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                <title>चित्रकूट पहुंचे सीएम योगी, कामदगिरि परिक्रमा कर बरहा हनुमान मंदिर में की पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान कामतानाथ के दर्शन के बाद करीब पांच किलोमीटर की पदयात्रा परिक्रमा की, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-yogi-reached-chitrakoot-circumambulated-kamadgiri-and-worshiped-at-barha/article-58273"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/yogi-adityanath-(3)1.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह धार्मिक नगरी चित्रकूट पहुंचकर भगवान कामतानाथ के दर्शन किए और कामदगिरि की पवित्र परिक्रमा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री का यह दौरा पूरी तरह धार्मिक कार्यक्रमों पर केंद्रित रहा। सुबह से ही चित्रकूट में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। परिक्रमा मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक सुरक्षा बल तैनात रहे और पूरे कार्यक्रम की लगातार निगरानी की जाती रही। मुख्यमंत्री के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़क किनारे और मंदिर परिसर में पहले से मौजूद थे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह करीब 7:10 बजे चित्रकूट के प्रसिद्ध बरहा हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भगवान हनुमान का आशीर्वाद लिया। मंदिर में पूजा के दौरान उन्होंने प्रदेश की खुशहाली, शांति और जनकल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में मौजूद पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कराई। दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में कुछ समय बिताया और वहां मौजूद संतों से भी मुलाकात की।</p>
<p style="text-align:justify;">बरहा हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने कामदगिरि की लगभग पांच किलोमीटर लंबी पवित्र परिक्रमा शुरू की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कामदगिरि पर्वत को भगवान श्रीराम का स्वरूप माना जाता है और इसकी परिक्रमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान चित्रकूट में लंबा समय बिताया था। इसी कारण देशभर से लाखों श्रद्धालु वर्षभर यहां दर्शन और परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री ने भी पारंपरिक तरीके से पैदल चलते हुए परिक्रमा पूरी की।</p>
<p style="text-align:justify;">परिक्रमा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ साधु-संत, प्रशासनिक अधिकारी और सुरक्षा कर्मी भी मौजूद रहे। रास्ते में उन्होंने कई स्थानों पर श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया। परिक्रमा मार्ग पर मौजूद लोगों में मुख्यमंत्री को करीब से देखने का खास उत्साह दिखाई दिया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने उन पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। पूरे मार्ग में 'जय श्रीराम' और 'जय कामतानाथ' के जयघोष लगातार सुनाई देते रहे, जिससे धार्मिक माहौल और भी भक्तिमय हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री के इस दौरे की एक और तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी। परिक्रमा के दौरान उन्होंने रास्ते में मौजूद बंदरों को चना भी खिलाया। चित्रकूट में बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं और श्रद्धालु उन्हें प्रसाद या चना खिलाना शुभ मानते हैं। मुख्यमंत्री ने भी कुछ समय रुककर बंदरों को चना खिलाया। वहां मौजूद लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल फोन में कैद किया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से साझा किए जाने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री के चित्रकूट दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। परिक्रमा मार्ग के हर प्रमुख स्थान पर पुलिस बल तैनात रहा। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यातायात व्यवस्था में भी आवश्यक बदलाव किए गए थे। प्रशासन का कहना था कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से पूरी कर ली गई थीं।चित्रकूट धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश का अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास से जुड़ी अनेक मान्यताएं इस स्थान से जुड़ी हुई हैं। कामदगिरि परिक्रमा, रामघाट, बरहा हनुमान मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेष पर्वों और धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या और भी अधिक बढ़ जाती है। मुख्यमंत्री का यह दौरा भी धार्मिक आस्था से जुड़ा माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के आगमन का स्वागत किया और इसे चित्रकूट के लिए गौरव का विषय बताया। व्यापारियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के दौरे से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। कई लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में चित्रकूट में तीर्थ यात्रियों की सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए नई योजनाओं पर भी काम होगा। कामदगिरि परिक्रमा पूरी करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बांदा के लिए रवाना होने का कार्यक्रम निर्धारित था। वहां भी उनके कई सरकारी कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। हालांकि चित्रकूट में उनका यह दौरा पूरी तरह धार्मिक गतिविधियों पर केंद्रित रहा। पूरे कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पूजा-अर्चना एवं परिक्रमा संपन्न की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:14:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमरनाथ यात्रा 2026 शुरू: जम्मू और पहलगाम से पहला जत्था बाबा बर्फानी के दर्शन को रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जम्मू और पहलगाम के नुनवान बेस कैंप से अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था पवित्र गुफा के लिए रवाना हुआ। 