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                <title>bilaspur-news - दैनिक जागरण</title>
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                <title>बिना इंटरनेट और मोबाइल के बढ़ रहा जनरल नॉलेज, गांव की दीवारें बनीं बच्चों की पाठशाला</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर के ग्राम पंचायत सेलर में विद्यार्थियों के लिए अनोखी पहल शुरू की गई है। स्कूल जाने वाले रास्ते की दीवारों पर सामान्य ज्ञान के प्रश्न लिखे जा रहे हैं, ताकि बच्चे रोज पढ़ते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/general-knowledge-is-increasing-without-internet-and-mobile-village-walls/article-57211"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/general-knowledge.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर जिले के ग्राम पंचायत सेलर में शिक्षा को लेकर एक अनोखी पहल शुरू की गई है, जिसकी चर्चा अब आसपास के इलाकों में भी होने लगी है। यहां बच्चों के जनरल नॉलेज को मजबूत बनाने के लिए स्कूल के रास्ते की दीवारों को ही खुली पाठशाला में बदल दिया गया है। गांव के सरपंच धनंजय सिंह के नेतृत्व में स्कूल से मुख्य गुड्डी तक की दीवारों पर सामान्य ज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न लिखे गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी रोजाना स्कूल आते-जाते इन प्रश्नों को पढ़ें और बिना अलग से समय निकाले सामान्य ज्ञान की तैयारी करते रहें। इस पहल की खास बात यह है कि इसमें किसी प्रकार की सरकारी राशि का उपयोग नहीं किया जा रहा, बल्कि पूरा कार्य ग्रामीणों के जनसहयोग से किया जा रहा है। ग्राम पंचायत का मानना है कि आज के समय में लगभग हर प्रतियोगी परीक्षा में सामान्य ज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में यदि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही इतिहास, भूगोल, विज्ञान, भारतीय संविधान, खेल, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं की जानकारी मिलती रहे तो आगे चलकर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में काफी मदद मिलेगी। इसी सोच के साथ गांव में दीवार लेखन का यह अभियान शुरू किया गया है। विद्यार्थी रोज जब स्कूल जाएंगे और लौटेंगे तो इन प्रश्नों पर उनकी नजर पड़ेगी। धीरे-धीरे यही जानकारी उनकी याददाश्त का हिस्सा बन जाएगी और पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि भी बढ़ेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस अभियान को केवल एक बार का प्रयोग बनाकर नहीं छोड़ा गया है। पंचायत ने पहले से ही इसकी आगे की योजना भी तैयार कर ली है। तय किया गया है कि हर 60 दिन बाद दीवारों पर लिखे पुराने प्रश्न हटाकर उनकी जगह नए प्रश्न लिखे जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को लगातार नई जानकारी मिलती रहेगी और वे एक ही विषय तक सीमित नहीं रहेंगे। हर दो महीने में अलग-अलग विषयों के प्रश्न लिखे जाने से बच्चों का ज्ञान लगातार बढ़ेगा और उन्हें देश-दुनिया से जुड़ी नई जानकारियां भी मिलती रहेंगी। पंचायत ने इस पहल को और प्रभावी बनाने के लिए प्रतियोगिता का भी रास्ता चुना है। प्रत्येक दो माह बाद कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए सामान्य ज्ञान की परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा। पंचायत का मानना है कि पुरस्कार मिलने से बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होगी और वे नियमित रूप से पढ़ाई के लिए प्रेरित होंगे। इससे केवल अच्छे अंक लाने की सोच नहीं बल्कि सीखने की आदत भी विकसित होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस अभियान में केवल पंचायत ही नहीं बल्कि पूरा गांव सहयोग कर रहा है। स्कूल विकास समिति के अध्यक्ष, समिति के सदस्य, शिक्षक और गांव के कई गणमान्य नागरिक इसमें सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। दीवारों पर प्रश्न लिखने से लेकर उन्हें समय-समय पर बदलने तक का पूरा काम जनसहयोग से किया जा रहा है। पंचायत का कहना है कि भविष्य में गांव के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल लिखे जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। सरपंच धनंजय सिंह का कहना है कि यदि विद्यार्थी प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी सामान्य ज्ञान की जानकारी भी हासिल करते रहें तो 12वीं तक पहुंचते-पहुंचते उनके पास हजारों महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह होगा। इससे वे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिक आत्मविश्वास के साथ शामिल हो सकेंगे। उनका मानना है कि पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि गांव का वातावरण भी सीखने वाला बन जाए तो बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षकों का भी कहना है कि बच्चों के लिए यह पहल काफी उपयोगी साबित होगी। सामान्य तौर पर विद्यार्थी सामान्य ज्ञान को अलग विषय मानकर कम महत्व देते हैं, लेकिन जब वही जानकारी रोज रास्ते में दिखाई देगी तो उसे पढ़ना उनकी आदत बन जाएगी। बार-बार एक ही प्रश्न देखने और पढ़ने से याददाश्त मजबूत होती है और बिना किसी अतिरिक्त दबाव के सीखने की प्रक्रिया भी आसान हो जाती है। यह तरीका खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के उन विद्यार्थियों के लिए अधिक फायदेमंद हो सकता है, जिनके पास इंटरनेट या डिजिटल संसाधनों की सीमित पहुंच है। सामान्य ज्ञान केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। यह व्यक्तित्व विकास, तार्किक सोच और जागरूक नागरिक बनने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश, संविधान, विज्ञान, पर्यावरण