<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/soccer-news/tag-18563" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Soccer News - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/18563/rss</link>
                <description>Soccer News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>फ्रांस लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में, मोरक्को को 2-0 से हराकर रचा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[कप्तान किलियन एम्बाप्पे और उस्मान डेम्बेले के गोल से मिली जीत, एम्बाप्पे ने मेसी के वर्ल्ड कप गोल रिकॉर्ड की बराबरी की; लंदन में जश्न के बीच हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/france-created-history-by-defeating-morocco-2-0-in-the-world/article-58352"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lionel-messi-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस ने एक बार फिर अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरी बार सेमीफाइनल में जगह बना ली है। क्वार्टर फाइनल मुकाबले में फ्रांसीसी टीम ने मोरक्को को 2-0 से हराकर न सिर्फ जीत दर्ज की, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि पिछले कई वर्षों से विश्व फुटबॉल में उसकी बादशाहत कायम है। इस मुकाबले में कप्तान किलियन एम्बाप्पे और उस्मान डेम्बेले ने शानदार प्रदर्शन किया। दोनों खिलाड़ियों के गोल की बदौलत फ्रांस ने मुकाबले पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा और मोरक्को की चुनौती को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया। इस जीत के साथ फ्रांस लगातार तीसरे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंच गया। इससे पहले टीम 2018 और 2022 में भी अंतिम चार में पहुंची थी। अब उसकी नजर लगातार तीसरी बार फाइनल में जगह बनाने और एक और विश्व कप खिताब जीतने पर होगी। सेमीफाइनल में फ्रांस का सामना स्पेन और बेल्जियम के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से होगा।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lionel-messi-(5).jpg" alt="Lionel Messi" width="1366" height="858"></img></p>
<p>मैच की शुरुआत से ही फ्रांस ने आक्रामक अंदाज अपनाया। शुरुआती मिनटों में ही किलियन एम्बाप्पे ने गोल करने की कोशिश की, लेकिन मोरक्को के गोलकीपर यासीन बूनू ने शानदार बचाव करते हुए टीम को शुरुआती झटका लगने से बचा लिया। इसके बाद भी फ्रांस लगातार हमले करता रहा। दायो उपामेकानो, उस्मान डेम्बेले और माइकल ओलीसे ने कई मौके बनाए, लेकिन मोरक्को की मजबूत रक्षापंक्ति ने पहले हाफ तक मुकाबले को गोलरहित बनाए रखा। पहले हाफ का सबसे अहम पल 26वें मिनट में आया, जब बॉक्स के भीतर एम्बाप्पे को गिराए जाने पर फ्रांस को पेनल्टी मिली। पूरी दुनिया की निगाहें एम्बाप्पे पर थीं, लेकिन मोरक्को के गोलकीपर यासीन बूनू ने शानदार डाइव लगाकर उनका शॉट रोक दिया। इस बचाव ने मोरक्को के खिलाड़ियों और समर्थकों में नई उम्मीद जगा दी और पहला हाफ बिना किसी गोल के समाप्त हुआ।दूसरे हाफ में फ्रांस ने अपनी रणनीति में और आक्रामकता दिखाई। टीम लगातार गेंद पर कब्जा बनाए रही और मोरक्को के डिफेंस पर दबाव बनाती रही। आखिरकार 60वें मिनट में कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने बॉक्स के बाहर से शानदार कर्लिंग शॉट लगाकर गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के साथ फ्रांस को महत्वपूर्ण बढ़त मिल गई और स्टेडियम में मौजूद फ्रांसीसी समर्थकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/kylian-mbappe-(1).jpg" alt="Kylian Mbappe" width="1366" height="768"></img></p>
<p>एम्बाप्पे के गोल के केवल छह मिनट बाद उस्मान डेम्बेले ने शानदार स्ट्राइक लगाकर फ्रांस की बढ़त 2-0 कर दी। मोरक्को के गोलकीपर ने गेंद को रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन शॉट इतना सटीक था कि गेंद गोललाइन पार कर गई। इसके बाद फ्रांस ने संयमित खेल दिखाते हुए मुकाबले को अपने नियंत्रण में रखा और मोरक्को को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इस मुकाबले में किलियन एम्बाप्पे ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। टूर्नामेंट में यह उनका आठवां गोल था, जिसके साथ उन्होंने अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी की बराबरी कर ली। दोनों खिलाड़ियों के अब इस वर्ल्ड कप में आठ-आठ गोल हैं। हालांकि एम्बाप्पे तीन असिस्ट के कारण गोल्डन बूट की दौड़ में फिलहाल सबसे आगे पहुंच गए हैं। कुल मिलाकर वर्ल्ड कप इतिहास में एम्बाप्पे के अब 20 गोल हो चुके हैं, जबकि मेसी के नाम 21 गोल दर्ज हैं। इससे साफ है कि युवा फ्रांसीसी कप्तान विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े रिकॉर्ड की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/fifa-world-cup-2026-(15).jpg" alt="FIFA World Cup 2026" width="1366" height="996"></img></p>
