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                <title>भोपाल एम्स में बड़ी लापरवाही: फॉर्मेलिन इंजेक्ट होने से 3 साल के बच्चे की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[ब्लड कैंसर से जूझ रहे मासूम को दवा की जगह लगा दिया गया खतरनाक रसायन, पिता की चेतावनी भी अनसुनी; दो नर्सिंग अधिकारियों पर केस दर्ज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/3-year-old-child-dies-due-to-negligence-in-injecting/article-55798"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/aiims-bhopal-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज करा रहे तीन साल के एक मासूम की मौत ने अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था और मेडिकल प्रोटोकॉल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आई जांच रिपोर्ट के मुताबिक ब्लड कैंसर से पीड़ित बच्चे को दवा की जगह गलती से फॉर्मेलिन इंजेक्ट कर दिया गया, जिसके कुछ ही देर बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ गई और डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने आंतरिक जांच कराई, जिसमें नर्सिंग स्टाफ की गंभीर लापरवाही सामने आई है। इसी आधार पर पुलिस ने दो नर्सिंग अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सागर जिले की बीना तहसील के ग्राम कौरजा निवासी तीन वर्षीय सार्थक यादव बी-सेल एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया नामक ब्लड कैंसर से पीड़ित था। उसकी हालत गंभीर होने के बाद 15 दिसंबर 2025 को उसे एम्स भोपाल के पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती कराया गया था। परिवार को उम्मीद थी कि बड़े अस्पताल में इलाज मिलने से बच्चे की तबीयत में सुधार होगा, लेकिन दो दिन बाद जो हुआ उसने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक 17 दिसंबर की सुबह बच्चे की आईवी लाइन चोक हो गई थी। इसी दौरान ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने ऐसी गलती कर दी, जो बाद में बच्चे की मौत की वजह बन गई। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि बायोप्सी और अन्य मेडिकल सैंपल को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला रसायन फॉर्मेलिन एक सिरिंज में भरकर वार्ड में रखा गया था। अस्पताल के नियमों के अनुसार इस तरह के रसायनों को सुरक्षित स्थान पर रखा जाना चाहिए, लेकिन आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग ऑफिसर अनुका गुजराती ने इसे मरीज के बेड के पास ही छोड़ दिया। बाद में दूसरी नर्सिंग ऑफिसर मधुबाला शर्मा ने बिना लेबल जांचे और बिना दवा की पहचान सुनिश्चित किए उसी सिरिंज को उठा लिया और बच्चे की नस में इंजेक्ट कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन लगाने के दौरान बच्चे के पिता ने कई बार नर्स को चेतावनी दी थी कि सिरिंज में दवा नहीं है और कुछ गड़बड़ लग रही है। परिवार का आरोप है कि उन्होंने तीन बार नर्स को रोकने की कोशिश की, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही क्षण बाद बच्चे की हालत अचानक बिगड़ने लगी। वह अचेत हो गया और मेडिकल स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई। तत्काल उसे पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया, जहां डॉक्टरों ने सीपीआर समेत कई आपातकालीन उपचार दिए, लेकिन सुबह करीब 8:45 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया। एम्स की आंतरिक जांच समिति ने मामले की विस्तार से पड़ताल की। जांच के दौरान यह निष्कर्ष निकला कि बच्चे की मौत का सीधा कारण नस के जरिए शरीर में फॉर्मेलिन का पहुंचना था। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि यह एक गंभीर मानवीय त्रुटि और मेडिकल प्रोटोकॉल की अनदेखी का मामला है। जांच समिति ने संबंधित नर्सिंग स्टाफ की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच रिपोर्ट मिलने के बाद बागसेवनिया थाना पुलिस ने 11 जून को दोनों नर्सिंग अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। नर्स मधुबाला शर्मा पर घोर लापरवाही से मौत कारित करने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत केस दर्ज किया गया है। वहीं अनुका गुजराती पर खतरनाक रसायन को असुरक्षित तरीके से रखने के आरोप में धारा 286 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फॉर्मेलिन अत्यंत विषैला रसायन होता है। यह मूल रूप से फॉर्मल्डिहाइड गैस का घोल है और मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों तथा प्रयोगशालाओं में ऊतकों और बायोप्सी सैंपल को संरक्षित रखने के लिए उपयोग किया जाता है। यदि यह गलती से मानव शरीर में पहुंच जाए तो ऊतकों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। विशेष रूप से नस के जरिए शरीर में जाने पर इसका असर बेहद घातक हो सकता है। इससे शरीर को शॉक लग सकता है, महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर सकते हैं और कुछ मामलों में तत्काल मौत भी हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 12:37:16 +0530</pubDate>
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