57 दिनों तक चलने वाली यात्रा के पहले दिन श्रद्धालुओं में उत्साह और आस्था का विशेष माहौल देखने को मिला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a4743bba9a6c/article-57751"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/amarnath-yatra-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में शामिल श्री अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ शुक्रवार को श्रद्धा, उत्साह और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच हुआ। जम्मू और पहलगाम के नुनवान बेस कैंप से श्रद्धालुओं का पहला जत्था बाबा बर्फानी के पवित्र दर्शन के लिए रवाना हुआ। इसके साथ ही 57 दिनों तक चलने वाली वार्षिक अमरनाथ यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो गई। यात्रा के पहले दिन श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और पूरा वातावरण "हर-हर महादेव", "बम-बम भोले" और "चलो बुलावा आया है, बाबा बर्फानी ने बुलाया है" के जयघोष से गूंज उठा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जम्मू से रवाना हुए पहले जत्थे को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस जत्थे में 4,800 से अधिक श्रद्धालु शामिल थे। सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में सभी श्रद्धालुओं को वाहनों के काफिले के साथ कश्मीर घाटी तक पहुंचाया गया। घाटी में प्रवेश के बाद विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों, स्वयंसेवी संस्थाओं और प्रशासन की ओर से फूल-मालाओं और पारंपरिक स्वागत के साथ यात्रियों का अभिनंदन किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहलगाम के नुनवान बेस कैंप और बालटाल बेस कैंप से शुक्रवार सुबह श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा की ओर अपनी पैदल यात्रा शुरू की। दोनों मार्गों पर प्रशासन ने चिकित्सा, सुरक्षा, संचार, भोजन और ठहरने की व्यापक व्यवस्था की है। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह स्वास्थ्य शिविर, विश्राम केंद्र और आपातकालीन सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। यात्रा शुरू होने से पहले पहलगाम क्षेत्र में कुछ समय के लिए भारी बारिश हुई, जिसके कारण सुरक्षा के मद्देनजर पहलगाम मार्ग पर यात्रियों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी गई। मौसम में सुधार होने और मार्ग की स्थिति सामान्य होने के बाद प्रशासन ने यात्रा दोबारा शुरू कर दी। अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बल, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की व्यापक तैनाती की गई है। यात्रा मार्ग पर सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन निगरानी और आधुनिक संचार प्रणाली के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किए हैं ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके। यात्रा के नोडल अधिकारी राहुल यादव ने बताया कि जिला प्रशासन ने बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सुविधाओं, पेयजल, स्वच्छता, बिजली, आपातकालीन सेवाओं और यातायात प्रबंधन के लिए अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रशासन लगातार यात्रा मार्ग की निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पारंपरिक धार्मिक वेशभूषा में बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना हुए। कई श्रद्धालु परिवार के साथ पहुंचे, जबकि बड़ी संख्या में युवा और बुजुर्ग भी यात्रा में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने कहा कि वर्षों से बाबा बर्फानी के दर्शन की इच्छा थी और इस बार यात्रा शुरू होते ही उन्हें पवित्र गुफा जाने का अवसर मिला है। उन्होंने प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमरनाथ यात्रा का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है। समुद्र तल से लगभग 3,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव ने इसी गुफा में माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। यही कारण है कि इस यात्रा को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रशासन ने यात्रियों से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी जांच पूरी करने, मौसम के अनुसार आवश्यक सामान साथ रखने और प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है। यात्रा मार्ग पर चिकित्सा दल, बचाव दल और आपदा प्रबंधन की टीमें भी लगातार तैनात हैं। इस वर्ष यात्रा अवधि 57 दिनों की निर्धारित की गई है। प्रशासन को उम्मीद है कि पूरे यात्रा काल में लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए आवास, भोजन, चिकित्सा और परिवहन की व्यवस्थाओं को पहले की तुलना में और मजबूत किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां भी पूरे यात्रा मार्ग पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:25:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था जम्मू से रवाना, कड़ी सुरक्षा के बीच बाबा बर्फानी के दर्शन को निकले श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[सिर्फ रजिस्टर्ड श्रद्धालुओं को मिली यात्रा की अनुमति, चारधाम में भी लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/the-first-batch-of-amarnath-yatra-left-from-jammu-devotees/article-57608"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/amarnath-yatra-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से गुरुवार तड़के अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना हो गया। सुबह करीब चार बजे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रद्धालुओं की बसों को हरी झंडी दिखाकर यात्रा की औपचारिक शुरुआत की। पूरे परिसर में 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 57 दिनों तक चलेगी और 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त, रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी। श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों से पवित्र गुफा तक पहुंचेंगे। प्रशासन ने पहले जत्थे में केवल उन्हीं श्रद्धालुओं को शामिल किया, जिन्होंने पहले से ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराया था। यात्रा में शामिल होने के लिए RFID कार्ड और ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करना भी अनिवार्य रखा गया। अधिकारियों के अनुसार इस व्यवस्था का उद्देश्य यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। यात्रा शुरू होने से पहले सभी यात्रियों की पहचान और दस्तावेजों की जांच की गई, जिसके बाद उन्हें निर्धारित सुरक्षा घेरे में रवाना किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। अब तक करीब चार लाख श्रद्धालु यात्रा के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं। प्रशासन ने बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, परिवहन, ठहरने की व्यवस्था, पेयजल, बिजली और आपातकालीन सहायता जैसी सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली हैं। यात्रा मार्ग पर मेडिकल कैंप, हेल्प डेस्क और राहत केंद्र भी स्थापित किए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। यात्रा शुरू होने से पहले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू स्थित बेस कैंप का निरीक्षण किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं, यात्री आवास, भोजन, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और हर स्तर पर बेहतर समन्वय बनाए रखा जाए। यात्रा की पूर्व संध्या पर उन्होंने तवी नदी के तट पर आयोजित तवी आरती में भी भाग लिया और यात्रा की सफलता तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा की कामना की।</p>
<p style="text-align:justify;">अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग सहित संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। सुरक्षाबल लगातार वाहन जांच अभियान चला रहे हैं और प्रमुख मार्गों पर पैदल गश्त भी की जा रही है। रामबन, बनिहाल और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सेना, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और स्थानीय पुलिस के जवान संयुक्त रूप से सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। यात्रा की निगरानी के लिए जम्मू में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) भी सक्रिय किया गया है, जहां से पूरे यात्रा मार्ग पर नजर रखी जा रही है। उधर, उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा में भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक जुलाई तक बद्रीनाथ धाम में करीब 14.5 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि केदारनाथ धाम में यह संख्या लगभग 13.75 लाख तक पहुंच गई है। पिछले कुछ सप्ताह में यात्रियों की संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मई के अंत तक केदारनाथ में श्रद्धालुओं की संख्या बद्रीनाथ से काफी अधिक थी, लेकिन जून के तीसरे सप्ताह के बाद बद्रीनाथ में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी और अब बद्रीनाथ आगे निकल गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मई के दौरान केदारनाथ में प्रतिदिन 25 से 28 हजार श्रद्धालु पहुंच रहे थे, जबकि बद्रीनाथ में रोजाना 15 से 18 हजार श्रद्धालु दर्शन कर रहे थे। जून के अंतिम सप्ताह में यह तस्वीर बदल गई और अब बद्रीनाथ में प्रतिदिन 18 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि मौसम अनुकूल रहने और बेहतर व्यवस्थाओं के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा का रुख कर रहे हैं। धार्मिक यात्राओं को लेकर देशभर में श्रद्धालुओं का उत्साह इस वर्ष पहले के मुकाबले अधिक दिखाई दे रहा है। अमरनाथ यात्रा हो या चारधाम यात्रा, दोनों जगह प्रशासन सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल निर्धारित नियमों का पालन करते हुए यात्रा करें, अधिकृत पंजीकरण के बाद ही यात्रा पर निकलें और मौसम व प्रशासन की सलाह का पालन करें। इससे यात्रा सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 10:10:34 +0530</pubDate>
