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                <title>Screen Time - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Screen Time RSS Feed</description>
                
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                <title>रात को देर तक मोबाइल चलाना पड़ सकता है भारी, जानिए शरीर और दिमाग पर इसके गंभीर असर</title>
                                    <description><![CDATA[नींद की कमी से लेकर आंखों की समस्या, मानसिक तनाव और हार्मोन असंतुलन तक—विशेषज्ञ बताते हैं क्यों सोने से पहले मोबाइल से दूरी बनाना है जरूरी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/using-mobile-phone-till-late-at-night-can-be-harmful/article-58219"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mobile-at-night.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रात को सोने से पहले मोबाइल फोन चलाना आज की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, वीडियो देखना, चैटिंग करना या वेब सीरीज देखना कई लोगों की रोजमर्रा की आदत बन गई है। लेकिन यही आदत धीरे-धीरे सेहत पर भारी पड़ सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देर रात तक मोबाइल स्क्रीन के सामने समय बिताने से न केवल नींद प्रभावित होती है, बल्कि इसका असर शरीर, दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के समय में बच्चे, युवा और बुजुर्ग लगभग हर आयु वर्ग के लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। कई लोग बिस्तर पर जाने के बाद भी एक-दो घंटे तक मोबाइल देखते रहते हैं। शुरुआत में यह सामान्य आदत लगती है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करने से कई गंभीर समस्याएं जन्म ले सकती हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है सबसे ज्यादा असर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित करती है। यही हार्मोन शरीर को यह संकेत देता है कि अब सोने का समय हो गया है। जब रात में लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल किया जाता है, तो मस्तिष्क सक्रिय बना रहता है और नींद आने में देरी होती है। इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति पर्याप्त नींद नहीं ले पाता और अगले दिन थकान महसूस करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लगातार कई दिनों तक नींद पूरी नहीं होने पर शरीर की कार्यक्षमता कम होने लगती है। इससे काम में मन नहीं लगता, याददाश्त कमजोर हो सकती है और दिनभर चिड़चिड़ापन बना रहता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आंखों पर बढ़ता है दबाव</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मोबाइल स्क्रीन को लगातार देखने से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे आंखों में जलन, सूखापन, धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई लोग देर रात तक अंधेरे कमरे में मोबाइल चलाते हैं, जिससे आंखों को और अधिक नुकसान पहुंच सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मानसिक स्वास्थ्य भी हो सकता है प्रभावित</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">देर रात तक सोशल मीडिया का उपयोग मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। लगातार नकारात्मक खबरें, तुलना की भावना और सोशल मीडिया का दबाव तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। कई बार लोग देर रात तक ऑनलाइन रहने के कारण मानसिक रूप से शांत नहीं हो पाते, जिससे दिमाग को आराम नहीं मिल पाता।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बढ़ सकता है मोटापा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कम लोग जानते हैं कि देर रात तक जागने और मोबाइल चलाने का संबंध वजन बढ़ने से भी जुड़ा हो सकता है। पर्याप्त नींद नहीं मिलने पर शरीर में भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन प्रभावित होते हैं। इसके कारण व्यक्ति को बार-बार भूख लगती है और जंक फूड खाने की इच्छा बढ़ सकती है। इसके अलावा देर रात तक जागने वाले लोग अक्सर शारीरिक गतिविधियां कम करते हैं, जिससे मोटापे का खतरा भी बढ़ जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>गर्दन और पीठ में दर्द की समस्या</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मोबाइल का लगातार उपयोग करते समय अधिकांश लोग गर्दन झुकाकर बैठते या लेटते हैं। लंबे समय तक इसी स्थिति में रहने से गर्दन, कंधे और पीठ में दर्द की शिकायत शुरू हो सकती है। इसे कई विशेषज्ञ "टेक्स्ट नेक" की समस्या भी मानते हैं।