<p>मोरक्को के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। अफ्रीकी टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया था और क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर इतिहास रचा था। लेकिन फ्रांस जैसी मजबूत टीम के सामने उसके खिलाड़ियों की मेहनत रंग नहीं ला सकी। इस हार के साथ टूर्नामेंट में अफ्रीका की आखिरी उम्मीद भी समाप्त हो गई। हालांकि मोरक्को ने अपने जुझारू खेल से दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का दिल जरूर जीता। मैच समाप्त होने के बाद फ्रांस के खिलाड़ी मैदान पर जश्न मनाते नजर आए। कप्तान एम्बाप्पे ने अपने साथियों और समर्थकों का अभिवादन किया, जबकि मोरक्को के खिलाड़ी हार के बाद भावुक दिखाई दिए। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने दोनों टीमों के प्रदर्शन की सराहना की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/france-created-history-by-defeating-morocco-2-0-in-the-world/article-58352</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/france-created-history-by-defeating-morocco-2-0-in-the-world/article-58352</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:21:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lionel-messi-%285%29.jpg"                         length="119453"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>62 शॉट, फिर भी नहीं हुआ एक गोल; तुर्किये वर्ल्ड कप से बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के खिलाफ कुल 62 शॉट लगाए, लेकिन एक भी गोल नहीं कर सकी टीम; कोच मोंटेला भी रहे हैरान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/62-shots-still-no-goal-scored-turkey-out-of-world/article-56503"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/turkey-world-cup-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई। पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है। शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया। टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है।  शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्य कोच विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी। यही कमी अंततः तुर्किये के वर्ल्ड कप अभियान का अंत बन गई। विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/62-shots-still-no-goal-scored-turkey-out-of-world/article-56503</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/62-shots-still-no-goal-scored-turkey-out-of-world/article-56503</guid>
                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 17:08:39 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/turkey-world-cup-%281%29.jpg"                         length="264084"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वीडन के यासिन अयारी ने ट्यूनीशिया के खिलाफ दागे दो गोल, फिर भी पहला गोल नहीं मनाया</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व कप डेब्यू में चमके 22 वर्षीय मिडफील्डर, पिता के देश के खिलाफ गोल करने के बाद दिखाया सम्मान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/swedens-yasin-ayari-scored-two-goals-against-tunisia-but-did/article-55998"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/yasin-ayari.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फीफा विश्व कप 2026 में स्वीडन और ट्यूनीशिया के बीच खेले गए ग्रुप एच मुकाबले में एक युवा खिलाड़ी का प्रदर्शन चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया। 