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                <title>मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के तहत झाबुआ से हरिद्वार-ऋषिकेश के लिए 191 श्रद्धालु रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[मेघनगर रेलवे स्टेशन से भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन को मंत्री निर्मला भूरिया ने दिखाई हरी झंडी, चार दिन की यात्रा में वरिष्ठ नागरिकों के लिए भोजन, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं की विशेष व्यवस्था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/191-devotees-leave-from-jhabua-for-haridwar-rishikesh-under-chief-minister/article-56997"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mukhyamantri-teerth-darshan-yojana.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के तहत झाबुआ जिले के 191 वरिष्ठ नागरिकों का दल शुक्रवार को हरिद्वार और ऋषिकेश की चार दिवसीय धार्मिक यात्रा पर रवाना हुआ। मेघनगर रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर यात्रा की शुरुआत कराई। स्टेशन परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं और उनके परिजनों की भीड़ जुटी रही। कई बुजुर्ग पहली बार हरिद्वार और ऋषिकेश की यात्रा पर जा रहे थे, इसलिए उनके चेहरों पर उत्साह और भावुकता दोनों साफ दिखाई दे रहे थे। यात्रा शुरू होने से पहले सभी तीर्थयात्रियों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया और उन्हें प्रतीकात्मक यात्रा टिकट भी सौंपे गए। अधिकारियों ने यात्रियों को यात्रा के दौरान पालन किए जाने वाले दिशा-निर्देशों की जानकारी दी और सुरक्षित यात्रा की शुभकामनाएं दीं। इस तीर्थयात्रा दल में 191 श्रद्धालुओं के अलावा चार अनुरक्षक और पांच सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं, जिनकी जिम्मेदारी पूरी यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अन्य व्यवस्थाओं का ध्यान रखना है। शासन की ओर से भोजन, आवास, चिकित्सा सुविधा और आवागमन सहित सभी आवश्यक इंतजाम पहले से सुनिश्चित किए गए हैं ताकि किसी भी यात्री को असुविधा का सामना न करना पड़े।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और उनकी धार्मिक आस्था को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना का सफल संचालन कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज और परिवार के लिए पूरी जिंदगी समर्पित करने वाले बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक तीर्थ यात्रा का अवसर देना सरकार की जिम्मेदारी है। कई ऐसे वरिष्ठ नागरिक होते हैं जो आर्थिक या अन्य कारणों से वर्षों तक अपने मन की धार्मिक यात्रा पूरी नहीं कर पाते। इस योजना के माध्यम से उनकी वर्षों पुरानी इच्छा पूरी हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास केवल यात्रा कराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि बुजुर्ग सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण में अपनी यात्रा पूरी करें। इसी उद्देश्य से यात्रा के हर चरण के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। भोजन की गुणवत्ता, रहने की सुविधा, चिकित्सकीय सहायता और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है। यात्रा के दौरान किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या से निपटने के लिए आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध रहेगी। अधिकारियों के अनुसार पूरी यात्रा की लगातार निगरानी की जाएगी ताकि किसी भी स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने भी वरिष्ठ नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं और उन्होंने अपने जीवन में परिवार, समाज तथा देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। शासन की यह योजना उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक प्रयास है। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि यात्रा के दौरान स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें, निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी आवश्यकता की स्थिति में साथ मौजूद अधिकारियों और अनुरक्षकों से तुरंत संपर्क करें। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी श्रद्धालु सुरक्षित यात्रा पूरी कर सुखद अनुभवों के साथ वापस लौटेंगे। कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जितेंद्र सिंह चौहान, जिलाध्यक्ष भानु भूरिया, एसडीएम मेघनगर अवंधती प्रधान सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी अपने परिजनों को विदा करने स्टेशन पहुंचे थे। ट्रेन रवाना होने के दौरान श्रद्धालुओं ने हाथ हिलाकर परिजनों का अभिवादन किया, वहीं परिजनों ने भी उनकी सुखद और सुरक्षित यात्रा की कामना की। मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश सरकार लगातार विभिन्न धार्मिक स्थलों के लिए वरिष्ठ नागरिकों की यात्राएं संचालित कर रही है। योजना का उद्देश्य केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं बल्कि उन लोगों की वर्षों पुरानी आस्था को सम्मान देना भी है, जो अपने जीवन की जिम्मेदारियों के कारण तीर्थ यात्रा नहीं कर सके। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी इस तरह की यात्राओं का सिलसिला जारी रहेगा ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक पात्र वरिष्ठ नागरिक इस योजना का लाभ उठा सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:24:19 +0530</pubDate>