और समसामयिक घटनाओं की जानकारी बच्चों को समाज और दुनिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है। ऐसे प्रयास ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। ग्राम पंचायत सेलर की यह पहल अब दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। कम संसाधनों में शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने का यह मॉडल दिखाता है कि यदि स्थानीय स्तर पर इच्छाशक्ति और जनसहयोग हो तो बड़े बदलाव संभव हैं। आने वाले समय में यदि अन्य पंचायतें भी इस तरह के प्रयास अपनाती हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उनकी तैयारी पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:39:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बिलासपुर में 6.25 लाख का गांजा जब्त, बच्चे की आड़ लेकर तस्करी का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[सिविल लाइन पुलिस ने दो महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया। आरोप है कि पुलिस से बचने के लिए आरोपियों ने अपने साथ पांच साल के बच्चे को रखा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/ganja-worth-rs-625-lakh-seized-in-bilaspur-accused-of/article-57214"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-news-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">बिलासपुर में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सिविल लाइन पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने गांजा तस्करी के आरोप में दो महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 12.405 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 6.25 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस का दावा है कि आरोपी शक से बचने और आसानी से सफर करने के लिए अपने साथ पांच साल के एक बच्चे को भी लेकर चल रहे थे। कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। वहीं बच्चे को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि उसलापुर रेलवे स्टेशन स्थित लोको पायलट प्रशिक्षण केंद्र के पास दो महिलाएं और एक पुरुष संदिग्ध हालत में एक आसमानी रंग का ट्रॉली बैग लेकर खड़े हैं। सूचना में यह भी बताया गया था कि उनके साथ एक छोटा बच्चा भी है। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस ने टीम गठित कर मौके पर घेराबंदी शुरू कर दी। कुछ ही देर बाद बताए गए हुलिए से मेल खाते तीनों संदिग्ध एक ट्रॉली बैग और बच्चे के साथ दिखाई दिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस ने संदेह के आधार पर उन्हें रोककर पूछताछ की। शुरुआती जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर ट्रॉली बैग की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान बैग के अंदर खाकी रंग की प्लास्टिक टेप से लिपटे 11 पैकेट मिले। जब पैकेट खोले गए तो उनमें गांजा भरा हुआ था। मौके पर ही जब्त सामग्री का वजन किया गया, जिसमें कुल 12.405 किलोग्राम गांजा निकला। बरामद मादक पदार्थ की कीमत करीब 6.25 लाख रुपए आंकी गई है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ओडिशा के झारसुगुड़ा निवासी प्रकाश नायक उर्फ पप्पू (41), नेहा सिंह (34) और जांजगीर-चांपा जिले की अर्चना सिंह (27) के रूप में हुई है। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गांजा कहां से लाया गया था और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। इसके अलावा इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने अपने साथ पांच साल के बच्चे को इसलिए रखा था ताकि किसी को उन पर आसानी से शक न हो। आमतौर पर परिवार के साथ यात्रा करने वालों पर कम संदेह किया जाता है और इसी बात का फायदा उठाने की कोशिश की गई। हालांकि पुलिस को पहले से ही सूचना में बच्चे के साथ होने की जानकारी मिल गई थी, जिसके चलते टीम पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंची और कार्रवाई सफल रही। जब्ती की कार्रवाई के बाद पुलिस ने गांजा, ट्रॉली बैग और अन्य सामान को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। तीनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत में पेशी के बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। वहीं उनके साथ मिले बच्चे की सुरक्षा और देखभाल को ध्यान में रखते हुए उसे बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों का संबंध किसी बड़े अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह से तो नहीं है। मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। बिलासपुर पुलिस का कहना है कि जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई है ताकि मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं भी नशीले पदार्थों की तस्करी या संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। हाल के दिनों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में नशीले पदार्थों की तस्करी के कई मामले सामने आए हैं। पुलिस का मानना है कि सीमावर्ती राज्यों से गांजे की अवैध सप्लाई रोकने के लिए लगातार निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। बिलासपुर की यह कार्रवाई भी उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:39:33 +0530</pubDate>
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                <title>बिलासपुर नगर निगम में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, सभी 8 जोनों के कमिश्नर बदले गए</title>
