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                <title>जसपाल राणा के निधन से भारतीय निशानेबाजी को बड़ा झटका, मनु भाकर बोलीं- अपूर्णीय क्षति</title>
                                    <description><![CDATA[49 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए दिग्गज निशानेबाज और कोच, ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर समेत खेल जगत में शोक की लहर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/jaspal-ranas-demise-a-big-blow-to-indian-shooting-manu/article-55836"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jaspal-rana.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय निशानेबाजी जगत के लिए शनिवार का दिन बेहद दुखद खबर लेकर आया। देश के सबसे सफल पिस्टल निशानेबाजों में शामिल और बाद में एक शानदार कोच के रूप में पहचान बनाने वाले जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई। खिलाड़ियों, कोचों और खेल प्रशासकों ने इसे भारतीय खेलों के लिए बड़ी क्षति बताया। खासकर उनकी शिष्या और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने अपने गुरु को याद करते हुए इसे “अपूर्णीय क्षति” करार दिया। सोशल मीडिया पर उनका छोटा सा संदेश भी लाखों खेल प्रेमियों को भावुक कर गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">जसपाल राणा लंबे समय से भारतीय निशानेबाजी का एक बड़ा नाम रहे। एक खिलाड़ी के रूप में उन्होंने देश को कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गौरवान्वित किया और बाद में कोच की भूमिका में भी उतनी ही सफलता हासिल की। बताया जा रहा है कि वह कुछ समय से हृदय संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे थे। इलाज के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और उनका निधन हो गया। उनके अचानक चले जाने से खेल जगत स्तब्ध है क्योंकि वह अभी भी भारतीय पिस्टल टीम के हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारियों में जुटे हुए थे।</p>
<p class="isSelectedEnd">मनु भाकर और जसपाल राणा का रिश्ता केवल कोच और खिलाड़ी तक सीमित नहीं था। दोनों ने साथ मिलकर भारतीय निशानेबाजी में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। पेरिस ओलंपिक 2024 में मनु भाकर ने दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था और इस सफलता के पीछे जसपाल राणा के मार्गदर्शन को काफी महत्वपूर्ण माना गया था। मनु ने सोशल मीडिया पर जसपाल राणा के साथ अपनी कुछ तस्वीरें साझा करते हुए केवल दो शब्द लिखे – “अपूर्णीय क्षति।” यह संदेश भले छोटा था, लेकिन उसमें एक शिष्या का अपने गुरु के प्रति सम्मान, प्रेम और दुख साफ झलक रहा था।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के अनुसार मनु भाकर इन दिनों देहरादून में राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा ले रही थीं। जसपाल राणा के निधन की खबर मिलने के बाद वह उनके परिवार के साथ मौजूद रहीं। जब उनका पार्थिव शरीर देहरादून लाया गया तो मनु भी वहां पहुंचीं और परिवार के सदस्यों के साथ अंतिम दर्शन किए। कई तस्वीरों में उन्हें जसपाल राणा के पिता और अन्य परिजनों के साथ बैठे देखा गया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया। खेल जगत के कई दिग्गजों ने भी परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।</p>
<p class="isSelectedEnd">जसपाल राणा का प्रतिस्पर्धी करियर डेढ़ दशक से ज्यादा समय तक चला। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक पदक जीते। वर्ष 2006 के एशियाई खेल उनके करियर का सबसे यादगार पड़ाव माना जाता है। उस प्रतियोगिता में उन्होंने तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया था। इतना ही नहीं, उन्होंने उस दौरान तत्कालीन विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी की थी। उनकी सटीक निशानेबाजी, मानसिक मजबूती और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से अलग बनाती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">खेल विशेषज्ञों का मानना है कि जसपाल राणा की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल उनके जीते हुए पदक नहीं थे, बल्कि नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करना भी था। उन्होंने युवा निशानेबाजों को तकनीकी कौशल के साथ मानसिक मजबूती सिखाने पर विशेष जोर दिया। उनकी कोचिंग शैली अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास पर आधारित थी। यही कारण था कि कई युवा खिलाड़ी उन्हें सिर्फ कोच नहीं बल्कि मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत मानते थे। भारतीय निशानेबाजी के कई मौजूदा खिलाड़ी उनके प्रशिक्षण से लाभान्वित हुए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने में सफल रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनके निधन के बाद खेल संगठनों और पूर्व खिलाड़ियों ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। कई खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया पर उनकी यादों को साझा करते हुए बताया कि जसपाल राणा हमेशा खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते थे। चाहे राष्ट्रीय शिविर हो या कोई बड़ी प्रतियोगिता, वह खिलाड़ियों के साथ हर कदम पर खड़े रहते थे। उनकी यही विशेषता उन्हें एक सफल कोच और सम्मानित व्यक्तित्व बनाती थी। जसपाल राणा का जाना भारतीय खेलों के लिए एक ऐसा नुकसान माना जा रहा है जिसकी भरपाई आसानी से संभव नहीं होगी। उन्होंने खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा। खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए वह हमेशा एक प्रेरणा बने रहेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 15:39:52 +0530</pubDate>
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