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                <title>महाकाल मंदिर में लाइट एंड साउंड शो हुआ पेड, श्रद्धालुओं का बढ़ेगा खर्च</title>
                                    <description><![CDATA[7 महीने मुफ्त रहने के बाद अब शो देखने के लिए देने होंगे 100 रुपए, आरती और शीघ्र दर्शन जोड़ें तो एक श्रद्धालु पर 1050 रुपए तक का खर्च]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/light-and-sound-show-in-mahakal-temple-will-increase-expenses/article-55799"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-temple-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की जेब पर अब अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। मंदिर परिसर में संचालित किए जा रहे लाइट एंड साउंड शो को देखने के लिए अब श्रद्धालुओं को 100 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क देना होगा। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। करीब सात महीने तक यह शो पूरी तरह निशुल्क चलाया गया था, लेकिन अब इसके लिए टिकट लेना अनिवार्य होगा। महाकाल मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के बीच यह लाइट एंड साउंड शो काफी लोकप्रिय हो चुका है। शाम के समय होने वाले इस शो में आधुनिक तकनीक के जरिए भगवान महाकाल, मां क्षिप्रा और प्राचीन अवंतिका नगरी की गौरवगाथा को दर्शाया जाता है। वॉटर स्क्रीन, लेजर लाइट, फाउंटेन और विशेष साउंड इफेक्ट्स के कारण यह कार्यक्रम श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करता है। अब तक इसे देखने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता था, लेकिन मंदिर प्रशासन ने इसके संचालन और रखरखाव के खर्च का हवाला देते हुए टिकट व्यवस्था लागू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस शो का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 अक्टूबर 2025 को दीपावली के अवसर पर किया था। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने इसे करीब 18 करोड़ 7 लाख रुपए की लागत से विकसित किया है। लगभग 25 मिनट की अवधि वाले इस कार्यक्रम को महाकाल लोक और मंदिर परिसर की प्रमुख आकर्षणों में शामिल माना जाता है। शुरुआती दिनों से ही इसे श्रद्धालुओं का अच्छा प्रतिसाद मिला और रोजाना सैकड़ों लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार शो के संचालन, तकनीकी रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं पर हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपए का खर्च आता है। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि इसी खर्च की भरपाई और सुविधाओं को बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से 100 रुपए का प्रवेश शुल्क निर्धारित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि शुल्क लागू होने के बाद भी श्रद्धालुओं की संख्या पर बहुत अधिक असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि शो की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आंकड़ों पर नजर डालें तो मंदिर प्रशासन को इस व्यवस्था से अच्छी आय होने की उम्मीद है। प्रशासन का अनुमान है कि प्रतिदिन करीब 500 श्रद्धालु लाइट एंड साउंड शो देखने पहुंचते हैं। ऐसे में 100 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क के हिसाब से रोजाना लगभग 50 हजार रुपए की आय हो सकती है। यह आंकड़ा महीनेभर में करीब 15 लाख रुपए और सालाना लगभग 1.8 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। वहीं रखरखाव पर होने वाला खर्च इसके मुकाबले काफी कम बताया जा रहा है। इसी वजह से इसे मंदिर समिति के लिए एक नए राजस्व स्रोत के रूप में भी देखा जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब महाकाल मंदिर में किसी सुविधा या विशेष व्यवस्था के लिए शुल्क तय किया गया हो। इससे पहले भी मंदिर प्रशासन कई सेवाओं को शुल्क आधारित बना चुका है। 19 फरवरी 2026 से संध्या आरती और शयन आरती में शामिल होने के लिए भी प्रति व्यक्ति 250 रुपए शुल्क लिया जा रहा है। इससे पहले इन आरतियों में श्रद्धालुओं का प्रवेश निशुल्क था। वहीं शीघ्र दर्शन और विशेष दर्शन जैसी व्यवस्थाओं के लिए पहले से ही अलग शुल्क निर्धारित है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ऐसे में यदि कोई श्रद्धालु संध्या आरती, शयन आरती, लाइट एंड साउंड शो और शीघ्र दर्शन जैसी सुविधाओं का लाभ लेना चाहता है तो उसका कुल खर्च 1000 रुपए से अधिक पहुंच सकता है। इसी वजह से मंदिर प्रशासन के इस फैसले पर श्रद्धालुओं के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि आधुनिक सुविधाओं और बेहतर व्यवस्थाओं के लिए शुल्क लेना उचित है, जबकि कई श्रद्धालु इसे आम भक्तों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ मान रहे हैं। महाकाल मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भस्म आरती में ही रोजाना करीब 1700 श्रद्धालुओं को ऑनलाइन अनुमति दी जाती है। इसके अलावा देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नई शुल्क व्यवस्था का असर बड़ी संख्या में आने वाले भक्तों पर पड़ सकता है। श्रद्धालुओं के एक वर्ग का मानना है कि धार्मिक परिसर में आयोजित होने वाले ऐसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों को अधिकतम लोगों की पहुंच में बनाए रखने के लिए मुफ्त या न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 12:38:36 +0530</pubDate>
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