test-for-the-signaling-system-of-bhopal-metro/article-56909"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-metro-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी भोपाल में मेट्रो परियोजना के लिए बुधवार का दिन काफी अहम रहा। मेट्रो के सिग्नलिंग सिस्टम की सुरक्षा और कार्यक्षमता को परखने के लिए कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम ने विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान पहली बार ऐसा मौका आया जब दो मेट्रो ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आमने-सामने लाई गईं। रानी कमलापति स्टेशन और एमपी नगर स्टेशन के बीच करीब आधे घंटे तक विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए गए। यह पूरा अभ्यास सिग्नलिंग सिस्टम की क्षमता, सुरक्षा मानकों और इमरजेंसी स्थिति में उसकी प्रतिक्रिया को जांचने के लिए किया गया। निरीक्षण के दौरान दो अलग-अलग टीमें अलग-अलग मेट्रो ट्रेनों में सवार होकर ट्रैक पर उतरीं। अधिकारियों के अनुसार यह परीक्षण पूरी तरह योजनाबद्ध था और इसका उद्देश्य यह देखना था कि यदि किसी कारणवश दो ट्रेनें एक-दूसरे के सामने आ जाएं तो सिस्टम किस प्रकार प्रतिक्रिया देगा। इस दौरान ट्रेनों की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, सुरक्षित दूरी, संचार व्यवस्था और नियंत्रण तंत्र जैसे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच की गई। तकनीकी विशेषज्ञों ने अलग-अलग परिस्थितियां बनाकर यह भी देखा कि अचानक ब्रेक लगाने या गति बदलने की स्थिति में सिस्टम कितना प्रभावी रहता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि यह निरीक्षण भोपाल मेट्रो के लिए एक महत्वपूर्ण चरण है। यदि CMRS की टीम अपनी अंतिम रिपोर्ट में सिग्नलिंग सिस्टम को सुरक्षित और मानकों के अनुरूप पाती है तो इसके संचालन को मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद मेट्रो सेवाओं के लिए नया टाइम टेबल जारी किया जाएगा और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक सेवाएं मिल सकेंगी। अधिकारियों का कहना है कि जुलाई से सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है, जिसके बाद ट्रेनों की संख्या और फ्रीक्वेंसी दोनों में बढ़ोतरी होगी। भोपाल में सुभाष नगर से एम्स तक करीब सात किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो का संचालन किया जा रहा है। हालांकि वर्तमान व्यवस्था में ट्रेनों की रफ्तार और फ्रीक्वेंसी सीमित है। यात्रियों को एक ट्रेन के बाद दूसरी ट्रेन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। वर्तमान में ट्रेनों के बीच लगभग 75 मिनट का अंतर रखा गया है, जिससे कई यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि मेट्रो की उपयोगिता को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं में अभी तक पूर्ण सिग्नलिंग सिस्टम लागू नहीं हुआ था। इस कारण मेट्रो संचालन केवल एक ही ट्रैक पर किया जा रहा है। ट्रेन जिस ट्रैक से अपने गंतव्य तक जाती है, उसी ट्रैक से वापस भी लौटती है। यानी अप और डाउन दोनों दिशाओं का संचालन एक ही लाइन पर किया जा रहा है। तकनीकी दृष्टि से यह व्यवस्था सुरक्षित तो है, लेकिन इससे संचालन क्षमता काफी सीमित हो जाती है। नए सिग्नलिंग सिस्टम के लागू होने के बाद दोनों ट्रैक का उपयोग शुरू हो सकेगा। मेट्रो परियोजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक लगभग 30 किलोमीटर लंबे नेटवर्क के लिए करीब 800 करोड़ रुपए की लागत से सिग्नलिंग और दूरसंचार प्रणाली विकसित की जा रही है। सुभाष नगर से एम्स के बीच इसका पहला चरण पूरा हो चुका है। यही कारण है कि अब इसकी सुरक्षा जांच और परीक्षण अंतिम दौर में पहुंच गए हैं। परीक्षण सफल रहने के बाद यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ होता है। यही तकनीक तय करती है कि दो ट्रेनों के बीच कितनी दूरी रहेगी, उनकी अधिकतम और न्यूनतम गति क्या होगी तथा किसी आपात स्थिति में ट्रेनों को कैसे नियंत्रित किया जाएगा। आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के बिना किसी भी मेट्रो नेटवर्क की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि दुनिया भर की आधुनिक मेट्रो सेवाओं में अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। भोपाल मेट्रो में जिस तकनीक को लागू किया जा रहा है, वह काफी हद तक दिल्ली मेट्रो में उपयोग होने वाली आधुनिक प्रणाली के समान है। इस तकनीक की मदद से ट्रेनों के बीच का अंतर कम किया जा सकेगा और कम समय में अधिक ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। इससे यात्रियों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी और मेट्रो दैनिक परिवहन का अधिक प्रभावी साधन बन सकेगी। नए सिस्टम के लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी में देखने को मिलेगा। अभी जहां यात्रियों को एक ट्रेन के लिए काफी समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है, वहीं भविष्य में यह अंतर काफी कम हो जाएगा। इसके अलावा सुबह और शाम के व्यस्त समय में अतिरिक्त सेवाएं भी शुरू की जा सकेंगी। मेट्रो दोनों दिशाओं में नियमित रूप से संचालित होगी, जिससे यात्रा अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 14:41:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल मेट्रो की रफ्तार बढ़ेगी, जुलाई से दोनों ट्रैक पर संचालन</title>
