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                <title>NCW - दैनिक जागरण</title>
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                <title>बारुईपुर रेप-मर्डर केस में मुख्य आरोपी गिरफ्तार, SIT जांच में कई अहम खुलासे</title>
                                    <description><![CDATA[पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दावा- दुष्कर्म के बाद नाबालिग को जिंदा तालाब में फेंका गया; मामले में तीन गिरफ्तार, जांच तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/main-accused-arrested-in-baruipur-rape-murder-case-many-important-revelations/article-58050"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/baruipur-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी आनंद सरदार को गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार देर शाम चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान उसे शहर के बाजार इलाके से पकड़ा गया। अधिकारियों के अनुसार इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। यह मामला सामने आने के बाद इलाके में लगातार तनाव का माहौल बना हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बच्ची 4 जुलाई को घर से अपनी सहेली के लिए उपहार खरीदने निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। परिवार ने उसकी तलाश की और कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। अगले दिन सूर्यपुर हाट इलाके के एक तालाब से उसका शव बरामद हुआ, जिसके बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आए शुरुआती निष्कर्षों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार बच्ची के फेफड़ों और पेट में पानी मिला है, जिससे आशंका जताई गई कि दुष्कर्म के बाद उसे जीवित अवस्था में तालाब में फेंका गया था। चिकित्सकीय जांच में यह भी सामने आया कि सिर पर गंभीर चोट लगी थी और शरीर के कई हिस्सों पर खरोंच तथा काटने के निशान मिले हैं। प्रारंभिक जांच के मुताबिक सिर पर किसी भारी वस्तु से हमला किया गया था या उसे किसी कठोर सतह पर जोर से पटका गया। अधिक खून बहने और डूबने की वजह से उसकी मौत होने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार अंतिम पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु के कारणों और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर और स्पष्ट होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस जांच में घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। जांचकर्ताओं को कुछ फुटेज में बच्ची चार लोगों के साथ जाती हुई दिखाई दी है। पुलिस इन लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की पुष्टि करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और फोरेंसिक जांच के आधार पर मामले की हर कड़ी को जोड़ा जा रहा है। इसी बीच मुख्य आरोपी आनंद सरदार की गिरफ्तारी को जांच में अहम सफलता माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि उससे पूछताछ के आधार पर आगे और महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भी सामने आया। बच्ची का शव मिलने के कुछ ही देर बाद भीड़ ने एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ लिया, जिस पर इस वारदात में शामिल होने का संदेह था। उसकी पहचान इंद्रजीत तांती के रूप में हुई। भीड़ ने उसकी कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस दौरान इलाके में तनाव बढ़ गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस ने भीड़ की हिंसा से जुड़े मामलों की भी अलग से जांच शुरू की है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखने की अपील की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को पीड़ित परिवार से मिलने जाने से रोकने के लिए उनके आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। दूसरी ओर भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे सामान्य सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बताया। घटना के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विभिन्न दल सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि राज्य पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष और तेजी से आगे बढ़ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा है कि रिपोर्ट में न केवल इस जघन्य अपराध की जांच की प्रगति शामिल होनी चाहिए, बल्कि इसके बाद हुई भीड़ की हिंसा, पुलिस पर हुए हमलों और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं का भी पूरा विवरण होना चाहिए। आयोग ने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम समय पर उठाए जाने चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार देश में हर वर्ष बच्चों के संरक्षण से जुड़े कानूनों के तहत हजारों मामले दर्ज होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई घटनाएं सामाजिक डर, बदनामी या अन्य कारणों से दर्ज ही नहीं हो पातीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>वायरल वीडियो के बाद प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा पर FIR</title>
