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                <title>Industrial News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>होसुर की टाटा फैक्ट्री पर संकट, भूजल प्रदूषण विवाद से हजारों नौकरियों पर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेतावनी के बाद बढ़ी चिंता, मुख्यमंत्री थलपति विजय के सामने पर्यावरण संरक्षण और रोजगार बचाने की दोहरी चुनौती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a2e540588ff6/article-55879"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tata-electronics.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तमिलनाडु की औद्योगिक राजधानी माने जाने वाले होसुर में स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की आईफोन कंपोनेंट्स निर्माण इकाई इन दिनों गंभीर विवादों में घिर गई है। फैक्ट्री पर आसपास के क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण फैलाने के आरोप लगे हैं, जिसके बाद तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी से जवाब मांगा है। संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने की स्थिति में फैक्ट्री के संचालन पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। इस घटनाक्रम ने राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन, किसानों और हजारों कर्मचारियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जब तमिलनाडु में नई सरकार का गठन हुआ है और मुख्यमंत्री थलपति विजय राज्य के विकास और निवेश को लेकर कई बड़े फैसले लेने की तैयारी में हैं। ऐसे में राज्य की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाइयों में शामिल टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की फैक्ट्री पर संकट खड़ा होना सरकार के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। एक ओर पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हितों की रक्षा का दबाव है, वहीं दूसरी ओर हजारों लोगों के रोजगार और विदेशी निवेश को बनाए रखने की जिम्मेदारी भी सरकार के सामने है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट जल का असर आसपास के इलाकों के भूजल पर पड़ा है। स्थानीय स्तर पर कुछ किसानों ने भी शिकायत की है कि जल गुणवत्ता में बदलाव देखने को मिला है, जिससे कृषि गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। इन शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की गई और कंपनी से जवाब मांगा गया। अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की यह इकाई केवल तमिलनाडु ही नहीं बल्कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां आईफोन के बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण किया जाता है। यह यूनिट एप्पल की वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा है और भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का बड़ा केंद्र बनाने की रणनीति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यही वजह है कि इस फैक्ट्री से जुड़ा कोई भी निर्णय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि इस यूनिट में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 75 हजार लोग जुड़े हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या स्थानीय युवाओं की है, जिन्हें पिछले कुछ वर्षों में रोजगार के अवसर मिले हैं। यदि किसी कारणवश फैक्ट्री का संचालन प्रभावित होता है या उत्पादन अस्थायी रूप से भी रुकता है, तो इसका असर हजारों परिवारों की आय पर पड़ सकता है। इसके अलावा क्षेत्र में छोटे व्यवसायों और सेवा क्षेत्र पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> यह मामला केवल एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और वैश्विक निवेशकों के विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। हाल के वर्षों में एप्पल और उससे जुड़ी कंपनियों ने भारत में बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ाया है। तमिलनाडु, कर्नाटक और अन्य राज्यों में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकाइयों का विस्तार हुआ है। ऐसे में यदि किसी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट पर पर्यावरणीय विवाद गहराता है तो उसका असर भविष्य के निवेश निर्णयों पर भी पड़ सकता है। रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 तक दुनिया में बनने वाले कुल आईफोन उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 26 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इस लक्ष्य को हासिल करने में तमिलनाडु की फैक्ट्रियों की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। इसलिए उद्योग जगत की नजरें भी इस पूरे मामले पर टिकी हुई हैं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरणीय नियमों का पालन और औद्योगिक विकास दोनों साथ-साथ चलने चाहिए ताकि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर सफाई दी है। कंपनी का कहना है कि वह पर्यावरणीय मानकों और स्थानीय समुदायों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कंपनी के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से नोटिस मिलने के बाद एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला से परीक्षण कराया गया था। इस अध्ययन में सभी नियामक मानकों का पालन किए जाने की पुष्टि हुई है। कंपनी ने यह भी कहा है कि उसका जवाब समय पर संबंधित विभाग को सौंप दिया गया है और वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 13:18:24 +0530</pubDate>