                                    <description><![CDATA[कामकाज में सुधार और प्रशासनिक कसावट के लिए निगम कमिश्नर ने जारी किए नए आदेश, कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-administrative-reshuffle-in-bilaspur-municipal-corporation-commissioners-of-all/article-55815"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-nagar-nigam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर नगर निगम में लंबे समय से एक ही जोन में कार्यरत अधिकारियों के प्रभार में आखिरकार बड़ा बदलाव किया गया है। नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने जोन कमिश्नरों, डिप्टी कमिश्नरों और कार्यपालन अभियंताओं की नई पदस्थापना के आदेश जारी कर दिए हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत निगम के सभी आठ जोनों में अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। निगम प्रशासन का कहना है कि यह कदम कामकाज में तेजी लाने, जवाबदेही बढ़ाने और वार्ड स्तर पर नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। नए आदेश जारी होने के बाद अधिकारियों ने अपने नए दायित्व संभालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम के अधिकांश जोन कमिश्नर पिछले ढाई से चार वर्षों से एक ही जोन में पदस्थ थे। लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थापना को लेकर निर्वाचित परिषद के सदस्यों और पार्षदों की ओर से लगातार बदलाव की मांग उठाई जा रही थी। उनका कहना था कि नियमित अंतराल में प्रभार बदलने से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ती है और विकास कार्यों की निगरानी अधिक प्रभावी होती है। इसी पृष्ठभूमि में निगम प्रशासन ने व्यापक स्तर पर फेरबदल का निर्णय लिया। सबसे ज्यादा चर्चा जोन क्रमांक-1 में लंबे समय से पदस्थ रंजना अग्रवाल के स्थानांतरण को लेकर हो रही है। रंजना अग्रवाल चार वर्षों से अधिक समय से इसी जोन की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अब उन्हें जोन क्रमांक-8 की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह जोन क्रमांक-6 की जोन कमिश्नर मधुलिका सिंह को जोन क्रमांक-1 का नया प्रभार दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक रंजना अग्रवाल के खिलाफ कई पार्षदों की शिकायतें भी लंबित थीं। हालांकि आधिकारिक तौर पर फेरबदल को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल जोन क्रमांक-3 को वीआईपी जोन माना जाता है। इस क्षेत्र में कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय, सरकारी आवास, जनप्रतिनिधियों के निवास और महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान स्थित हैं। ऐसे में इस जोन की जिम्मेदारी हमेशा अनुभवी अधिकारियों को सौंपी जाती है। इस बार प्रवेश कश्यप को इस महत्वपूर्ण जोन का जोन कमिश्नर बनाया गया है। निगम प्रशासन को उम्मीद है कि उनके अनुभव का लाभ इस क्षेत्र में चल रहे विकास और जनसुविधा संबंधी कार्यों को मिलेगा। प्रवेश कश्यप को केवल जोन क्रमांक-3 की जिम्मेदारी ही नहीं मिली है, बल्कि उनके पास पहले से मौजूद कई महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार भी बरकरार रखा गया है। वे उपायुक्त, स्थापना शाखा, स्वास्थ्य अधिकारी, स्वच्छता सर्वेक्षण और सिटी 2.0 से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे। इससे स्पष्ट है कि निगम प्रशासन ने उन्हें कई अहम परियोजनाओं और व्यवस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी सौंपकर विशेष भरोसा जताया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी क्रम में प्रवीण शुक्ला को जोन कमिश्नर के पद से मुक्त कर उनके मूल पद कार्यपालन अभियंता के रूप में कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। अब वे जोन क्रमांक-3 और जोन क्रमांक-7 में कार्यपालन अभियंता की जिम्मेदारी संभालेंगे। निगम प्रशासन का मानना है कि तकनीकी कार्यों के बेहतर निष्पादन के लिए अनुभवी अभियंताओं को उनकी मूल जिम्मेदारियों में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। नए आदेशों के तहत जोन क्रमांक-7 के जोन कमिश्नर प्रवीण शर्मा को जोन क्रमांक-2 भेजा गया है। वहीं भूपेंद्र उपाध्याय को जोन क्रमांक-2 से स्थानांतरित कर जोन क्रमांक-7 का प्रभार दिया गया है। सागर राज को जोन क्रमांक-4 से जोन क्रमांक-6 भेजा गया है, जबकि विभा सिंह को जोन क्रमांक-8 से जोन क्रमांक-4 की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा सवीना अनंत को जोन क्रमांक-5 का जोन कमिश्नर नियुक्त किया गया है। उनके पास उद्यान और स्विमिंग पूल से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी रहेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डिप्टी कमिश्नर दीपिका भगत के प्रभार में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। उन्हें स्टोर शाखा, भविष्य निधि, पेंशन और खाद्य शाखा से संबंधित जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनके कई पूर्व दायित्व भी यथावत रखे गए हैं ताकि प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनी रहे। निगम प्रशासन का कहना है कि अधिकारियों के अनुभव और कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए नई जिम्मेदारियों का निर्धारण किया गया है। नगर निगम के भीतर इस फेरबदल को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहने से कार्यप्रणाली में एकरूपता आ जाती है और कई बार निगरानी व्यवस्था भी प्रभावित होती है। ऐसे में समय-समय पर दायित्व बदलने से नई कार्यशैली और बेहतर परिणाम सामने आने की संभावना रहती है। वहीं पार्षदों और जनप्रतिनिधियों का भी मानना है कि इससे नागरिक समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी और विकास कार्यों की समीक्षा अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:24:38 +0530</pubDate>
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