                                    <description><![CDATA[गुरुग्राम में वायरल वीडियो के बाद कार्रवाई, महिलाओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे और वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ एफआईआर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/fir-against-pranit-more-and-himanshu-jangra-after-viral-video/article-56231"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pranit-more.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुरुग्राम में आयोजित एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो के दौरान महिलाओं को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का मामला अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के आधार पर पुलिस ने स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे और वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के नोटिस के बाद की गई है। मामले ने सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक व्यापक बहस छेड़ दी है, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और महिलाओं के सम्मान के बीच संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह घटना 12 अप्रैल को गुरुग्राम के सेक्टर-24 स्थित डीएलएफ साइबर हब में आयोजित एक कॉमेडी शो के दौरान हुई थी। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों में मौजूद एक व्यक्ति द्वारा महिलाओं को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। आरोप है कि इस टिप्पणी को मंच पर मौजूद कॉमेडियन ने न केवल आगे बढ़ाया बल्कि उस पर प्रतिक्रिया देकर माहौल को और बढ़ावा दिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों की हंसी और तालियों के बीच यह पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड हो गया, जिसका वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने इसे महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताया। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने इस पर आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की। बढ़ते विवाद के बीच राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए हरियाणा पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया। आयोग ने अपने नोटिस में कहा कि महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियों को मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत करना गंभीर चिंता का विषय है। महिला आयोग ने पूरे घटनाक्रम को महिलाओं की मर्यादा और सम्मान के खिलाफ बताया। आयोग के अनुसार किसी महिला के संदर्भ में की गई कथित टिप्पणी, उस पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया और पूरे माहौल को मनोरंजन के रूप में पेश करना सामाजिक दृष्टि से गलत संदेश देता है। आयोग ने मामले में कानूनी कार्रवाई करने और जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गुरुग्राम पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक राज्य पुलिस मुख्यालय से महिला आयोग का नोटिस मिलने के बाद कार्रवाई की गई। जांच के दौरान वायरल वीडियो को साक्ष्य के रूप में जब्त किया गया है। साथ ही कार्यक्रम स्थल से सीसीटीवी फुटेज भी एकत्र किए गए हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें यौन उत्पीड़न, यौन रंग वाली टिप्पणियां, अश्लील सामग्री के प्रसार और सार्वजनिक शरारत को बढ़ावा देने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड करने और उसके प्रचार-प्रसार में किसकी क्या भूमिका रही। मामले के तूल पकड़ने के बाद दोनों आरोपियों ने सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है। प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा ने अपने बयान में कहा कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था और यदि उनकी बातों से किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका खेद है। हालांकि पुलिस का स्पष्ट कहना है कि सार्वजनिक माफी का कानूनी प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और जांच नियमानुसार जारी रहेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस विवाद का असर हिमांशु जांगड़ा के पेशेवर जीवन पर भी पड़ा है। जिस निजी कंपनी में वह कार्यरत थे, वहां से उन्हें नौकरी से हटा दिया गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद कंपनी पर भी प्रतिक्रिया आई थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि कंपनी की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया के दौर में सार्वजनिक मंचों पर कही गई बातें तेजी से व्यापक दर्शकों तक पहुंचती हैं। ऐसे में किसी भी टिप्पणी के सामाजिक और कानूनी परिणाम पहले की तुलना में कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं। विशेषकर जब मामला महिलाओं की गरिमा और सम्मान से जुड़ा हो, तब कानून प्रवर्तन एजेंसियां अधिक संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करती हैं। दूसरी ओर, कुछ लोग यह भी तर्क दे रहे हैं कि कॉमेडी और व्यंग्य की दुनिया में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी महत्व है। हालांकि अधिकांश विशेषज्ञों का कहना है कि हास्य और मनोरंजन के नाम पर किसी वर्ग, समुदाय या व्यक्ति के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियों को उचित नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस ने दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं। जांच एजेंसियां वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:41:42 +0530</pubDate>
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                <title>‘370 रुपए बिरयानी’ विवाद पर फिर झुके कॉमेडियन प्राणित मोरे, बोले- नफरत का हकदार हूं</title>