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                <title>रायपुर की पोरवाल ऑयल फैक्ट्री में लगी आग, इलाके में मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[उरला क्षेत्र की फैक्ट्री से उठता धुएं का गुबार दूर तक दिखा, दमकल और पुलिस टीमों ने समय रहते पाया काबू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/6a2d01a4a496e/article-55806"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-factory-fire.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रायपुर के उरला थाना क्षेत्र स्थित पोरवाल ऑयल फैक्ट्री में शुक्रवार को अचानक आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। फैक्ट्री परिसर से उठते काले धुएं के घने गुबार दूर-दूर तक दिखाई दिए, जिसके बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और पुलिस की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। राहत की बात यह रही कि समय रहते आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आग फैक्ट्री के उत्पादन क्षेत्र में उस समय लगी जब वहां सैंपल लेने की प्रक्रिया चल रही थी। बताया जा रहा है कि तकनीकी कारणों से एक वाल्व पूरी तरह बंद नहीं हो पाया, जिसके चलते गर्म पदार्थ बाहर निकलने लगा। जैसे ही यह पदार्थ ऑक्सीजन के संपर्क में आया, सेल्फ इग्नीशन यानी स्वतः दहन की प्रक्रिया शुरू हो गई और देखते ही देखते आग फैल गई। फैक्ट्री कर्मचारियों ने शुरुआत में खुद आग पर नियंत्रण पाने की कोशिश की, लेकिन लपटें बढ़ने पर दमकल विभाग को सूचना दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के दौरान सैंपल ले रहे एक कर्मचारी के हाथ में हल्की चोट आई। फैक्ट्री प्रबंधन ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत खतरे से बाहर बताई गई। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी कर्मचारी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि आग लगने के बाद कुछ समय तक फैक्ट्री परिसर और आसपास का इलाका धुएं से घिरा रहा, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के कुछ ही मिनटों में धुएं का गुबार आसमान में कई मीटर ऊंचाई तक पहुंच गया था। दूर से गुजर रहे लोगों ने भी धुएं के बड़े-बड़े गुबार देखे और इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को दी। कई लोगों ने घटना के वीडियो भी बनाए, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। वीडियो में फैक्ट्री परिसर से उठता धुआं और मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ियां साफ दिखाई दे रही हैं। दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फैक्ट्री में ज्वलनशील पदार्थों के इस्तेमाल के कारण आग तेजी से फैलने की आशंका थी। इसी वजह से अतिरिक्त दमकल वाहनों को भी मौके पर भेजा गया। कई घंटे तक चले अभियान के बाद आग को नियंत्रित कर लिया गया। सुरक्षा के लिहाज से फैक्ट्री के कुछ हिस्सों को खाली कराया गया और आसपास के क्षेत्र में भी निगरानी बढ़ा दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">पोरवाल ऑयल फैक्ट्री में टायरों को प्रोसेस कर डामर और बिटुमिनस उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इस तरह के उद्योगों में उच्च तापमान और ज्वलनशील सामग्री का उपयोग होता है, इसलिए सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है। घटना के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री में मौजूद सुरक्षा व्यवस्थाओं और तकनीकी प्रक्रियाओं की जांच शुरू कर दी है। यह भी देखा जा रहा है कि कहीं सुरक्षा नियमों के पालन में कोई कमी तो नहीं रही। इस घटना ने कुछ सप्ताह पहले रायपुर के एमजी रोड स्थित जया ऑटोमोबाइल बिल्डिंग में लगी भीषण आग की याद भी ताजा कर दी। उस हादसे में आग इतनी भयंकर थी कि उसे बुझाने में दमकल विभाग को करीब 11 घंटे का समय लगा था। आग दूसरी और तीसरी मंजिल तक फैल गई थी और फायर कर्मियों को जेसीबी मशीन की मदद से भवन का हिस्सा तोड़कर अंदर प्रवेश करना पड़ा था। हालांकि पोरवाल ऑयल फैक्ट्री की घटना उस स्तर की नहीं रही, लेकिन इससे औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर सवाल फिर खड़े हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के सही कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम फैक्ट्री का निरीक्षण करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना पूरी तरह तकनीकी खराबी का परिणाम थी या फिर सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:22:59 +0530</pubDate>
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