22 वर्षीय यासिन अयारी ने अपने विश्व कप डेब्यू मैच में दो शानदार गोल दागकर स्वीडन को यादगार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन मैच के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके पहले गोल के बाद किए गए व्यवहार की हुई। आमतौर पर विश्व कप जैसे मंच पर पहला गोल करने वाला खिलाड़ी खुशी से झूम उठता है, लेकिन अयारी ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने गोल करने के बाद दोनों हाथ ऊपर उठाए और फिर सजदे में झुक गए। यह दृश्य मैदान में मौजूद दर्शकों और टीवी पर मैच देख रहे लाखों फुटबॉल प्रशंसकों के लिए हैरानी का विषय बन गया। मैच की शुरुआत से ही स्वीडन ने आक्रामक खेल दिखाया। मुकाबले के सिर्फ सातवें मिनट में यासिन अयारी ने जोरदार वॉली लगाते हुए गेंद को ट्यूनीशिया के गोलपोस्ट के ऊपरी कोने में पहुंचा दिया। यह गोल इतना शानदार था कि गोलकीपर के पास कोई मौका नहीं बचा। स्टेडियम में मौजूद स्वीडिश समर्थक खुशी से झूम उठे, लेकिन अयारी का चेहरा शांत दिखाई दिया। उन्होंने किसी तरह का उत्साहपूर्ण जश्न नहीं मनाया। बाद में सामने आया कि इसके पीछे एक भावनात्मक कारण था। दरअसल अयारी का परिवार उत्तर अफ्रीका से जुड़ा हुआ है। उनके पिता ट्यूनीशिया से हैं जबकि उनकी मां मोरक्को मूल की हैं। हालांकि उनका जन्म स्वीडन में हुआ और उनका बचपन भी वहीं बीता, लेकिन पारिवारिक जड़ें आज भी ट्यूनीशिया और मोरक्को से जुड़ी हुई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यासिन अयारी की कहानी सिर्फ एक फुटबॉलर की सफलता की कहानी नहीं बल्कि पहचान और भावनाओं के संतुलन की कहानी भी है। जब वह किशोर अवस्था में थे तब उनके सामने यह विकल्प था कि वह ट्यूनीशिया की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करें या स्वीडन का। बताया जाता है कि ट्यूनीशिया की ओर से उन्हें अवसर भी मिला था, लेकिन उन्होंने अंततः स्वीडन के लिए खेलने का फैसला किया। इस निर्णय में उनके पिता का भी पूरा समर्थन था। परिवार का मानना था कि जिस देश ने उन्हें अवसर दिए, जहां उनका पालन-पोषण हुआ और जहां उन्होंने फुटबॉल सीखा, उसी देश का प्रतिनिधित्व करना उचित होगा। यही वजह रही कि अयारी ने स्वीडन की युवा टीमों से लेकर सीनियर राष्ट्रीय टीम तक का सफर तय किया। यासिन अयारी ने बहुत कम उम्र में फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया था। सात साल की उम्र में उन्होंने अपने गृह नगर सोलना के स्थानीय क्लब में प्रशिक्षण लेना शुरू किया। इसके बाद वह स्वीडन के प्रतिष्ठित क्लब एआईके से जुड़े और धीरे-धीरे अपनी प्रतिभा से पहचान बनाई। वर्ष 2020 में उन्होंने सीनियर स्तर पर पदार्पण किया और जल्द ही यूरोपीय फुटबॉल जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनके शानदार प्रदर्शन के चलते इंग्लिश प्रीमियर लीग क्लब ब्राइटन एंड होव एल्बियन ने उन्हें 2023 में अपने साथ जोड़ लिया। इसी वर्ष उन्होंने स्वीडन की राष्ट्रीय टीम के लिए भी पदार्पण किया और तब से लगातार टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व कप 2026 के ड्रॉ की घोषणा जब हुई थी और यह तय हुआ कि स्वीडन और ट्यूनीशिया एक ही ग्रुप में होंगे, तब अयारी ने भी इस मुकाबले को विशेष बताया था। उनके लिए यह सिर्फ एक फुटबॉल मैच नहीं था, बल्कि अपनी पारिवारिक विरासत से जुड़े देश के खिलाफ मैदान में उतरने का अवसर भी था। यही कारण था कि पहले गोल के बाद उन्होंने सम्मान दिखाते हुए कोई जश्न नहीं मनाया। हालांकि मैच के अंतिम क्षणों में जब उन्होंने अपना दूसरा गोल किया, तब हालात अलग थे। इंजरी टाइम के दौरान उन्होंने शानदार व्यक्तिगत प्रयास करते हुए गेंद को ट्यूनीशिया के गोल में पहुंचा दिया। यह उनके विश्व कप डेब्यू का दूसरा गोल था और इस बार उन्होंने अपने साथियों और दर्शकों के साथ खुशी साझा की। यासिन अयारी ने इस मैच में केवल गोल ही नहीं किए बल्कि अपने व्यवहार से भी खेल भावना का उदाहरण पेश किया। एक तरफ उन्होंने अपने देश के लिए बेहतरीन प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर अपने पारिवारिक संबंधों और भावनात्मक जुड़ाव का सम्मान भी बनाए रखा। यही वजह है कि मैच के बाद सोशल मीडिया से लेकर खेल विश्लेषकों तक हर जगह उनके प्रदर्शन और उनके फैसले की चर्चा होती रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/swedens-yasin-ayari-scored-two-goals-against-tunisia-but-did/article-55998</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/swedens-yasin-ayari-scored-two-goals-against-tunisia-but-did/article-55998</guid>
                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:04:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/yasin-ayari.jpg"                         length="142443"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        