                                    <description><![CDATA[शो में आपत्तिजनक टिप्पणी पर हंसने को बताया बड़ी गलती, राष्ट्रीय महिला आयोग के समन और पुलिस जांच के बीच मांगी दूसरी बार माफी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/comedian-pranit-more-bows-down-again-on-370-rupees-biryani/article-55849"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pranit-more-controversy-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्टैंड-अप कॉमेडियन प्राणित मोरे एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। ‘370 रुपए बिरयानी’ टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर भारी आलोचना झेल रहे मोरे ने शनिवार को दूसरी बार सार्वजनिक माफी जारी की। उन्होंने स्वीकार किया कि शो के दौरान की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर हंसना उनकी “गलत सोच और निर्णय में चूक” थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह की बातें मंच पर कही गईं, उन्हें वहीं रोक देना चाहिए था, लेकिन वह माहौल में बह गए और यही उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई। पूरा विवाद गुरुग्राम में आयोजित एक स्टैंड-अप शो के दौरान शुरू हुआ था। शो में दर्शकों से बातचीत के दौरान वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा ने अपनी एक डेट का अनुभव साझा किया। उसने बताया कि उसने एक महिला के लिए 370 रुपए की चिकन बिरयानी खरीदी थी। बाद में जब महिला ने उसे घर छोड़ने के लिए कहा तो उसने कथित तौर पर उस खर्च के बदले यौन संबंधों की मांग कर दी। इस टिप्पणी पर प्राणित मोरे हंसते दिखाई दिए, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इस टिप्पणी को महिलाओं के प्रति अपमानजनक और गैर-सहमति वाले व्यवहार को बढ़ावा देने वाला बताया। आलोचकों का कहना था कि मंच पर मौजूद कॉमेडियन की जिम्मेदारी केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होती, बल्कि उन्हें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उनके मंच से किस तरह के संदेश समाज में जा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर कई दिनों तक बहस चलती रही। विवाद बढ़ने के बाद सबसे पहले हिमांशु जांगड़ा और फिर प्राणित मोरे ने माफी मांगी थी। हालांकि आलोचना थमने के बजाय और बढ़ गई। शनिवार को जारी अपने नए बयान में मोरे ने कहा कि वह लोगों के गुस्से को समझते हैं और खुद को इस आलोचना का पात्र मानते हैं। उन्होंने कहा कि उस व्यक्ति ने मंच पर कई अपमानजनक बातें कहीं, लेकिन वहां मौजूद लोग हंस रहे थे और वह भी उसी माहौल का हिस्सा बन गए। उनके मुताबिक यदि वह उसी समय टिप्पणी का विरोध करते और बातचीत को रोक देते तो शायद मामला इतना नहीं बढ़ता।</p>
<p style="text-align:justify;">मोरे ने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्होंने अनजाने में उस व्यक्ति को मंच और महत्व दे दिया, जिससे विवाद और बड़ा हो गया। उन्होंने उन सभी लोगों से माफी मांगी जो इस घटना से आहत हुए हैं। साथ ही उन्होंने समाज से एक और मौका देने की अपील की और भरोसा दिलाया कि भविष्य में उनका काम और व्यवहार यह साबित करेगा कि उन्होंने इस घटना से सीख ली है। इस विवाद के बाद मामला केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। राष्ट्रीय महिला आयोग ने गुरुवार को प्राणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा दोनों को समन जारी किया। आयोग का कहना है कि दोनों के बयान और व्यवहार से ऐसा प्रतीत होता है कि गैर-सहमति वाले यौन व्यवहार और दबाव को सामान्य या स्वीकार्य बनाने की कोशिश की गई। आयोग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों से जवाब मांगा है। विवाद का असर हिमांशु जांगड़ा के पेशेवर जीवन पर भी पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर मामला उछलने के बाद उनकी नौकरी समाप्त कर दी गई। वहीं प्राणित मोरे के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री प्रसारित करने को लेकर साइबर पुलिस में मामला भी दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच विवाद में एक और वीडियो सामने आया, जिसमें एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार मेडिकल शिक्षा में उपयोग होने वाले शवों और पुरुष शरीर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करती दिखाई दीं। इस वीडियो पर भी लोगों ने नाराजगी जताई। बाद में सेजल पवार ने भी सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली। मामले को गंभीर मानते हुए मुंबई के केईएम अस्पताल प्रशासन ने जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मृत व्यक्तियों और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विषयों पर इस तरह की टिप्पणियां स्वीकार्य नहीं हैं। वहीं मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े ने कहा कि मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता, नफरत या महिलाओं के प्रति अपमानजनक सोच को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कलाकारों, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की। इस पूरे विवाद पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी को प्राप्त है और स्टैंड-अप कॉमेडी मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी दूसरे व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी की अभिव्यक्ति दूसरे व्यक्ति के सम्मान और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:40:43 +0530</pubDate>
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