                                    <description><![CDATA[सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा, CMRS निरीक्षण के बाद नया शेड्यूल होगा लागू; यात्रियों को कम इंतजार और ज्यादा फेरे मिलेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/bhopal-metro-speed-will-increase-operation-on-both-tracks-from/article-56166"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-metro.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल मेट्रो को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अपनी धीमी रफ्तार और कम फ्रीक्वेंसी के कारण चर्चा में रही भोपाल मेट्रो जल्द ही नए अंदाज में दिखाई देगी। मेट्रो के सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो चुका है और जुलाई से इसके पूरी क्षमता के साथ संचालन की तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का दावा है कि नए सिस्टम के लागू होने के बाद न केवल मेट्रो की गति बढ़ेगी, बल्कि ट्रेनों के फेरे भी बढ़ जाएंगे और यात्रियों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार सुभाष नगर से एम्स तक करीब सात किलोमीटर लंबे ट्रैक पर आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। इसके बाद अब कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया गया है। संभावना है कि अगले सप्ताह यह टीम भोपाल पहुंचकर पूरे सिस्टम का परीक्षण करेगी। यदि निरीक्षण के बाद हरी झंडी मिल जाती है तो जुलाई से नए सिस्टम के साथ मेट्रो का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल मेट्रो एक सीमित व्यवस्था के तहत संचालित हो रही है। वर्तमान में सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण मेट्रो केवल एक ट्रैक पर चल रही है। यही वजह है कि यात्रियों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। अभी ट्रेनें दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सीमित समय के लिए चलाई जा रही हैं और उनकी फ्रीक्वेंसी लगभग 75 मिनट रखी गई है। इससे कई लोग मेट्रो का नियमित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। अभी सुभाष नगर से एम्स तक डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में संचालित की जा रही है। यानी जिस ट्रैक से ट्रेन आगे जाती है, उसी ट्रैक से वापस भी लौटती है। अप ट्रैक का उपयोग नहीं हो पाने के कारण मेट्रो की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यही वजह है कि ट्रेनों की संख्या और गति दोनों प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। यह सिस्टम तय करता है कि ट्रेन किस गति से चलेगी, ट्रेनों के बीच कितना अंतर रहेगा और किसी भी आपात स्थिति में किस प्रकार नियंत्रण किया जाएगा। आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के बिना एक साथ कई ट्रैक पर सुरक्षित संचालन संभव नहीं होता। भोपाल मेट्रो में अब जो तकनीक लागू की जा रही है, वह दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक व्यवस्था पर आधारित है। इस तकनीक के लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि मेट्रो दोनों ट्रैक पर एक साथ दौड़ सकेगी। इससे ट्रेनों के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को हर थोड़ी देर में मेट्रो उपलब्ध हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे मेट्रो की लोकप्रियता भी बढ़ेगी और यात्री संख्या में इजाफा होगा।  कई यात्रियों का कहना है कि 75 मिनट का इंतजार सार्वजनिक परिवहन के लिए काफी लंबा समय है। ऐसे में लोग बस, ऑटो या निजी वाहनों को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन नए सिस्टम के बाद यह स्थिति बदल सकती है। मेट्रो प्रबंधन की योजना है कि सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया टाइम टेबल जारी किया जाए। इसमें सुबह और शाम के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। खासतौर पर कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और नियमित यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो आने वाले महीनों में भोपाल मेट्रो शहर के प्रमुख सार्वजनिक परिवहन साधनों में शामिल हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजना के तहत कुल लगभग 30 किलोमीटर लंबे रूट पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में केवल सीमित हिस्से में संचालन हो रहा है, लेकिन धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क को विकसित किया जा रहा है। ऐसे में सिग्नलिंग सिस्टम का पूरा होना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यात्रियों को अब CMRS की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। निरीक्षण रिपोर्ट सकारात्मक आने के बाद भोपाल मेट्रो न सिर्फ तेज रफ्तार से दौड़ेगी, बल्कि अधिक ट्रेनों और बेहतर समय-सारिणी के साथ शहर की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने का काम भी करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:36:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंदौर मेट्रो का दूसरा फेज तैयार, 21 जून से नए ट्रैक पर दौड़ेगी</title>