यदि यह आदत लंबे समय तक बनी रहती है तो रीढ़ की हड्डी पर भी असर पड़ सकता है और मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या बढ़ सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>हार्मोन संतुलन पर असर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त नींद शरीर के हार्मोन संतुलन के लिए बेहद जरूरी होती है। लगातार देर रात तक मोबाइल चलाने और कम सोने से शरीर का जैविक चक्र प्रभावित होता है। इससे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है और शरीर की रिकवरी प्रक्रिया भी धीमी पड़ सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बच्चों और किशोरों के लिए ज्यादा नुकसानदायक</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों और किशोरों में मोबाइल की लत तेजी से बढ़ रही है। पढ़ाई के बाद भी घंटों मोबाइल देखने से उनकी नींद, पढ़ाई और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है। कई बच्चों में ध्यान की कमी, व्यवहार में बदलाव और आंखों की समस्याएं भी देखने को मिल रही हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखें और सोने से पहले मोबाइल के इस्तेमाल की आदत को सीमित करें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कैसे करें बचाव</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कुछ आसान उपाय अपनाने की सलाह देते हैं। सोने से कम से कम 45 मिनट से एक घंटे पहले मोबाइल का उपयोग बंद कर दें। यदि जरूरी हो तो मोबाइल में ब्लू लाइट फिल्टर या नाइट मोड का इस्तेमाल करें। बिस्तर पर मोबाइल लेकर न जाएं और अलार्म के लिए अलग घड़ी का उपयोग करें। रात के समय किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना या ध्यान करना बेहतर विकल्प हो सकते हैं। इसके अलावा दिनभर नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और समय पर सोने की आदत भी अच्छी नींद और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी मानी जाती है। आज के डिजिटल दौर में मोबाइल हमारी जरूरत बन चुका है, लेकिन इसका सही समय और सीमित उपयोग ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है। छोटी-सी सावधानी भविष्य में कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है। यदि आप भी रात को देर तक मोबाइल चलाने की आदत रखते हैं, तो समय रहते इस आदत में बदलाव करना आपके शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 17:37:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>स्क्रीन के दौर में कितना काम सही, कब रुकना है यह समझना भी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[लंबे समय तक लैपटॉप और मोबाइल के सामने बिताया गया समय केवल आंखों ही नहीं, शरीर और दिमाग पर भी असर डाल सकता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/opinion/in-the-age-of-screens-it-is-important-to-understand/article-55858"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/monsoon-skin-care-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज की दुनिया पहले से काफी अलग हो चुकी है। काम करने के तरीके बदल गए हैं और अब बड़ी संख्या में लोग दिन का अधिकांश समय कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल स्क्रीन के सामने बिताते हैं। दफ्तरों से लेकर घरों तक, पढ़ाई से लेकर व्यापार तक, लगभग हर काम किसी न किसी स्क्रीन से जुड़ गया है। ऐसे में एक सवाल बार-बार सामने आता है कि आखिर एक व्यक्ति को दिन में कितने घंटे काम करना चाहिए और लगातार स्क्रीन देखने से होने वाले असर से खुद को कैसे बचाया जा सकता है। मेरी नजर में काम के घंटों का कोई ऐसा फॉर्मूला नहीं है जो हर व्यक्ति पर लागू हो सके। किसी का काम शारीरिक होता है तो किसी का मानसिक। कोई कम समय में बेहतर परिणाम दे देता है तो कोई ज्यादा समय लगाता है। फिर भी यदि सामान्य स्थिति की बात करें तो 7 से 9 घंटे का कार्य समय संतुलित माना जा सकता है। इससे व्यक्ति को अपने परिवार, स्वास्थ्य, आराम और व्यक्तिगत जीवन के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है। असल समस्या तब पैदा होती है जब काम केवल समय का खेल बन जाता है। आज कई लोग 10 से 12 घंटे तक लगातार स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं। शुरुआत में यह सामान्य लगता है, लेकिन धीरे-धीरे इसका असर दिखाई देने लगता है। आंखों में थकान, सिर भारी लगना, गर्दन में जकड़न, पीठ दर्द और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। कई