                                    <description><![CDATA[20 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर करेंगे लोकार्पण, लाखों यात्रियों को मिलेगा फायदा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a2cf375974d1/article-55792"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-metro-phase-2-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इंदौर मेट्रो परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। येलो लाइन के दूसरे फेज को हरी झंडी मिलने के बाद अब 20 जून को इसका औपचारिक लोकार्पण किया जाएगा, जबकि 21 जून से आम लोग नए रूट पर मेट्रो की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इस विस्तार के साथ इंदौर मेट्रो न केवल अपने नेटवर्क को और मजबूत करेगी, बल्कि भोपाल मेट्रो की तुलना में विकास की रफ्तार में भी आगे निकलती दिखाई दे रही है। मेट्रो के नए कॉरिडोर के शुरू होने से शहर के सबसे व्यस्त इलाकों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन से जोड़ा जाएगा। मेट्रो का नया रूट सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक रहेगा। यह कॉरिडोर इंदौर के कई प्रमुख आवासीय, व्यावसायिक और आईटी क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग माना जा रहा है। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार इस रूट से सीधे तौर पर 4 से 6 लाख लोगों को लाभ मिलेगा, जबकि फीडर बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को जोड़ने के बाद यह संख्या 8 से 10 लाख यात्रियों तक पहुंच सकती है। शहर के जिन इलाकों से यह मेट्रो गुजरेगी, वहां प्रतिदिन लाखों लोग निजी और सार्वजनिक वाहनों से सफर करते हैं। ऐसे में ट्रैफिक दबाव कम होने के साथ-साथ यात्रा का समय भी घटने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस रूट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह इंदौर के तेजी से विकसित हो रहे आईटी और कॉरपोरेट हब को जोड़ता है। टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी कंपनियों के कैंपस इसी कॉरिडोर के आसपास स्थित हैं। इसके अलावा एयरपोर्ट, एसईजेड, आईटी पार्क, होटल, शैक्षणिक संस्थान और कई कॉरपोरेट कार्यालय भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संचालन के शुरुआती दिनों में प्रतिदिन 25 से 40 हजार यात्री इस रूट का उपयोग कर सकते हैं। आने वाले वर्षों में जब सुपर कॉरिडोर और आसपास के क्षेत्र और विकसित होंगे, तब यह संख्या एक लाख यात्रियों प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। लोकार्पण से पहले भोपाल स्थित मेट्रो मुख्यालय में लगातार बैठकें चल रही हैं। मेट्रो प्रबंधन किराया, टाइमिंग और ट्रेनों के फेरों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक अगले कुछ दिनों में पूरा शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। नए फेज के साथ करीब 17 किलोमीटर लंबे नेटवर्क पर मेट्रो सेवाएं उपलब्ध होंगी। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्टेशन संचालन, टिकटिंग व्यवस्था और फीडर सेवाओं पर भी काम किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मेट्रो परियोजना के तहत सुपर कॉरिडोर स्टेशन-2, सुपर कॉरिडोर स्टेशन-1, भौंरासला चौराहा, एमआर-10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा जैसे स्टेशन शामिल होंगे। ये सभी इलाके शहर के प्रमुख यातायात और व्यावसायिक केंद्र माने जाते हैं। ऐसे में मेट्रो के संचालन से यात्रियों को रोजाना होने वाली ट्रैफिक समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर भोपाल मेट्रो परियोजना पर भी तेजी से काम जारी है, लेकिन निर्माण की जटिलताओं के कारण उसका दूसरा फेज इंदौर से पीछे चल रहा है। भोपाल में ऑरेंज लाइन और ब्लू लाइन पर कार्य प्रगति पर है। यहां सुभाष नगर से एम्स तक का प्रायोरिटी कॉरिडोर पहले ही शुरू हो चुका है, जबकि अगले चरण में अंडरग्राउंड रूट का निर्माण किया जा रहा है। करीब 3.39 किलोमीटर लंबी सुरंग और दो भूमिगत स्टेशन इस परियोजना का हिस्सा हैं। अधिकारियों के अनुसार यह कार्य वर्ष 2028 तक पूरा होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत में भी बड़ा इजाफा हुआ है। वर्ष 2016 में करीब 6,241 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली परियोजना अब बढ़कर 10,033 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई लागत से निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी और अगले दो वर्षों में परियोजना का स्वरूप और स्पष्ट दिखाई देगा। इंदौर मेट्रो के दूसरे फेज का शुभारंभ शहर के सार्वजनिक परिवहन ढांचे के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि आईटी सेक्टर, व्यापारिक गतिविधियों और शहरी विकास को भी नई गति मिलेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 12:36:58 +0530</pubDate>
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