बार व्यक्ति को लगता है कि वह ज्यादा समय देकर ज्यादा काम कर रहा है, लेकिन वास्तविकता यह होती है कि लंबे समय तक लगातार काम करने से एकाग्रता कम होने लगती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मेरा मानना है कि काम की गुणवत्ता हमेशा काम के घंटों से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। यदि कोई व्यक्ति आठ घंटे में अपना काम अच्छे ढंग से पूरा कर सकता है तो उसे केवल दिखावे के लिए देर रात तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने की जरूरत नहीं है। उत्पादकता का मतलब केवल अधिक समय तक काम करना नहीं, बल्कि बेहतर परिणाम देना भी है। स्क्रीन आधारित काम करने वालों के लिए सबसे जरूरी बात आंखों का ध्यान रखना है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव पड़ता है। इसलिए हर कुछ समय बाद नजरें स्क्रीन से हटानी चाहिए। कई लोग घंटों तक बिना रुके काम करते रहते हैं, जिससे आंखों में सूखापन और जलन की समस्या बढ़ सकती है। थोड़ी देर के लिए दूर देखना या कुछ मिनट का ब्रेक लेना आंखों को आराम देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही स्क्रीन की रोशनी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई लोग बहुत तेज ब्राइटनेस पर काम करते हैं, जबकि कुछ लोग बहुत कम रोशनी में स्क्रीन देखते हैं। दोनों ही स्थितियां आंखों को प्रभावित कर सकती हैं। कमरे की रोशनी और स्क्रीन की ब्राइटनेस में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। शाम और रात के समय मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय स्क्रीन की चमक कम रखना बेहतर माना जाता है। एक और बड़ी समस्या लंबे समय तक बैठे रहना है। आधुनिक जीवनशैली में लोगों की शारीरिक गतिविधियां लगातार कम हो रही हैं। सुबह कुर्सी पर बैठकर काम शुरू होता है और कई बार देर शाम तक वही स्थिति बनी रहती है। इससे शरीर की मांसपेशियां अकड़ने लगती हैं और कमर, कंधे तथा गर्दन में दर्द की शिकायत बढ़ जाती है। इसलिए हर घंटे कुछ मिनट के लिए उठना, चलना और शरीर को स्ट्रेच करना जरूरी है। बैठने की सही मुद्रा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि कंप्यूटर स्क्रीन आंखों के स्तर से बहुत नीचे या ऊपर हो तो गर्दन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसी तरह गलत ऊंचाई वाली कुर्सी और टेबल भी परेशानी बढ़ा सकती है। आज कम उम्र के युवाओं में भी पीठ और गर्दन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका एक कारण लगातार गलत मुद्रा में काम करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">मोबाइल फोन ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। दिनभर लैपटॉप पर काम करने के बाद भी कई लोग घंटों सोशल मीडिया, वीडियो या गेम में समय बिताते हैं। इससे कुल स्क्रीन टाइम काफी बढ़ जाता है। ऐसे में कोशिश करनी चाहिए कि काम के बाद कुछ समय स्क्रीन से दूरी बनाई जाए। परिवार के साथ बातचीत, किताब पढ़ना, टहलना या किसी शौक को समय देना मानसिक रूप से भी राहत देता है। नींद पर भी स्क्रीन का सीधा असर पड़ता है। रात में सोने से ठीक पहले मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत अब आम हो चुकी है। कई लोग बिस्तर पर जाने के बाद भी लंबे समय तक स्क्रीन देखते रहते हैं। इसका असर नींद की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। यदि सोने से कुछ समय पहले स्क्रीन का उपयोग कम कर दिया जाए तो दिमाग को आराम मिलने में मदद मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम जरूरी है और सफलता हासिल करने के लिए मेहनत भी जरूरी है। लेकिन यह भी सच है कि स्वास्थ्य से बड़ा कोई निवेश नहीं होता। यदि काम के कारण शरीर और मन लगातार थकान महसूस करने लगें तो लंबे समय में इसका असर जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ सकता है। इसलिए काम और आराम के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। मेरे विचार से सफलता का मतलब केवल ज्यादा घंटे काम करना नहीं है। असली सफलता वही है जिसमें करियर आगे बढ़े, लेकिन स्वास्थ्य पीछे न छूटे। नियमित ब्रेक, पर्याप्त नींद, थोड़ी शारीरिक गतिविधि और सीमित स्क्रीन टाइम जैसी छोटी आदतें लंबे समय तक बेहतर जीवन जीने में मदद कर सकती हैं। काम कीजिए, लक्ष्य हासिल कीजिए, लेकिन अपने शरीर और आंखों को नजरअंदाज किए बिना। यही आधुनिक दौर में स्वस्थ और संतुलित जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:43:00 +0530</pubDate>
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